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	<title>State Goverment Archives - Aadarsh Himachal</title>
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		<title>प्रदेश सरकार ने स्पीति घाटी में जीवाश्म स्मृति चिन्ह की सस्ती बिक्री पर लगाया प्रतिबंध</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/state-government-bans-cheap-sale-of-fossil-souvenirs-in-spiti-valley/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Sep 2021 14:32:12 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACHIEVEMENT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>लाहुल-स्पीति: हिमाचल की स्पीति घाटी में पाए जाने वाले अधिकांश जीवाश्म समुद्री हैं और उनकी बाज़ार में उच्च मांग हैं. ये समुद्री जीवाश्म निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ घाटी में आने वाले पर्यटकों को सस्ते दरों पर बिक्री के कारण व्यवस्थित रूप से नष्ट हो गए हैं. वर्षों के विनाश के बाद आखिरकार हिमाचल प्रदेश सरकार [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>लाहुल-स्पीति:</strong> हिमाचल की स्पीति घाटी में पाए जाने वाले अधिकांश जीवाश्म समुद्री हैं और उनकी बाज़ार में उच्च मांग हैं. ये समुद्री जीवाश्म निर्माण गतिविधियों के साथ-साथ घाटी में आने वाले पर्यटकों को सस्ते दरों पर बिक्री के कारण व्यवस्थित रूप से नष्ट हो गए हैं. वर्षों के विनाश के बाद आखिरकार हिमाचल प्रदेश सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है. प्रदेश सरकार ने सैकड़ों साल पुराने समुद्री जीवाश्मों की सस्ती बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है.</p>
<p>बता दें कि समुद्री जीवाश्म स्पीति घाटी के लालुंग, मिट्टी, कॉमिक, हिक्किम और लंगज़ा गांवों के पास की पहाड़ियों में पाए जाते हैं और ₹50 से ₹5,000 तक की कम दरों पर दर्शनीय स्पीति घाटी में आने वाले पर्यटकों को बेचे जाते हैं. बिक्री पर आम जीवाश्मों में ट्राइसिक काल (250 से 199 मिलियन वर्ष पुरानी) की प्रवाल भित्तियाँ और ट्राइसिक-जुरासिक काल के अमोनोइड्स (199 से 145 मिलियन वर्ष पुराने) शामिल हैं.</p>
<p>काजा में एक ट्रैवल ऑपरेटर और होटल व्यवसायी लारा त्सेरिंग ने कहा कि विदेशों सहित पर्यटकों की भीड़ में वृद्धि, भूवैज्ञानिक कलाकृतियों के विनाश के लिए अग्रणी रही है. घाटी में आने वाले कई पर्यटक जीवाश्मों की उपलब्धता से अवगत हैं. इनमें से कुछ को विभिन्न भोजनालयों और रेस्तरां में बिक्री के लिए प्रदर्शित किया जाता है. स्पीति जीवाश्म स्मृति चिन्ह को ब्लॉग, यात्रा साइटों और अन्य इंटरनेट प्लेटफार्मों के माध्यम से भी प्रचारित किया जाता है और इनकी अत्यधिक मांग है.</p>
<p>त्सेरिंग ने कहा, सड़कों और अन्य इमारतों के निर्माण के दौरान बहुत सारे जीवाश्म भी नष्ट हो गए थे. राज्य के भूविज्ञानी पीयूष गुलेरिया ने कहा, स्पीति में पाए जाने वाले अधिकांश जीवाश्म समुद्री हैं. यह बहुत महत्वपूर्ण है; यह प्राचीन भूगोल का विवरण प्रदान करने में मदद करता है. उन्हें संरक्षित करने के लिए कदम उठाने होंगे.</p>
<p>उन्होंने कहा कि जीवाश्म हिमालय से भी पुराने हैं. इन जीवाश्मों पर बहुत सारे अध्ययन किए गए हैं. इस क्षेत्र के भूवैज्ञानिक भारतीय प्लेट के अलगाव, इसकी मिलीभगत और विकास का अध्ययन कर रहे हैं. यह देश का भूवैज्ञानिक इतिहास प्रदान करता है.</p>
<p>स्पीति घाटी में कैम्ब्रियन (542 मिलियन से 488 मिलियन वर्ष पुराना) से लेकर क्रेटेशियस (145 मिलियन से 65 मिलियन वर्ष पुराना) तक लगभग एक निरंतर उत्तराधिकार है, जो इसे जीवाश्म विज्ञानियों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य बनाता है. इस पर काजा उप-मंडल मजिस्ट्रेट महेंद्र प्रताप सिंह राणा ने कहा कि हमें जीवाश्मों के दोहन को रोकना होगा. स्थानीय लोग जीवाश्मों की बिक्री को बढ़ावा देते हैं. इसलिए हमने जीवाश्मों की बिक्री को रोकने के लिए एक आदेश पारित किया है. इन्हें संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा; अगर कोई इसका अध्ययन करना चाहता है, तो हम उन्हें इस शर्त पर इसे लेने की अनुमति देंगे कि वे इसे वापस कर दें. उन्होंने कहा कि इसके लिए संग्रहालय का निर्माण चल रहा है और अगले साल तक पूरा हो जाएगा.</p>
<p>कुछ स्थानीय लोग भी जीवाश्मों के संरक्षण के प्रयास कर रहे हैं. स्पीति के एक होटल व्यवसायी राजिंदर बोध ने कहा, हम समय-समय पर स्थानीय लोगों में विरासत के संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए शिविर लगाते हैं.</p>
<p><strong>वर्षों में जीवाश्म कैसे हुए नष्ट?</strong></p>
<p>पिन वैली के लिए सड़क के निर्माण के दौरान पाराहियो घाटी में पाए गए त्रिलोबाइट निशान के साथ विशाल बिच्छू के जीवाश्म को नष्ट कर दिया गया है. विशालकाय बिच्छू के निशान अद्वितीय हैं और केवल अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया और स्पीति घाटी में पाए जाते हैं.</p>
<p>एक नहर के निर्माण के दौरान, स्पीति नदी की सहायक नदी रतनगनाला में मध्य नोरियन प्रवाल भित्तियों को निर्माण सामग्री प्रदान करने के लिए खनन किया गया था. खुदाई की गई धरती ने चट्टान के बचे हुए हिस्से को ढक दिया है.</p>
<p>उस युग से संबंधित एक और भूवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण विशेषता जब महाद्वीप पहली बार स्थिर हुए, सतलुज घाटी में एक पैलियोप्रोटेरोज़ोइक पेलियोसोल, हिमाचल प्रदेश में हिंदुस्तान-तिब्बत रोड के निर्माण के दौरान उजागर हुआ था. दोनों ओर दीवारें बना दी गई हैं और अब कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है.</p>
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		<title>केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में चिकित्सा उपकरण पार्क को दी मंजूरी</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/center-approves-medical-equipment-park-in-himachal-pradesh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Sep 2021 10:05:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[ACHIEVEMENT]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की सहायता से उत्तर भारत में सबसे पहले चिकित्सा उपकरण पार्क की मंजूरी दी गई है. ठाकुर ने सोलन जिले के नालागढ़ में विकसित किए जाने वाले पार्क को मंजूरी देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश को केंद्र सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपये की सहायता से उत्तर भारत में सबसे पहले चिकित्सा उपकरण पार्क की मंजूरी दी गई है.</p>
<p>ठाकुर ने सोलन जिले के नालागढ़ में विकसित किए जाने वाले पार्क को मंजूरी देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया, जहां 265 हेक्टेयर भूमि की पहचान की गई है.</p>
<p>केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने देश में चार चिकित्सा उपकरण पार्क स्थापित करने के उद्देश्य से चिकित्सा उपकरण पार्क योजना को बढ़ावा देने के दिशा-निर्देशों को अधिसूचित किया था.</p>
<blockquote class="twitter-tweet" data-width="550" data-dnt="true">
<p lang="hi" dir="ltr">देवभूमि हिमाचल के लिए चिकित्सा उपकरण पार्क स्वीकृत करने हेतु यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं केंद्र सरकार का हार्दिक आभार।</p>
<p>केंद्र सरकार के रसायन,उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्युटिकल विभाग ने चिकित्सा उपकरण पार्क प्रोत्साहन योजना के लिए दिशा-निर्देश अधिसूचित कर दिए है।</p>
<p>&mdash; Jairam Thakur (मोदी का परिवार) (@jairamthakurbjp) <a href="https://twitter.com/jairamthakurbjp/status/1441440865818271753?ref_src=twsrc%5Etfw">September 24, 2021</a></p></blockquote>
<p><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पार्क की अनुमानित लागत 266.95 करोड़ रुपये होगी और 160.95 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी.</p>
<p>उन्होंने कहा कि राज्य 20,000 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और लगभग 10,000 लोगों के लिए लाभकारी रोजगार की उम्मीद कर रहा था.</p>
<p>ठाकुर ने कहा कि पार्क उपभोक्ता वस्तुओं के उत्पादन के अलावा औद्योगीकरण के दूसरे चरण को बड़ा बढ़ावा देगा, उन्होंने कहा कि इसमें संयंत्र और मशीनरी आदि जैसे पूंजीगत सामान का उत्पादन करने वाले उद्योग होंगे.</p>
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		<title>राज्य में कुल लक्षित आबादी में से 65 प्रतिशत लोगों को दी जा चुकी है कोविड वैक्सीन की पहली खुराक</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/the-first-dose-of-covid-vaccine-has-been-given-to-65-percent-of-the-total-target-population-in-the-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 24 Jul 2021 14:21:26 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[कोरोना]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
		<category><![CDATA[Corona Vaccination]]></category>
		<category><![CDATA[covaccine]]></category>
		<category><![CDATA[Covid vaccine has been given to 65 percent of the total target]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: कोविड-19 के खिलाफ चुनौतीपूर्ण लड़ाई में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित किया जा रहा हैं. कोविड-19 के खिलाफ इस वैक्सीनेशन महाअभियान के प्रति लोगों में भारी उत्साह है और लोग इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लेकर अपना वैक्सीनेशन करवाने के लिए आगे आ रहे है. जिसके फलस्वरूप यह [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला: </strong>कोविड-19 के खिलाफ चुनौतीपूर्ण लड़ाई में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कोविड-19 टीकाकरण अभियान को प्रभावी तरीके से संचालित किया जा रहा हैं. कोविड-19 के खिलाफ इस वैक्सीनेशन महाअभियान के प्रति लोगों में भारी उत्साह है और लोग इसमें बढ़चढ़कर हिस्सा लेकर अपना वैक्सीनेशन करवाने के लिए आगे आ रहे है. जिसके फलस्वरूप यह पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश कोविड महामारी को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफल रहा है.</p>
<p><strong>65 प्रतिशत आबादी को पहली खुराक</strong></p>
<p>राज्य सरकार के प्रयासों व स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के बहुमूल्य योगदान से प्रदेश में अब तक टीकाकरण के लिए लक्षित कुल आबादी में से कुल 65 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया जा चुका है. स्वास्थ्य विभाग के आकड़ों के अनुसार राज्य में लगभग 55 लाख 23 हजार पात्र लोग है, जिनका कोविड-19 के खिलाफ टीकाकरण किया जाना है. प्रदेश में संचालित किए जा रहे टीकाकरण महाभियान के अन्तर्गत अब तक राज्य में 35,64,834 लोगों को केाविड-19 वैक्सीन की पहली खुराक लगाई जा चुकी है.</p>
<p><strong>11 लाख से ज्यादा को दूसरी खुराक</strong></p>
<p>राज्य सरकार द्वारा टीकाकरण के लिए प्रभावी रणनीति बना कर पात्र लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है. इसके साथ-साथ ही टीके की पहली खुराक लगा चुके लोगों को कोविड-19 टीके की दूसरी खुराक भी लगाई जा रही है, जिसके लिए भी सरकार द्वारा प्रभावी रणनीति तैयार कर टीकाकरण अभियान को आगे बढ़ाया जा रहा है. राज्य में 11,48,567 लोगों को वैक्सीन की दूसरी खुराक भी लगाई जा चुकी हैं.</p>
<p><strong>किस वर्ग में कितनी खुराक लगी</strong></p>
<p>स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित किए जा रहे कोविड-19 टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत राज्य में अब तक युवा वर्ग टीकाकरण मामले में अग्रिम स्थान पर है. प्रदेश में युवा वर्ग यानी 18 से 44 वर्ष के आयु वर्ग में 13,80,403 युवाओं का अब तक टीकाकरण कर अभियान के अन्तर्गत पहली खुराक लगाई जा चुकी हैं. 45 से 60 वर्ष के आयु वर्ग में 10,98,603 लोगों को, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में 7,70,876 लोगों का टीकाकरण किया जा चुका है. इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य देखभाल कार्यकर्ता श्रेणी में 86,669 और अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता श्रेणी में 2,28,283 लोगों को वैक्सीन की पहली खुराक 23 जुलाई, 2021 तक लगाई जा चुकी है.</p>
<p><strong>लाहौल-स्पीति जिले में शत-प्रतिशत टीकाकरण</strong></p>
<p>लाहौल-स्पीति जिला कोविड के खिलाफ टीकाकरण अभियान के अन्तर्गत शत-प्रतिशत आबादी को वैक्सीन की पहली खुराक लगा कर जहां राज्य का पहला जिला बन चुका है, वहीं प्रदेश के अन्य जिलें भी अपने निर्धारित शत-प्रतिशत लक्ष्य को हासिल करने की ओर अग्रसर है.</p>
<p>The post <a href="https://aadarshhimachal.com/the-first-dose-of-covid-vaccine-has-been-given-to-65-percent-of-the-total-target-population-in-the-state/">राज्य में कुल लक्षित आबादी में से 65 प्रतिशत लोगों को दी जा चुकी है कोविड वैक्सीन की पहली खुराक</a> appeared first on <a href="https://aadarshhimachal.com">Aadarsh Himachal</a>.</p>
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