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	<title>विशेष रिपोर्ट - Aadarsh Himachal</title>
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		<title>कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी, 2027 चुनाव से पहले संगठन के सामने बड़ी चुनौती</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 12 Jun 2026 02:04:36 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों  शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हर पांच वर्ष बाद सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल की सफलता उसके संगठन की मजबूती, जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नेतृत्व की कार्यशैली पर निर्भर करती है। वर्तमान समय में प्रदेश कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेताओं के बीच मतभेद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>शिमला।</strong> हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हर पांच वर्ष बाद सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल की सफलता उसके संगठन की मजबूती, जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नेतृत्व की कार्यशैली पर निर्भर करती है। वर्तमान समय में प्रदेश कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेताओं के बीच मतभेद और कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री और सरकार को पार्टी संगठन तथा कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेताओं के बीच तालमेल की कमी भविष्य में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और आंतरिक मतभेदों को समाप्त करने की बड़ी जिम्मेदारी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में स्वर्गीय Virbhadra Singh की राजनीतिक विरासत, कांग्रेस संगठन की एकजुटता और कार्यकर्ताओं की मेहनत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी वीरभद्र परिवार का प्रभाव प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी बनी हुई है कि लोक निर्माण मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता Vikramaditya Singh की लोकप्रियता प्रदेशभर में बढ़ रही है। युवा वर्ग के साथ-साथ कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं होली लॉज को प्रदेश कांग्रेस की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है, जिसका पार्टी की दिशा और रणनीति पर लंबे समय से प्रभाव रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>वर्तमान परिदृश्य में पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्य संसदीय सचिव Neeraj Bharti का नाम भी चर्चा में है। कांगड़ा की राजनीति में उनकी एक अलग पहचान रही है और युवाओं के बीच उनका प्रभाव माना जाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसे जनाधार वाले नेताओं की उपेक्षा या संगठन से दूरी कार्यकर्ताओं में असंतोष का कारण बन सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पिछले कुछ वर्षों के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं जैसे हर्ष महाजन ,सुधींर शर्मा ,राजिंदर राणा  और कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़कर अन्य दलों में जाना भी संगठन के लिए चिंता का विषय रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक स्तर पर संवाद और समन्वय को मजबूत नहीं किया गया तो इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसके अतिरिक्त सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए जिन कुछ व्यक्तियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, उनके अपेक्षित परिणाम न दे पाने की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में सुनने को मिल रही हैं। इससे सरकार, संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति बनाए रखनी है तो संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा। कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देनी होगी तथा सभी वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनानी होगी। यही पार्टी की एकजुटता और भविष्य की सफलता का आधार बन सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से समय-समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी किस प्रकार संगठनात्मक चुनौतियों से निपटती है, इस पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी रहेगी।</p>
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		<title>महानाटी के रंग में रंगीं 320 से अधिक महिलाएं, लोकसंस्कृति के साथ दिया नशामुक्ति का संदेश</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/over-320-women-dressed-up-as-mahanati-spread-the-message-of-de-addiction-with-folk-culture/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 02:29:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; आदर्श हिमातल ब्यूरों &#160; शिमला । अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के दूसरे दिन मां थीम (मदरस अगेंस्ट ड्रग्स) पर महा नाटी का भव्य आयोजन शिमला पुलिस सहायता कक्ष के समक्ष किया गया जिसमें शिमला जिला के विभिन्न आईसीडीएस खंड से 320 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने भी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>आदर्श हिमातल ब्यूरों </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>शिमला</strong> । अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव-2026 के दूसरे दिन मां थीम (मदरस अगेंस्ट ड्रग्स) पर महा नाटी का भव्य आयोजन शिमला पुलिस सहायता कक्ष के समक्ष किया गया जिसमें शिमला जिला के विभिन्न आईसीडीएस खंड से 320 से अधिक महिलाओं ने भाग लिया। इस दौरान स्थानीय लोगों और पर्यटकों ने भी नाटी में शामिल होकर हिमाचल प्रदेश की शान नाटी का आनंद लिया।</p>
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<video class="wp-video-shortcode" id="video-129637-1" width="640" height="361" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4?_=1" /><a href="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4">https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4</a></video></div>
<p>&nbsp;</p>
<p>उपायुक्त एवं अध्यक्ष अंतर्राष्ट्रीय शिमला ग्रीष्मोत्सव अनुपम कश्यप ने महानाटी की थीम मां के तहत &#8216;मां का संकल्प &#8211; समाज का संकल्प&#8217; विषय पर उपस्थित महिलाओं को शपथ दिलाई और नशे, विशेषकर चिट्टे, हिंसा, और हर प्रकार के दुर्व्यवहार का डटकर विरोध करने का संकल्प दिलाया। सभी 320 प्रतिभागी महिलाओं को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस दौरान महिलाओं ने &#8220;हर मां की यही पुकार &#8211; नशा और अत्याचार से इंकार,&#8221; &#8220;मा की ममता का यही संदेश &#8211; नशे से दूर रहे प्रदेश,&#8221; &#8220;चिट्टा छोड़ो संस्कार जोड़ो मां के संकल्प से समाज को मोड़ो&#8221; और &#8220;हर मां की यही पुकार- बेटी पर हिंसा नहीं स्वीकार&#8221; जैसे नारों से लोगों को नशे के दुष्प्रभावों और महिलाओं पर होने अत्याचारों बारे जागरूक किया गया।</p>
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		<title>शूलिनी विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि, इनोवेशन डे पर 2,000 IP एप्लीकेशन का रिकॉर्ड</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 10 Jun 2026 02:13:59 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों सोलन ।  शूलिनी यूनिवर्सिटी ने 2,000 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) एप्लीकेशन का आंकड़ा पार करके इनोवेशन डे मनाया। यह उपलब्धि भारत के सबसे सक्रिय यूनिवर्सिटी इनोवेशन इकोसिस्टम में से एक को बनाने के ग्यारह वर्षों के सफर को दर्शाती है। इनोवेशन का यह सफर 2015 में शुरू हुआ था। सालाना पेटेंट रिपोर्ट पेश [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></div>
<div></div>
<div><strong>सोलन</strong> ।  शूलिनी यूनिवर्सिटी ने 2,000 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP) एप्लीकेशन का आंकड़ा पार करके इनोवेशन डे मनाया। यह उपलब्धि भारत के सबसे सक्रिय यूनिवर्सिटी इनोवेशन इकोसिस्टम में से एक को बनाने के ग्यारह वर्षों के सफर को दर्शाती है। इनोवेशन का यह सफर 2015 में शुरू हुआ था।</div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div>सालाना पेटेंट रिपोर्ट पेश करते हुए, शूलिनी इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स ऑफिस (SIPRO) के डायरेक्टर दिनेश कुमार ने सभी इनोवेटर्स की लगन के लिए उनका धन्यवाद किया और IP इकोसिस्टम बनाने में यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट के लगातार सहयोग को सराहा।</div>
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<div>रिपोर्ट के अनुसार, शूलिनी यूनिवर्सिटी ने अब तक 2,000 IP एसेट्स फाइल किए हैं, जिनमें 1,224 यूटिलिटी पेटेंट, 512 डिज़ाइन एप्लीकेशन, 247 कॉपीराइट और 17 ट्रेडमार्क शामिल हैं। इनमें से 989 पेटेंट पब्लिश हो चुके हैं और 656 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टीज़ को मंज़ूरी या रजिस्ट्रेशन मिल चुका है। अकेले 2025 में, यूनिवर्सिटी ने 182 पेटेंट एप्लीकेशन, 37 डिज़ाइन एप्लीकेशन और 51 कॉपीराइट एप्लीकेशन फाइल किए; इसी दौरान 180 पेटेंट पब्लिश हुए और आठ पेटेंट मंज़ूर हुए।</div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div>इस कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी के प्रमुख इनोवेटर्स को सम्मानित किया गया।</div>
<div>2025 में सबसे ज़्यादा पेटेंट फाइल करने वालों में, स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के डॉ. राज कुमार सैनी ने 17 पेटेंट एप्लीकेशन के साथ पहला स्थान हासिल किया। उनके बाद फैकल्टी ऑफ़ एग्रीकल्चर के डीन प्रो. सोमेश शर्मा रहे, जिन्होंने 15 फाइलिंग कीं। स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड केमिकल साइंसेज के प्रो. पंकज रायज़ादा और स्कूल ऑफ़ फार्मास्युटिकल साइंसेज के डीन डॉ. दीपक कुमार ने 12-12 पेटेंट फाइल किए।</div>
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<div>स्कूल-वाइज़ कैटेगरी में, &#8216;स्कूल ऑफ़ एग्रीकल्चर&#8217; 29 पेटेंट एप्लीकेशन के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद &#8216;स्कूल ऑफ़ फ़ार्मास्युटिकल साइंसेज़&#8217; (23 एप्लीकेशन) और &#8216;स्कूल ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी&#8217; (21 एप्लीकेशन) का स्थान रहा। &#8216;शूलिनी इंस्टीट्यूट ऑफ़ लाइफ़ साइंसेज़ एंड बिज़नेस मैनेजमेंट&#8217; (SILB) की SIPRO IPR लैब के प्रतिनिधियों को विशेष सम्मान दिया गया, जिन्होंने एक साल से भी कम समय में 10 पेटेंट एप्लीकेशन फ़ाइल किए।</div>
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<div>इस समारोह का मुख्य आकर्षण यूनिवर्सिटी का &#8216;वन स्टूडेंट, वन पेटेंट&#8217; अभियान था, जिसके तहत हर स्टूडेंट को पेटेंट-योग्य आइडिया विकसित करने और क्लासरूम से बाहर इनोवेशन में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।</div>
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<div>चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने &#8216;वन स्टूडेंट, वन पेटेंट&#8217; अभियान के प्रति यूनिवर्सिटी की प्रतिबद्धता को दोहराया और स्टूडेंट्स व फैकल्टी से असल दुनिया की चुनौतियों के समाधान खोजने और अपने आइडिया को पेटेंट में बदलने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, &#8220;इनोवेशन हर स्टूडेंट की एकेडमिक यात्रा का एक अहम हिस्सा होना चाहिए।</div>
<div></div>
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<div></div>
<div>प्रो-चांसलर विशाल आनंद ने स्टूडेंट्स और रिसर्चर्स को आत्मविश्वास के साथ अपने आइडिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा, &#8220;इनोवेशन तब फलता-फूलता है जब लोग प्रयोग करने, सीखने और आइडिया को व्यावहारिक समाधानों में बदलने के लिए तैयार रहते हैं।</div>
<div></div>
<div></div>
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<div>वाइस-चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने इनोवेटर्स की लगन और दृढ़ता की तारीफ़ की और कम्युनिटी के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया — आने वाले वर्षों में 10,000 पेटेंट होने चाहिए।</div>
<div>
<div style="width: 640px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-129631-2" width="640" height="361" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4?_=2" /><a href="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4">https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0076.mp4</a></video></div>
</div>
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<div></div>
<div>रजिस्ट्रार डॉ. सुनील पुरी ने शूलिनी में पेटेंट से जुड़ी गतिविधियों के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने हमेशा फैकल्टी और रिसर्चर्स को इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (बौद्धिक संपदा) बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, &#8220;सालों पहले जो विज़न तय किया गया था, वह अब संस्थान की खास ताकतों में से एक बन गया है।</div>
<div></div>
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<div>डायरेक्टर (प्लानिंग) प्रो. जे.एम. जुल्का ने इस उपलब्धि को शानदार बताया और कहा कि एक अच्छे इकोसिस्टम में छोटे-छोटे आइडिया भी आगे चलकर कीमती पेटेंट बन सकते हैं।</div>
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<div></div>
<div></div>
<div>SIPRO के सीनियर मैनेजर हिमांशु शर्मा ने आगे की योजना के बारे में बताया। SIPRO ने 2026 में 300 यूटिलिटी पेटेंट फाइल करने का लक्ष्य रखा है और अगले साल तक कुल IP एप्लीकेशन की संख्या 3,000 से ज़्यादा करने का इरादा है। ऑफिस का लक्ष्य हर साल कम से कम 300 पब्लिश्ड पेटेंट और 25 ग्रांटेड पेटेंट हासिल करना भी है। शर्मा ने रिसर्चर्स से पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी (PCT) एप्लीकेशन फाइल करने का आग्रह किया ताकि QS और टाइम्स हायर एजुकेशन जैसी इंटरनेशनल रैंकिंग में शूलिनी की स्थिति और मजबूत हो सके।</div>
<div></div>
<div></div>
<div></div>
<div>कार्यक्रम का समापन SIPRO की IPR अटॉर्नी डॉ. ऋचिका मेहता के धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। उन्होंने इनोवेशन का कल्चर बनाने में योगदान के लिए यूनिवर्सिटी लीडरशिप, इनोवेटर्स, फैकल्टी, स्टूडेंट्स और SIPRO टीम का आभार व्यक्त किया।</div>
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		<title>शिमला क्रिकेट कार्निवल में गूंजा &#8220;नशा छोड़ो, खेल खेलो&#8221; का संदेश, सनराइज़ रीबर्थ टीम बनी प्रेरणा की मिसाल</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/the-message-of-quit-drugs-play-sports-resonated-at-the-shimla-cricket-carnival-with-the-sunrise-rebirth-team-becoming-an-inspiration/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 04 Jun 2026 00:20:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; आदर्श हिमाचल ब्यूरों &#160; शिमला। &#8216;शिमला क्रिकेट कार्निवल&#8217; ने बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण का गवाह बना। कार्निवल के मुख्य उद्देश्य और **&#8221;नशा छोड़ो, खेल खेलो&#8221;** के नारे को यथार्थ में बदलते हुए, आज के मुकाबले में &#8216;सनराइज़ रीबर्थ रिहैबिलिटेशन सेंटर&#8217; की टीम ने हिस्सा लिया और समाज के सामने वापसी व जीवटता की [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>शिमला</strong>। &#8216;शिमला क्रिकेट कार्निवल&#8217; ने बेहद भावुक और प्रेरणादायक क्षण का गवाह बना। कार्निवल के मुख्य उद्देश्य और **&#8221;नशा छोड़ो, खेल खेलो&#8221;** के नारे को यथार्थ में बदलते हुए, आज के मुकाबले में &#8216;सनराइज़ रीबर्थ रिहैबिलिटेशन सेंटर&#8217; की टीम ने हिस्सा लिया और समाज के सामने वापसी व जीवटता की एक बेहतरीन मिसाल पेश की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>नशे और &#8216;चिट्टे&#8217; के खिलाफ कार्निवल की ऐतिहासिक मुहिम</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिमला क्रिकेट कार्निवल का इतिहास केवल हार-जीत या क्रिकेट के मुकाबलों तक सीमित नहीं है। यह आयोजन पिछले कई वर्षों से हिमाचल प्रदेश में फैल रहे नशे और विशेषकर **&#8217;चिट्टे&#8217;** के जानलेवा प्रकोप के खिलाफ एक सशक्त सामाजिक आंदोलन रहा है। इस कार्निवल की नींव ही युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में मोड़ने और उन्हें नशे के दलदल से दूर रखने के लिए रखी गई थी। अपने पिछले संस्करणों की तरह, इस बार भी यह टूर्नामेंट नशे के खिलाफ एक युद्ध स्तर की मुहिम चला रहा है, जिसका असर आज मैदान पर स्पष्ट रूप से देखने को मिला।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रेरणा का स्रोत: कप्तान आशीष और उनकी टीम<br />
आज का बहुचर्चित मुकाबला &#8216;सनराइज़ रीबर्थ&#8217; और &#8216;ओल्ड टाउन बस स्टैंड&#8217; की टीमों के बीच खेला गया। &#8216;सनराइज़ रीबर्थ&#8217; टीम का नेतृत्व कर रहे कप्तान आशीष की कहानी आज के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आशीष, जो स्वयं कभी नशे की गहरी गिरफ़्त में थे, आज पिछले 12 सालों से नशे से पूरी तरह मुक्त हैं। वे अब खुद &#8216;सनराइज़ रीबर्थ&#8217; नाम से एक नशामुक्ति केंद्र संचालित कर रहे हैं और अब तक कई युवाओं को नशे के भयानक चंगुल से बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन दे चुके हैं। मैदान पर बल्ले और गेंद के साथ उनका और उनकी टीम का प्रदर्शन यह साबित करता है कि इच्छाशक्ति के दम पर नशे को जड़ से खत्म किया जा सकता है।</p>
<div style="width: 640px;" class="wp-video"><video class="wp-video-shortcode" id="video-129593-3" width="640" height="361" preload="metadata" controls="controls"><source type="video/mp4" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0075.mp4?_=3" /><a href="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0075.mp4">https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/05/VID-20260517-WA0075.mp4</a></video></div>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्य धारा में युवाओं की वापसी का प्रयास<br />
इस पूरे आयोजन के पीछे **&#8217;हिमालयन स्पोर्ट्स एंड कल्चरल यूथ सोसायटी, शिमला&#8217;** के साथ-साथ *ब्लैक ब्लैंकेट एनजीओ* का महत्वपूर्ण योगदान है। सोसायटी लगातार यह प्रयास कर रही है कि जो युवा नशे की लत का शिकार हो गए थे और अब रिहैब के माध्यम से सुधार की राह पर हैं, उन्हें समाज की मुख्य धारा में दोबारा कैसे शामिल किया जाए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सोसायटी का स्पष्ट संदेश है कि नशे से लड़ रहे युवाओं को समाज के तिरस्कार की नहीं, बल्कि साथ और समर्थन की आवश्यकता है। क्रिकेट के इस महाकुंभ के जरिए सोसायटी न केवल खेल प्रतिभाओं को मंच दे रही है, बल्कि &#8216;चिट्टे&#8217; मुक्त और स्वस्थ शिमला के निर्माण का अपना सपना भी साकार कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>सरकार और संगठन में बढ़ती दूरी कांग्रेस के लिए बन रही खतरे की घंटी</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/the-growing-distance-between-the-government-and-the-organization-is-becoming-a-danger-signal-for-the-congress/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 27 May 2026 13:27:34 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों शिमला।प्रदेश में कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच बढ़ती दूरी अब पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो नगर निगम, पंचायती राज संस्थाओं और आगामी चुनावों में कांग्रेस को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों</strong></p>
<p><strong>शिमला।</strong>प्रदेश में कांग्रेस सरकार और संगठन के बीच बढ़ती दूरी अब पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक चुनौती बनती जा रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि समय रहते हालात नहीं सुधरे तो नगर निगम, पंचायती राज संस्थाओं और आगामी चुनावों में कांग्रेस को इसका सीधा नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इन दिनों कांग्रेस के भीतर लगातार बढ़ती गुटबाजी, नेताओं के बीच खींचतान और संगठनात्मक कमजोरी खुलकर सामने आ रही है। कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, जबकि फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित होने के आरोप लगातार लग रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति में लंबा इंतजार, विधायकों के बागी तेवर, वरिष्ठ नेताओं की अनदेखी और सरकार-संगठन के बीच समन्वय की कमी ने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा दिया है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होता दिखाई दे रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ऐसे राजनीतिक माहौल में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह का वह पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हिमाचल में कांग्रेस का द्वार होली लॉज से निकलता है।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज प्रदेश की परिस्थितियां कहीं न कहीं उस बयान को सच साबित करती नजर आ रही हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राजा वीरभद्र सिंह हमेशा संगठन और कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने की राजनीति के पक्षधर माने जाते थे। उनके कार्यकाल में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिलता था, जबकि वर्तमान समय में पार्टी के भीतर बढ़ती दूरियां और असंतोष लगातार सार्वजनिक होता जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सरकार पर यह आरोप भी लग रहे हैं कि वह आम जनता के मुद्दों से दूर होती जा रही है। किसान, बागवान, व्यापारी, कर्मचारी और युवा वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर निराश दिखाई दे रहे हैं। प्रदेश पर बढ़ता कर्ज, विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और अफसरशाही के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग मानता है कि यदि समय रहते संगठन को मजबूत करने, वरिष्ठ नेताओं को साथ लेकर चलने और कार्यकर्ताओं की भावनाओं को समझने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले चुनावों में पार्टी को इसका बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रदेश की राजनीति में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व संगठन और सरकार के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर पाएगा या फिर अंदरूनी कलह पार्टी की मुश्किलें और बढ़ाएगी।#CongressCrisis<br />
#HimachalCongress<br />
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#PoliticalChallenge<br />
#HimachalPolitics<br />
#CongressVsOrganization<br />
#Election2026<br />
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#PoliticalAnalysis<br />
#HimachalNews</p>
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			</item>
		<item>
		<title>बगली फीडर में 17 व 18 अप्रैल को बिजली    कारण जाने आपभी          ली रहेगी बंद</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/there-will-be-power-cut-in-bagli-feeder-on-17th-and-18th-april-know-the-reason/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 17 Apr 2026 01:05:40 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल  ब्यूरों &#160; धर्मशाला ।  विद्युत उपमंडल-2 के सहायक अभियन्ता रमेश चंद ने जानकारी दी कि 33 केवी सब-स्टेशन ढगवार में लाइन निर्माण कार्य के चलते 11 केवी बगली फीडर के क्षेत्रों चेतडू, शीला चाॅक, मनेड, मिल्क प्लांट, रुद्रा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और आसपास के अन्य क्षेत्रों में 17 अप्रैल और 18 अप्रैल को सुबह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><span style="color: #000000; font-family: sans-serif; font-size: 12.8px; font-style: normal; font-variant-ligatures: normal; font-variant-caps: normal; font-weight: 400; letter-spacing: normal; orphans: 2; text-align: start; text-indent: 0px; text-transform: none; widows: 2; word-spacing: 0px; -webkit-text-stroke-width: 0px; white-space: normal; background-color: #fbf9fa; text-decoration-thickness: initial; text-decoration-style: initial; text-decoration-color: initial; display: inline !important; float: none;"><strong>आदर्श हिमाचल  ब्यूरों </strong></span></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><span style="color: #000000; font-family: sans-serif; font-size: 12.8px; font-style: normal; font-variant-ligatures: normal; font-variant-caps: normal; font-weight: 400; letter-spacing: normal; orphans: 2; text-align: start; text-indent: 0px; text-transform: none; widows: 2; word-spacing: 0px; -webkit-text-stroke-width: 0px; white-space: normal; background-color: #fbf9fa; text-decoration-thickness: initial; text-decoration-style: initial; text-decoration-color: initial; display: inline !important; float: none;"><strong>धर्मशाला ।</strong>  विद्युत उपमंडल-2 के सहायक अभियन्ता रमेश चंद ने जानकारी दी कि 33 केवी सब-स्टेशन ढगवार में लाइन निर्माण कार्य के चलते 11 केवी बगली फीडर के क्षेत्रों चेतडू, शीला चाॅक, मनेड, मिल्क प्लांट, रुद्रा हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट और आसपास के अन्य क्षेत्रों में 17 अप्रैल और 18 अप्रैल को सुबह 9 बज़े से दोपहर 1 बज़े तक विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। मौसम खराब होने पर ये कार्य अगले कार्य दिवस पर किया जाएगा। उन्होंने जनता से बिजली विभाग को सहयोग करने की अपील भी की है।</span></p>
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			</item>
		<item>
		<title>समूह की हेती देवी पत्तल के काम से महीने का कमा रही दस हजार </title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/heti-devi-of-the-group-earns-rs-10000-every-month-by-making-leaf-plates/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Apr 2026 05:06:30 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACHIEVEMENT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल की विशेष रिपोर्ट सफलता की कहानी मंडी।ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाएं सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर सशक्त व स्वाबलंबी बन रही हैं। इन्ही में से एक महिला हैं हेती देवी, जो खाने खाने के लिए विशेष पेड़ की पत्तियों से पत्तलें (थाली) बनाकर सफलता की नई इबारत लिख रही [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<div dir="auto"><strong>आदर्श हिमाचल की विशेष रिपोर्ट सफलता की कहानी</strong></div>
<div dir="auto"></div>
<div dir="auto"><strong>मंडी</strong>।ग्रामीण परिवेश में रहने वाली महिलाएं सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाकर सशक्त व स्वाबलंबी बन रही हैं। इन्ही में से एक महिला हैं हेती देवी, जो खाने खाने के लिए विशेष पेड़ की पत्तियों से पत्तलें (थाली) बनाकर सफलता की नई इबारत लिख रही हैं।</div>
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<div dir="auto">मंडी जिला मुख्यालय के समीप बिहनधार गांव की रहने वाली हेती देवी ज्योति स्वयं सहायता समूह की सचिव हैं। वे बताती हैं कि वर्ष 2018 से वह इस स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। उनका समूह पत्तल बनाने का काम करता है। टौर वृक्ष के हरे पत्तों से बनी यह विशेष थाली, मंडी व आस-पास के क्षेत्रों में काफी प्रचलित है, जिसे आम भाषा में पत्तल कहते हैं। विवाह-शादियों व अन्य समारोहों में यह सामूहिक भोज के लिए विशेष तौर पर प्रयोग में लाई जाती हैं। खाने के लिए स्वच्छ तथा उपयोग के उपरांत आसानी से घुलनशील यह पत्तल पर्यावरण अनुकूल भी हैं।</div>
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<div dir="auto">हेती देवी बताती हैं कि शुरूआत में वह हाथ से पत्तल बनाती थीं और महीने का लगभग पांच हजार रुपए कमा लेती थीं। वर्ष 2023 के उपरांत उन्होंने मशीन के माध्यम से पत्तलें बनाने का कार्य शुरू किया। विकास खंड मंडी से पत्तल बनाने की मशीन मिलने के बाद उनकी कमाई दोगुना हो गई। अब वह मशीन से पत्तलें बनाकर महीने का लगभग दस हजार रूपए कमा रही हैं। हालांकि यह सब मांग पर भी निर्भर करता है। हिमाचल प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन इसमें सहायक बना है।</div>
<div dir="auto"><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-128993" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-300x197.jpg" alt="" width="300" height="197" srcset="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-300x197.jpg 300w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-1024x671.jpg 1024w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-768x503.jpg 768w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-1536x1006.jpg 1536w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-2048x1342.jpg 2048w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-696x456.jpg 696w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-741x486.jpg 741w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-1068x700.jpg 1068w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397683-641x420.jpg 641w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></div>
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<div dir="auto">उन्होंने बताया कि उनके द्वारा बनाई गई पत्तल गुणवत्ता के हिसाब से दूसरी पत्तलों से बेहतर है। हाथ से बनी पत्तल 200 रूपए सैंकड़ा की दर से बिकती हैं जबकि मशीनी पत्तल की कीमत 400 रूपए प्रति सैंकड़ा है। इसके अलावा हाथ से पत्तों के बनाए डूने 100 रुपए सैंकड़ा जबकि मशीन द्वारा बनाए डूने 200 रुपए प्रति सैंकड़ा बिकते हैं।</div>
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<div dir="auto">समूह की महिलाएं डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी बिक्री के लिए कर रही हैं। हेती देवी बताती हैं कि उन्हें ऑर्डर मोबाइल के माध्यम से मिल जाता है। इससे उनका कार्य अच्छे से चल रहा है। इस तरह की योजनाओं के लिए वह मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का धन्यवाद करती हैं।</div>
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<div dir="auto">समूह की प्रधान तृप्ता देवी ने बताया कि उनके समूह का गठन वर्ष 2018 में हुआ था। समूह में छ: महिलाएं हैं। सरकार की ओर से समूह को 40 हजार रूपए रिवॉल्विंग फंड के रूप में मिला है, जिससे समूह में इंटर लोनिंग की जा रही है। उन्होंने बताया कि पत्तलें बनाने के कार्य से वह साल में एक से डेढ़ लाख रुपए कमा रही हैं, जिससे उनके परिवार का खर्च ठीक से चल रहा है। उन्हें सरकार द्वारा पत्तल बनाने की मशीन भी उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिला उत्थान की दिशा में सरकार द्वारा उठाया गया सराहनीय कदम है जिसके लिए वह सरकार का विशेष तौर पर मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त करती हैं।</div>
<div dir="auto"><img decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-128992" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-300x180.jpg" alt="" width="300" height="180" srcset="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-300x180.jpg 300w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-1024x613.jpg 1024w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-768x460.jpg 768w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-1536x920.jpg 1536w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-2048x1227.jpg 2048w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-696x417.jpg 696w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-1068x640.jpg 1068w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/1000397685-701x420.jpg 701w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /></div>
<div dir="auto"></div>
<p>उपायुक्त अपूर्व देवगन का कहना है कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण स्तर पर महिला स्वालंबन पर बल दिया जा रहा है। सरकार के निर्देशों के अनुसार इन समूहों को सशक्त करने के लिए मंडी जिला में सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। #SelfReliance #WomenEmpowerment #HetiDevi #PattalWork #RuralEntrepreneur #HimachalNews #VillageSuccess #AdarshHimachal 💪🌿</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/heti-devi-of-the-group-earns-rs-10000-every-month-by-making-leaf-plates/">समूह की हेती देवी पत्तल के काम से महीने का कमा रही दस हजार </a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
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		<title>जिले में श्रमिकों के 1927 बच्चों का उच्च शिक्षा का सपना हुआ साकार</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/the-dream-of-higher-education-of-1927-children-of-labourers-in-the-district-came-true/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 23:24:54 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Concepts]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल बयूऱों   धर्मशाला।  सुख की सरकार ने कामगारों के नौनिहालों की निश्चल, अल्हड़ और उन्मुक्त हंसी खुशी में उज्जवल भविष्य के रंग भर दिए हैं। कभी अपने परिजनों के साथ मेहनत मजदूरी में हाथ बंटाते इन नौनिहालों को उच्च शिक्षा हासिल करना महज एक सपना प्रतीत होता था लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खु [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल बयूऱों </strong></p>
<p><strong> धर्मशाला</strong>।  सुख की सरकार ने कामगारों के नौनिहालों की निश्चल, अल्हड़ और उन्मुक्त हंसी खुशी में उज्जवल भविष्य के रंग भर दिए हैं। कभी अपने परिजनों के साथ मेहनत मजदूरी में हाथ बंटाते इन नौनिहालों को उच्च शिक्षा हासिल करना महज एक सपना प्रतीत होता था लेकिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खु के कुशल नेतृत्व में सरकार ने वंचित वर्गों तक शिक्षा की लौ जलाकर उन्हें मुख्यधारा में लाने के दृष्टिगत अनेकों कल्याणकारी योजनाएं संचालित कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इन कल्याणकारी योजनाओं ने कामगारों के बच्चों का जीवन बदलकर उनके भविष्य को सुरक्षित सुरक्षित कर रही है इन बच्चों को शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाकर उनके सपने को न सिर्फ हकीकत में बदला, बल्कि उनके नौनिहालों को आत्मनिर्भर बनने की राह पर भी आगे बढ़ाया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक के लिए वितीय सहायता का प्रावधान:हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड बाल श्रमिक विद्या योजना और हिमाचल प्रदेश की शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता योजना जैसी पहलों के माध्यम से, पहली कक्षा से लेकर पीएचडी तक के लिए 8400 से एक लाख 20 हजार तक की सहायता दी जा रही है। इन योजनाओं ने शिक्षा के प्रति कामगारों की पहुंच को आसान बनाया है। इसी कड़ी में कांगड़ा जिला में गत तीन वर्षों में 1927 कामगारों के नौनिहालों को शिक्षा हासिल करने के लिए कामगार कल्याण बोर्ड की ओर से तीन करोड़ 49 लाख की वितीय सहायता मुहैया करवाई गई है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>सरकार की आर्थिक मदद नहीं मिलती तो बच्चे पढ़ नहीं पाते: लाभार्थी</strong></p>
<p>कांगड़ा विकास खंड के मटौर की कामगार मीनाक्षी देवी, नगरोटा के रिन्न की रजनी देवी, थुरल की अनूप रानी जैसी कई कामगारों ने कामगार कल्याण बोर्ड से वितीय मदद मिलने के बाद बच्चों के उज्जवल भविष्य को संवरते देखा है। कामगार अनूप रानी को अपने दो बेटों की पढ़ाई के लिए 84 हजार की वितीय मदद मिली है जिसमें एक बेटा आयुष राणा बी फार्मेसी तथा दूसरा बेटा पियूष राणा डी फार्मेसी कर रह है। इसी तरह से मीनाक्षी देवी को अपनी दो बेटियों की पढ़ाई के लिए 72 हजार की वितीय मदद मिली है और दोनों की बेटियां खुश्वु, मुस्कान स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं। नगरोटा की रजनी देवी के बेटा तथा बेटी को 72 हजार की वितीय मदद दी गई है उनका बेटा सक्षम चैधरी बीएससी कंप्यूटर साइंस तथा बेटी सुहानी स्नातक की पढ़ाई कर रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस योजना के लिए सरकार का धन्यवाद करते हुए कामगार मीनाक्षी, रजनी तथा अनूपी रानी कहना है अगर सरकार की आर्थिक मदद नहीं मिलती तो बच्चे पढ़ नहीं पाते। आज उन्हें आगे बढ़ते देख कर लगता है कि मेहनत रंग लाई है। उनका कहना है कि यह कहानी न केवल एक परिवार की सफलता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं जब जरूरतमंदों तक पहुंचती हैं, तो वे जीवन को संवार सकती हैं। उनका कहना है कि वर्तमान सरकार ने उनके बच्चों के लिए शिक्षा के वितीय मदद देकर उनके नौनिहालों का भविष्य उज्ज्वल बनाया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत सरकार</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p>लेबर कल्याण अधिकारी लोकेश ने बताया कि ऐसे व्यक्ति जो किसी भवन या निर्माण कार्य में कुशल, अर्द्धकुशल के रूप में या मैनुअल, लिपिकीय कार्य, सुपरवाईजर या तकनीकी, वेतन या पारिश्रमिक के लिए कार्य करते है। जैसा कि मिस्त्री, पेंटर, प्लम्बर, वेल्डर, इलेक्ट्रीशियन, कारपेंटर, मजदूर व हेल्पर आदि कामगार की श्रेणी में आते हैं और हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड द्वारा उन्हें पहली से पीएचडी तक पढ़ाई के लिए 8400 से लेकर एक लाख 20 हजार की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।  कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव कंवर ने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के संवेदनशील नेतृत्व में प्रदेश सरकार का यह संकल्प है कि कोई भी होनहार बच्चा केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से वंचित न रहे। कामगार कल्याण बोर्ड जैसे प्रयास इसी दिशा में एक मजबूत कड़ी हैं, जो राज्य के निर्माण में लगे मजदूरों को सिर्फ सुरक्षा ही नहीं, सम्मान और संभावनाओं से भरा भविष्य भी देते हैं। राज्य सरकार ऐसे श्रमिकों के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। बोर्ड के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को समय-समय पर आर्थिक मदद प्रदान की जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।#Shiksha #WorkersChildren #HigherEducation #HimachalNews #EducationForAll #SocialWelfare #AdarshHimachal</p>
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		<title>सोमभद्रा तट पर सजेगा भव्य राज्य स्तरीय हरोली उत्सव-2026, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू करेंगे शुभारंभ</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/a-grand-haroli-festival-2026-will-be-organised-on-the-banks-of-sombhadra-which-will-be-inaugurated-by-chief-minister-sukhwinder-singh-sukhu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 14:59:07 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Concepts]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों &#160; ऊना । राज्य स्तरीय हरोली उत्सव-2026 इस वर्ष प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण सोमभद्रा नदी तट पर हरोली-रामपुर पुल के समीप रोड़ा मैदान में 11 से 14 अप्रैल तक भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। इस उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू 11 अप्रैल को शोभायात्रा में भाग लेकर करेंगे। [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong> ऊना ।</strong> राज्य स्तरीय हरोली उत्सव-2026 इस वर्ष प्राकृतिक सुंदरता से परिपूर्ण सोमभद्रा नदी तट पर हरोली-रामपुर पुल के समीप रोड़ा मैदान में 11 से 14 अप्रैल तक भव्य स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। इस उत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू 11 अप्रैल को शोभायात्रा में भाग लेकर करेंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>एसडीएम हरोली एवं उत्सव संयोजक विशाल शर्मा ने बताया कि इस वर्ष उत्सव को प्रकृति और संस्कृति के संगम के रूप में प्रस्तुत करने के उद्देश्य से पहली बार नदी तट पर आयोजित किया जा रहा है, जिससे यह वैसाखी पर्व के पारंपरिक महत्व के और अधिक निकट होगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उत्सव के दौरान चार दिनों तक आयोजित होने वाली स्टार नाइट्स विशेष आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इनमें हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ पंजाब के प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे। 11 अप्रैल को गिप्पी ग्रेवाल, 12 अप्रैल को जी. खान और प्रभ गिल, 13 अप्रैल को कुलदीप कुमार एवं अनुज शर्मा तथा 14 अप्रैल को गुलरेज अख्तर और एमी विर्क अपनी प्रस्तुतियां देंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक संध्याओं में भाग लेने के लिए स्थानीय कलाकारों के ऑडिशन भी आयोजित किए गए हैं, जिससे स्थानीय प्रतिभाओं को मंच प्रदान किया जा सके।उपमुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जिला प्रशासन ने उत्सव को सुव्यवस्थित एवं भव्य बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया है। संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य कर रहे हैं ताकि आयोजन को सफल एवं यादगार बनाया जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उत्सव के दौरान पशु मेला, डॉग शो और बेबी शो सहित विभिन्न आकर्षक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। साथ ही विभिन्न विभागों द्वारा विकास प्रदर्शनी लगाई जाएगी, जिसमें सरकारी योजनाओं और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। 14 अप्रैल को रोजगार मेला भी आयोजित किया जाएगा, जिसमें नामी कंपनियां भाग लेंगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह उत्सव न केवल सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन करेगा, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और पारंपरिक महत्व को भी सुदृढ़ करेगा। प्रशासन और स्थानीय जनता की सहभागिता से यह आयोजन हरोली की पहचान को नई ऊंचाई देने वाला ऐतिहासिक उत्सव साबित होगा।#HaroliUtsav2026 #Una #HimachalPradesh #SomBhadra #VaisakhiFestival #SukhuGovernment #CulturalFestival #StarNight #GippyGrewal #AmmyVirk #PrabhGill #GKhan #AnujSharma #KuldeepKumar #HimachalEvents #LiveConcert #HimachalCulture #FestivalVibes #AdarshHimachal #BreakingNews #HimachalUpdates 🎉✨</p>
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		<item>
		<title>पर्यावरण और आजीविका का संगम 🌱 &#124; ‘मिशन 32 प्रतिशत’ से ग्रीन हिमाचल की नींव</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/the-confluence-of-environment-and-livelihood-%f0%9f%8c%b1-foundation-of-green-himachal-laid-with-mission-32-percent/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Apr 2026 00:55:29 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Concepts]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों विशेष रिपोर्ट &#160; शिमला । वन विस्तार की ओर बढ़ते कदमवन विस्तार से जनभागीदारी तक: पर्यावरण और आजीविका का संगमप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में एक दूरदर्शी और महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में ‘मिशन 32 प्रतिशत’ की घोषणा की है। &#160; मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में इस [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/the-confluence-of-environment-and-livelihood-%f0%9f%8c%b1-foundation-of-green-himachal-laid-with-mission-32-percent/">पर्यावरण और आजीविका का संगम 🌱 | ‘मिशन 32 प्रतिशत’ से ग्रीन हिमाचल की नींव</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों विशेष रिपोर्ट</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong> शिमला ।</strong> वन विस्तार की ओर बढ़ते कदमवन विस्तार से जनभागीदारी तक: पर्यावरण और आजीविका का संगमप्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में एक दूरदर्शी और महत्त्वाकांक्षी पहल के रूप में ‘मिशन 32 प्रतिशत’ की घोषणा की है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में इस मिशन के तहत वर्ष 2030 तक राज्य के वन आवरण को 29.50 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह निर्णय ‘‘हिमाचल को हरित हिमालय राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा निर्णय है’’ और इससे जैव विविधता बढ़ेगी। यह लक्ष्य केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने, पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और सतत विकास सुनिश्चित करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हिमाचल में वनावरण को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार ने गत तीन वर्षों में कई अभिनव पहल की हैं, जो वन विस्तार, संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को एकीकृत करती हैं। इनमें मुख्यमंत्री वन विस्तार योजना विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इस योजना का उद्देश्य बंजर और अनुपयोगी पहाड़ियों को हरित आवरण में बदलना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस योजना के पहले वर्ष में ही लगभग 600 हेक्टेयर बंजर भूमि पर पौधरोपण किया जा चुका है। इस योजना के अंतर्गत विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से वन भूमि पर पौधरोपण किया जा रहा है, जिसमें 60 प्रतिशत पौधे फलदार प्रजातियों के शामिल हैं। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भविष्य में आय के स्रोत भी सृजित हो रहे हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इसी क्रम में राजीव गांधी वन संवर्धन योजना वन क्षेत्र के पुनर्जीवन की दिशा में एक मजबूत कदम है। इस योजना के तहत वन भूमि पर बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है और पौधों की देखभाल के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। लोगों और संस्थाओं को प्रति हेक्टेयर एक लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जा रही है, जिससे पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण और जीवितता दर सुनिश्चित की जा सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह योजना स्थानीय स्वयं सहायता समूहों, महिला मंडलों और युवाओं के माध्यम से धरातल पर उतारी जा रही है जिससे उन्हें रोजगार भी उपलब्ध हुआ है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।सरकार ने हरित विकास को जन-आंदोलन का रूप देने के लिए ग्रीन एडॉप्शन योजना भी शुरू की है। इस योजना के तहत निजी उद्यम, कंपनियां और गैर-सरकारी संगठन बंजर वन भूमि को गोद लेकर वहां पौधरोपण और संरक्षण कार्य करेंगे। यह पहल कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सबिलिटी को प्रोत्साहन प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर रही है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इससे सरकारी संसाधनों पर निर्भरता कम होती है और बड़े स्तर पर हरित परियोजनाओं को गति मिलती है।इन सभी पहलों का समेकित प्रभाव राज्य को ‘ग्रीन हिमाचल’ की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। वन आवरण में वृद्धि के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण, जल स्रोतों की सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में भी मदद मिल रही है।बजट 2026-27 में ‘मिशन 32 प्रतिशत’ को केंद्र में रखना और वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए अन्य कदम व नीतियां स्पष्ट करती हैं कि हिमाचल प्रदेश सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पहल न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को संबल प्रदान कर रही है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और समृद्ध पर्यावरण की नींव भी है।#Mission32Percent #GreenHimachal #HimachalPradesh #ForestCover #ClimateAction #Afforestation #SustainableDevelopment #EcoFriendly #Biodiversity #GreenFuture #RajivGandhiScheme #CSRIndia #RuralEconomy #EnvironmentProtection #HimachalNews</p>
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