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	<title>increased Archives - Aadarsh Himachal</title>
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	<description>Latest News and Information</description>
	<lastBuildDate>Wed, 23 Aug 2023 04:46:51 +0000</lastBuildDate>
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		<title>कैबिनेट: मिड-डे-मील कुक-सह-हेल्पर के मानदेय में की गई 500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ौत्तरी, स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति में संशोधन का लिया गया निर्णय </title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/cabinet-honorarium-mid-day-meal-cook-cum-helper-increased-500-per-month/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Priyanka Chauhan]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 23 Aug 2023 04:46:51 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Concepts]]></category>
		<category><![CDATA[DESH-DUNIA]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>11 वर्ष की दैनिक भोगी और अंशकालिक सेवाओं को पूर्ण करने वाले अंशकालिक जलवाहकों को नियमित करने की भी मिली मंजूरी  &#160; आदर्श हिमाचल ब्यूरो &#160; शिमला।  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में प्रदेश मंत्रिमण्डल की बैठक में बरसात के इस मौसम में राज्य में भारी बारिश के कारण हुई जान-माल की व्यापक [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/cabinet-honorarium-mid-day-meal-cook-cum-helper-increased-500-per-month/">कैबिनेट: मिड-डे-मील कुक-सह-हेल्पर के मानदेय में की गई 500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ौत्तरी, स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति में संशोधन का लिया गया निर्णय </a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<h4><strong>11 वर्ष की दैनिक भोगी और अंशकालिक सेवाओं को पूर्ण करने वाले अंशकालिक जलवाहकों को नियमित करने की भी मिली मंजूरी </strong></h4>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरो </strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>शिमला।</strong>  मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में प्रदेश मंत्रिमण्डल की बैठक में बरसात के इस मौसम में राज्य में भारी बारिश के कारण हुई जान-माल की व्यापक क्षति पर दुःख व्यक्त किया गया तथा इस आपदा में काल का ग्रास बने लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। राजस्व विभाग ने आपदा प्रबन्धन और सार्वजनिक एवं निजी सम्पत्ति को हुए नुकसान पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमण्डल ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति में संशोधन का निर्णय लिया। इसके तहत समझौता ज्ञापन 40 वर्षों के लिए होगा और रॉयल्टी की दरें 12 वर्ष के लिए 15 प्रतिशत, अगले 18 वर्षों के लिए 20 प्रतिशत तथा शेष 10 वर्षों के लिए 30 प्रतिशत होंगी। इसके उपरांत परियोजना राज्य सरकार को बिना किसी लागत तथा सभी तरह की देनदारियों और ऋण भार से मुक्त वापिस मिल जाएगी। हालांकि, बढ़ी हुई अवधि के लिए राज्य को अदा की जाने वाली रॉयल्टी 50 प्रतिशत से कम नहीं होगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>
<span style="color: #00ccff;">बैठक में 210 मेगावाट क्षमता की लुहरी चरण-1, 66 मेगावाट क्षमता की धौलासिद्ध, 382 मेगावाट क्षमता की सुन्नी बांध तथा 500 मेगावाट क्षमता की डुगर जल विद्युत परियोजना के लिए सतलुज जल विद्युत निगम एवं एन.एच.पी.सी को प्रदत्त बाधा रहित निःशुल्क विद्युत रॉयल्टी की छूट वापस लेने का भी निर्णय लिया गया।</span></p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमण्डल ने जल विद्युत परियोजनाओं से लिए जाने वाले जल उपकर की दरों का युक्तिकरण करने का भी निर्णय लिया।<br />
बैठक में हिमाचल प्रदेश विधवा पुनर्विवाह योजना के अन्तर्गत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता 65 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने को भी स्वीकृति प्रदान की गई।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>मंत्रिमण्डल ने वर्ष 2023-24 के लिए राज्य में मण्डी मध्यस्थता योजना के अन्तर्गत सेब, आम और नींबू प्रजाति के फलों के समर्थन मूल्य में बढ़ौत्तरी करने का भी निर्णय लिया। इसके तहत अब सेब और आम का समर्थन मूल्य 10.50 रुपये के बजाय 12 रुपये प्रति किलोग्राम होगा। इसके अतिरिक्त किन्नू, माल्टा और संतरे के लिए समर्थन मूल्य 9.50 रुपये से बढ़कर 12 रुपये प्रति किलोग्राम जबकि नींबू एवं गलगल का समर्थन मूल्य आठ रुपये से बढ़कर 10 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाएगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में मिड-डे-मील योजना के तहत कुक-सह-हेल्पर के मानदेय में प्रथम अप्रैल, 2023 से 500 रुपये प्रतिमाह की बढ़ौत्तरी को स्वीकृति प्रदान की गई, जिससे उन्हें प्रतिमाह 3500 रुपये से बढ़कर 4000 रुपये का मानदेय प्राप्त होगा। इस निर्णय से इस योजना के तहत कार्यरत 21431 व्यक्तियों को लाभ मिलेगा।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>
<span style="color: #00ccff;">मंत्रिमण्डल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 15 अगस्त, 2023 से गैर जनजातीय क्षेत्रों में दिहाड़ी की दरें 224 रुपये बढ़ाकर 240 रुपये करने तथा जनजातीय क्षेत्रों में 280 रुपये से बढ़ाकर 294 रुपये करने को भी स्वीकृति प्रदान की। बैठक में राज्य में सफाई कर्मियों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करने के लिए उन्हें आयुष्मान भारत योजना के तहत शामिल करने का निर्णय लिया गया।</span></p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में 874 उम्मीदवारों को पटवारी के रूप में और 16 पात्र चेनमैन को चयनित और प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया गया जिन्हें अगले पांच वर्षों में राज्य में तैनात किया जाएगा। मंत्रिमण्डल ने कीरतपुर-मनाली फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात नियमों के उल्लंघन को कम करने और सड़क सुरक्षा मानदण्डों को सुनिश्चित करने के लिए तीन नए स्थापित यातायात सह पर्यटक पुलिस स्टेशनों के प्रबन्धन के लिए विभिन्न श्रेणियों के 48 पद सृजित कर भरने को भी मंजूरी प्रदान की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में ग्रामीण विकास विभाग में जूनियर ऑफिस एसिस्टेंट (आईटी) के 35 पद भरने का निर्णय लिया गया। मंत्रिमण्डल ने शिक्षा विभाग में 31 मार्च, 2023 और 30 सितम्बर, 2023 तक संयुक्त रूप से 11 वर्ष की दैनिक भोगी और अंशकालिक सेवाओं को पूर्ण करने वाले अंशकालिक जलवाहकों की सेवाओं को नियमित करने की स्वीकृति प्रदान की।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p><span style="color: #00ccff;">मंत्रिमण्डल ने वन भूमि में गिरे पेड़ों की गणना, चिन्हांकन, निष्कर्षण और निपटान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को मंजूरी प्रदान की। इससे स्थानीय स्तर पर लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी और इसे अपरिष्कृत रूप में ढालने में भी मदद मिलेगी। साथ ही परिवहन लागत में कमी आएगी और राजस्व में भी वृद्धि होगी। इससे फील्ड स्टाफ की दक्षता में भी वृद्धि होगी।</span></p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>बैठक में राजीव गांधी स्वरोजगार योजना-2023 के तहत सरकारी विभागों, स्थानीय प्राधिकरणों, स्वायत्त निकायों, बोर्ड, निगमों, सरकारी उपक्रमों और अन्य संस्थानों में ई-टैक्सी किराये पर लेने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को अनुमति प्रदान की गई। इस योजना से युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और राज्य सरकार ई-टैक्सी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत उपदान प्रदान करेगी। यह निर्णय वाहन प्रदूषण को कम करने तथा हरित राज्य बनने की ओर आगे बढ़ने में दूरगामी भूमिका निभाएगा। यह योजना 2 अक्तूबर, 2023 से कार्यान्वित की जाएगी। मंत्रिमण्डल ने श्रम एवं रोजगार विभाग का नामकरण श्रम, रोजगार एवं विदेशी नियोजन (प्लेसमेंट) विभाग के रूप में करने को मंजूरी प्रदान की।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>संपादकीयः घटने की जगह बढ़ गयी है दुनिया की कोयला-आधारित स्‍टील निर्माण क्षमता</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/editorial-worlds-coal-based-steelmaking-capacity-increased-decreasing/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 20 Jul 2023 08:08:51 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>आदर्श हिमाचल ब्यूरो &#160; शिमला। ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर (Global Energy Monitor) की ताजा रिपोर्ट यह कहती है कि दुनिया में स्‍टील उत्‍पादन के लिये ‘ब्‍लास्‍ट फर्नेस- बेसिक ऑक्‍सीजन फर्नेस’ पद्धति का इस्‍तेमाल करने वाली कोयला आधारित उत्‍पादन क्षमता वर्ष 2021 के 350 एमटीपीए के मुकाबले 2022 में बढ़कर 380 एमटीपीए हो गयी है। यह ऐसे वक्‍त हुआ [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>आदर्श हिमाचल ब्यूरो</strong></p>
<p>&nbsp;</p>
<p><strong>शिमला। </strong><span lang="HI">ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर<span style="font-family: Mangal, serif;"> (</span></span><a href="https://globalenergymonitor.org/" target="_blank" rel="noopener" data-saferedirecturl="https://www.google.com/url?q=https://globalenergymonitor.org/&amp;source=gmail&amp;ust=1689925634230000&amp;usg=AOvVaw3e4YQH24ixuYbfHMUwC6wh">Global Energy Monitor</a>)<span lang="HI"> </span>की ताजा रिपोर्ट यह कहती है कि दुनिया में स्‍टील उत्‍पादन के लिये ‘ब्‍लास्‍ट फर्नेस- बेसिक ऑक्‍सीजन फर्नेस’ पद्धति का इस्‍तेमाल करने वाली कोयला आधारित उत्‍पादन क्षमता वर्ष 2021 के <a href="https://aadarshhimachal.com/leaders-selfies-helicopter-rescue-disaster/"><span style="color: #00ccff;">350 एमटीपीए</span></a> के मुकाबले 2022 में बढ़कर 380 एमटीपीए हो गयी है। यह ऐसे वक्‍त हुआ है जब लंबी अवधि के डीकार्बनाइजेशन लक्ष्‍यों को हासिल करने के लिये दुनिया की कुल उत्‍पादन क्षमता में कोयले की हिस्‍सेदारी में नाटकीय रूप से गिरावट आनी चाहिये।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>ग्‍लोबल स्‍टील प्‍लांट ट्रैकर के डेटा के वार्षिक सर्वेक्षण में पाया गया है कि कोयला आधारित स्‍टील उत्‍पादन क्षमता में वृद्धि का लगभग पूरा काम (99 प्रतिशत) एशिया में ही हो रहा है और चीन तथा भारत की इन परियोजनाओं में कुल हिस्‍सेदारी 79 प्रतिशत है।</p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>ध्यान रहे, <a href="https://aadarshhimachal.com/governor-flagged-two-vehicles-material-affected-areas/"><span style="color: #00ccff;">एशिया कोयला</span></a> आधारित इस्पात उत्पादन का केंद्र है, जहां 83% चालू ब्लास्ट फर्नेस, 98% निर्माणाधीन और 94% आगामी सक्रिय होने वाली भट्टियां हैं। इसको देखते हुए यह जरूरी है कि जलवायु आपदा से बचने के लिए पूरे एशिया में निवेश संबंधी फैसले तेजी से बदले जाएं। नई तकनीक, ग्रीन स्टील की मांग और कार्बन की कीमतों के साथ वैश्विक स्तर पर बाजार बदल रहा है। एशियाई उत्पादकों के सामने एक विकल्प है, चाहे वे दशकों से अधिक कोयले में निवेश करें, या भविष्य के इस्पात क्षेत्र में निवेश करें।</p>
<p>&nbsp;</p>
<blockquote><p>
इतिहास में ऐसा पहली बार है जब भारत कोयला आधारित स्‍टील उत्‍पादन क्षमता के विस्‍तार के मामले में चीन को पछाड़कर शीर्ष पर पहुंच गया है। भारत में कोयला आधारित ‘ब्‍लास्‍ट फर्नेस-बेसिक ऑक्‍सीजन फर्नेस’ क्षमता का 40 प्रतिशत हिस्‍सा विकास के दौर से गुजर रहा है, जबकि चीन में यही 39 फीसद है।</p></blockquote>
<p>&nbsp;</p>
<p>हालांकि हाल के वर्षों में कोयला आधारित इस्पात निर्माण का कुछ भाग उत्पादन के स्वच्छ स्‍वरूपों को दे दिया गया है मगर यह बदलाव बहुत धीमी गति से हो रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के वर्ष 2050 के नेटजीरो परिदृश्‍य के मुताबिक<a href="https://aadarshhimachal.com/annapurna-charitable-society-forward-help-flood-victims/"><span style="color: #3366ff;"> &#8216;इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस&#8217;</span></a> क्षमता की कुल हिस्‍सेदारी वर्ष 2050 तक 53 प्रतिशत हो जानी चाहिये। इसका मतलब है कि 347 मैट्रिक टन कोयला आधारित क्षमता को या तो छोड़ने अथवा रद्द करने की जरूरत होगी और &#8216;इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस&#8217; की 610 मैट्रिक टन क्षमता को मौजूदा क्षमता में जोड़ने की आवश्‍यकता होगी।</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>ग्‍लोबल एनर्जी मॉनिटर में भारी उद्योग इकाई की कार्यक्रम निदेशक केटलिन स्‍वालेक ने कहा, ‘‘स्‍टील उत्‍पादकों और उपभोक्‍ताओं को <a href="https://aadarshhimachal.com/manipur-disgusting-act-two-women-paraded-naked-women-pleading-leave/"><span style="color: #00ccff;">डीकार्बनाइजेशन</span> </a>की योजनाओं के प्रति अपनी महत्‍वाकांक्षा को और बढ़ाने की जरूरत है। हालांकि‍ स्‍टील उत्‍पादन में कोयले के इस्‍तेमाल में कमी लायी जा रही है लेकिन यह काम बहुत धीमी रफ्तार से हो रहा है। कोयला आधारित उत्‍पादन क्षमता में वृद्धि कर रहे विकासकर्ता भविष्‍य में इसकी कीमत अरबों में चुकाने का खतरा मोल ले रहे हैं।”</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>E3G के वरिष्ठ नीति सलाहकार कटिंका वागसेथर के अनुसार,<a href="https://aadarshhimachal.com/pearls-group-scam-vigilance-c-a-jaswinder-dang-arrested/"><span style="color: #00ccff;"> &#8216;वैश्विक इस्पात उत्पादन</span></a> क्षमता को धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से स्वच्छ उत्पादन मार्गों की ओर बढ़ते देखना उत्साहजनक है। लेकिन जीईएम की रिपोर्ट यह भी स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि कोयले से अपेक्षित बदलाव देखने से हम अभी भी कितने दूर हैं। उदाहरण के लिए, ऑस्ट्रियाई स्टील निर्माता वोएस्टालपाइन की हालिया रीलाइनिंग घोषणा से पता चलता है कि यद्यपि यूरोप स्वच्छ स्टील उत्पादन के लिए पाइपलाइन के मामले में अग्रणी है, फिर भी यूरोपीय स्टील निर्माता अभी भी स्वच्छ स्टील में बदलाव के अवसर की महत्वपूर्ण खिड़कियां खो रहे हैं और इसके बजाय उच्च-उत्सर्जन प्रौद्योगिकियों को लॉक कर रहे हैं।&#8217;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>
<p>अंत में यह कहना गलत नहीं होगा कि<a href="https://aadarshhimachal.com/harjit-grewal-and-deep-singh-honored-america-success-gatke/"><span style="color: #00ccff;"> इस्पात उद्योग</span> </a>को डीकार्बोनाइजेशन योजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए और कोयला मुक्त उत्पादन विधियों का रुख करने में तेजी लानी चाहिए। साथ ही, सरकारों, इस्पात उत्पादकों और उपभोक्ताओं को समान रूप से एक टिकाऊ और पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार भविष्य बनाने के अवसर का लाभ भी उठाना चाहिए।</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/editorial-worlds-coal-based-steelmaking-capacity-increased-decreasing/">संपादकीयः घटने की जगह बढ़ गयी है दुनिया की कोयला-आधारित स्‍टील निर्माण क्षमता</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
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