आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला| केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI), शिमला ने बुधवार को अपना 77वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली के उपनिदेशक डॉ. संजय कुमार सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, इस कार्यक्रम में शिमला नगर निगम के मेयर सुरेन्द्र चौहान और मशरूम अनुसंधान निदेशालय, सोलन के निदेशक डॉ. वी.पी. शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने समारोह की अध्यक्षता करते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया और संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला है उन्होंने बताया कि संस्थान ने अब तक भारत की विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के लिए कुल 76 आलू किस्में विकसित की हैं, और हाल ही में चार नई किस्में भी विकसित कर ली गई हैं, जिन्हें सरकार की अधिसूचना के बाद आम किसानों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। डॉ. सिंह ने आलू उत्पादन से जुड़ी भंडारण, प्रसंस्करण, संसाधन प्रबंधन, फसल सुरक्षा और आलू आधारित फसल प्रणाली के क्षेत्र में संस्थान द्वारा विकसित कृषि तकनीकों की भी जानकारी दी। इस दौरान मुख्य अतिथि डॉ. संजय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि पहले आलू की खेती केवल ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित थी, लेकिन CPRI के अनुसंधानों के चलते अब यह फसल देश के लगभग हर हिस्से में उगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है, जो इस संस्थान की नवाचार क्षमता का प्रमाण है।
इस दौरान मेयर सुरेन्द्र चौहान ने संस्थान को शिमला की शान बताते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी अलग पहचान रखता है। इस अवसर पर संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. तनुजा बक्सेठ, तकनीकी वर्ग से श्रीमती कुसुम सिंह, प्रशासनिक वर्ग से गुरुजीत सिंह और सहायक वर्ग से रणवीर सिंह को ‘बेस्ट वर्कर अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया। साथ ही, राज्य के 27 उत्कृष्ट किसानों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। फील्ड इकाई कुफरी फागू के प्रभारी डॉ. संजीव शर्मा, वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी के. शर्मा, पादप सुरक्षा प्रमुख डॉ. बृजेश सिंह और डॉ. आरती बैरवा को पीसीएन क्वारंटाइन मुक्त बीज उत्पादन के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान किए गए।
इस कार्यक्रम के दौरान शिमला के स्कूली बच्चों को आलू पर किए जा रहे अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी गई तथा संस्थान की प्रयोगशालाओं का भ्रमण भी करवाया गया। संस्थान के कृषि अभियंताओं द्वारा विकसित यंत्रों का प्रदर्शन भी किया गया और इन्हें देशभर के किसानों के लिए जारी किया गया। इसके अतिरिक्त, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों द्वारा कृषि प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा।