इन-हैंड सैलरी और CTC विवाद पर कोर्ट ने साफ की स्थिति, कर्मचारियों के वेतन को लेकर दिया अहम स्पष्टीकरण

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य में 108 और 102 एम्बुलेंस सेवाओं में कार्यरत कर्मचारियों के वेतन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम व्यवस्था दी है. कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पूर्व में दिए गए आदेश के अनुसार, कर्मचारियों को ₹15,000 प्रति माह ‘टेक होम सैलरी’ (यानी हाथ में मिलने वाला वेतन) मिलनी चाहिए, न कि ‘कॉस्ट टू कंपनी’ (CTC) के आधार पर वेतन, जिसमें कटौती के बाद राशि कम हो जाती है.।

 

यह मामला एम्बुलेंस कर्मचारी यूनियन द्वारा दायर एक निष्पादन याचिका (Execution Petition) से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट के 2020 के एक आदेश को लागू करने की मांग की गई थी.

मामला वर्ष 2017 में कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान (Court on its own motion) लेने से शुरू हुआ था. इस पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट ने 08.01.2020 को आदेश जारी किया था (जिसे बाद में संशोधित किया गया), जिसमें एम्बुलेंस सेवा संचालित करने वाली कंपनी (GVK-EMRI) को निर्देश दिया गया था कि वह अपने पायलटों (चालकों) और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (EMTs) का मासिक वेतन बढ़ाकर ₹15,000 करे. यह बढ़ी हुई सैलरी 20.01.2020 से प्रभावी होनी थी.
विवाद की जड़: ‘हाथ में वेतन’ बनाम ‘CTC’
कर्मचारी यूनियन ने अदालत में दलील दी कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद उन्हें ₹15,000 हाथ में नहीं मिल रहे हैं।

 

 

उन्होंने वेतन पर्चियां और गणना (calculations) पेश कर दिखाया कि उन्हें实际 (actual) में लगभग ₹11,545 से ₹12,908 के बीच वेतन मिल रहा है.
दूसरी ओर, एम्बुलेंस कंपनी (प्रतिवादी संख्या 10) ने हलफनामा दायर कर दावा किया कि वह कोर्ट के आदेश का पालन कर रही है. कंपनी की दलील थी कि उन्होंने कर्मचारियों का वेतन ₹15,000 प्रति माह (CTC) के आधार पर तय किया है. कंपनी का कहना था कि इस ₹15,000 में से ईपीएफ (PF), ईएसआई (ESI) और अन्य वैधानिक कटौती करने के बाद जो राशि बचती है, वही कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा की जा रही है. कंपनी ने अदालत को एक चार्ट भी पेश किया जिसमें वेतन के अलग-अलग हिस्से (बेसिक, एचआरए, भत्ता, PF, ESI आदि) दिखाए गए थे. कंपनी के अनुसार, कटौती के बाद कर्मचारियों को ₹12,908 हाथ में मिल रहे थे।

 

 

हाईकोर्ट की टिप्पणी और स्पष्टीकरण
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद, हाईकोर्ट के खंडपीठ (Division Bench) ने माना कि कंपनी की दलीलें गलत हैं. कोर्ट ने अपने पुराने आदेश (2020) के पैरा संख्या 19 का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट रूप से ‘take home salary’ (टेक होम सैलरी) शब्द का इस्तेमाल किया गया था.
अदालत ने कहा कि ‘टेक होम सैलरी’ का मतलब वह वास्तविक राशि होती है जो कर्मचारी को कटौतियों (जैसे प्रॉविडेंट फंड, प्रोफेशनल टैक्स, इनकम टैक्स आदि) के बाद खर्च करने के लिए मिलती है।

कोर्ट ने इस बात को रेखांकित किया कि आदेश में स्पष्ट रूप से प्रत्येक कर्मचारी की ‘टेक होम सैलरी’ को ₹15,000 करने का निर्देश था, न कि कुल खर्च (CTC) को. इसलिए, कंपनी की यह दलील कि ₹15,000 (CTC) पर कटौती के बाद भुगतान करना आदेश का पालन है, स्वीकार्य नहीं है. अदालत ने साफ किया कि कर्मचारियों को वैधानिक कटौतियों के बाद वास्तविक रूप से ₹15,000 हाथ में मिलने चाहिए।

 

दस्तावेजों के अनुसार, यह विवाद अभी पूरी तरह से सुलझा नहीं है क्योंकि 2021 में इस मामले से जुड़ी अन्य रिट याचिकाएं भी दायर की गई हैं, जो लंबित हैं. बहरहाल, हाईकोर्ट की इस ताजा टिप्पणी ने वेतन को लेकर चल रहे भ्रम को दूर कर दिया है और एम्बुलेंस कर्मियों की मांगों को बल दिया है. यह फैसला भविष्य में ऐसे अन्य मामलों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है जहां ‘इन-हैंड’ सैलरी और CTC के बीच विवाद हो. उच्च न्यायालय का फैसला है ।