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	<title>आस्था - Aadarsh Himachal</title>
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		<title>सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का एपीजी विश्वविद्यालय में समापन, श्रद्धा और संस्कारों का बना केंद्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 15 May 2026 05:02:55 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; आदर्श हिमाचल ब्यूरों शिमला । (एपीजी) के पवित्र मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय *श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ* का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन का वातावरण भक्तिमय ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>शिमला ।</strong> (एपीजी) के पवित्र मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय *श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ* का समापन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ हुआ। अंतिम दिन का वातावरण भक्तिमय ऊर्जा, सकारात्मकता और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत रहा, जहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>कथा के अंतिम दिवस में *“सुदामा चरित्र”* का भावपूर्ण वर्णन किया गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय को गहराई से स्पर्श किया। इस प्रसंग के माध्यम से सच्ची मित्रता, विनम्रता, भक्ति, कृतज्ञता, सादगी और नैतिक जीवन के महत्व को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता ने यह संदेश दिया कि निस्वार्थ भाव, सच्चे संबंध और अटूट श्रद्धा भौतिक संपत्ति से कहीं अधिक मूल्यवान हैं।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>प्रख्यात आध्यात्मिक वक्ता Swami Nivasacharya ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, मानवता और आधुनिक जीवन में नैतिक मूल्यों की आवश्यकता पर अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वास्तविक शिक्षा केवल डिग्रियाँ प्राप्त करना नहीं, बल्कि जीवन में करुणा, अनुशासन, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान तथा समाज सेवा की भावना विकसित करना है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े रहने का संदेश देते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ-साथ संस्कारों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस समापन समारोह में हिमाचल प्रदेश के एडवोकेट जनरल Anoop Rattan मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त शिमला नगर निगम की पार्षद Gitanjali Bhagra, Sheenm Kataria तथा Mrs.Mayor Seema Chauhan ने भी कार्यक्रम में सहभागिता की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विशिष्ट अतिथियों ने विश्वविद्यालय द्वारा शैक्षणिक परिसर में ऐसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन करवाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा जैसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए सकारात्मक, शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक वातावरण का निर्माण करते हैं, जिससे उनमें अध्ययन के प्रति समर्पण, अनुशासन, आध्यात्मिक चेतना और मूल्य आधारित जीवनशैली का विकास होता है तथा वे नकारात्मक प्रवृत्तियों से दूर रहते हैं।</p>
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		<title>शिमला विश्वविद्यालय में गोवर्धन पूजा के माध्यम से पर्यावरण से जुड़ने का किया आह्वान-स्वामी</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/swami-urged-people-to-connect-with-the-environment-through-govardhan-puja-at-shimla-university/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 13 May 2026 02:23:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों   ​शिमला । (एपीजी)के शांत, सुरम्य और पवित्र मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन मंगलवार को पुनः भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। कुलगुरु पंचकुला से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक एवं शास्त्रों और संस्कृत विद्वान स्वामी निवासाचार्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का सजीव [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों</strong></p>
<p><strong> </strong><br />
<strong>​शिमला ।</strong> (एपीजी)के शांत, सुरम्य और पवित्र मंदिर परिसर में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पांचवें दिन मंगलवार को पुनः भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। कुलगुरु पंचकुला से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक एवं शास्त्रों और संस्कृत विद्वान स्वामी निवासाचार्य ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का सजीव चित्रण किया, जिसे सुनकर उपस्थित श्रद्धालु, स्थानीय लोग, विद्यार्थी व शिक्षकवर्ग भावविभोर हो उठे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी निवासाचार्य ने आध्यात्मिक शिक्षा को व्यावहारिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि विवेक ही वह प्रकाश है जो मनुष्य को सांसारिक बंधनों से मुक्त करता है। स्वामी निवासाचार्य ने आत्मा का जागरण बारे समझाया कि जिन्होंने अपनी आत्मा को पहचान लिया, उन्हें ही परमात्मा की विशेष कृपा प्राप्त होती है। स्वामी निवासाचार्य ने सम्मान का आधार क्या है , इस विषय पर कहा कि एक ज्ञानी व्यक्ति अपनी पद-प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और आचरण से हर जगह सम्मान पाता है। वहीं स्वामी निवासाचार्य ने वाणी की मधुरता बारे में भी बताया कि शिक्षा का असली उद्देश्य केवल साक्षर होना नहीं, बल्कि वाणी में वह मधुरता लाना है जो समाज को जोड़ सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>नारी सम्मान पर जोर देते हुए स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि नारी परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति की रीढ़ है।वहीं कथा के दौरान स्वामी निवासाचार्य ने सामाजिक शिक्षा पर जोर देते हुए कहा— &#8220;यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:&#8221; अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का वास होता है।उन्होंने विद्यार्थियों और युवाओं को प्रेरित किया कि एक सभ्य और शिक्षित समाज वही है जहाँ नारी को पूर्ण आदर और सुरक्षा प्राप्त हो।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>​भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का पांचवा दिवस गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग का दिव्य आयोजन विशेष रूप से &#8216;गोवर्धन पूजा&#8217; को समर्पित रहा। स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण द्वारा इंद्र का मान-मर्दन कर प्रकृति की रक्षा का संदेश दिया गया, जो आज के युग में पर्यावरण संरक्षण की शिक्षा देता है। प्रभु को छप्पन भोग अर्पित किए गए, जिसमें विश्वविद्यालय परिवार और श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। स्वामी निवासाचार्य ने बताया कि भगवान विष्णु होकर भी प्रभु ने बालक रूप में लीलाएं कीं ताकि वे भक्तों का उद्धार और दुष्टों का संहार कर सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी ने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण है। भागवत कथा जैसे आयोजन विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करते हैं। स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) में चल रहे ज्ञानयज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली एक जीवंत पाठशाला बन गया है। यहाँ &#8220;सा विद्या या विमुक्तये&#8221; (शिक्षा वही है जो मुक्ति दिलाए) के ध्येय को चरितार्थ होते देखा जा रहा है। यह विश्वविद्यालय का सौभाग्य प्राप्त हुआ कि इस तरह के प्रभु के ज्ञानयज्ञ का अवसर मिला।<br />
​</p>
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		<title>एपीजी विश्वविद्यालय में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, स्वामी निवासाचार्य ने बताया — भक्ति ही जीवन की सच्ची शक्ति</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/a-wave-of-devotion-swept-through-apg-university-swami-nivasacharya-declared-devotion-is-the-true-power-of-life/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 10 May 2026 15:12:11 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों  ​शिमला। विश्वविद्यालय (एपीजी) के मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय &#8216;श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ&#8217; के तीसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक स्वामी निवासाचार्य ने आज के व्याख्यान में भक्ति को केवल बुढ़ापे की वस्तु न मानकर, उसे युवाओं की ऊर्जा और जीवन जीने की कला से जोड़कर प्रस्तुत किया। कथा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>​शिमला।</strong> विश्वविद्यालय (एपीजी) के मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय &#8216;श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ&#8217; के तीसरे दिन रविवार को श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथावाचक स्वामी निवासाचार्य ने आज के व्याख्यान में भक्ति को केवल बुढ़ापे की वस्तु न मानकर, उसे युवाओं की ऊर्जा और जीवन जीने की कला से जोड़कर प्रस्तुत किया। कथा के मुख्य अंश जो युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा हैं। स्वामी निवासाचार्य ने बड़े ही तर्कसंगत ढंग से बताया कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि एक मानसिक अनुशासन है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि बचपन से ही प्रभु का ध्यान क्यों? जैसे कच्ची मिट्टी को मनचाहा आकार दिया जा सकता है, वैसे ही बचपन और युवावस्था में संस्कार डालने से भविष्य उज्ज्वल होता है। स्वामी निवासाचार्य ने श्रद्धालुओं और युवाओं को संदेश दिया कि सफलता के शिखर पर पहुँचने के लिए &#8216;राम की कृपा&#8217; और &#8216;तुलसी के धैर्य&#8217; जैसे गुणों की आवश्यकता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>​मृत्युतुल्य कौन है? कथा के दौरान एक कड़वा सत्य साझा करते हुए स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि केवल सांसों का रुकना मृत्यु नहीं है। जिस व्यक्ति के हृदय में भगवान के प्रति प्रेम और समाज के प्रति सद्भाव नहीं है, वह जीवित होते हुए भी &#8216;मृत्युतुल्य&#8217; है। प्रणाम का विज्ञान क्या है? पैर छूने की परंपरा को स्वामी जी ने झुकने की कला और अहंकार के नाश से जोड़ा। उन्होंने बताया कि जब हम बड़ों के चरण स्पर्श करते हैं, तो यह केवल आशीर्वाद नहीं, बल्कि ऊर्जा का आदान-प्रदान और विनम्रता का प्रतीक है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी निवासाचार्य ने स्पष्ट किया कि परमात्मा का धाम कोई भौगोलिक सीमा नहीं है। जहाँ प्रभु की लीलाएँ होती हैं, जहाँ उनके गुणों का गान होता है, वही स्थान &#8216;धाम&#8217; बन जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को प्रेरित किया कि वे अपने हृदय को ही ऐसा धाम बनाएँ जहाँ ईश्वर निवास कर सकें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>​स्वामी निवासाचार्य ने बताया कि हम भगवान के थे, भगवान के हैं और सदा भगवान के ही रहेंगे। यह अटूट विश्वास ही मनुष्य को हर संकट से लड़ने की शक्ति देता है। विश्वविद्यालय के मंदिर परिसर में आयोजित इस भागवत कथा ज्ञानयज्ञ में बड़ी संख्या में ब्यौलिया ग्राम पंचायत के आसपास के ग्रामीण लोग और शिक्षक और छात्र- छात्राएं भी भाग ले रहे हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि स्वामी निवासाचार्य की वाणी आधुनिक जटिलताओं को सुलझाने में सहायक सिद्ध है। कथा के अंत में सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया।<br />
​</p>
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			</item>
		<item>
		<title>युवाओं के उज्ज्वल भविष्य हेतु स्वामी निवासाचार्य ने दिए सफलता के मंत्र</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/swami-nivasacharya-gave-success-mantras-for-the-bright-future-of-the-youth/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 09 May 2026 15:13:42 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>&#160; &#160; आदर्श हिमाचल ब्यूरों शिमला ।  मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को भागवत सत्र के दौरान आध्यात्मिक चेतना की ऐसी लहर चली कि पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु और श्रोता भाव-विभोर हो उठे। सुप्रसिद्ध कथावाचक Swami Nivasacharya Ji ने भक्ति, कर्म, आध्यात्म, मन की शांति, शिक्षा, संस्कार, युवा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>शिमला</strong> ।  मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञानयज्ञ के दूसरे दिन शनिवार को भागवत सत्र के दौरान आध्यात्मिक चेतना की ऐसी लहर चली कि पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु और श्रोता भाव-विभोर हो उठे। सुप्रसिद्ध कथावाचक Swami Nivasacharya Ji ने भक्ति, कर्म, आध्यात्म, मन की शांति, शिक्षा, संस्कार, युवा शक्ति और राष्ट्र निर्माण के गहरे संबंधों पर प्रकाश डालते हुए बताया कि शांत मन, उत्तम शिक्षा और प्रभु कृपा से समाज की दिशा और दशा बदली जा सकती है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>स्वामी निवासाचार्य ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मन की शांति ही जीवन का सबसे बड़ा वैभव है। आज का मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, लेकिन भीतर से अशांत और बेचैन है। उन्होंने कहा कि ‘माया’ मनुष्य को भ्रमित कर देती है, जिससे वह क्षणिक सुख को ही स्थायी सत्य मान बैठता है। जब माया का पर्दा हटता है, तब परमात्मा का वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है, जो सर्वव्यापी और सर्वशक्तिमान है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>जीवन प्रबंधन, निद्रा, चिंता और गृहस्थ धर्म पर प्रकाश डालते हुए स्वामी जी ने कहा कि अति निद्रा शरीर को और अति चिंता आत्मा को कमजोर कर देती है। संयमित और संतुलित जीवन ही उन्नति का आधार है। उन्होंने कहा कि एक गुणवान पत्नी केवल घर नहीं संभालती, बल्कि परिवार, धर्म और समाज की मजबूत आधारशिला होती है।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>स्वामी निवासाचार्य ने प्रभु की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए कहा कि ईश्वर स्वयं सामने आकर कार्य नहीं करते, बल्कि किसी न किसी व्यक्ति को माध्यम बनाकर अपना कार्य सिद्ध करते हैं। इसलिए मनुष्य को स्वयं को प्रभु का योग्य ‘निमित्त’ बनाने का प्रयास करना चाहिए।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>शिक्षा और संस्कारों के महत्व पर विशेष जोर देते हुए स्वामी जी ने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें नैतिकता, मानवता, अनुशासन और आध्यात्मिक मूल्यों का समावेश होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वह शिक्षा अधूरी है जो केवल बुद्धि का विकास करे, लेकिन चरित्र निर्माण न कर सके। सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा दे।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>युवाओं को संबोधित करते हुए स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि सत्संग केवल बुजुर्गों के लिए नहीं, बल्कि युवाओं के लिए सबसे अधिक आवश्यक है। जब युवा शक्ति के पास ईश्वरीय भक्ति, उत्तम शिक्षा, संस्कार, शक्ति और आध्यात्मिक ज्ञान का संतुलन होगा, तभी वे भटकाव से बचकर समाज, परिवार और राष्ट्र की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि एक संस्कारित और आध्यात्मिक युवा ही समर्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>उन्होंने कहा कि युवाओं को कर्मयोगी बनने के साथ-साथ आध्यात्मिक ज्ञान से भी जुड़ना चाहिए, क्योंकि आध्यात्मिक चेतना से युक्त युवा समाज और राष्ट्र की तस्वीर बदल सकते हैं। स्वामी निवासाचार्य ने कहा कि भारत कभी विश्वगुरु इसलिए कहलाता था क्योंकि यहां की शिक्षा व्यवस्था में वेदों, पुराणों, उपनिषदों और ऋषि-मुनियों के ज्ञान के साथ आध्यात्मिकता और संस्कारों का समावेश था।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज विश्व में बढ़ती नफरत, लालसा, हिंसा, अपराध और मानसिक अशांति का मुख्य कारण यह है कि लोग आध्यात्मिक जीवन और नैतिक मूल्यों से दूर होकर केवल भौतिकवाद की ओर बढ़ रहे हैं।</p>
<blockquote><p>&nbsp;</p></blockquote>
<p>कम्युनिकेशन स्किल्स का उदाहरण देते हुए स्वामी जी ने कहा कि सच्चा श्रोता वह नहीं जो केवल कानों से सुनता है, बल्कि वह है जो बातों को हृदय से धारण करता है। सत्संग के महत्व को बताते हुए उन्होंने कहा कि “सत्संग वह साबुन है, जो मन के विकारों को धोकर उसे निर्मल और पवित्र बना देता है।”</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/swami-nivasacharya-gave-success-mantras-for-the-bright-future-of-the-youth/">युवाओं के उज्ज्वल भविष्य हेतु स्वामी निवासाचार्य ने दिए सफलता के मंत्र</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
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		<item>
		<title>नशे और तनाव से मुक्ति का मार्ग है अध्यात्म: स्वामी श्री निवासाचार्य</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/spirituality-is-the-path-to-freedom-from-addiction-and-stress-swami-shri-nivasacharya/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 15:01:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरो शिमला ।  आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने तथा उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के उद्देश्य से श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ शुक्रवार को शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) के मंदिर परिसर में हुआ। यह आयोजन संस्कृत गुरुकुल पंचकूला के परम श्रद्धेय स्वामी श्री [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरो</strong></p>
<p><strong> शिमला । </strong> आधुनिक और भागदौड़ भरे दौर में युवाओं को अध्यात्म से जोड़ने तथा उन्हें नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के उद्देश्य से श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ शुक्रवार को शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) के मंदिर परिसर में हुआ। यह आयोजन संस्कृत गुरुकुल पंचकूला के परम श्रद्धेय स्वामी श्री निवासाचार्य  के सानिध्य में आयोजित किया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंदिर परिसर में पहुंचे स्वामी श्री निवासाचार्य का विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भव्य स्वागत किया गया। कथा के प्रथम दिन व्यास गद्दी से स्वामी जी ने श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा एवं आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी श्री निवासाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में युवा वर्ग मानसिक तनाव, अनिश्चितता और नशे जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे में आध्यात्मिक ज्ञान जीवन को सही दिशा देने वाला मार्गदर्शक बन सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म व्यक्ति को जीवन की आपाधापी के बीच भी मानसिक शांति, आत्मबल और संतुलन बनाए रखना सिखाता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा का हिस्सा बनाए जाने को एक युगांतकारी पहल बताते हुए कहा कि इससे युवा अपनी संस्कृति, गौरवशाली इतिहास और ऋषि-मुनियों की शिक्षाओं से जुड़ सकेंगे। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों, वेदों और पुराणों में निहित जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर युवा न केवल तकनीकी रूप से सक्षम बनेंगे, बल्कि नैतिक रूप से भी सुदृढ़ होंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी जी ने कहा कि आध्यात्मिक जीवन अपनाकर वैश्विक बुराइयों, द्वेष और अनैतिकता का समाधान संभव है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रहकर मानवहित और राष्ट्र निर्माण के लिए भी कार्य करें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान भगवद्गीता के “कर्मण्येवाधिकारस्ते” और “समत्वं योग उच्यते” जैसे सूत्रों ने लोगों को मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा। गीता का संदेश आज भी युवाओं को सकारात्मक सोच, संतुलन और कर्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>स्वामी श्री निवासाचार्य ने बताया कि श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ एक सप्ताह तक चलेगा, जिसमें प्रतिदिन विभिन्न कथा प्रसंगों के माध्यम से जीवन प्रबंधन और आध्यात्मिक मूल्यों की सीख दी जाएगी। कथा के अंतर्गत नंदोत्सव, गोवर्धन पूजा, रुक्मिणी मंगल एवं सुदामा चरित्र जैसे विशेष उत्सव भी आयोजित किए जाएंगे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने श्रद्धालुओं एवं अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों से अवश्य जोड़ें ताकि युवा पीढ़ी अपनी संस्कृति और नैतिक मूल्यों से परिचित हो सके।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिमला विश्वविद्यालय (एपीजी) प्रबंधन ने कहा कि भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि युवाओं में सकारात्मक सोच, आत्मअनुशासन, नैतिक मूल्यों और मानसिक शांति विकसित करने का प्रभावशाली माध्यम है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं श्रद्धालुओं से इस आध्यात्मिक आयोजन में सहभागिता का आग्रह किया है।</p>
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		<title>खाटू श्याम जी मंदिर में नतमस्तक हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप पठानियां, प्रदेश की खुशहाली की कामना</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 08 May 2026 01:28:02 +0000</pubDate>
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										<content:encoded><![CDATA[<p>&nbsp;</p>
<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>जयपुर/शिमला।</strong> हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां गत सायं लोक सभा द्वारा गठित पीठासीन अधिकारी समिति की द्वितीय बैठक में भाग लेने के उपरान्त राजस्थान के जिला सिक्कर स्थित खाटू श्याम जी मन्दिर में दर्शन करने हेतु पहुँचे। विधान सभा अध्यक्ष ने मन्दिर में पूजा अर्चना कर शीश नवाया तथा भगवान श्री खाटू श्याम जी से प्रदेश के लोगों की सुख-समृद्वि की कामना की। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, सिक्किम, उड़ीसा के स्पीकर तथा विधान सभा सचिव यशपाल शर्मा भी उनके साथ मौजूद थे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक उपरान्त पठानियां ने पत्रकारों को भी सम्बोधित किया तथा राजस्थान विधान सभा परिसर में किए गए विकासात्मक कार्यों की प्रशंसा की तथा परिसर में संग्रहालय निर्माण तथा औषधीय पौधशाला को विकसित करने के लिए राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी की सराहना की। पठानियां ने मिडिया से वार्ता के दौरान कहा कि लोक सभा द्वारा विधान मण्डलों की समितियों के सशक्तिकरण के लिए गठित यह समिति अगले महीने तक अपनी रिर्पोट लोक सभा को प्रेषित कर देगी जिसकी अगली बैठक उड़ीसा में प्रस्तावित है। उसी बैठक में सभी की सहमति से इसे लोक सभा को प्रेषित किया जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इससे पूर्व विधान सभा अध्यक्ष ने समिति बैठक उपरान्त राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से भी मुलाकात की तथा प्रदेश विधान सभा की कार्यप्रणाली, क्रिया-क्लापों तथा विधान सभा परिसर में चल रही विकासात्मक गतिविधियों बारे अपने विचार सांझा किए। विधान सभा अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा को हि0प्र0 में पर्यटन की अपार सम्भावनाओं बारे अवगत करवाया तथा सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों का भी उनके साथ जिक्र किया। पठानियां ने मुख्यमंत्री तथा राजस्थान सरकार का आतिथ्य सत्कार के लिए धन्यवाद भी किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>विधान सभा अध्यक्ष आज दोपहर बाद जयपुर से वायु मार्ग द्वारा चण्डीगढ़ के लिए रवाना हुए तथा वहाँ से सड़क मार्ग द्वारा सायं शिमला पहुँचेगें।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>जागा माता मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में पहुंचे शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, संस्कृति और विकास पर दिया जोर</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 23 Apr 2026 14:10:47 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरो  शिमला । शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने  जुब्बल उपमंडल की कोट काईना पंचायत में जागा माता मंदिर के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। &#160; उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरो </strong></p>
<p><strong> शिमला</strong> । शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने  जुब्बल उपमंडल की कोट काईना पंचायत में जागा माता मंदिर के नवनिर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि की कामना की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि के रूप में प्रसिद्ध है, जहां हर स्थान और तत्व में देवी-देवताओं का वास है। साथ ही यहां की संस्कृति विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे आधुनिकता के साथ आगे बढ़ते हुए अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>क्षेत्र में विकास कार्यों को मिली गति</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>शिक्षा मंत्री ने बताया कि जागा माता मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए 15.29 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। कोट काईना पंचायत में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में 6 नई सड़कों का निर्माण हुआ है, जिन पर 4.30 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अतिरिक्त बुशहर क्षेत्र में 18 नई सड़कों का निर्माण किया गया है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि 1.56 करोड़ रुपये की लागत से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र झड़ग का निर्माण कार्य जारी है, जबकि 2.38 करोड़ रुपये से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय सारी के भवन का निर्माण कार्य प्रगति पर है। साथ ही मंढोल पंचायत में नाबार्ड के तहत सड़क निर्माण कार्य भी जारी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone size-medium wp-image-129090" src="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" srcset="https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-300x225.jpg 300w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-1024x770.jpg 1024w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-768x577.jpg 768w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-80x60.jpg 80w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-265x198.jpg 265w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-696x523.jpg 696w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-1068x803.jpg 1068w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391-559x420.jpg 559w, https://aadarshhimachal.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260423-WA03391.jpg 1280w" sizes="(max-width: 300px) 100vw, 300px" /><br />
जुब्बल-कोटखाई में अभूतपूर्व विकास</p>
<p>रोहित ठाकुर ने कहा कि पिछले लगभग तीन वर्षों में जुब्बल-नावर-कोटखाई क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हुआ है। इस दौरान 175 नई सड़कों का निर्माण किया गया, जो प्रदेश में सर्वाधिक है।<br />
उन्होंने बताया कि जुब्बल के डकैड़ गांव के पास 17 करोड़ रुपये की लागत से शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। कोटखाई में केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति को बड़ी उपलब्धि बताते हुए उन्होंने कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>खेलों को मिल रहा बढ़ावा</p>
<p>शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में 9 खेल छात्रावास संचालित हैं, जिनमें ठाकुर राम लाल राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (कन्या) का छात्रावास सबसे बड़ा बनकर उभर रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>उन्होंने बताया कि यहां वॉलीबॉल के साथ कबड्डी और बैडमिंटन को भी शामिल किया गया है तथा अब बॉक्सिंग प्रशिक्षण भी शुरू किया जाएगा। इस छात्रावास के नए भवन का निर्माण 2.27 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है।इस अवसर पर हिमुडा उपाध्यक्ष यशवंत छाजटा, मंदिर कमेटी के सदस्य, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>
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		<title>पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शिमला में गूंजा स्वागत, पहुँची ज्योतिर्लिंग यात्रा</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/shimla-welcomed-with-traditional-musical-instruments-as-jyotirlinga-yatra-reached/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 13:28:54 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों शिमला । आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा संचालित सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग यात्रा आज शिमला पहुँची, जहाँ इसका पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भव्य एवं श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया। इस पावन अवसर पर शहरवासियों ने रिज मैदान से पदम देव कॉम्प्लेक्स तक पहुँचकर पवित्र सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन किए। &#160; आर्ट ऑफ [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों</strong></p>
<p><strong> शिमला ।</strong> आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा संचालित सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग यात्रा आज शिमला पहुँची, जहाँ इसका पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भव्य एवं श्रद्धापूर्ण स्वागत किया गया। इस पावन अवसर पर शहरवासियों ने रिज मैदान से पदम देव कॉम्प्लेक्स तक पहुँचकर पवित्र सोमनाथ मूल ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन किए।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>आर्ट ऑफ लिविंग संस्था द्वारा आयोजित यह आध्यात्मिक कार्यक्रम शाम 4 बजे से रात्रि 8 बजे तक चला, जिसमें श्रद्धालुओं को ज्योतिर्लिंग के दर्शन के साथ-साथ स्पर्श पूजा, आध्यात्मिक सत्संग एवं प्रसाद वितरण का लाभ प्राप्त हुआ।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस मौके पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत वातावरण में भाग लेकर स्वयं को धन्य महसूस किया। शहर के गणमान्य व्यक्तियों एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और भी बढ़ाया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>राज्य मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि इस पावन अवसर पर आश्रम से विशेष रूप से पधारे स्वामी विरुपाक्ष, स्वामी रामानंद एवं वेद पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के माध्यम से पूरे ऐतिहासिक रिज मैदान को भक्तिमयी वातावरण से सराबोर कर दिया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस मौके पर महापौर सुरेंद्र चौहान, उप महापौर उमा और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी ने मंत्रोच्चारण का आनंद लिया, प्रसाद ग्रहण किया और भगवान सोमनाथ के मूल स्वरूप के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित करना है। यह पावन यात्रा चंबा से आरंभ होकर आज 9 तारीख को शिमला स्थित रिज मैदान के वर्धनदेव कॉम्प्लेक्स पहुँची, जहाँ हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।<br />
इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक एवं स्वयंसेवकों ने भाग लेकर भक्ति और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>इस अवसर पर वैदिक संस्थान की राज्य समन्वयक सोनिया मीनोचा, डीटीसी अमित शर्मा, एसटीसी कांता शर्मा, अभय शर्मा, कमलेश चौहान, रत्ना, घनश्याम, चंदन तथा एपेक्स मेंबर गोपाल कृष्ण, भीष्म सिंह कंवर सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>साथ ही भजन मंडली में शानू, नविता सूद, भूपेंद्र शर्मा, आशा किमटा आदि ने भगवान शंभू के भजनों की मधुर प्रस्तुति देकर पूरे रिज मैदान को भक्ति और शिवमय वातावरण में परिवर्तित कर दिया।#SomnathJyotirling #ArtOfLiving #Shimla #HarHarMahadev #SpiritualVibes #HimachalPradesh #ShivBhakti #Devotional #RidgeShimla #MahadevBlessings</p>
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			</item>
		<item>
		<title>सांस्कृतिक बदलाव के दौर में भारत, परंपराओं से दूरी पर चिंता</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/chinta-india-in-a-period-of-cultural-change-worrying-about-the-departure-from-traditions/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Apr 2026 14:10:43 +0000</pubDate>
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		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[सोलन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://aadarshhimachal.com/?p=128759</guid>

					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों &#160; शिमला । भारतवर्ष, जो अपनी सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, आज सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जिला सोलन के अर्की क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगतराम नड्डा ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>शिमला</strong> । भारतवर्ष, जो अपनी सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, आज सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जिला सोलन के अर्की क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगतराम नड्डा ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की।</p>
<p>उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि “सनातन धर्म” का जीवंत प्रतीक है, जहां सम्मान, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।</p>
<p>आचार्य जी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि लोग अपनी जड़ों और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। बेहतर अवसरों की तलाश में हिमाचल से बाहर बसने की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर रही है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी कमजोर कर रही है।</p>
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<p>उन्होंने भारत की आध्यात्मिक धरोहर—पवित्र नदियों, ज्योतिर्लिंगों और चार धाम—का उल्लेख करते हुए कहा कि यही विरासत देश को “देवभूमि” बनाती है।</p>
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<p>साथ ही उन्होंने समाज में बढ़ते पाखंड और नैतिक गिरावट पर भी चिंता जताई और लोगों से अपनी जड़ों को पहचानने तथा परंपराओं को सहेजने की अपील की।<br />
उनका संदेश स्पष्ट था—आधुनिकता के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।</p>
<p>#SanatanDharma #IndianCulture #HimachalPradesh #CulturalChange #Spirituality #Traditions #Devbhoomi #India</p>
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		<title>शिमला में पावन अवसर: सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन 9 अप्रैल को</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/auspicious-occasion-in-shimla-divine-darshan-of-somnath-jyotirlinga-on-9th-april/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Apr 2026 10:25:44 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरों  शिमला। शहर के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि पवित्र सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप के दिव्य दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त होने जा रहा है। &#160; यह पावन आयोजन दिनांक 9 अप्रैल को पदमदेव कॉम्प्लेक्स, द रिज, शिमला में सायं 4:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरों </strong></p>
<p><strong>शिमला।</strong> शहर के श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है कि पवित्र सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल स्वरूप के दिव्य दर्शन का दुर्लभ अवसर प्राप्त होने जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>यह पावन आयोजन दिनांक 9 अप्रैल को पदमदेव कॉम्प्लेक्स, द रिज, शिमला में सायं 4:00 बजे से रात्रि 8:00 बजे तक आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं को सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दिव्य दर्शन के साथ-साथ स्पर्श पूजा, आध्यात्मिक सत्संग तथा अंत में प्रसाद वितरण का लाभ प्राप्त होगा।</p>
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<p>उल्लेखनीय है कि हिमाचल प्रदेश में यह आध्यात्मिक यात्रा बैंगलुरु स्थित आर्ट ऑफ लिविंग आश्रम से प्रारंभ होकर 1 अप्रैल से 10 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में संचालित हो रही है। यह यात्रा चंबा से आरंभ होकर प्रदेश के विभिन्न स्थानों से होती हुई 9 अप्रैल को शिमला पहुँचेगी।</p>
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<p>राज्य मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा का उद्देश्य समाज में शांति, सद्भाव एवं सांस्कृतिक एकता का संदेश प्रसारित करना है। यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, साधक एवं स्वयंसेवक भाग लेकर भक्ति और सेवा का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन, ध्यान सत्र एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जा रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>हिमाचल प्रदेश में यात्रा के आगमन पर श्रद्धालुओं एवं स्थानीय सामाजिक संगठनों द्वारा भव्य स्वागत किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक वातावरण का संचार हो रहा है।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>सभी श्रद्धालुओं एवं आमजन से विनम्र आग्रह है कि वे दिनांक 9 अप्रैल को सायं 4:00 बजे से 8:00 बजे तक द रिज, शिमला में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान के दिव्य आशीर्वाद प्राप्त करें तथा इस आध्यात्मिक आयोजन को सफल बनाएं।</p>
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