आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला। हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व का विषय है कि युवा लेखक आयुष शर्मा का चयन “प्रधानमंत्री युवा लेखक परामर्श योजना” के अंतर्गत हुआ है। इस योजना के तहत वे राज्य की प्रसिद्ध लोकगायिका स्वर्गीय गम्भरी देवी के जीवन, पहाड़ी परंपराओं, लोकजीवन और सांस्कृतिक योगदान पर शोध कार्य करेंगे। इस शोध कार्य को राष्ट्रीय बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित किया जाएगा।
इस योजना के अंतर्गत देशभर से 30 वर्ष से कम आयु के 43 लेखकों का चयन किया गया है, जिनमें आयुष शर्मा हिमाचल प्रदेश से चुने जाने वाले पहले लेखक हैं।
आयुष शर्मा मूल रूप से जिला बिलासपुर के चल्हेली गांव से संबंध रखते हैं और वर्तमान में जयपुर की मनिपाल यूनिवर्सिटी से बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं।
उनके पिता ज्ञान चन्द हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत हैं, जबकि उनकी माता अनिता देवी एक कुशल गृहिणी हैं।यह शोध कार्य आयुष शर्मा, डॉ. प्रो. कमला कौशिक के मार्गदर्शन में करेंगे। डॉ. कमला कौशिक दिल्ली विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं और मूल रूप से जिला मंडी के गोहर क्षेत्र से संबंध रखती हैं। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोक संगीत पर गहन शोध कार्य किया है।
लोकगायिका गम्भरी देवी ने पहाड़ी लोकसंगीत को नई पहचान दिलाते हुए लोकसंस्कृति को सशक्त स्वर प्रदान किया। बिलासपुर क्षेत्र से संबंध रखने वाली इस महान कलाकार ने अपनी मधुर और प्रभावशाली आवाज के माध्यम से प्रदेश की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाया। उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें वर्ष 2001 में हिमाचल अकादमी ऑफ आर्ट्स का अचीवमेंट अवॉर्ड तथा वर्ष 2011 में संगीत नाटक अकादमी द्वारा प्रतिष्ठित टैगोर अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उनका प्रसिद्ध लोकगीत “खाणा पीणा नंद लेणी ओ गंभरिए…” आज भी लोगों के दिलों में विशेष स्थान रखता है। गम्भरी देवी का जन्म वर्ष 1922 में जिला बिलासपुर के बंदला गांव में हुआ था तथा 8 जनवरी 2013 को उन्होंने इस संसार को अलविदा कहा।#AyushSharma #YuvaLekhakYojana #HimachalPradesh #GambhariDevi #FolkMusic #HimachaliCulture #NBTHIndia #YoungAuthor #ResearchWork #PahadiSanskriti #Bilaspur #HimachalNews











