आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला। भाजपा के राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश महामंत्री डॉ. सिकंदर कुमार ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह सर्वेक्षण देश की आर्थिक मजबूती, संरचनात्मक बदलाव और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का स्पष्ट प्रमाण है। उन्होंने कहा कि आज जब पूरी दुनिया भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक विखंडन और वित्तीय अस्थिरता जैसी चुनौतियों से गुजर रही है, ऐसे समय में भारत ने लगातार चौथे वर्ष दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखी है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत अनुमानित है और वर्ष 2026-27 में भी यह 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान है। यह इस बात का संकेत है कि भारत की अर्थव्यवस्था केवल तात्कालिक सुधार नहीं कर रही, बल्कि दीर्घकालिक संरचनात्मक मजबूती और स्थायी विकास की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति का आधार संतुलित है, जिसमें निजी उपभोग में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और यह जीडीपी का 61.5 प्रतिशत हिस्सा बना हुआ है, वहीं निवेश अर्थात सकल स्थायी पूंजी निर्माण में 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह दर्शाता है कि भारत में घरेलू मांग और निवेश दोनों मजबूत स्थिति में हैं।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि इस सर्वेक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि अप्रैल से दिसंबर 2025 के दौरान औसत उपभोक्ता मुद्रास्फीति मात्र 1.7 प्रतिशत रही, जो अब तक के सबसे निचले स्तरों में से एक है। इससे आम नागरिकों की क्रय शक्ति मजबूत हुई है और अर्थव्यवस्था में स्थिरता का वातावरण बना है। उन्होंने बताया कि सरकार के वित्तीय अनुशासन का परिणाम है कि राजकोषीय घाटा भी लगातार घट रहा है और वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 4.4 प्रतिशत तक आने का अनुमान है। कर संग्रह में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जहां जीएसटी संग्रह अप्रैल-दिसंबर 2025 में 17.4 लाख करोड़ रुपये रहा। आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है, जो अर्थव्यवस्था के औपचारिकरण और बेहतर अनुपालन को दर्शाती है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि भारत का बैंकिंग क्षेत्र भी आज ऐतिहासिक रूप से मजबूत स्थिति में है। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां घटकर 2.2 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए 0.5 प्रतिशत तक आ गया है, जो बीते कई दशकों का सबसे बेहतर स्तर है। वहीं बैंक ऋण वृद्धि भी 14.5 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जिससे उद्योग, व्यापार और आम नागरिकों को आर्थिक गतिविधियों के विस्तार में सहायता मिल रही है। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन के क्षेत्र में भी सरकार ने अभूतपूर्व कार्य किया है। देश में अब तक 55 करोड़ से अधिक जनधन खाते खोले जा चुके हैं और निवेशकों की संख्या 12 करोड़ पार कर गई है, जिनमें महिलाओं की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सेवा क्षेत्र आज भारत की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा इंजन बन चुका है, जिसका योगदान सकल मूल्य वर्धन में 56.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सेवाओं की वृद्धि दर लगभग 9 प्रतिशत रही और भारत आज विश्व का सातवां सबसे बड़ा सेवा निर्यातक बन गया है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में भी तेजी आई है। विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में 9.13 प्रतिशत रही। सरकार की उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना ने 14 क्षेत्रों में ₹2 लाख करोड़ से अधिक निवेश आकर्षित किया है और 12.6 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कृषि क्षेत्र में परिवर्तन को भी उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि बागवानी उत्पादन पहली बार खाद्यान्न उत्पादन से अधिक हो गया है। यह कृषि क्षेत्र के विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम है। उन्होंने महिला श्रम शक्ति भागीदारी में आई ऐतिहासिक वृद्धि पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला श्रम भागीदारी दर 23.3 प्रतिशत से बढ़कर 41.7 प्रतिशत हो गई है, जो महिला सशक्तिकरण और आर्थिक समावेशन का मजबूत संकेत है। कुल बेरोजगारी दर भी घटकर 4.8 प्रतिशत तक आ गई है, जो रोजगार सृजन की दिशा में सकारात्मक परिणाम है।
उन्होंने कहा कि देश के बुनियादी ढांचे में पिछले वर्षों में अभूतपूर्व विकास हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में 60 प्रतिशत वृद्धि हुई है, एयरपोर्ट्स की संख्या 74 से बढ़कर 164 हो गई है और रेलवे विद्युतीकरण लगभग पूर्ण स्तर तक पहुंच गया है। नवीकरणीय ऊर्जा में भी भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है और कुल स्थापित बिजली क्षमता में अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत हो चुकी है। भारत आज अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सामाजिक क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। बहुआयामी गरीबी दर में भारी गिरावट आई है और आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा मिली है। शिक्षा के क्षेत्र में भी नामांकन दर में वृद्धि हुई है, जिससे मानव संसाधन निर्माण को नई दिशा मिली है।
डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 यह स्पष्ट करता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है। मजबूत आर्थिक वृद्धि, ऐतिहासिक कम मुद्रास्फीति, वित्तीय अनुशासन, बैंकिंग सुधार, रोजगार विस्तार, कृषि विविधीकरण, महिला सशक्तिकरण, आधारभूत संरचना विकास और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाली चुनौती इन उपलब्धियों को और अधिक समावेशी, समान और टिकाऊ विकास में परिवर्तित करना है, ताकि भारत का प्रत्येक नागरिक इस प्रगति का लाभ उठा सके।











