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आदर्श हिमाचल की विशेष रिपाट लेखक – अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)
आजकल कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को कर्मचारी लाभ पैकेज के तहत ग्रुप मेडिकल कवरेज (जीएमसी) प्रदान करती हैं. कंपनियां वेतन के साथ-साथ आपको जो अतिरिक्त लाभ पेश करती हैं, उनमें यह एक महत्त्वपूर्ण भाग बनकर उभरा है. जीएमसी पॉलिसी नौकरीपेशा लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तो देती है, लेकिन इसका कवरेज तब तक ही काम करता है जब तक कि आप उस कंपनी में काम करते हैं. यह बात साल 2020 में खास तौर पर सामने आई, जब भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने वाली कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस देना अनिवार्य कर दिया. समय के साथ इसे लागू करने के नियम बेहद लचीले हो गए, लेकिन जीएमसी अब भी कर्मचारियों को मिलने वाला एक सामान्य लाभ है, जो कि नौकरी के दौरान ही मिलता है. क्या आपने कभी सोचा है कि अगली कंपनी आपको जीएमसी न पेश करे या सीमित कवर दे तो क्या होगा? अगर आप करियर में ब्रेक लेना चाहते हैं या फिर एक फ्रीलांसर के तौर पर काम करना चाहते हैं या कारोबारी बनना चाहते हैं, तो आप ये सब कैसे करेंगे? चिंता न करें; आपके पास जीएमसी के तहत मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को इंडिविजुअल रिटेल हेल्थ पॉलिसी में ट्रांसफर करने का विकल्प होता है; इसे ‘निरंतर लाभ’ भी कहा जाता है. आइए देखते हैं कि यह कैसे काम करता है.
कैसे ट्रांसफर करें?
सबसे पहले, अगर आपकी जीएमसी पॉलिसी आपके आश्रितों को कवर करती है, तो आप फैमिली फ्लोटर प्लान में ट्रांसफर कर सकते हैं. अगर आपकी पॉलिसी केवल आपको कवर करती है, तो आप उसे इंडिविजुअल रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में ट्रांसफर कर सकते हैं.
सबसे पहले जिस कंपनी ने आपको जीएमसी पेश किया है उन्हें सूचित करें और बताएं कि आप उसी इंश्योरेंस कंपनी में अपनी पॉलिसी को इंडिविजुअल प्लान में ट्रांसफर करना चाहते हैं. ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान हो इसके लिए आपका ग्रुप कवर खत्म हो या इसे रिन्यू करने की तारीख आ जाए, उससे कम से कम 30 दिन पहले इंश्योरेंस कंपनी को अपनी इच्छा बताएं. इसके अलावा, उनके रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट के बारे में सारी जानकारी पढ़ लें, अपनी ज़रूरतों को समझें और इसके बाद अपने लिए एक ऐसा प्लान चुनें जो आपके लिए सर्वश्रेष्ठ हो. एक बार जब आप अपने लिए सर्वश्रेष्ठ प्लान चुन लें, तो इसके बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी को ज़रूरी डॉक्यूमेंट प्रदान करने कहें जैसे कि प्रपोज़ल, ट्रांसफर फॉर्म इत्यादि. अब फॉर्म अच्छी तरह से भर लें, अपनी मौजूदा जीएमसी पॉलिसी की सारी जानकारी अच्छी तरह से साझा करें, मेडिकल हिस्ट्री और क्लेम हिस्ट्री के बारे में भी बताएं. कुल मिलाकर, फॉर्म में जो भी चीज़ें भरने कही गई हैं, उन्हें भरें और अपनी इंश्योरेंस कंपनी के पास जमा कर दें. एक बार जब आपका फॉर्म जमा हो जाता है, तो इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी आपके फॉर्म की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करती है और फॉर्म स्वीकार करती है. अब आप नेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड या यूपीआई के ज़रिए भुगतान कर सकते हैं. इसके अलावा, हो सकता है कि कंपनी आपकी क्लेम हिस्ट्री या हेल्थ डिक्लरेशन के आधार पर कुछ बदलाव/संशोधन करने कहे. कंपनी ने जो भी पेशकश की है उसे अच्छी तरह से देखें और फिर आगे बढ़ें.
ट्रांसफर करने के क्या फायदे हैं?
ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर आपने जीएमसी में वेटिंग पीरियड पहले ही पूरी कर ली है, तो पहले से हुई बीमारी या रोग के वेटिंग पीरियड को रिटेल पॉलिसी में एडजस्ट (आमतौर पर आपकी पिछली इंश्योरेंस राशि और उस पर मिलने वाले संचयी बोनस तक) कर दिया जाता है. जैसे कि आप जो रिटेल पॉलिसी लेना चाहते हैं उसमें खास बीमारी के लिए 4 साल का वेटिंग पीरियड है और आपका जीएमसी कवर 3 साल का है. तो इस तरह के मामले में, जीएमसी में पूरे किए गए वर्षों का भी ख्याल रखा जाएगा. यानी आपको उस बीमारी (उपरोक्त बताई गई क्रेडिट सीमा के अधीन) के लिए केवल 1 वर्ष का वेटिंग पीरियड पूरा करने की ज़रूरत है. जीएमसी पॉलिसी का दूसरा फायदा यह है कि ये ऐसी लोगों के समूह को कवरेज देती है, जिनकी इंश्योरेंस की ज़रूरतें एक जैसी होती हैं. रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको अपनी ज़रूरत के मुताबिक कवरेज पाने का मौका मिलता है. जीएमसी में अक्सर विभिन्न बीमारियों के लिए सब-लिमिट्स होती हैं जैसे कि मोतियाबिंद और मातृत्व कवर. रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको उच्च इंश्योरेंस राशि चुनने की सुविधा मिलती है, जो कि आपकी ज़रूरतों के मुताबिक होती है. अंत में, आप अपनी पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करके उसे अपनी ज़रूरत के मुताबिक बनाए रख सकते हैं, चाहे आप नौकरी बदलें या न बदलें.
इन बातों का खास ख्याल रखें: निरंतर लाभ के कई फायदे हैं. हालांकि ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना होता है. आप अपनी जीएमसी पॉलिसी को रिटेल प्लान में उसी कंपनी के पास ट्रांसफर कर सकते हैं जहां से आपने जीएमसी पॉलिसी ली होती है. इसके अलावा, ट्रांसफर करना इंश्योरेंस कंपनी की जोखिम निर्धारण प्रक्रिया और दिशानिर्देशों पर निर्भर होता है. आमतौर पर जीएमसी पॉलिसी में मेडिकल चेकअप की ज़रूरत नहीं होती है, लेकिन अपनी पॉलिसी ट्रांसफर करते समय आपको एक सामान्य मेडिकल जांच करवानी पड़ सकती है. ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ट्रांसफर के दौरान उनकी इंश्योरेंस राशि बढ़ जाए, ताकि उन्हें और बेहतर कवरेज मिले. हालांकि, इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि वेटिंग पीरियड का फायदा केवल जीएमसी की इंश्योरेंस राशि (और यदि कोई संचयी बोनस हो तो उसके साथ) पर ही लागू होगा. मानिए कि जीएमसी की इश्योरेंस राशि ₹3 लाख है और आप नई पॉलिसी में इंश्योरेंस राशि को ₹5 लाख तक बढ़ाना चाहते हैं. ऐसे में ₹3 लाख पर वेटिंग पीरियड का फायदा मिलेगा; लेकिन अतिरिक्त ₹2 लाख के लिए आपको वेटिंग पीरियड पूरा करने की ज़रूरत होगी. अंत में, यह देखना न भूलें कि आपकी नई पॉलिसी की क्या सीमाएं हैं और कौन सी चीज़ें इसमें अपवाद हैं. नई पॉलिसी के नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें, ताकि आपको यह स्पष्ट हो सके कि कवरेज कितना और इसकी क्या सीमाएं हैं. और सबसे ज़रूरी बात, अपनी पॉलिसी पर नज़र बनाए रखें और इसे समय-समय पर रिन्यू करें, ताकि यह हमेशा चालू रहे.
अपनी जीएमसी पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करना न केवल सुविधाजनक होता है, बल्कि इसमें आपको अपनी इच्छानुसार कवरेज और बेजोड़ फायदे भी मिलते हैं. उपरोक्त बातों को ध्यान में रखने हुए आप न केवल सूझबूझ भरा फैसला ले सकते हैं, बल्कि अपनी ट्रांसफर प्रक्रिया को भी बेहद आसान बना सकते हैं. अंत में, रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको और आपके प्रियजनों को सुरक्षा के साथ-साथ मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एक मज़बूत आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है.











