आदर्श हिमाचल ब्यूरों
मंडी| हिमाचल प्रदेश की देवभूमि में स्थित मंडी का माँ त्रोकड़ा धाम आस्था, भक्ति और चमत्कारों का जीवंत केंद्र बनकर उभरा है। मंडी में कोटली मार्ग पर तुंगल घाटी की सुरम्य वादियों में स्थित यह पावन स्थल मां त्रोकड़ावाली के दिव्य प्राकट्य, अद्भुत महिमा और भक्तों की अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। यह धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, साहस और तपस्या की जीवंत पाठशाला है। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु मां की छत्रछाया में अलौकिक ऊर्जा और शांति का अनुभव करता है।
प्राकट्य की पौराणिक कथा
यहां की स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सैकड़ों वर्ष पूर्व एक साधक ने इस स्थान पर कठोर तपस्या की थी। मां अंबिका माता, दुर्गा रूप में प्रसन्न होकर प्रकट हुईं और वरदान दिया कि यह भूमि भविष्य में सिद्धपीठ के रूप में विख्यात होगी और समय के साथ यह स्थान मां त्रोकड़ावाली के धाम के रूप में स्थापित हुआ। यह गांव साई, तहसील कोटली निवासी लाभ सिंह धरवाल की भक्ति इस धाम की स्थापना में केंद्रीय रही है। 1960 के दशक में जब त्रोकड़ा नाला में डंगे का निर्माण हो रहा था, तब एक भारी पत्थर के दो भाग होते ही मां दुर्गा की भव्य मूर्ति प्रकट हुई और यही मूर्ति आज मंदिर में स्थापित है। लाभ सिंह जी ने मां की परीक्षा लेने हेतु खुले आसमान में वर्षा की प्रार्थना की थी, जो कुछ ही देर में पूरी हुई और यह घटना भक्तों की आस्था का बड़ा आधार बनी है।
त्रोकड़ा धाम की धार्मिक विशेषताएं
यहां संतान प्राप्ति, पितृ दोष निवारण, भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति और नवग्रह शांति के लिए अनुष्ठान किए जाते हैं। नशीले पदार्थों का पूर्णतः निषेध है और बलिप्रथा की जगह केवल नारियल चढ़ाया जाता है। इस मंदिर में हस्तलिखित रजिस्टर में चमत्कारों और भक्तों की मनोकामनाओं के पूर्ण होने का विस्तृत विवरण दिनांक सहित दर्ज किया जाता है। इस मंदिर के निर्माण में अनेक आर्थिक और प्रशासनिक कठिनाइयाँ आईं, परंतु लाभ सिंह जी ने कभी हार नहीं मानी। मां के स्वप्नदर्शन और भक्तों के सहयोग से आज यह धाम एक सुव्यवस्थित, पवित्र तीर्थस्थल के रूप में प्रतिष्ठित है। हर वर्ष भाद्रपद कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को यहां जागरण, देववाणी, भंडारा और भजन-कीर्तन का भव्य आयोजन होता है।
श्रद्धा का राष्ट्रीय केंद्र
आज त्रोकड़ा धाम न केवल हिमाचल, बल्कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है। इस मंदिर में प्रवेश करते ही भक्त एक अद्भुत शांति और मां की दिव्य उपस्थिति को महसूस करते हैं। यह धाम न केवल मां की महिमा का प्रतीक है, बल्कि भक्त और भगवान के सच्चे रिश्ते की जीवंत मिसाल भी है। श्रद्धा और विश्वास से परिपूर्ण यह स्थल आज भी हर दिन किसी न किसी चमत्कार की गवाही देता है।