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	<title>lahul Spitti Archives - Aadarsh Himachal</title>
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	<lastBuildDate>Thu, 02 Dec 2021 14:41:00 +0000</lastBuildDate>
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		<title>स्पिति घाटी बनी निर्देशकों के लिए शूटिंग का पंसदीदा स्थल, मशहूर निर्देशक ने स्पिति को दी गैंड कैनियन आफ इंडिया की संज्ञा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Dec 2021 14:41:00 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लाहुल स्पीती: हिमाचल प्रदेश सरकार ने शूटिंग को प्रदेश में प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म नीति तैयार की है. इसके साथ ही प्रदेश्ज्ञ में फिल्म स्टिी स्थापित करने के लएि 100 करोड़ रूप्ए का समझौता ज्ञापन भी तैयार किया है. ताकि फिल्म निर्माताओं को उनकी फिल्मों के अनूकुल वातावरण मिल सके. इसी कड़ी में स्पिति [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहुल स्पीती:</strong> हिमाचल प्रदेश सरकार ने शूटिंग को प्रदेश में प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म नीति तैयार की है. इसके साथ ही प्रदेश्ज्ञ में फिल्म स्टिी स्थापित करने के लएि 100 करोड़ रूप्ए का समझौता ज्ञापन भी तैयार किया है. ताकि फिल्म निर्माताओं को उनकी फिल्मों के अनूकुल वातावरण मिल सके. इसी कड़ी में स्पिति अब फिल्मों की दृष्टि से भी काफी पहचाना जाने लगा है. बालीबुड और टालीबुड की फिल्मों का फिल्माकंन यहां होना शुरू हो गया है. तेलगू फिल्म इंडस्ट्री की शूटिंग हाल ही स्पिति में सम्पन्न हुई. करीब 25 दिनों तक तेलगू फिल्म की शूटिंग यहां हुई है. इसमें मुख्य अभिनेता और साउड इंडियन अभिनेता डूलकर सलमान थे. रंगरीक, काजा, में मुख्य तौर पर फिल्म के सीन फिल्माएं गए है. इस फिल्म में स्थानीय लोगों ने भी अभिनय किया है. इससे जहां स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपल्ब्ध हुआ. बल्कि पर्यटन की दृष्टि से स्पिति का प्रचार प्रसार होगा. एडीएम मोहन दत शर्मा तेलगू फिल्म इंडस्ट्री के निर्देशक अनुराघव पूरी से मिले.</p>
<p>निर्देशन अनुराघव पूरी ने जानकारी देते हुए कहा कि इससे पहले भी स्पिति में एक प्रोजेक्ट पर काम कर चुके है. मुझे स्पिति से काफी प्यार है. यहां की भूगौलिक परिस्थिति आपको अपनी ओर आकर्षित करती है. कुछ लोकेशन स्पिति की ऐसी है जोकि स्विटजरलैंड, कश्मीर की तरह बर्फबारी के दिनों दिखते है. स्पिति गैंड कैनियन आफ इंडिया है. कई फिल्म निर्माता विदेशों में शूटिंग करने के लिए प्राथमिकता देते है. लेकिन स्पिति एक ऐसी लोकेशन है जोकि आपको विदेश में होने का अनुभव करवाती है. यहां पर शूटिंग में काफी मदद प्रशासन ने की है. लोग यहां के काफी सहयोग करने वाले है. यहां पर यातायात की व्यवस्था अगर और मजबूत हो जाए तो शूटिंग की कार्य को तीव्रता मिलेगी. प्रशासन और सरकार इस पर प्रभावी कदम उठाए. मुझे जब भी इस तरह की लोकेशन से जुड़ा फिल्माकंन करना होगा तो मैं स्पिति ही आउंगा. इस मौके पर एडीएम मोहन दत शर्मा ने कहा कि शूटिंग स्पिति में कुछ समय से बढ़ गई है. फिल्म, वीडियो सांग, डाक्यूमेंट्री आदि की शूटिंग अब आए दिन हो रही है. स्थानीय लोगों को रोजगार भी प्राप्त हो रहा है. इसके साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करने में हम सफल होंगे. फिल्म के अभिनेता डूलकर सलमान ने स्पिति की बेहतरीन वीडिया अपने इंस्टाग्राम में शेयर की है जिसमें स्पिति की सुदंरता को लाखों लोग देख चुके है.</p>
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		<title>नेशनल डिव्लेमेंट कैंप काजा में 25 दिसंबर से होगा शुरू, 80 खिलाड़ी लेंगे कैंप में हिस्सा</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Dec 2021 14:27:03 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
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		<category><![CDATA[Tourism]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>&#8211; एक महीने तक चलेगा कैंप &#8211; राष्ट्रीय महिला आईस हॉकी प्रतियोगिता का भी होगा आयोजन- एडीएम मोहन दत शर्मा &#8211; कैंप में हैदराबाद, लेह, चंडीगढ़, दिल्ली मुबई और हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी लेंगे हिस्सा लाहुल स्पीती: काजा में पहली बार राष्ट्रीय महिला आईस हॉकी प्रतियोगिता होने जा रही है. 25 दिंसबर से नेशनल डिव्लेमेंट [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<blockquote>
<p style="text-align: left;"><strong>&#8211; एक महीने तक चलेगा कैंप</strong><br />
<strong>&#8211; राष्ट्रीय महिला आईस हॉकी प्रतियोगिता का भी होगा आयोजन- एडीएम मोहन दत शर्मा</strong><br />
<strong>&#8211; कैंप में हैदराबाद, लेह, चंडीगढ़, दिल्ली मुबई और हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी लेंगे हिस्सा</strong></p>
</blockquote>
<p><strong>लाहुल स्पीती:</strong> काजा में पहली बार राष्ट्रीय महिला आईस हॉकी प्रतियोगिता होने जा रही है. 25 दिंसबर से नेशनल डिव्लेमेंट कैंप काजा में आयोजित हो रहा है. आइस हॉकी एसोसियेशन आफ इंडिया की तरफ से कैंप और राष्ट्रीय प्रतियोगिता के आयोजन के बारे में पत्र एडीएम मोहन दत शर्मा को प्राप्त हो गया है. आईस हॉकी एसोसियेशन आफ लाहुल स्पिति और स्थानीय प्रशासन ने उक्त आयोजन के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. इस कैंप में 80 के करीब खिलाड़ी हिस्सा लेंगे. राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पांच से सात टीमों के हिस्सा लेने की संभावना है. हर टीम में 22 खिलाड़ी होंगे. इसके साथ ही 10 आफिशयल भी रहेंगे. प्रतियोगिता में रोजाना दो से तीन मैच होंगे. कैंप में हैदराबाद, लेह, चंडीगढ़, दिल्ली मुबई और हिमाचल प्रदेश के खिलाड़ी होंगे.</p>
<p>एडीएम मोहन दत शर्मा ने बताया कि स्पिति के लिए काफी बड़ा ये आयोजन है. पहली बार राष्ट्रीय प्रतियोगिता स्पिति में होने जा रही है. इसके साथ ही राष्ट्रीय कैंप भी यहां पर आयोजित होगा. गत वर्ष हमारी महिला आईस हाकी टीम ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ब्रांज मैडल हासिल किया था. इस आयोजन से जहां स्पिति के युवाओं को खेलों के प्रति जागरूकता फैलेगी . बल्कि राष्ट्रीय स्तर का मंच भी उन्हें यहीं पर मिलने का अवसर प्राप्त होगा. खिलाड़ियों के ठहरने की उचित व्यवस्था का प्रावधान यहां पर किया गया है. इसके साथ ही जितने भी आफिशयल आएंगे उनके लिए अलग से रहने की व्यवस्थाएं की गई हैं. उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को हर सुविधा देने का प्रयास प्रशासन की ओर से किया जाएगा. इस आयोजन से पर्यटन और रोजगार के साधन भी विकसित होंगे. कैंप और प्रतियोगिता के आयोजन में आईस हॉकी ऐसोसियेशन आफ लाहुल स्पिति की काफी बड़ी भूमिका है. एसोसियेशन के सदस्य काफी बढ़ चढ़ कर इसमें हिस्सा ले रहें है.</p>
<p><strong>रिंक में बर्फ जमाने का कार्य शुरू</strong></p>
<p>समुद्र तल से 3720 मीटर की उंचाई पर काजा में बने आईस रिंक में बर्फ जमाने का कार्य शुरू हो गया. बर्फबारी शुरू होते है रिंक में पानी जमने की उम्मीदें काफी बढ़ गई है. इसके साथ ही आगामी कुछ दिनों में रिंक तैयार करने से संबधित सारी तैयारियां पूरी हो जाएगी. पिछले वर्ष 165 स्पिति के खिलाड़ियों को एंडवास कैंप आईस हॉकी का राष्ट्रीय कोच अमित बेरबाल ने करवाया था.</p>
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		<item>
		<title>सराहनीय: भारतीय सेना ने लाहौल-स्पीति में फंसे 205 पर्यटकों को बचाया</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/commendable-indian-army-rescues-205-tourists-stranded-in-lahaul-spiti/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 Oct 2021 13:50:32 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाहौल-स्पीति: भारतीय सेना ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में अत्यधिक ऊंचाई वाले स्पीति उपखंड में बेमौसम भारी बर्फबारी के कारण फंसे 205 नागरिकों को बचाया है. जिला अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी. एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि नागरिक, ज्यादातर पर्यटक, राज्य की राजधानी से लगभग 430 किलोमीटर दूर पूह से [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहौल-स्पीति:</strong> भारतीय सेना ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में अत्यधिक ऊंचाई वाले स्पीति उपखंड में बेमौसम भारी बर्फबारी के कारण फंसे 205 नागरिकों को बचाया है. जिला अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी.</p>
<p>एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि नागरिक, ज्यादातर पर्यटक, राज्य की राजधानी से लगभग 430 किलोमीटर दूर पूह से काजा की यात्रा कर रहे थे, जब वे सोमवार शाम को वहां फस गए.</p>
<p>सुमदोह में सेना का एक शिविर उन्हें रात भर रहने और खाने की व्यवस्था देकर उनकी मदद के लिए आगे आया. उन्हें चिकित्सा सुविधा भी प्रदान की गई.</p>
<p>डोगरा स्काउट्स के कर्नल नितिन मित्तल के हवाले से एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि 205 लोगों को भोजन और आश्रय प्रदान किया गया. उन्होंने कहा कि खराब मौसम के कारण वाहन चालकों को आगे न जाने की सलाह दी गई है.</p>
<p>उन्होंने कहा &#8220;जो लोग हमारे साथ रहे, उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए एक संचार सुविधा भी प्रदान की,&#8221;.</p>
<p>सड़क संपर्क फिर से खुलने के साथ, मुख्य रूप से मलिंग नाला, 3,875 मीटर की ऊंचाई पर एक उच्च पर्वतीय दर्रा, पर्यटक मंगलवार को अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए.</p>
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		<item>
		<title>बर्फबारी के बाद मनाली-लेह राजमार्ग सामान्य यातायात के लिए बंद, सरचू में एक पर्यटक की मौत</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/manali-leh-highway-closed-for-normal-traffic-after-snowfall-one-tourist-died-in-sarchu/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Oct 2021 11:39:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[CRIME/ACCIDENT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाहौल-स्पीति: हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के बारालाचा दर्रे पर ताजा हिमपात के बाद रविवार को मनाली-लेह राजमार्ग को सामान्य यातायात के लिए बंद कर दिया गया. लाहौल-स्पीति के एसपी मानव वर्मा के मुताबिक, लाहौल-स्पीति के कुंजुम दर्रे पर बर्फबारी के कारण ग्रामफू-काजा हाईवे पर भी यातायात बाधित हो गया है. वर्मा ने [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहौल-स्पीति:</strong> हिमाचल प्रदेश के लाहौल और स्पीति जिले के बारालाचा दर्रे पर ताजा हिमपात के बाद रविवार को मनाली-लेह राजमार्ग को सामान्य यातायात के लिए बंद कर दिया गया.</p>
<p>लाहौल-स्पीति के एसपी मानव वर्मा के मुताबिक, लाहौल-स्पीति के कुंजुम दर्रे पर बर्फबारी के कारण ग्रामफू-काजा हाईवे पर भी यातायात बाधित हो गया है.</p>
<p>वर्मा ने कहा, &#8220;मनाली-लेह राजमार्ग पर बारालाचा दर्रे और ग्राम्फू-काजा राजमार्ग पर कुंजुम दर्रे पर ताजा बर्फबारी के कारण दोनों मार्गों पर यातायात अवरुद्ध है.&#8221;</p>
<p>लाहौल-स्पीति के एसपी ने यह भी बताया कि सरचू में अधिक ऊंचाई पर बीमारी के कारण एक पर्यटक की मौत हो गई.</p>
<p>उन्होंने कहा, &#8220;उन्हें स्वास्थ्य जांच के लिए सेना के ट्रांजिट कैंप में ले जाया गया, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.&#8221;</p>
<p>इससे पहले रविवार को लगातार बारिश के बाद केदारनाथ धाम के आसपास के पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी हुई थी.</p>
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		<item>
		<title>खंमीगर ग्लेशियर रेस्क्यू किए सदस्य काजा पहुंचे, दिया गया प्राथमिक उपचार</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/khamigar-glacier-rescued-members-reached-kaza-given-first-aid/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Sep 2021 15:06:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACHIEVEMENT]]></category>
		<category><![CDATA[Concepts]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[लाहुल स्पीती]]></category>
		<category><![CDATA[स्पेशल न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[Adarsh Himachal Desk]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाहुल स्पीति: खंमीगर ग्लेशियर पर ठहरे पर्वतारोही दल के रेस्क्यू किए गए सदस्यों का काजा पहुंचाया गया. सीएचसी काजा में इनका प्राथमिक उपचार किया गया. इनमें एक शेरपा छह पोटर और तीन सदस्य थे.10 सदस्यों को रेस्क्यू किया गया है. वहीं एक पोटर और एक सदस्य पहले से रेस्क्यू दल के साथ काह से आईटीबीपी [&#8230;]</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/khamigar-glacier-rescued-members-reached-kaza-given-first-aid/">खंमीगर ग्लेशियर रेस्क्यू किए सदस्य काजा पहुंचे, दिया गया प्राथमिक उपचार</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहुल स्पीति:</strong> खंमीगर ग्लेशियर पर ठहरे पर्वतारोही दल के रेस्क्यू किए गए सदस्यों का काजा पहुंचाया गया. सीएचसी काजा में इनका प्राथमिक उपचार किया गया. इनमें एक शेरपा छह पोटर और तीन सदस्य थे.10 सदस्यों को रेस्क्यू किया गया है. वहीं एक पोटर और एक सदस्य पहले से रेस्क्यू दल के साथ काह से आईटीबीपी कैंप के लिए गया था जोकि अब काजा पहुंच गया. काजा में कुल दल के 12 सदस्य पहुंच गए है. जबकि चार पोटर दो शवों के साथ खंमीगर ग्लेशियर से नीचे लाए जा रहे है. उन्हें आईटीबीपी बेस कैंप पर लाया जा चुका है.</p>
<p>जिलाधीश नीरज कुमार ने बताया कि काजा पहुंचने पर दल के सदस्यों को प्राथमिक उपचार दिया गया है. इनमें से दो सदस्यों को फ्रास्ट बाईट हुआ था. सभी सदस्य स्वस्थ हैं. मैं रेस्क्यू दल में आईटीबीपी, डोगरा स्काउट और पोटर का आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने इस रेस्क्यू आपरेशन को सफलतापूर्वक पूरा किया. इसके साथ ही स्पिति प्रशासन के एडीएम और उनकी टीम ने समन्वय में काफी भूमिका निभाई है. जल्द ही दोनों शवों के साथ चार पोटरों को भी काजा रेस्क्यू करके लाया जाएगा. अभी आईटीबीपी के बेस कैंप पर पहुंच चुके है. एडीएम मोहन दत शर्मा ने सभी दल के सदस्यों का हाल जाना है. पश्चिम बंगाल के मंत्री से फोन के माध्यम से सदस्यों के बात हुई है.</p>
<p>15 सिंतबर को बातल से 18 सदस्यीय दल रवाना हुआ है. इसमें 6 सदस्य, एक शेरपा और 11 पोटर थे. इनका ट्रेक बातल, बड़ा ग्लेशियर, खंमीगर ग्लेशियर यहीं से यूटर्न के साथ मनीकर्ण पहुंचना था. खंमीगर ग्लेशियर पहुंचने तक यह सात जगह रूके थे. बर्फबारी के कारण इन्होंने अपना आगे का सफर जारी नहीं रखा था. 24 सिंतबर जैसे ही आठवें प्वाईट पर पहुंचे तो सदस्य संदीप ठाकुराता और भास्कदेव मुखोप्धाय पीछे रह गए थे. ये दोनो सदस्य टेंट तक पहुंच ही नहीं पाए तो शेरपा व एक अन्य पोटर पीछे गए और जिस स्थान पर दोनों रूके हुए थे. वहीं पर टेंट लगा दिया और उन्हें स्लीपिंग बैग के साथ टेंट में ठहरा कर वापिस आगे आ गए. 25 सिंतबर को तीन पोटर उन दोनों को सदस्यों को देखने के लिए करीब सात बजे सुबह गए. लेकिन जब पहुंचे तो दोनों सदस्यों की मौत हो चुकी थी. तीनों पोटर वापिस पहुंचे और दल के अन्य सदस्यों को मृतकों की सूचना दी. फिर दल ने फैसला किया कि स्थानीय प्रशासन को इसके बारे में सूचित किया जाए और सदस्य अभिजीत के साथ पोटर जीवन को काजा तुरंत रवाना किया गया. इन दोनों को दो दिन काजा पहुंचने में लग गए. 27 सिंतबर की सुबह दोनों ने एडीएम काजा के पास इस घटना के बारे में सूचना दी. इसके बाद ही प्रशासन ने आइटीबीपी, डोगरा स्काउट और पोटर का 32 सदस्यीय रेस्क्यू दल का गठन किया और पिन घाटी के काह गांव के लिए रवाना कर दिया. 28 सिंतबर को रेस्क्यू दल की एंडवास पार्टी को उक्त सदस्य रास्ते में मिल गए. इनमें से दो सदस्यों को फ्रोस्ट बाईट से ग्रसित थे. जिन्हें चलने में दिक्कत हो रही थी. लेकिन रेस्क्यू दल के सदस्यों ने कंधों का सहारा लेकर इन्हें काह तक लाया.</p>
<p><strong>क्या कहा पर्वतारोहियो ने</strong></p>
<p>अभिजीत कोलकाता के रहने वाले है. उन्होंने कहा कि 24 सिंतबर को जब सुबह बर्फबारी नहीं हो रही थी तो दल ने आगे के ट्रेक पराया कॉल के लिए निकले. फिर हमने खंमीगर ग्लेशियर से नीचे जैसे जहां पर बर्फ कम थी. वहां पर टेंट लगाया हुआ था. लेकिन दो सदस्य टेंट में नहीं पहुंचे. फिर वहीं पर उन्हें टेंट लगवा दिया गया. परंतु अगली सुबह जब खाना पानी आदि सामान लेकर उनके पास सदस्य पहुंचे तो उनकी मौत हो चुकी. फिर काजा प्रशासन को सूचना दी गई. प्रशासन ने रेस्क्यू दल का गठन करके हमारे दल के सदस्यों को रेस्क्यू किया है. हम स्पिति प्रशासन, आईटीबीपी, डोगरा स्काउट का विशेष आभार व्यक्त करता हूं.</p>
<p>रनोधीर राय ने कहा कि मैं छोटी उम्र से ट्रेकिंग का शौकीन रहा हूं. पहले में अपने दोस्तों के साथ ट्रेकिंग करता रहता था. देबाशीष बर्धन के साथ मिलना हुआ तो उन्होंने बताया कि स्पिति काजा के अज्ञात ग्लेशियर ट्रेक को ढूंढना और उन्हें एक्सप्लोर करना था. पिछले तीन सालों से यहां पर आ रहे है. यह ट्रेक भी काफी अच्छा और रोमांचक था. हम ने नियमों के मुताबिक ही दल का चला रहे थे. काजा प्रशासन ने बहुत की बेहतरीन तरीके से रेस्क्यू अभियान को सफल बनाया है. आईटीबीपी और डोगरा स्काउट के जवानों ने दल के हर सदस्य को सुरक्षित रेस्क्यू किया है. हिमाचल सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार ने मिलकर रेस्क्यू करने में पल पल की खबर लेते रहे.</p>
<p>पोटर जीवन ने बताया कि बड़ा ग्लेशियर से होते हुए ट्रेक किया था. लेकिन तीन तक बर्फ गिरता रहा था. जब बड़ा ग्लेशियर से नीचे उतरते समय जब खंमीगर ग्लेशियर पर पहुंचे तो दो सदस्यों की मौत हो गई. इसके बाद रेस्क्यू दल ने हमें सुरक्षित रेस्क्यू किया इसके लिए प्रशासन के आभारी हैं.</p>
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		<title>लाहुल स्पीति की 29 पंचायतों में मतदान शुरू, दुनिया के सबसे ऊंचे मतदान केंद्र में नहीं हुई वोटिंग</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 29 Sep 2021 07:53:06 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लाहुल स्पीति: लाहुल स्पीति में पहले चरण पर 29 पंचायतों में मतदान शुरू हो गए हैं. सुबह के समय ठंड के कारण मतदान की रफ्तार धीमी रही लेकिन धूप खिलते ही मतदाता अपने घर से अपने मत देने के लिए निकले. बता दें कि लाहुल की 16 पंचायतों में पंचायत सहित बीडीसी व जिला परिषद [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहुल स्पीति:</strong> लाहुल स्पीति में पहले चरण पर 29 पंचायतों में मतदान शुरू हो गए हैं. सुबह के समय ठंड के कारण मतदान की रफ्तार धीमी रही लेकिन धूप खिलते ही मतदाता अपने घर से अपने मत देने के लिए निकले. बता दें कि लाहुल की 16 पंचायतों में पंचायत सहित बीडीसी व जिला परिषद के लिए जबकि स्पीति की सभी 13 पंचायतों में सिर्फ जिला परिषद के लिए मतदान हो रहा है. इन 13 पंचायतों में बीडीसी के चुनाव पहले ही हो चुके हैं.</p>
<p>पहले चरण में स्पीति की सभी 13 पंचायतों सहित लाहुल मंडल में तिंदी, चिमरेट, उदयपुर, त्रिलोकनाथ, जाहलमा, थिरोट, मूरिंग, गोहरमा, जोबरंग, वारपा, गोशाल, केलांग, दारचा, बरबोग, खंगसर और कोकसर पंचायतों में मतदान चल रहा है जबकि एक अक्टूबर को दूसरे चरण के मतदान में सलग्रां,तिंगरेट, मडग्राम, शकौली, जुंडा, किशौरी, नालडा, शांशा, रानिका, तांदी, मूलिंग, यूरनाथ, कोलोग, कारदंग, गोंधला और सिस्सु में मतदान होंगे.</p>
<p>दुनिया के सबसे ऊंचा मतदान केंद्र में हुआ मतदान<br />
देश एवं दुनिया के सबसे ऊंचा मतदान केंद्र टशीगंग के मतदाता आज कामिक केंद्र में मतदान करने पहुंचे. लोकसभा चुनाव में पहली बार मई 2019 में टशीगंग में मतदान हुआ था. उल्लेखनीय है कि यह मतदान केंद्र चीन सीमा से महज 10 किलोमीटर दूर 15,256 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. पहले 14,567 फीट की ऊंचाई पर स्थित स्पीति के ही हिक्किम को दुनिया का सबसे ऊंचा पोलिंग बूथ होने का दर्जा प्राप्त था. अब यह रिकार्ड 15345 फीट की ऊंचाई पर स्थित टशीगंग के नाम दर्ज है. टशीगंग पोलिंग बूथ में कुल 49 मतदाता हैं, जिनमें 29 पुरुष और 20 महिलाएं हैं. जोकि आज कामिक में मतदान कर रहे हैं.</p>
<p>जिला निर्वाचन अधिकारी एवं उपायुक्त लाहुल-स्पीति नीरज कुमार ने बताया जनजातीय जिला की 29 पंचायतों में शांति पूर्वक मतदान चल रहा है.</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<title>PM मोदी की सलाह पर, हिमाचल भूस्खलन से निपटने के लिए वैज्ञानिक समाधान खोजने को पूर्ण रूप से तैयार</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/on-the-advice-of-pm-modi-himachal-ready-to-find-scientific-solutions-to-deal-with-landslides/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Sep 2021 07:35:27 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : क्या हिमाचल प्रदेश वास्तव में यात्रा के लिए सुरक्षित है? लगातार मौतों और पहाड़ों के टूटने की खबरों के बीच बड़े पैमाने पर भूस्खलन की लाइव तस्वीरें और वायरल वीडियो ने पर्यटकों को चिंतित कर दिया है और राज्य के अधिकारी चिंतित हैं. इस वर्ष लगभग 435 मौतें &#8211; पिछले पांच वर्षों में [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> क्या हिमाचल प्रदेश वास्तव में यात्रा के लिए सुरक्षित है? लगातार मौतों और पहाड़ों के टूटने की खबरों के बीच बड़े पैमाने पर भूस्खलन की लाइव तस्वीरें और वायरल वीडियो ने पर्यटकों को चिंतित कर दिया है और राज्य के अधिकारी चिंतित हैं. इस वर्ष लगभग 435 मौतें &#8211; पिछले पांच वर्षों में मानसून के दौरान राज्य में सबसे अधिक &#8211; हुई हैं. बार-बार होने वाले भूस्खलन के कारण कई राष्ट्रीय राजमार्ग अवरुद्ध हैं, चट्टानें गिरने से पुल टूट गए हैं और मलबे से पर्यटक वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं.</p>
<p>राज्य के लिए स्थिति चिंताजनक है, जिसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन और बागवानी पर निर्भर है. राज्य का प्रशासन बड़े पैमाने पर भूस्खलन की समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई), और आईआईटी मंडी सहित प्रमुख संस्थानों को पहाड़ से संबंधित खतरों के जोखिम का आकलन करने का कार्य सौंपने का निर्णय लिया है.</p>
<p>राज्य के टीकाकरण की सफलता पर एक वीडियो इंटरेक्टिव सत्र के दौरान प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर से राज्य में जोखिम कारकों का आकलन करने के लिए एक योजना तैयार करने के लिए निर्णय लेने को कहा है. हाल ही में राज्य की यात्रा के दौरान, भारत के राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने राज्य सरकार का ध्यान कुछ जिलों में बार-बार होने वाले भूस्खलन की ओर भी आकर्षित किया था.</p>
<p>राज्य के मुख्य सचिव राम सुभग सिंह ने कहा, &#8220;मैं वैज्ञानिक संगठनों की मदद से इस मुद्दे को आगे बढ़ा रहा हूं. न केवल कमजोरियों का आकलन करने और उन्हें रोकने के लिए कदम उठाने की जरूरत है बल्कि उन्हें रोकने और मानव जीवन पर उनके प्रभाव को कम करने के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने की भी आवश्यकता है.&#8221;</p>
<p>उन्होने आगे कहा कि, &#8220;यह अब एक स्वीकृत बात है कि इनमें से अधिकांश खतरे जलवायु परिवर्तन से संबंधित हैं.&#8221;</p>
<p>प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली- जिसे राज्य के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण विभाग ने विकसित करने का प्रस्ताव दिया है, जलवायु परिवर्तन के लिए एक अनुकूली उपाय है, जो समुदायों को खतरनाक जलवायु से संबंधित घटनाओं के लिए तैयार करने में मदद करने के लिए एकीकृत संचार प्रणालियों का उपयोग करता है.</p>
<p>सिंह ने कहा कि एक सफल ईडब्ल्यूएस जीवन और नौकरियों, भूमि और बुनियादी ढांचे को बचा सकता है और दीर्घकालिक स्थिरता का समर्थन करता है. पिछले महीने, हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अलावा केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा कि वे हिमाचल प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ अक्सर होने वाले भूस्खलन की गंभीर समस्या से निपटने का प्रस्ताव कैसे करते हैं. व्यस्त राज्य की सड़कें. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि मलीमथ और न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ की खंडपीठ ने एक सामाजिक कार्यकर्ता नमिता मानिकतला द्वारा दायर जनहित याचिका पर ये आदेश पारित किए थे. उनके याचिका ने राज्य के नाजुक भूविज्ञान की ओर भूस्खलन की ओर ध्यान आकर्षित किया है.</p>
<p>उनकी याचिका में यह इंगित किया गया है कि निवासियों के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश आने वाले पर्यटकों को भी जीवन का मौलिक अधिकार है और यह राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह उन सभी एहतियाती उपायों को करे, जो भूस्खलन को रोक सकें और जीवन और संपत्ति के किसी भी नुकसान को रोक सकें.</p>
<p>मानिकतला ने आरोप लगाया कि विशेषज्ञों ने विभिन्न रिपोर्टों में भूस्खलन को रोकने के लिए उपचारात्मक उपायों की सिफारिश की है.</p>
<p>भूस्खलन जोखिम प्रबंधन रिपोर्ट, 2015&#8242; डॉ. एके महाजन, प्रोफेसर (पर्यावरण विज्ञान) द्वारा किए गए एक अध्ययन पर आधारित, पांवटा साहिब में काली ढांक क्षेत्र में रोड केव-इन के संबंध में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट- शिलाई रोड और पर्वतीय पारिस्थितिक तंत्र की जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना के प्रभाव का अध्ययन करने के लिए उच्च न्यायालय द्वारा गठित अभय शुक्ल समिति की रिपोर्ट में यह कहा गया है.</p>
<p>मानिकतला ने आरोप लगाया, &#8220;लेकिन राज्य और एनएचएआई के अधिकारी हिमाचल प्रदेश में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं, विशेष रूप से बड़े पैमाने पर पहाड़ियों की खुदाई वाले राजमार्गों को शुरू करते समय इन विशेषज्ञ सुझावों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं.&#8221; याचिकाकर्ता ने राज्य को उक्त रिपोर्टों में विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए उपायों के कार्यान्वयन के बारे में न्यायालय को सूचित करने का निर्देश देने की प्रार्थना की है. उन्होंने उनसे वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून &#8211; क्षेत्र में अग्रणी विशेषज्ञ संस्थान &#8211; की सेवाओं को शामिल करने के लिए भी कहा है ताकि भूस्खलन से ग्रस्त क्षेत्रों का अध्ययन किया जा सके और उन्हें रोकने के उपायों का सुझाव दिया जा सके.</p>
<p>कार्यकर्ता ने प्रेस को एक बयान में बताया है कि, &#8220;हमने अदालत से राज्य को भूस्खलन की भविष्यवाणी करने वाले उपकरणों को स्थापित करने का आदेश देने के लिए भी कहा है, जैसा कि सभी भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में आईआईटी, मंडी द्वारा विकसित किया गया है.&#8221;</p>
<p>बता दें कि किन्नौर में दो बड़े भूस्खलन, जिसमें 35 से अधिक लोगों की जान चली गई, जिनमें से नौ पर्यटक थे, ने हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी घटना के लाइव फुटेज को देखने वाले लोगों को झकझोर दिया. एक अन्य ऊंचाई वाले जिले लाहौल-स्पीति में भी भूस्खलन का सामना करना पड़ा जिससे चिनाब नदी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया. चंडीगढ़-शिमला और चंडीगढ़-कुल्लू-मनाली-लेह और शिमला-किन्नौर जैसे राष्ट्रीय राजमार्ग अत्यधिक जोखिम वाले हैं पर्यावरणविद मानसी आशेर भूस्खलन का श्रेय पनबिजली परियोजनाओं के बड़े पैमाने पर निर्माण, और &#8216;विकास&#8217; के नाम पर पहाड़ों की निरंतर सुरंग और विस्फोट को देते हैं. अमित कश्यप, निदेशक (पर्यटन) स्वीकार करते हैं कि पिछले दो महीनों के दौरान भूस्खलन ने राज्य में पर्यटकों की आमद पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है. उनका कहना है कि &#8220;पर्यटक स्वाभाविक रूप से भूस्खलन, अचानक बाढ़, या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम वाले स्थानों की यात्रा करना पसंद नहीं करेंगे, चाहे वह हिमाचल प्रदेश या उत्तराखंड में हो&#8221;.</p>
<p>गौरतलब है इस मानसून के दौरान हिमाचल प्रदेश में कुल 45 बड़े और छोटे भूस्खलन हुए हैं. जीएसआई ने सरकार को सूचित किया है कि हिमाचल प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा भूस्खलन हुआ है. हाल के दिनों में उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का एक समान पैटर्न देखा गया है.</p>
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		<title>हिमाचल प्रदेश लाहौल-स्पीति में प्रवेश करने के लिए अब करना होगा कर भुगतान</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/now-you-will-have-to-pay-tax-to-enter-lahaul-spiti-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 11 Sep 2021 14:13:50 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को एक कर का भुगतान करना होगा. Ataकेलांग की एसडीएम प्रिया नागरा ने कहा कि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एसएडीए) द्वारा रोहतांग की अटल सुरंग के पास लाहौल में सिसु में कर एकत्र करने के लिए एक अवरोध स्थापित किया गया है. उन्होंने [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में प्रवेश करने के लिए पर्यटकों को एक कर का भुगतान करना होगा. Ataकेलांग की एसडीएम प्रिया नागरा ने कहा कि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एसएडीए) द्वारा रोहतांग की अटल सुरंग के पास लाहौल में सिसु में कर एकत्र करने के लिए एक अवरोध स्थापित किया गया है.</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोपहिया वाहनों से 50 रुपये, कारों से 200 रुपये, एसयूवी और एमयूवी से 300 रुपये और बसों और ट्रकों से 500 रुपये लिए जा रहे हैं. साथ ही पिछले साल अक्टूबर में अटल सुरंग के खुलने के बाद लाहौल में प्रवेश करने वाले वाहनों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है.</p>
<p>सुरंग का उद्घाटन 3 अक्टूबर को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. उन्होंने कहा कि टैक्स के पैसे का इस्तेमाल स्थानीय क्षेत्र के विकास के लिए किया जाएगा.</p>
<p>उन्होंने कहा कि नियमित आधार पर लाहौल में प्रवेश करने वाले वाहनों को कर नहीं देना होगा और छूट के लिए आवेदन करना होगा.</p>
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		<item>
		<title>काजा में पहली बार हुई सिजेरियन डिलीवरी, मां और बच्चा दोनों सुरक्षित, छह दिनों तक रखा गया था निगरानी में</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Sep 2021 09:50:37 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>लाहुल-स्पित्ति : बर्फबारी से छह महीने तक ढके रहने वाले जनजातीय क्षेत्र स्पिति के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने में हिमाचल सरकार और अपोलो के सहयोग से चल रहे टेलीमेडीसन सैंटर काफी मददगार साबित हो रहा है. अभी हॉल ही में काजा में गर्भवती महिला के प्रसव करवाने में सैंटर ने काफी अहम [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहुल-स्पित्ति :</strong> बर्फबारी से छह महीने तक ढके रहने वाले जनजातीय क्षेत्र स्पिति के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने में हिमाचल सरकार और अपोलो के सहयोग से चल रहे टेलीमेडीसन सैंटर काफी मददगार साबित हो रहा है. अभी हॉल ही में काजा में गर्भवती महिला के प्रसव करवाने में सैंटर ने काफी अहम भूमिका निभाई. 11 अगस्त 2021 को क्यामो गांव की रहने वाली 27 वर्षीय तेंजिन लामो प्रसव पीड़ा से कहरा रही थी. उसके परिजन उसे काजा अस्पताल में ले आए. लेकिन रास्ते में पीड़िता से काफी ब्लीडिंग शुरू हो गई.</p>
<p>पीड़िता को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), काजा में भर्ती कराया गया था. इसी दौरान यहां पर मिशन अस्पताल मनाली की ओर से कैंप भी चल रहा था. स्थानीय चिकित्सकों, मिशन अस्पताल और अपोलो टेलीमेडीसन सैंटर ने संयुक्त प्रयास से पीड़िता को सही उपचार मिल पाया. पीड़िता का सिजेरियन काजा में करवाया गया. पहली बार काजा में सिजेरियन हुआ है. असल में काजा में सामान्य प्रसव ही करवाया जाता है. लेकिन अगर उक्त पीड़िता को रैंफर करते तो मां और बच्चें दोनों की जान को खतरा था . बच्चें को छह दिनों तक काजा में अपोलो टेलीमेडीसन सैंटर ने निगरानी में रखा था .</p>
<p>डॉ अल्फा खाखर (एमडी, एमबीबीएस ) अपोलो हॉस्पिटल्स ने बताया कि टेलीमेडिसिन पर पूरी तरह से जांच की, और पोस्ट-पार्टम हैमरेज के रूप में स्थिति का निदान किया. उसके बाद, हमने सलाह दी रोगी के नैदानिक प्रबंधन के लिए उपचार की रेखा. बच्चे पर जटिलताएं भी दिखाई देने लगी थीं क्योंकि प्रसव समय से पहले था और बच्चा कम शरीर के वजन के साथ पैदा हुआ था. इसके अलावा, जन्म के समय बच्चे का रंग नीला पड़ गया था. बच्चे की स्थिति को स्थिर करने के लिए, कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन(सीपीआर) को 2 मिनट के लिए सलाह दी गई और उसके बाद अन्य आपातकालीन नैदानिक प्रबंधन प्रक्रियाओं की सलाह दी गई.</p>
<p>सीपीआर और आपातकालीन देखभाल के बाद बच्चे को नवजात देखभाल इकाई में स्थानांतरित कर दिया गया. हालांकि, बच्चे को रुक-रुक कर कम रक्त होता रहा. जैसे-जैसे बच्चे की स्थिति बिगड़ती गई तो अपोलो हॉस्पिटल्स’ ने ’वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ, डॉ. लता विश्वनाथन (एमबीबीएस, डीसीएच, डीएनबी), (बाल रोग) के साथ टेली-परामर्श का आयोजन किया गया. टैलीमेडिसन सैंटर काजा में तैनात स्टाफ नर्स तेंजिन डोल्कर ने कहा कि उक्त पीड़िता और बच्चा छह दिनों तक हमारी निगरानी में रहा. हमारा स्टाफ चौबीस घंटे उसके लिए तैनात था. अब बच्चा काफी स्वस्थ है और मां भी . हमारा सैंटर बेहतरी सुविधा जनजातीय क्षेत्र के लोगों को मुहैया करवा रहा है. बीएमओ तेंजिन नोरबू ने कहा कि 11 अगस्त को गर्भवती महिला को लेकर परिजन अस्पताल जाए थे. लेकिन ब्लीडिंग काफी हो रही थी. ऐसे में मिशन अस्पताल के सहयोग से यहां पर सिजेरियन करना पड़ा. इसके बाद अपोलो टेलीमेडीसन सैंटर की निगरानी में महिला और बच्चा रहे.</p>
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		<title>लद्दाख के साथ सीमा विवाद सुलझाना चाहता है लाहौल</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/lahaul-wants-to-resolve-border-dispute-with-ladakh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 06 Sep 2021 06:55:35 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[DESH-DUNIA]]></category>
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		<category><![CDATA[News]]></category>
		<category><![CDATA[STATE]]></category>
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		<category><![CDATA[HimachalPradesh News]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>मंडी : लाहौल और स्पीति जिले के निवासी चाहते हैं कि सरचू और शिंकुला दर्रे पर लद्दाख के साथ सीमा का मुद्दा जल्द से जल्द सुलझाया जाए. लाहौल के निवासियों द्वारा लद्दाख में लोगों द्वारा हिमाचल प्रदेश की भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाने के साथ संघर्ष लंबे समय से चल रहा है. उनका [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>मंडी :</strong> लाहौल और स्पीति जिले के निवासी चाहते हैं कि सरचू और शिंकुला दर्रे पर लद्दाख के साथ सीमा का मुद्दा जल्द से जल्द सुलझाया जाए. लाहौल के निवासियों द्वारा लद्दाख में लोगों द्वारा हिमाचल प्रदेश की भूमि पर अतिक्रमण करने का आरोप लगाने के साथ संघर्ष लंबे समय से चल रहा है. उनका आरोप है कि विवाद को सुलझाने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किया गया.</p>
<p>जिला परिषद लाहौल-स्पीति के अध्यक्ष रमेश कुमार रूलबा ने कहा निवासी आशंकित हैं कि सरचू और शिंकुला दर्रे पर पर्यटन फिर से शुरू होने से, संघर्ष और खराब हो सकता है क्योंकि दोनों पक्षों के युवा क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल हैं.</p>
<p>उन्होंने कहा कि परिषद ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को पत्र लिखा था, लेकिन मामला केंद्र के पास लंबित है. लाहौल-स्पीति इको टूरिज्म सोसाइटी के चेयरपर्सन रिगज़िन सम्पेल हेरेप्पा ने कहा, हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के युवाओं ने पर्यटकों के लिए सरचू और शिंकुला में कैंपिंग साइट स्थापित की हैं. वे अक्सर सीमा के मुद्दे पर आपस में भिड़ जाते हैं. यह एक गंभीर मामला है और इसे जल्द ही सुलझाया जाना चाहिए.</p>
<p>लाहौल-स्पीति के पूर्व विधायक रवि ठाकुर ने दावा किया कि जहां लेह के निवासियों ने सरचू में हिमाचल क्षेत्र में 14 किमी तक शिविर लगाए हैं, वहीं कारगिल निवासी शिंकुला में हमारे क्षेत्र के 35 किमी अंदर तक व्यावसायिक गतिविधियां करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए इस मुद्दे को तत्काल सुलझाने की जरूरत है.</p>
<p>उपायुक्त नीरज कुमार ने कहा कि राज्य ने केंद्र के साथ मामला उठाया था और सीमा के सीमांकन के लिए अपनी मंजूरी दे दी थी. लद्दाख प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है. हमें उम्मीद है कि लद्दाख के सीमांकन के लिए अपनी मंजूरी मिलने के बाद, मामला सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा.</p>
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