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	<title>HPU Archives - Aadarsh Himachal</title>
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	<lastBuildDate>Thu, 16 Sep 2021 08:44:14 +0000</lastBuildDate>
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		<title>प्रदेश महाविद्यालयों में लोक प्रशासन विषय के सभी रिक्त पदों को जल्द भरा जाए : ABVP</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/all-vacant-posts-of-public-administration-subject-in-state-colleges-should-be-filled-soon-abvp/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Sep 2021 08:44:14 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
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		<category><![CDATA[Public Administration]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में लोक प्रशासन विभाग के शोधर्थियो ने विद्यार्थी परिषद के साथ मिलकर प्रदेश भर में लोक प्रशासन विषय से जुड़ी हुई मांगो को लेकर लोक प्रशासन विभाग मे चर्चा की. मीडिया को जानकारी देते हुए लोक प्रशासन विभाग के शोधार्थी रमेश कुमार ने कहा कि प्रदेश भर में मात्र 34 [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल प्रदेश विश्विद्यालय में लोक प्रशासन विभाग के शोधर्थियो ने विद्यार्थी परिषद के साथ मिलकर प्रदेश भर में लोक प्रशासन विषय से जुड़ी हुई मांगो को लेकर लोक प्रशासन विभाग मे चर्चा की.</p>
<p>मीडिया को जानकारी देते हुए लोक प्रशासन विभाग के शोधार्थी रमेश कुमार ने कहा कि प्रदेश भर में मात्र 34 ऐसे महाविद्यालय है, जहाँ इस विषय को वर्तमान में पढ़ाया जा रहा है, जबकि प्रदेश भर मे महाविधालय की कुल संख्या 137 है और इसमें भी केवल 27 महाविद्यालय मे ही इसके पदो को भरा गया है. उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में लोक प्रशासन विषय को पढ़ाया जाए. उनहोंने कहा कि लोक प्रशासन विषय मे ऐसे हजारो छात्र है, जिन्होंने M.A., M.Phil और Ph.D कर रखी है, लेकिन फिर भी बेरोजगार है. इसलिये हमारी सरकार से मांग रहेगी कि इस विषय के महत्व को समझते हुऐ उचित निरणय ले और हम सभी छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से बचायें.</p>
<p>बैठक मे सभी शोधर्थियो ने मांग रखी कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में लोक प्रशासन विषय को पढ़ाया जाए और सभी महाविद्यालयों में शिक्षको के पदों को भी जल्द भरा जाए.</p>
<p>लोक प्रशासन विषय में उच्च शिक्षा निदेशालय द्वारा मात्र सात पदों की सिफारिश की गई है, जिसे कैबिनेट कमेटी ने भी मंजूरी दे दी है, लेकिन ये सीटे पर्याप्त नही है क्यूंकि वर्तमान में लोक प्रशासन विषय में नेट /सेट योग्य विद्यार्थियों की संख्या में बहुत अधिक बढ़ोतरी हुई है, इसलिए लोक प्रशासन विषय की सीटो में बढ़ोतरी की जाए और साथ ही उन्होंने कहा कि सरदार वल्लभ भाई कलस्टर विश्विद्यालय में भी लोक प्रशासन विषय को जल्द शुरू किया जाए.</p>
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		<item>
		<title>छात्रवृत्ति घोटाला : &#8216;लापरवाह&#8217; अधिकारियों ने छात्र आईडी ही सत्यापित नहीं की : CBI</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/cbi-statement-on-student-scholarship-scam/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 14:40:33 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
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		<category><![CDATA[Student Scholarship Scam]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>हिमाचल में 250 करोड़ रुपये का रैकेट सीबीआई कर रही है 250 करोड़ रुपये के हिमाचल प्रदेश छात्रवृत्ति घोटाले की जांच जब छात्रवृत्ति सूची को मंजूरी दी गई तो किंगपिन ने &#8220;जानबूझकर&#8221; अपने वरिष्ठों से आधार विवरण छुपाया जांच के अनुसार, वरिष्ठ भी अनभिज्ञ दिखाई दिए और उन्होंने खुद से दस्तावेज नहीं मांगे शिमला : [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">हिमाचल में 250 करोड़ रुपये का रैकेट</span></strong></p>
<ul>
<li>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">सीबीआई कर रही है 250 करोड़ रुपये के हिमाचल प्रदेश छात्रवृत्ति घोटाले की जांच</span></strong></p></blockquote>
</li>
<li>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">जब छात्रवृत्ति सूची को मंजूरी दी गई तो किंगपिन ने &#8220;जानबूझकर&#8221; अपने वरिष्ठों से आधार विवरण छुपाया</span></strong></p></blockquote>
</li>
<li>
<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">जांच के अनुसार, वरिष्ठ भी अनभिज्ञ दिखाई दिए और उन्होंने खुद से दस्तावेज नहीं मांगे</span></strong></p></blockquote>
</li>
</ul>
</blockquote>
<p><strong>शिमला :</strong> 250 करोड़ रुपये के हिमाचल प्रदेश छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही सीबीआई की एक टीम ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से कथित अज्ञानता और लापरवाही को एक कारण बताया है, जिसके परिणामस्वरूप अनुदान की हेराफेरी हुई है.</p>
<p>सूत्रों ने कहा कि उप निदेशक (वितरण) सहित अधिकारी फर्जी लाभार्थियों के खातों में छात्रवृत्ति के हस्तांतरण की अनुमति देने वाले दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने से पहले उम्मीदवारों के आधार विवरण को सत्यापित करने के अनिवार्य कदम का पालन करने में विफल रहे.</p>
<p>जांच से पता चला कि पूछताछ के दौरान, अधिकारियों ने जांच एजेंसी को बताया कि मुख्य आरोपी, तत्कालीन अधीक्षक (ग्रेड- II) अरविंद राजता ने &#8220;केवल छात्रों की सूची दिखाई, जबकि आधार संख्या सहित अन्य विवरण जानबूझकर छिपाए गए थे&#8221;. उन्होंने कहा कि कई शिक्षण संस्थानों द्वारा विभाग को गुमराह करने के लिए झूठे संबद्धता दिखाने के लिए एक कथित फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया था. 270 से अधिक शिक्षण संस्थान जांच के दायरे में हैं और राज्य में बड़ी संख्या में निजी संस्थान कथित रूप से घोटाले में शामिल हैं. हालांकि सीबीआई फिलहाल सिर्फ बड़ी मछलियों को पकड़ने पर फोकस कर रही है. हिमाचल में करीब 450 निजी कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान हैं.</p>
<p>संस्थानों के साथ-साथ शिक्षा विभाग की ओर से प्रमुख प्रक्रियात्मक खामियां और विसंगतियां पाई गईं क्योंकि छात्रों की आधार संख्या जमा नहीं की गई थी और कई लाभार्थियों की छात्रवृत्ति वापस लेने के लिए एक ही खातों का उपयोग किया गया था.</p>
<p>इसके अलावा, उम्मीदवारों की साख की पुष्टि किए बिना संस्थानों द्वारा प्रस्तुत सूची के आधार पर छात्रवृत्ति जारी की गई थी. यहां तक ​​​​कि बुनियादी ढांचे और छात्रों की ताकत का भौतिक सत्यापन भी नहीं किया गया था, सूत्रों ने कहा. रजत ने कथित तौर पर नाइलेट के नाम से चल रहे नौ फर्जी संस्थानों को 33 करोड़ रुपये का वितरण किया, जिसमें उनकी पत्नी उनकी तीन निदेशकों में से एक थी.</p>
<p>सीबीआई ने 8 मई, 2019 को मामला दर्ज किया था. घोटाला 2012-13 में शुरू हुआ था, जब 36 योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / बीसी छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति का भुगतान योग्य छात्रों को नहीं किया गया था. छात्रवृत्ति का लगभग 80% पैसा निजी संस्थानों के खातों में स्थानांतरित कर दिया गया था, यह पता चला है.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>HPU: डेढ़ महीने में ही निकल गया अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा का रंग</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/hpu-the-color-of-the-statue-of-atal-bihari-vajpayee-went-out-in-a-month-and-a-half/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 11:10:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
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		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
		<category><![CDATA[Atal Bihari Vajpayee]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमलाः हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थापित की गई देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा का रंग निकल गया है. प्रतिमा की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि यह प्रतिमा पहले मानसून की बारिश की मार भी झेल नहीं सकी. 22 जुलाई को [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमलाः</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में स्थापित की गई देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा का रंग निकल गया है. प्रतिमा की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से सहज ही लगाया जा सकता है कि यह प्रतिमा पहले मानसून की बारिश की मार भी झेल नहीं सकी. 22 जुलाई को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने प्रतिमा का अनावरण किया था. इस मौके पर उनके साथ शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर, शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार भी मौजूद थे. प्रतिमा के अनावरण के दौरान अटल बिहारी वाजपेई याद में बड़ी-बड़ी बातें की गई, लेकिन अब अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा से निकल रहा रंग प्रतिमा की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है.</p>
<p>मई महीने में जब प्रतिमा का काम शुरू हुआ था, उस समय से ही विश्वविद्यालय के कई छात्र संगठन प्रतिमा लगाए जाने का विरोध कर रहे थे. प्रतिमा लगाए जाने के समय से ही विश्वविद्यालय प्रशासन विरोध का सामना कर रहा है और अब प्रतिमा करण निकालने की वजह से विश्वविद्यालय एक बार फिर घिरता नजर आ रहा है. भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेई की प्रतिमा के सिर, कंधे, बाजू, पैर और कमर से निकल रहा है. इसके बाद से ही हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले विद्यार्थी और आने-जाने वालों के बीच यह चर्चा का विषय बना हुआ है.</p>
<p>वहीं, इस बारे में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय सौंदर्यीकरण कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर हिम चटर्जी का कहना है कि 22 जुलाई को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की स्थापना दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की वजह से जल्दबाजी में काम किया गया. इस वजह से प्रतिमा का रंग उतर रहा है. उन्होंने कहा कि यह इसे अस्थाई तौर पर किया गया था. प्रतिमा में लगे सीमेंट को करीब एक महीने की धूप की आवश्यकता है. इसके बाद इस पर स्थाई रूप से रंग किया जाएगा.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से मुलाकात करेंगे HPU के अध्यापक, जानिए क्यों</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/hpu-teachers-will-gather-experience-by-meeting-the-families-of-freedom-fighters/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 11:05:43 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Concepts]]></category>
		<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[adarsh himachal]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
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		<category><![CDATA[HPU Teacher]]></category>
		<category><![CDATA[Indian army]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमलाः हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पढ़ाने वाले आचार्य और आचार्य देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से मिलेंगे. इस दौरान यह आचार्य परिवार से अनुभव एकत्रित करेंगे. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने आजादी के अमृत महोत्सव विषय पर विश्वविद्यालय [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमलाः</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में पढ़ाने वाले आचार्य और आचार्य देश की आजादी में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से मिलेंगे. इस दौरान यह आचार्य परिवार से अनुभव एकत्रित करेंगे. हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने आजादी के अमृत महोत्सव विषय पर विश्वविद्यालय में बैठक की अध्यक्षता की बैठक की. अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सिकंदर कुमार ने सभी विभागों को आजादी के अमृत महोत्सव में बढ़-चढ़कर उत्साह के साथ भाग लेने के लिए कहा है. कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय के विभाग ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानकारी जुटाएंगे, जिनका उल्लेख इतिहास में नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानना बेहद जरूरी है, ताकि सभी को हिमाचल प्रदेश के गौरवमई इतिहास के बारे में पता चल सके.</p>
<p>कुलपति प्रोफेसर सिकंदर कुमार ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से पौधारोपण, नशा मुक्ति अभियान, स्वतंत्रता सेनानियों के परिवार से मिलकर प्रदर्शनी के माध्यम से वीर योद्धाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए विश्वविद्यालय में विशेष कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे.</p>
<p>बता दें कि 14 अगस्त को हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथन लेकर ने हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति के साथ बैठक कर अमृत महोत्सव की योजना के बारे में बातचीत की थी. इसके बाद से हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से आजादी के अमृत महोत्सव में विशेष कार्यक्रम आयोजित कराने की योजना चल रही है. आजादी का अमृत महोत्सव 15 अगस्त 2021 से शुरू हुआ है और 15 अगस्त 2023 तक चलेगा इस दौरान देशभर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने अफगान छात्रों को दिया मदद का आश्वासन</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/himachal-pradesh-university-assures-help-to-afghan-students/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Sep 2021 11:18:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[DESH-DUNIA]]></category>
		<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
		<category><![CDATA[Afganisthan Student]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : अपना देश एक बार फिर तालिबान के हाथों में पड़ने के बाद, हिमाचल प्रदेश में अफगान छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. शिमला के हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और नौनी के डॉ वाई एस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ) ने उन्हें अपने खर्च और वीजा विस्तार में मदद करने का वादा किया [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> अपना देश एक बार फिर तालिबान के हाथों में पड़ने के बाद, हिमाचल प्रदेश में अफगान छात्र अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं. शिमला के हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और नौनी के डॉ वाई एस परमार बागवानी और वानिकी विश्वविद्यालय (यूएचएफ) ने उन्हें अपने खर्च और वीजा विस्तार में मदद करने का वादा किया है.</p>
<p>नौनी के पीएचडी, एमएससी और एमबीए प्रोग्राम में आठ अफगान छात्र, एचपीयू में 14 और शिमला के एक निजी विश्वविद्यालय में 19 छात्र हैं. नौनी के लोग भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के फेलोशिप पर हैं, और ट्यूशन फीस जमा करना उनके लिए कोई समस्या नहीं है, लेकिन समय सीमा समाप्त होने वाला वीजा एक बड़ी चिंता का विषय है.</p>
<p>विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने कहा कि संस्थान ने कुछ अफगान छात्रों के वीज़ा विस्तार में मदद के अनुरोध को अग्रेषित किया था.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>वि.वि. प्रशासन और ERP कंपनी की मिलीभगत ने हजारों छात्रों के भविष्य को किया बर्बाद : SFI</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/university-the-collusion-of-administration-and-erp-company-ruined-the-future-of-thousands-of-students-sfi/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 04 Sep 2021 07:01:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[ERP]]></category>
		<category><![CDATA[ERP scam]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[HPU]]></category>
		<category><![CDATA[SFI]]></category>
		<category><![CDATA[UG]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : शुक्रवार को विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने विश्वविद्यालय में ERP सिस्टम के अंदर हुए करोड़ो के घोटाले और UG रिजल्ट की गोपनीयता के अंदर हुई सेंध को लेकर DS का उग्र घेराव किया. एसएफआई ने आरोप लगाया की विश्वविद्यालय प्रशासन और ERP कंपनी की मिलीभगत ने विश्वविद्यालय के संसाधनों को बर्बाद करते हुए तथा हजारों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला : </strong>शुक्रवार को विश्वविद्यालय एसएफआई इकाई ने विश्वविद्यालय में ERP सिस्टम के अंदर हुए करोड़ो के घोटाले और UG रिजल्ट की गोपनीयता के अंदर हुई सेंध को लेकर DS का उग्र घेराव किया.</p>
<p>एसएफआई ने आरोप लगाया की विश्वविद्यालय प्रशासन और ERP कंपनी की मिलीभगत ने विश्वविद्यालय के संसाधनों को बर्बाद करते हुए तथा हजारों छात्रों के भविष्य को बर्बाद किया है. एसएफआई ने आरोप लगाया कि जो स्नातक कोर्स के अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणाम के अंदर गोपनीयता को ताक पर रखा गया है बिना विश्वविद्यालय के आधिकारिक घोषणा के एक पोर्टल पर छात्रों के परीक्षा परिणाम उपलब्ध होना विश्वविद्यालय की साख के लिए बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है यह एक बहुत ही गंभीर मामला है जिसके अंदर छात्रों के परीक्षा परिणाम के साथ साथ उनकी निजी गोपनीयता व पारदर्शिता को भी तार-तार किया गया है</p>
<p>एसएफआई ने आरोप लगाया की विश्वविद्यालय ने ईआरपी सिस्टम को स्थापित करने के लिए 8 करोड़ की राशि विश्वविद्यालय को प्रस्तावित की थी जिसमे RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार 6 ,60,00000 वितरित किए गए जिसमे 5,18,74,298 खर्च कर दिए परंतु वो कहां खर्च किए उसका कोई ब्यौरा नहीं है न ही ERP सिस्टम के अंदर कोई भी सुधार देखने को नहीं मिला. जब से ईआरपी सिस्टम को विश्वविद्यालय ने अपनाया है तब से लेकर लगातार एसएफआई विश्वविद्यालय में इआरपी सिस्टम के अंदर जो खामियां छात्र समुदाय को परेशान कर रही थी उनके खिलाफ लगातार विरोध करती आ रही है. लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने एसएफआई के आंदोलन को दबाने के लिए उन पर मुकदमे दर्ज किए और अनेक हथकंडे अपनाते हुए छात्रों को प्रताड़ित करने का काम किया. इस पूरे प्रकरण में लगभग 6 साल का समय बीत चुका है परंतु विश्वविद्यालय को इतने लंबे समय के दौरान ईआरपी सिस्टम की खामियों का अंदेशा नहीं हुआ. छात्रों की आवाज को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा हमेशा से नकारा गया जिसका परिणाम हिमाचल प्रदेश के हजारों छात्रों को अपने अपने भविष्य को दांव पर रख कर चुकाना पड़ा. इसके साथ साथ विश्वविद्यालय के अंदर करेक्शन के नाम पर छात्रों से ₹600 लिए जाते हैं चाहे उसमें गलती विश्वविद्यालय प्रशासन की ही क्यों न हो. लेकिन जब कोई छात्र अपने रिजल्ट को ठीक करने के लिए प्रदेश के दूर दराज के क्षेत्र से आते तो उन्हें ये लगभग 5,000 के आस पास पड़ता है और इस पूरे फसाद की जड़ खस्ताहाल ERP सिस्टम है.</p>
<p>विश्वविद्यालय एसएसआई सचिव रॉकी का कहना है की सवाल यह है कि जब छात्र 6 सालों से इस चीज को उठा रहे थे तब तो विश्वविद्यालय प्रशासन हमेशा से इस चीज को अस्वीकार करता रहा और इस बेकार सिस्टम के कसीदे पढ़ता रहा ऐसे में सवाल उत्पन होता है की आज तक जिन छात्रों का भविष्य इस सिस्टम की वजह से बर्बाद हुआ है उसकी भरपाई कैसे की जाएगी . एसएफआई ने आरोप लगाया कि एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के चक्कर में छात्रों की जिंदगी से खिलवाड़ किया गया. अगर इस सिस्टम को स्थापित करने के लिए 6 करोड से ज्यादा का खर्च विश्वविद्यालय वहन कर रहा है कहीं ना कहीं यह चीज संदेह के दायरे में आती है इतने बड़े बजट का दुरुपयोग कहां हुआ इसलिए इस पूरे सिस्टम को लेकर तथा इसको स्थापित करने की प्रक्रिया को लेकर सीबीआई जांच होनी चाहिए और स्नातक अंतिम वर्ष के परिणामों के अंदर हुई इस गड़बड़ी के लिए ERP संचालकों को दंडित किया जाना चाहिए ताकि यह साफ हो सके की कहीं अधिकारियों के द्वारा कंपनी के साथ सांठगांठ करके उस पैसे को डकार तो नहीं लिया गया. साथ ही साथ विश्वविद्यालय के अंदर आउट सोर्स भर्तियों को निरस्त करने की भी मांग की गई विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ भी यही मांग कर रहा है लेकिन प्रशासन के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है. एसएफआई ने चेतावनी दी कि अगर इन तमाम चीजों को लेकर विश्वविद्यालय एक महीने के समय के अंदर सुधार नहीं करती है तो आने वाले 03 अक्तूबर को जितने भी छात्र इस सिस्टम से प्रताड़ित हुए हैं उन सब को लामबंद करते हुए प्रशासन का कैंपस आना बैन करेगी और उग्र प्रदर्शन करेगी.</p>
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			</item>
		<item>
		<title>हिमाचल प्रदेश वि.वि. के चपरासी पर सहायक रजिस्ट्रार पर हमला करने का मामला दर्ज</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/himachal-pradesh-university-case-registered-for-attacking-assistant-registrar-on-peon/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 03 Sep 2021 07:45:49 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[case register on peon]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[HPU]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ एक सहायक रजिस्ट्रार के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. प्राथमिकी के अनुसार विश्वविद्यालय के यूआईटी विभाग में चपरासी सिमरनजीत सिंह ने सहायक रजिस्ट्रार शिव कुमार की शर्ट फाड़ दी और मारपीट की. सिमरनजीत [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खिलाफ एक सहायक रजिस्ट्रार के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है.</p>
<p>प्राथमिकी के अनुसार विश्वविद्यालय के यूआईटी विभाग में चपरासी सिमरनजीत सिंह ने सहायक रजिस्ट्रार शिव कुमार की शर्ट फाड़ दी और मारपीट की.</p>
<p>सिमरनजीत करीब एक माह से ड्यूटी से अनुपस्थित था और सहायक रजिस्ट्रार के कार्यालय के बाहर बैठा था. शिव कुमार ने जब उनसे उनकी अनुपस्थिति के बारे में पूछा तो वह हिंसक हो गए.</p>
<p>एफआईआर आईपीसी की धारा 353 और 332 के तहत दर्ज की गई है, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. विवि प्रशासन ने जांच कमेटी का गठन भी कर दिया है.</p>
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		<item>
		<title>वि.वि. ERP में लगातार गड़बड़ियों को देखते हुए विद्यार्थी परिषद् ने अधिष्ठाता अध्ययन का किया घेराव</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/university-in-view-of-the-continuous-disturbances-in-erp-the-student-council-surrounded-the-deans-study/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Sep 2021 13:01:05 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[ABVP]]></category>
		<category><![CDATA[ERP]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[HPU]]></category>
		<category><![CDATA[NISU]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>वि वि से अभी परिणाम घोषित नहीं हुए लेकिन छात्रों ने परिणामों को कर आया डाउलोड:अभाविप ई आर पी की पर करोड़ों का खर्च करने के बाद भी ई आर पी की गोपनीयता का उलंघन : अभाविप छात्र कर रहे यूजी परिणाम टोरेंट सॉफ्टवेयर से डाउनलोड , विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली की खुली पोल यूजी [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p><strong><span style="color: #ff0000;">वि वि से अभी परिणाम घोषित नहीं हुए लेकिन छात्रों ने परिणामों को कर आया डाउलोड:अभाविप</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">ई आर पी की पर करोड़ों का खर्च करने के बाद भी ई आर पी की गोपनीयता का उलंघन : अभाविप</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">छात्र कर रहे यूजी परिणाम टोरेंट सॉफ्टवेयर से डाउनलोड , विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली की खुली पोल</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">यूजी परिणाम अभी तक घोषित नहीं,फिर भी छात्रों ने डाउनलोड किया परिणाम</span></strong></p>
<p><strong><span style="color: #ff0000;">प्रदेश विश्वविद्यालय कीऑनलाइन प्रणाली की निकली हवा</span></strong></p></blockquote>
<p><strong>शिमला: </strong>मीडिया को जानकारी देते हुए इकाई अध्यक्ष विशाल सकलानी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को, ई.आर. पी. से मिली झूठी थपथपाहट मीठी लगने लगी है. उन्होंने कहा कि कहा की प्रदेश विश्वविद्यालय ई. आर. पी. में गड़बड़ियों का स्तर बढ़ गया है. उन्होंने बताया कि पहले तो प्रशाशन टेस्टिंग के नाम पर प्रशाशन ने छात्रों का गलत परिणाम घोषित करता आया है, लेकिन इस बार तो बिना टेस्टिंग के टोरेंट सॉफ्टवेयर से रिजल्ट छात्र डाउनलोड कर रहे हैं , पूरे प्रदेश के छात्रों को एक बार फिर मानसिक तनाव जैसी स्थिति में डाल दिया है, लेकिन रिजल्ट में कोई सच्चाई नहीं है, उन्होंने कहा कि जिस तरह से परिणाम घोषित हुए बिना किसी अन्य सॉफ्टवेयर से लिंक बदल कर जैसे परिणाम डाउनलोड हो रहे हैं , यह परिणामों की गोपनीयता पर सवाल खड़ा करता है और ई आर पी को एक बार फिर सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है. उन्होंने कहा कि अभाविप लम्बे समय से मांग उठा रही है की विश्वविद्यालय की ऑनलाइन प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए और जो खामियों इस ऑनलाइन प्रणाली में उनको दूर करे ताकि छात्रों को समस्याओं का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सिस्टम का लक्ष्य छात्रों को सहूलियत प्रदान करना है लेकिन इसकी खामियों के कारण छात्र अनेक समस्याओं का सामना कर रहे हैं.</p>
<p>जब यह जानकारी सामने आई कि मात्र एक टोरंट अपल्लिकएशन से बी ए, बी एस सी , बी कॉम के छात्रों की परिणाम सेव हो रहे है. टोरंट आम तौर पर मनोरजन , वीडियो देखने के लिए इस्तेमाल कि जाने वाली एप्लिकेशन है, उन्होंने कहा कि प्रशाशन ने जैसे तैसे ए ग्रेड ले लिया लेकिन अभी भी ए ग्रेड ए ग्रेड समस्याओं को निपटारा नहीं कर पा रहा.</p>
<p><strong>उन्होंने कहा की ए ग्रेड यूनिवर्सिटी में डी ग्रेड ई आर पी कब तक?</strong></p>
<p>अगर ऐसे ही टेस्टिंग के नाम पर विश्वविद्यालय गलत परिणाम घोषित करने लगे और मात्र एक टोरंट एप्लिकेशन में आसानी से परिणाम मिल जाने लगे तो ऐसे में विश्वविद्यालय की ई आर पी / ऑनलाइन प्रणाली की गुणवत्ता और गोपनीयता का स्तर गिरता नजर आता है. प्रसाशन ने ई. आर.पी. के लिए करोड़ों का बजट निकाल कर वाहवाहियां लूटी लेकिन वास्तव में परिणाम हम आपके सामने हैं.</p>
<p>उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद लंबे समय से प्रशाशन के सामने ई. आर.पी. की खामियों को लेकर सचेत करने का काम कर रही है , विद्यार्थी परिषद के बार बार ई. आर. पी. की खामियों को दूर करने की मांग उठाने के बावजूद खामियों का स्तर बढ़ा है.</p>
<p>इस बार तो लापरवाही की सारी हदें प्रशासन ने पार कर दी हैं , जब बिना घोषणा के परिणाम एक सॉफ्टवेयर से छात्र डाउनलोड कर रहे हैं ऐसे में ऑनलाइन प्रणाली में गोपनीयता को लेकर ढील बरती गई है , यह समस्त छात्र समुदाय के साथ धोखा है और अभाविप मांग करती है कि कम्पनी के ऊपर भी कार्यवाही की जाए व उनका उत्तरदायित्व सुनिश्चित किया जाए ताकि इसे लापरवाही भविष्य में न हो.</p>
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		<item>
		<title>ERP घोटाले में कुलपति सहित HPU प्रशासन ने करोड़ो डकारे, जल्द हो न्यायिक या CBI जांच : NSUI</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/hpu-administration-including-vice-chancellor-looted-crores-in-erp-scam-be-it-judicial-or-cbi-probe-nsui/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 01 Sep 2021 13:34:50 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[EDUCATION]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[POLITICS]]></category>
		<category><![CDATA[ERP scam]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[HPU]]></category>
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		<category><![CDATA[NSUI]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>*एनएसयूआई ने एचपीयू के ईआरपी स्कैम की न्यायिक या सीबीआई जांच की उठाई मांग. *ईआरपी घोटाले के तहत कुलपति सहित एचपीयू प्रशासन पर करोड़ो डकारने का आरोप. *एनएसयूआई ने पीजी परीक्षाओं के लिए सभी जिलों में परीक्षा केंद्र खोलने की मांग की. शिमला : भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने ईआरपी [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p>*<strong>एनएसयूआई ने एचपीयू के ईआरपी स्कैम की न्यायिक या सीबीआई जांच की उठाई मांग.</strong></p>
<p><strong>*ईआरपी घोटाले के तहत कुलपति सहित एचपीयू प्रशासन पर करोड़ो डकारने का आरोप.</strong></p>
<p><strong>*एनएसयूआई ने पीजी परीक्षाओं के लिए सभी जिलों में परीक्षा केंद्र खोलने की मांग की.</strong></p>
<p><strong>शिमला : </strong>भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने ईआरपी स्कैम के अंतर्गत विवि कुलपति सहित प्रशासन पर करोड़ो रुपयों के गबन का आरोप लगाया है. एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि पहले तो साजिश के तहत विवि प्रशासन ईआरपी सिस्टम को संचालित करने के लिए अपनी किसी चहेती निजी कंपनी को आउटसोर्स करती है और फिर उसकी खामियों को दूर करने के नाम पर आठ करोड़ बजट का प्रावधान रखती है.</p>
<p>विवि के अनुसार इसमे से अभी तक ईआरपी सिस्टम को दुरुस्त करने के नाम पर लगभग छह करोड़ रुपये खर्च किये जा चुके है. लेकिन एनएसयूआई ने आरोप लगाया है कि करोड़ो खर्च करने पर भी ईआरपी सिस्टम का हाल वही फटीचर का फटीचर ही है जिससे साफ पता चलता है कि विश्वविद्यालय के संसाधनों का दुरुपयोग कर घोटालों के तहत पैसा अंदर किया जा रहा है. एनएसयूआई के इकाई उपाध्यक्ष रजत भारद्वाज पोन्टू ने कहा कि प्रदेशभर से हज़ारों छात्रों की शिकायतें उन्हें मिली जिसमे छात्र जब अपने पोर्टल पर रिजल्ट देखत है तो वहां पास शो करता है और दो दिन बाद रिजल्ट में फेल या कोई अनियमितताएं शो करता है. इन सभी कारणों से विवि और कॉलेजों के छात्र कई वर्षों से परेशान है. ऑनलाइन सिस्टम होने के बावजूद भी हज़ारों छात्रों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए दूर पर के जिलों से शिमला विवि की ओर रुख करना पड़ता है जिससे उनका समय व पैसा दोनो बर्बाद होता है. ऐसे में एनएसयूआई ने ईआरपी घोटाले की न्यायिक जांच की मांग की है. साथ ही एनएसयूआई ने एचपीयू परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंप कर कोरोना महामारी के चलते छात्रों के लिए प्रदेश के सभी जिलों में पीजी के परीक्षा केंद्रों को खोलने की भी मांग की. इसके अतिरिक्त ज्ञापन में विश्विद्यालय लाइब्रेरी के 24 ऑवर सेक्शन को तत्काल छात्रों के लिए खोलने सहित पिछले लंबित सभी पीजी व यूजी परीक्षा परिणामों को जल्द घोषित करने की मांग उठाई.</p>
<p>इस मौके पर रजत भारद्वाज पोन्टू, यासीन बट, अरविंद ठाकुर, प्रिंस बंसल, योगेश यादव, अखिल चौहान, पवन नेगी, निखिलेश नगरन, नितिन शर्मा, प्रवीण कंवर, मनीष शर्मा आदि कार्यकर्ता मौजूद रहे.</p>
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		<item>
		<title>तालिबान अधिग्रहण: हिमाचल में पढ़ रहे अफगानी छात्रों ने वीजा विस्तार की मांग की</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/afghan-students-in-himachal-seek-visa-extension/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 18 Aug 2021 01:00:06 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[afganishtan]]></category>
		<category><![CDATA[afghani student]]></category>
		<category><![CDATA[himachal pradesh university]]></category>
		<category><![CDATA[HPU]]></category>
		<category><![CDATA[Taliban]]></category>
		<category><![CDATA[visa extension]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 125 अफगान छात्र हैं, जो अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के अल्मा मेटर हैं. तालिबान के अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान में अराजकता और अनिश्चितता ने हिमाचल प्रदेश में अफगान छात्रों को बहुत चिंतित कर दिया है क्योंकि उनमें से अधिकांश अपने परिवारों से घर वापस बात करने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला: </strong>शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 125 अफगान छात्र हैं, जो अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई के अल्मा मेटर हैं.<br />
तालिबान के अधिग्रहण के बाद अफगानिस्तान में अराजकता और अनिश्चितता ने हिमाचल प्रदेश में अफगान छात्रों को बहुत चिंतित कर दिया है क्योंकि उनमें से अधिकांश अपने परिवारों से घर वापस बात करने में सक्षम नहीं हैं और स्थिरता लौटने तक भारत में अपने प्रवास को बढ़ाने के लिए अपने वीजा के विस्तार की मांग कर रहे हैं. .<br />
शिमला स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लगभग 125 ऐसे छात्र छात्रवृत्ति पर अध्ययन कर रहे हैं, जो पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई के अल्मा मेटर हैं.</p>
<p><strong>कड़ी नजर रख रहे हैं</strong></p>
<p>“यह वहाँ एक गंभीर स्थिति है. चीजें इतनी तेजी से बदलीं. यहां तक ​​​​कि तालिबान ने भी इसकी उम्मीद नहीं की होगी, ”मास कम्युनिकेशन के छात्र वाहिद ज़हीर ने कहा. “तालिबान ने भले ही कब्जा कर लिया हो, लेकिन वे अराजकता को संभालने के लिए पूरी तरह से कमान में नहीं हैं. अब तक, उन्होंने शांति से कब्जा कर लिया है, लेकिन हम स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं, ”ज़हीर ने कहा, जो काबुल के अधिग्रहण के बाद से हर घंटे अपने परिवार को फोन कर रहे हैं.</p>
<p><strong>तेजी से बदल रही स्थिति</strong></p>
<p>राजनीति विज्ञान के छात्र मिसाबाहुद्दीन यूसुफजई ने कहा, &#8220;यह अकेले अफगानिस्तान के बारे में नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया प्रभावित है. उम्मीद है कि तालिबान कल्याणकारी सरकार बनाने की अपनी घोषणा पर कायम रहेगा. मुझे अपने परिवार की चिंता है. चीजें इतनी तेजी से बदल रही हैं. हम तब सो गए जब एक सरकार सत्ता में थी और कुर्सी पर बैठे दूसरे शासक को जगाया, ”उन्होंने कहा.</p>
<p>यूसुफजई ने कहा कि यह स्पष्ट नहीं है कि भारत उनके देश में नए शासन को मान्यता देगा या नहीं. उन्होंने कहा, &#8216;सरकार को छात्रों के वीजा की अवधि बढ़ानी चाहिए अन्यथा हम एक बड़ी समस्या की ओर बढ़ रहे हैं.</p>
<p>अधिकांश अफगान छात्र एचपीयू में राजनीति विज्ञान का अध्ययन करने का विकल्प चुनते हैं. यहां तक ​​कि करजई ने 1983 में एचपीयू से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया. वह आखिरी बार 2006 में शिमला आए थे.</p>
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