सांस्कृतिक बदलाव के दौर में भारत, परंपराओं से दूरी पर चिंता

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । भारतवर्ष, जो अपनी सनातन परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों के लिए विश्वभर में जाना जाता है, आज सामाजिक और सांस्कृतिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। जिला सोलन के अर्की क्षेत्र में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान भगतराम नड्डा ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि “सनातन धर्म” का जीवंत प्रतीक है, जहां सम्मान, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों को सर्वोच्च स्थान दिया जाता है।

आचार्य जी ने विशेष रूप से इस बात पर चिंता जताई कि लोग अपनी जड़ों और परंपराओं से दूर होते जा रहे हैं। बेहतर अवसरों की तलाश में हिमाचल से बाहर बसने की बढ़ती प्रवृत्ति न केवल सामाजिक ढांचे को प्रभावित कर रही है, बल्कि सांस्कृतिक पहचान को भी कमजोर कर रही है।

 

उन्होंने भारत की आध्यात्मिक धरोहर—पवित्र नदियों, ज्योतिर्लिंगों और चार धाम—का उल्लेख करते हुए कहा कि यही विरासत देश को “देवभूमि” बनाती है।

 

साथ ही उन्होंने समाज में बढ़ते पाखंड और नैतिक गिरावट पर भी चिंता जताई और लोगों से अपनी जड़ों को पहचानने तथा परंपराओं को सहेजने की अपील की।
उनका संदेश स्पष्ट था—आधुनिकता के साथ संतुलन बनाते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना ही समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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