कृषि को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को दे रही बढ़ावा – कृषि मंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला| कृषि एवं पशुपालन मंत्री प्रो. चंद्र कुमार ने आज शिमला में भारतीय आलू अनुसंधान संस्थान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कृषि रोड मैप और रबी एक्शन प्लान को किसानों के लिए लाभकारी खेती की नई दिशा देने वाली पहल बताया है। इस कार्यशाला का आयोजन राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, राज्य सरकार के विभागों और आईसीएआर संस्थानों के सहयोग से हुआ। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के लिए आगामी पांच वर्षों (2025-2030) का कृषि रोडमैप तैयार करना था, जो प्रदेश की प्राकृतिक खेती में अग्रणी भूमिका, कृषि-जलवायु विविधता, और राष्ट्रीय अभियानों के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर केंद्रित रहेगा।

प्राकृतिक खेती में मवेशियों की अहम भूमिका
इस दौरान कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश प्राकृतिक खेती की दिशा में अग्रसर है, लेकिन इसके लिए मवेशियों की महत्ता को नकारा नहीं जा सकता। प्राकृतिक खेती मवेशियों पर आधारित है, और इसके लिए रिमोट सेंसिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।

किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने के लिए ऐतिहासिक कदम
प्रो. चंद्र कुमार ने बताया कि किसानों की आर्थिकी को सुदृढ़ बनाने के लिए दूध की कीमतों में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। इसके अतिरिक्त, ढगवार में 250 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का निर्माण किया जा रहा है, जिसका संचालन डेयरी डेवलपमेंट अथॉरिटी करेगी, इस प्लांट में उत्पादित दूध पर ‘हिमाचल’ ट्रेडमार्क होगा।

कार्यशाला के सत्र और विशेषज्ञों की भागीदारी
इस कार्यशाला में तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, पहले सत्र में कृषि रोड मैप, प्राथमिकताएँ और कार्य नीतियों पर चर्चा हुई, जिसमें पालमपुर और नौणी बागवानी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने राज्य की कृषि चुनौतियों और अवसरों पर प्रस्तुतिकरण दिया। दूसरे सत्र में आईसीएआर से जुड़े अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिकों ने कृषि रोड मैप के क्रियान्वयन और अनुसंधान-आधारित रणनीतियों पर अपने विचार रखे। तीसरे सत्र में राज्य सरकार के दृष्टिकोण से कृषि रोड मैप पर चर्चा की गई, जिसमें कृषि विभाग, बागवानी विभाग, प्राकृतिक खेती और पशुपालन विभाग के निदेशकों ने भाग लिया। इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालयों, विभिन्न विभागों और आईसीएआर संस्थानों के अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।