मानव भारती यूनिवर्सिटी के फर्जीवाड़े की जांच सीबीआई को सौंपने से क्यों कतरा रही है सरकार – राणा

सुजानपुर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा
सुजानपुर से कांग्रेस विधायक राजेंद्र राणा

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। 6 लाख से ज्यादा फर्जी डिग्रीयों को बेचने के आरोपों से कुख्यात हुई मानव भारती यूनिवर्सिटी की मान्यता भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की वकालत करने वाली सरकार ने अभी जारी रखी है। यह बात राज्य कांग्रेस उपाध्यक्ष एवं विधायक राजेंद्र राणा ने यहां जारी प्रेस बयान में कही है। राणा ने कहा कि अब यह साबित हो चुका है कि सलाखों के पीछे चल रहे इस यूनिवर्सिटी के सरगना ने 6 लाख से ज्यादा फर्जी डिग्रीयां देश और विदेश में बेची हैं।

इन डिग्रीयों में एलएलबी की हजारों डिग्रीयों का खुलासा हुआ है, जिनके आधार पर कई लोग न्यायालयों में प्रेक्टिस कर रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक यह सरगना एक डिग्री को डेढ़ से तीन लाख रुपए में बेचता था। हैरानी यह है कि ऐसी ही फर्जी डिग्री के आधार पर यह शिक्षा माफिया सरगना जोधपुर में वकील के तौर पर भी रजिस्ट्रड है। इस यूनिवर्सिटी में जांच के नाम पर चले खेल में नाकाम सरकार के कई अधिकारियों ने भी करोड़ों के बारे न्यारे किए हैं। राणा ने कहा कि फर्जी डिग्रीयां बेच कर अकूत संपत्ति के स्वामी बने माफिया सरगना के खाते से 9 मार्च को 50 लाख रुपया, 12 जून को 1 करोड़ रुपया व 23 जून को 40 लाख रुपया निकला है। जिसके सीधे तौर पर जांच में लगे सिस्टम की तिजोरियों को भरने के आरोप लगे हैं। जानकारी यह भी है कि देश के कई राज्यों में फर्जी डिग्रीयां बेचने का जाल इस शिक्षा माफिया सरगना द्वारा दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक समेत कई राज्यों में फैलाया था, लेकिन ऐसे में अब यह सवाल खड़ा होता है कि सरकार इस मामले की सीबीआई से जांच करवाने की मांग से क्यों कतरा रही है। उन्होंने कहा कि बरसों तक फर्जी डिग्रीयों का खेल इस प्रदेश में बेखौफ चलता रहा।
      यह फर्जी डिग्रीयां देश, प्रदेश और यहां तक कि विदेशों में भी बेची जाती रही। हालांकि अब यह भ्रष्टाचार का मामला जांच की जद में है, लेकिन अब इस जांच में इसको कौन संरक्षण दे रहा है। किस-किस ने जांच के नाम पर करोड़ों के इस भ्रष्टाचार जांच में करोड़ों के बारे न्यारे किए हैं, इसका भी खुलासा होना जरुरी है। राणा ने कहा कि भ्रष्टाचार के इस जड़ को संरक्षित करने में 2009 में किसका हाथ रहा है, तत्कालीन सरकार के मुखिया का वह कौन अधिकारी था? जिसने सरकार के मुखिया तक मध्यस्थता करते हुए इस शिक्षा माफिया को सत्ता संरक्षण दिलवाया। इसकी भी जांच अब बीजेपी सरकार करवाए, क्योंकि तब भी प्रदेश में बीजेपी की सरकार थी और अब भी प्रदेश में बीजेपी की सरकार है।
    इसलिए असली गुनहागारों को बेनकाब करना जरुरी है। राणा ने कहा कि सरकार की खामोशी बता रही है कि सरकार न केवल इस गंभीर भ्रष्टाचार के मामले में भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दे रही है बल्कि इस मामले में अपने लोगों का पर्दाफाश होने के खौफ में बगलें झांक रही हैं। राणा ने कहा कि जब-जब प्रदेश में बीजेपी की सरकार सत्तासीन हुई है, तब-तब भ्रष्टाचार का बोल बाला बढ़ा है। ऐसे में हैरत इस बात की है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करने वाली सरकार इस करोड़ों के भ्रष्टाचार मामले पर चुप्पी साधे हुए है।
   उन्होंने कहा कि सरकार को बताना होगा कि सरकार इस मामलें क्यों सीबीआई की जांच की मांग नहीं कर रही है। वह कौन लोग हैं, जिन्होंने भ्रष्टाचार की इस फैक्टरी को चलाने में सरकारी सहयोग व संरक्षण दिया और जांच के नाम पर किस-किस अधिकारी ने अपनी तिजोरियां लबालब भरी हैं। राणा ने कहा कि अगर वह अधिकारी सरकार के सिस्टम में है तो सरकार उनके नाम जगजाहिर करे। अगर वह सेवानिवृत हो चुके हैं तो सरकार उनके खातों व संपत्ति की जांच करके उन्हें भी उनके अंजाम तक पहुंचाए। राणा ने कहा कि कहीं ऐसा तो नहीं कि जांच के नाम पर हाथ रंगने वाले अधिकारियों की ओर से भ्रष्टाचार का मेवा सरकार तक भी पहुंचा हो। जिसका शक और संदेह लगातार पुख्ता हो रहा है।