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	<title>Umang foundation Archives - Aadarsh Himachal</title>
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		<title>रोगियों के अधिकार एवं कर्तव्य पर उमंग के वेबीनार में पद्मश्री डॉ ओमेश भारती 14 को  करेंगे व्याखान</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 13 Nov 2021 09:49:15 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा विज्ञानी पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती 14 नवंबर को उमंग फाउंडेशन के सप्ताहिक वेबीनार में रोगियों के अधिकार एवं कर्तव्य विषय पर व्याख्यान देंगे। वह प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी देंगे। वह उमंग फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य भी हैं। उमंग फाउंडेशन की प्रवक्ता और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वनस्पति शास्त्र [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा विज्ञानी पद्मश्री डॉ. ओमेश भारती 14 नवंबर को उमंग फाउंडेशन के सप्ताहिक वेबीनार में रोगियों के अधिकार एवं कर्तव्य विषय पर व्याख्यान देंगे। वह प्रतिभागियों के सवालों का जवाब भी देंगे। वह उमंग फाउंडेशन के संस्थापक सदस्य भी हैं।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन की प्रवक्ता और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से वनस्पति शास्त्र में पीएचडी कर रही अंजना ठाकुर ने बताया कि आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने के लिए हर रविवार को मानवाधिकार से जुड़े मुद्दों पर वेबीनार किया जा रहा है। इस अभियान का यह नौवां कार्यक्रम होगा।</p>
<p>उन्होंने बताया कि पद्मश्री से सम्मानित डॉक्टर ओमेश भारती अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चिकित्सा विज्ञानी हैं जिन्होंने जानवरों के काटने से होने वाली जानलेवा बीमारी रेबीज के इलाज की नई और सस्ती पद्धति विकसित कर विश्व स्वास्थ्य संगठन समेत अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को हैरान कर दिया था। उन्हें कई अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय सामानों के अलावा राष्ट्रपति ने पद्मश्री से भी अलंकृत किया। वह थैलेसीमिया, सर्पदंश और पशुओं की टीबी आदि जैसे जटिल रोगों पर अपने विश्वस्तरीय शोध के लिए जाने जाते हैं।</p>
<p>अंजना ठाकुर ने कहा कि रोगियों के अधिकार और कर्तव्य विषय इसलिए अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि आमतौर पर किसी मरीज को उसके अधिकार पता ही नहीं होते। इससे रोगियों को बहुत नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि इस साप्ताहिक वेबिनार में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी और प्रदेश के अनेक महाविद्यालयों के अलावा दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं छात्र भी शामिल होते हैं।</p>
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		<title>सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट भी आरटीआई कानून के दायरे में: डॉ. संघाईक</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/supreme-court-and-high-court-also-under-the-purview-of-rti-act-dr-sanghaiq/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 18 Oct 2021 14:39:38 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर नहीं हैं. कुछ अपवादों को छोड़कर आम नागरिक के आवेदन पर वे सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं. सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है. यह जानकारी प्रदेश के वरिष्ठ आरटीआई विशेषज्ञ और शिमला के राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय तक सूचना के अधिकार के दायरे से बाहर नहीं हैं. कुछ अपवादों को छोड़कर आम नागरिक के आवेदन पर वे सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए बाध्य हैं. सूचना का अधिकार एक मौलिक अधिकार है.</p>
<p>यह जानकारी प्रदेश के वरिष्ठ आरटीआई विशेषज्ञ और शिमला के राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गोपाल कृष्ण संघाईक ने उमंग फाउंडेशन के वेबिनार &#8216;आरटीआई कानून और उसका उपयोग&#8217; में दी. इसमें हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, विभिन्न महाविद्यालयों के  विद्यार्थियों और एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी के एनसीसी के कैडेटों के अलावा अनेक शिक्षकों ने भी हिस्सा लिया.</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी और कार्यक्रम के संयोजक संजीव शर्मा ने बताया कि फाउंडेशन आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में मानवाधिकारों पर  जागरूकता के लिए हर रविवार को एक वेबीनार आयोजित करता है. इस कड़ी में यह पांचवा कार्यक्रम था.</p>
<p>डॉक्टर गोपाल कृष्ण संघाईक ने बताया आरटीआई कानून के तहत भारत का कोई भी नागरिक साधारण कागज पर संबंधित विभाग के जन सूचना अधिकारी को पत्र लिखकर ₹10 का पोस्टल आर्डर लगा कर सूचनाएं मांग सकता है. इसमें किसी विशेष फॉर्म या वकील की सहायता नहीं चाहिए होती है. हिमाचल में बीपीएल परिवारों के लिए सूचना बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराई जाती है. अन्य लोगों से प्रति पेज 2 रुपए की दर से शुल्क लिया जाता है.</p>
<p>कानून के तहत 30 दिन के भीतर सूचनाएं उपलब्ध कराना जनसूचना अधिकारी का दायित्व है. यदि देरी से सूचना उपलब्ध कराई जाती है तो वह निशुल्क होगी. सूचना न देने या अधूरी अथवा गलत सूचना देने पर प्रथम अपीलीय प्राधिकरण में अपील की जा सकती है.</p>
<p>राज्य के मुख्य सूचना आयुक्त को इसकी शिकायत भी की जा सकती है. दोषी पाए जाने पर जन सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाया जाता है जो उसे स्वयं भरना पड़ता है. केंद्र सरकार के कार्यालयों संबंधी शिकायतें केंद्रीय सूचना आयोग के पास भेजी जानी चाहिए.</p>
<p>उन्होंने बताया की सूचना के दायरे में सिर्फ वही दस्तावेज आते हैं जो रिकॉर्ड में होते हैं. दस्तावेजों का मुआयना भी करने का प्रावधान है. इसके अलावा किसी भी सरकारी निर्माण कार्य में उपयोग की जाने वाली सामग्री के सैंपल भी देखे और लिए जा सकते हैं.</p>
<p>उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय समेत कोई भी सरकारी विभाग अथवा सरकार से सहायता लेने वाली निजी संस्थान एवं स्वयंसेवी संगठन भी पब्लिक अथॉरिटी के तौर पर आरटीआई के दायरे में आते हैं.</p>
<p>उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ द्वारा एक दशक पूर्व दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के संदर्भ में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संपत्तियों और उनकी नियुक्ति से संबंधित जानकारियां भी सूचना के अधिकार के दायरे में आती हैं.</p>
<p>उन्होंने बताया कि अदालतों से उनके न्यायिक कार्यो और भविष्य में दिए जाने वाले फैसलों आदि से संबंधित जानकारियां इस कानून के दायरे में नहीं आती हैं. उन्होंने कई विभागों के कुछ चुनिंदा मामलों के बारे में सूचनाएं न देने के प्रावधान के बारे में भी बताया.</p>
<p>उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री कार्यालय से भी सूचनाएं प्राप्त करने का अधिकार इस कानून में दिया गया है.</p>
<p>फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव ने कहा कि इन कार्यक्रमों का उददेश्य युवाओं को जागरूक करके समाज के सबसे कमजोर वर्गों के लिए काम करने को प्रेरित करना है. कार्यक्रम के संचालन में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर श्वेता शर्मा, अभिषेक भागड़ा, सवीना जहाँ, मुकेश कुमार और बबीता ठाकुर ने सहयोग किया.</p>
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		<title>मानवाधिकार संरक्षण पर उमंग फाउंडेशन के कार्यक्रमों की श्रंखला 19 सितम्बर से</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/series-of-programs-of-umang-foundation-on-human-rights-protection-from-19th-september/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 19 Sep 2021 09:24:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला]]></category>
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		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला : आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में युवाओं में मानवाधिकार संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उमंग फाउंडेशन प्रत्येक रविवार को ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करेगा. इसकी पहली कड़ी में 19 सितंबर को &#8220;बेसहारा मनोरोगियों को बचाने में समाज की भूमिका&#8221; पर कार्यक्रम होगा. उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं जागरूकता कार्यक्रम के संयोजक [&#8230;]</p>
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										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला :</strong> आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष में युवाओं में मानवाधिकार संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए उमंग फाउंडेशन प्रत्येक रविवार को ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करेगा. इसकी पहली कड़ी में 19 सितंबर को &#8220;बेसहारा मनोरोगियों को बचाने में समाज की भूमिका&#8221; पर कार्यक्रम होगा.</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी एवं जागरूकता कार्यक्रम के संयोजक विनोद योगाचार्य एवं संजीव शर्मा ने बताया कि गूगल मीट और फेसबुक लाइव के माध्यम से हर रविवार को शाम 7 से 8 के मध्य यह कार्यक्रम प्रसारित होगा.</p>
<p>उन्होंने कहा कि पहला कार्यक्रम सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मनोरोगियों को समाज के सहयोग रेस्क्यू कराने से संबंधित है. इसके कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर राज्य मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव प्रकाश डालेंगे. वे प्रश्नोत्तर कार्यक्रम में युवाओं की शंकाओं के  समाधान भी करेंगे.</p>
<p>उमंग फाउंडेशन बेसहारा महिलाओं, बेघर बुजुर्गों अनाथ बच्चों, दिव्यांगजनों, गंभीर मरीजों, और ऐसे ही अन्य दुर्बल वर्गों के मानवाधिकारों पर कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को समाज सेवा के लिए प्रेरित करेगा.</p>
<p>19 सितंबर को शाम 7 बजे बेसहारा मनोरोगियों को बचाने से संबंधित कार्यक्रम में उमंग फाउंडेशन शिमला के फेसबुक पेज के अलावा गूगल मीट के इस लिंक http://meet.google.com/abp-ppmn-vgf के जरिए भी शामिल हुआ जा सकता है.</p>
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		<item>
		<title>सराहनीय : उमंग फाउंडेशन शिक्षक दिवस के अवसर पर क्यार कोटि में 22वां रक्तदान शिविर का करेगा आयोजन</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/umang-foundation-will-organize-22nd-blood-donation-camp-on-the-occasion-of-teachers-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Devinder Singh]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 02 Sep 2021 07:54:24 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Health]]></category>
		<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[Blood Donation Camp]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[Kayar koti]]></category>
		<category><![CDATA[Shimla]]></category>
		<category><![CDATA[Umang foundation]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी विनोद योगाचार्य ने बताया कि राजकीय उच्च पाठशाला क्यार कोटी में हो रहे रक्तदान शिविर में स्थानीय विधायक राणा अनिरुद्ध सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय ग्राम पंचायत चैड़ी के प्रधान भुवनेश्वर शर्मा करेंगे । विनोद योगाचार्य ने कहा कि उमंग फाउंडेशन ने कोरोना काल की विकट परिस्थितियों [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला: </strong>उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी विनोद योगाचार्य ने बताया कि राजकीय उच्च पाठशाला क्यार कोटी में हो रहे रक्तदान शिविर में स्थानीय विधायक राणा अनिरुद्ध सिंह मुख्य अतिथि होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्थानीय ग्राम पंचायत चैड़ी के प्रधान भुवनेश्वर शर्मा करेंगे ।</p>
<p>विनोद योगाचार्य ने कहा कि उमंग फाउंडेशन ने कोरोना काल की विकट परिस्थितियों में शिमला के अस्पतालों में मरीजों के लिए अभी तक 21 रक्तदान शिविर लगाए हैं। यह उमंग का 22 वां रक्तदान शिविर हैं ।</p>
<p>उमंग फाउंडेशन ने लॉक डाउन में सैकड़ों प्रवासियों व गरीब मजदूरों को राशन, सैनिट्री नैपकिन व बच्चों को चॉकलेट बाँटने से लेकर सर्दियों में सड़कों पर सोने वाले लोगों को कम्बल बांटने का अभियान चलाया। इस बरसात उमंग फाउंडेशन ने शिमला ग्रामीण में 800 पौधे ग्रामीण सड़कों के किनारे लगाए और पर्यावरण संरक्षण व प्लास्टिक मुक्त हिमाचल के लिए भी लोगों को जागरूक किया।</p>
<p>&nbsp;</p>
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		<item>
		<title>उमंग फाउंडेशन दे रहा है बेसहारा मनोरोगियों को सहारा</title>
		<link>https://aadarshhimachal.com/umang-foundation-is-giving-support-to-destitute-psychopaths/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Aadarsh Himachal]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Aug 2021 11:59:02 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[HIMACHAL]]></category>
		<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[himachal Pradesh news]]></category>
		<category><![CDATA[Umang foundation]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>शिमला: बेतरतीब बढ़ी हुई गंदी दाढ़ी व बाल, बदबूदार कपड़े, बारिश में नंगे पैर में दर-दर की ठोकरें गुमनाम शख़्स का कसूर सिर्फ यह था कि उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ है. यह भी नहीं पता कि वह कहां से भटक कर ठियोग के पास जायस घाटी पहुंच गया. उमंग फाउंडेशन के प्रयासों से उसे [&#8230;]</p>
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]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p><strong>शिमला:</strong> बेतरतीब बढ़ी हुई गंदी दाढ़ी व बाल, बदबूदार कपड़े, बारिश में नंगे पैर में दर-दर की ठोकरें गुमनाम शख़्स का कसूर सिर्फ यह था कि उसका मानसिक संतुलन बिगड़ा हुआ है. यह भी नहीं पता कि वह कहां से भटक कर ठियोग के पास जायस घाटी पहुंच गया.</p>
<p>उमंग फाउंडेशन के प्रयासों से उसे पुलिस ने रेस्क्यू करके इंदिरा गांधी मेडिकल अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग में दाखिल कराया. डॉक्टरों का कहना है कि उसकी याददाश्त वापस आने की उम्मीद है. कुछ ही दिनों में उसे शिमला के राज्य मनोचिकित्सा अस्पताल में भेज दिया जाएगा.</p>
<p>जायस घाटी के आशु चमन ने 2 दिन पहले उसे दयनीय हालात में बारिश में भटकते हुए देखा. उन्होंने इंटरनेट से स्टेट मेंटल हेल्थ अथॉरिटी के सदस्य और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव का नंबर ढूंढ कर उन्हें फोन किया और उस व्यक्ति को बचाने के लिए कहा. आशु ने अपना सामाजिक दायित्व बखूबी निभाया.</p>
<p>प्रो. अजय श्रीवास्तव ने बताया कि मेंटल हेल्थ एक्ट 2017 में सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मनोरोगियों को रेस्क्यू करके अस्पताल में भर्ती कराने का प्रावधान है. कानून ने यह दायित्व पुलिस को दिया है. पुलिस ऐसे मनोरोगी को रेस्क्यू करके जुडिशल मजिस्ट्रेट से इलाज के लिए आदेश प्राप्त करती है. फिर उस का मुफ्त इलाज किया जाता है. प्रदेश हाईकोर्ट ने भी इस बारे में स्पष्ट आदेश किए थे कि पुलिस इस कानून का सख्ती से पालन करे.</p>
<p>ठियोग के डीएसपी लखबीर सिंह को फोन कर अजय श्रीवास्तव ने उस गुमनाम मनोरोगी को रेस्क्यू करने का अनुरोध किया. उन्होंने तुरंत कॉन्स्टेबल गुलाब सिंह बिजटा को मौके पर भेजा. पुलिस के पहुंचने तक आशु चमन ने उस मनोरोगी को भगाने नहीं दिया. ठियोग पुलिस की संवेदनशीलता से एक बेसहारा मनोरोगी को बचा लिया गया.<br />
आईजीएमसी अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग के अध्यक्ष डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि इस मनोरोगी के लक्षण देखकर लगता है कि इलाज के बाद इसकी याददाश्त वापस आ सकती है. उन्होंने कहा कि असली संतोष तो तब मिलेगा जब यह अपने घर वापस चला जाएगा.</p>
<p>उल्लेखनीय है कि उमंग फाउंडेशन द्वारा बेसहारा मनोरोगियों को बचाने का जनांदोलन चलाने के बाद आम नागरिकों की सजगता से पिछले कुछ वर्षों में 300 से अधिक मनोरोगियों को रेस्क्यू कराया जा चुका है. इनमें से अनेक याददाश्त वापस आने के बाद अपने घरों को भी भेजे जा चुके हैं. किसी भी मनोरोगी को बेसहारा भटकता देख कोई भी व्यक्ति पुलिस को सूचना देकर उसे रेस्क्यू करवा सकता है.</p>
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