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	<title>High Court Archives - Aadarsh Himachal</title>
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		<title>स्टोन क्रशर स्थापित करने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को हाई कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/in-the-matter-of-setting-up-stone-crushers-the-high-court-issued-notice-to-the-pollution-control-board-and-sought-its-response/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 21 Sep 2021 07:57:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल हाईकोर्ट ने ज्वालामुखी के तहत ग्राम अधवानी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन कर स्टोन क्रशर स्थापित करने के मामले में मुख्य सचिव व वन सचिव सहित सदस्य सचिव राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एचओएफएफ), कांगड़ा के डीसी और उपमंडल मजिस्ट्रेट ज्वालामुखी को नोटिस जारी कर [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल हाईकोर्ट ने ज्वालामुखी के तहत ग्राम अधवानी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा निर्धारित मानदंडों के उल्लंघन कर स्टोन क्रशर स्थापित करने के मामले में मुख्य सचिव व वन सचिव सहित सदस्य सचिव राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (एचओएफएफ), कांगड़ा के डीसी और उपमंडल मजिस्ट्रेट ज्वालामुखी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब तलब किया है.</p>
<p>कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ व न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने ग्राम अधवानी के निवासियों द्वारा मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर स्वत संज्ञान लेने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किए. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि ज्ञान चंद नाम की फर्म ग्रामीणों के विरोध के बावजूद गांव में स्टोन क्रशर स्थापित कर रही है और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानदंडों का पालन किए बिना इसे जबरन स्थापित कर रही है.</p>
<p>पर्यावरण को दूषित होने का लगाया आरोप याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वहां उनके घर हैं और खेती की जमीन और मवेशियों के लिए चरने की जमीन भी है. स्टोन क्रशर के स्थापित होने से पैदा होने वाली धूल और प्रदूषण से सभी क्षेत्रीय लोगों को नुकसान पहुंचेगा. इससे ग्रामीणों की जमीन के</p>
<p>पर्यावरण को दूषित होने का लगाया आरोप याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वहां उनके घर हैं और खेती की जमीन और मवेशियों के लिए चरने की जमीन भी है. स्टोन क्रशर के स्थापित होने से पैदा होने वाली धूल और प्रदूषण से सभी क्षेत्रीय लोगों को नुकसान पहुंचेगा. इससे ग्रामीणों की जमीन के आसपास की जमीन में लगे पेड़ खत्म हो जाएंगे और पेड़ों का नुकसान होगा. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नियमों का उल्लंघन कर स्टोन क्रशर लगा जा रहा है और इसकी दूरी सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से 1000 मीटर से कम और पानी लाने के लिए ग्रामीणों द्वारा उपयोग किए जाने वाली बावड़ी से 100 मीटर से भी कम है.</p>
<p>इसके अलावा गांव की आबादी से 500 मीटर की दूरी के भीतर क्रशर लगाया जा रहा है. उन्होंने न्यायालय से गुहार लगाई है कि ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य की रक्षा के लिए और आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरणीय क्षरण के हानिकारक प्रभावों से बचाने के लिए, जो स्टोन क्रेशर द्वारा लाया जाएगा उसकी स्थापना तुरंत बंद कर दी जाए. इस मामल में हाईकोर्ट ने प्रतिवादी ज्ञान चंद को &#8216; नोटिस जारी किया.</p>
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		<title>हि.प्र. उच्च न्यायालय ने नशामुक्ति केन्द्रों की दयनीय स्थिति को देखते हुए किया नोटिस जारी</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/hp-high-court-issued-notice-in-view-of-pathetic-condition-of-drug-de-addiction-center/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Sep 2021 18:04:55 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
		<category><![CDATA[De-Drug Addiction]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज अतिरिक्त मुख्य सचिव (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता) एवं निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता को व्यसनों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र की आर्थिक तंगी के कारण दयनीय स्थिति के मुद्दे पर नोटिस जारी किया. कोर्ट ने प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया. कार्यवाहक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज अतिरिक्त मुख्य सचिव (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता) एवं निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता को व्यसनों के लिए एकीकृत पुनर्वास केंद्र की आर्थिक तंगी के कारण दयनीय स्थिति के मुद्दे पर नोटिस जारी किया. कोर्ट ने प्रतिवादियों को दो सप्ताह के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया.</p>
<p>कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने ये आदेश अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित एक समाचार पर जनहित याचिका के रूप में अदालत द्वारा स्वत: संज्ञान लिए जाने पर &#8220;व्यसनमुक्ति केंद्र युद्ध निधि संकट&#8221; शीर्षक के तहत पारित किए गए. .</p>
<p>यह बताया गया कि हिमाचल को नशा मुक्त राज्य बनाने के राज्य सरकार के दावों के बावजूद, एकीकृत व्यसन पुनर्वास केंद्र (IRCA) की स्थिति एक अलग कहानी कहती है. जबकि कुल्लू (महिला), धर्मशाला, चंबा, मंडी, सिरमौर, बिलासपुर और सोलन में स्थापित केंद्र पहले अनुदान प्राप्त होने के बावजूद अभी तक चालू नहीं हुए हैं, 2019 में शिमला में शुरू किया गया 15 बेड केंद्र बंद होने का सामना कर रहा है क्योंकि यह अभी तक बंद नहीं हुआ है. पिछले दो वर्षों के दौरान केंद्र से अनुदान (54 लाख रुपये से अधिक) प्राप्त किया. उक्त केंद्र नए मरीजों को जोड़ने की स्थिति में नहीं है और इसमें केवल तीन की ही ऑक्यूपेंसी है. एक साल से वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों को छुट्टी पर जाना पड़ा है. किराए के भवन में स्थित होने के कारण केंद्र किराया, बिजली, पानी, टेलीफोन और इंटरनेट शुल्क का भुगतान करने में असमर्थ है और इसके अलावा, कैदियों को दवा और भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल हो गया है. ओपीडी और आईपीडी सुविधाएं भी बंद कर दी गई हैं.</p>
<p>यह भी बताया गया कि केंद्र ने उच्च अधिकारियों के साथ अपनी चिंताओं को साझा किया है लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. आगे बताया गया कि मादक पदार्थों की लत के मामले बढ़ रहे हैं और 1 जनवरी,2020 से 30 अप्रैल, 2021 तक कुल 2,126 मामले दर्ज किए गए हैं.</p>
<p>यह बताया गया कि राज्य में शिमला, कुल्लू, ऊना और हमीरपुर में 60 बिस्तरों की कुल क्षमता के साथ चार कार्यात्मक आईआरसीए हैं. अन्य तीन पूरी क्षमता से चल रहे हैं लेकिन इन्हें भी वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है.</p>
<p>कोर्ट ने मामले को दो हफ्ते बाद पोस्ट किया.</p>
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		<title>भू-स्खलन पर हिमाचल प्रदेश NHAI को HC का नोटिस</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/hc-notice-to-himachal-pradesh-nhai-on-landslide/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 13:41:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
		<category><![CDATA[High Court]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
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		<category><![CDATA[Shimla]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज हिमाचल में भूस्खलन की घटनाओं को उजागर करने वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को नोटिस जारी कर जान-माल के नुकसान का ब्यौरा मांगा है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने नमिता [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/hc-notice-to-himachal-pradesh-nhai-on-landslide/">भू-स्खलन पर हिमाचल प्रदेश NHAI को HC का नोटिस</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने आज हिमाचल में भूस्खलन की घटनाओं को उजागर करने वाली एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकारों और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को नोटिस जारी कर जान-माल के नुकसान का ब्यौरा मांगा है.</p>
<p>कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमठ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने नमिता मानिकतला द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश पारित किया कि हिमाचल के कई क्षेत्रों में एक नाजुक भूविज्ञान है और भूस्खलन की संभावना है. लगभग हर साल, राज्य में बड़े पैमाने पर भूस्खलन होता है जिससे जान-माल का नुकसान होता है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य के निवासियों के साथ-साथ पर्यटकों को भी जीवन का मौलिक अधिकार है और यह राज्य का कर्तव्य है कि वह सभी एहतियाती कदम उठाए जिससे भूस्खलन को रोका जा सके और जीवन और संपत्ति के किसी भी नुकसान को रोका जा सके.</p>
<p>याचिका को जनहित याचिका (PIL) मानते हुए, अदालत ने संबंधित अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.</p>
<p>याचिकाकर्ता ने दावा किया कि विशेषज्ञों ने विभिन्न रिपोर्टों में भूस्खलन को रोकने के लिए उपचारात्मक उपायों की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य और एनएचएआई विकास परियोजनाओं, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर पहाड़ियों की खुदाई से जुड़ी राजमार्ग परियोजनाओं को क्रियान्वित करते समय इन सुझावों पर ध्यान नहीं दे रहे थे.</p>
<p>याचिकाकर्ता ने अदालत से राज्य सरकार को सभी आपदा संभावित क्षेत्रों में आईआईटी, मंडी और अन्य समान उपकरणों द्वारा विकसित भूस्खलन की भविष्यवाणी करने वाले उपकरणों को स्थापित करने का निर्देश देने का आग्रह किया. उन्होंने प्रार्थना की कि एनएचएआई और राज्य लोक निर्माण विभाग को सभी राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर भूस्खलन की रोकथाम के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए सभी उपायों को लागू करने का निर्देश दिया जाए.</p>
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