पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय ठियोग में 11वीं-12वीं के विज्ञान विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

ठियोग/शिमला। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), ठियोग, जिला शिमला में 14 अक्टूबर 2026 को विज्ञान संकाय के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, भविष्य के रोजगार, आधुनिक तकनीकी विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना था, ताकि वे अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य के लक्ष्यों के अनुरूप सोच-समझकर करियर का चयन कर सकें।

 

इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान, पीएच.डी., एसएनजीएनसी, आईजीएमसी शिमला एवं विजिटिंग फैकल्टी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला ने विद्यार्थियों को करियर संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उनके साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग की स्नातकोत्तर छात्राएँ भूमिका वर्मा एवं  नाज़िया खान भी उपस्थित रहीं। दोनों ने विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक परीक्षण, व्यक्तिगत रुचियों की समझ, करियर संबंधी मार्गदर्शन तथा विद्यार्थियों की विभिन्न मनोवैज्ञानिक चिंताओं पर संवाद के माध्यम से कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

 

भविष्य के करियर और बदलती रोजगार व्यवस्था पर विशेष व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) चौहान ने “2030 और उसके बाद के लिए भविष्य-तैयार रूपरेखा: नौकरी तलाशने वालों से रोजगार सृजित करने वालों तक” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रोजगार के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, स्वचालन, जैव प्रौद्योगिकी, डेटा साइंस तथा डिजिटल तकनीकों के विकास से अनेक पारंपरिक व्यवसायों में बदलाव आ रहा है और नए करियर विकल्प भी विकसित हो रहे हैं।

 

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि भविष्य में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए विषय की गहरी समझ, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान की क्षमता, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और निरंतर सीखने की आदत विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि करियर का चयन सामाजिक दबाव, दूसरों की देखा-देखी अथवा केवल लोकप्रिय व्यवसायों को ध्यान में रखकर नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी रुचियों, शैक्षणिक क्षमता, व्यक्तिगत विशेषताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों का आकलन करके उचित निर्णय लेना चाहिए।

 

विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए विविध करियर संभावनाएँ
व्याख्यान में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, फार्मास्यूटिकल साइंस, पर्यावरण विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे।

 

प्रो. (डॉ.) चौहान ने बताया कि आधुनिक समय में अनेक करियर ऐसे हैं जिनमें विज्ञान के साथ कंप्यूटर तकनीक, प्रबंधन, संचार कौशल और विश्लेषणात्मक सोच का समन्वय आवश्यक होता है। इसलिए विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच उपलब्ध संभावनाओं को समझना चाहिए।

 

उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रमों, प्रवेश परीक्षाओं, पात्रता मानदंडों, छात्रवृत्तियों तथा संस्थानों की जानकारी समय रहते प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी पाठ्यक्रम का चयन करने से पहले उसकी शैक्षणिक आवश्यकताओं, भविष्य की संभावनाओं और अपनी व्यक्तिगत रुचि का उचित मूल्यांकन करें।

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कौशल का महत्व
कार्यक्रम का एक प्रमुख विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों का बढ़ता प्रभाव रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग शिक्षा, अनुसंधान, सूचना विश्लेषण तथा रचनात्मक कार्यों में सहायक हो सकता है।
व्याख्यान में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आलोचनात्मक चिंतन, तार्किक क्षमता, संवाद कौशल, नेतृत्व, टीम भावना, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता भी आवश्यक है।

 

विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे विज्ञान प्रदर्शनियों, शोध परियोजनाओं, नवाचार प्रतियोगिताओं तथा व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लें। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित हो सकती है।
साथ ही, डिजिटल माध्यमों से प्राप्त जानकारी की सत्यता जाँचने, गोपनीयता बनाए रखने और तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

 

नौकरी तलाशने से रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश

 

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उद्यमिता और नवाचार रहा। प्रो. (डॉ.) चौहान ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे करियर की सफलता को केवल सरकारी या निजी नौकरी प्राप्त करने तक सीमित न रखें, बल्कि स्वरोजगार, उद्यम स्थापना और नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने की संभावनाओं पर भी विचार करें।

 

उन्होंने बताया कि विज्ञान के विद्यार्थी तकनीकी स्टार्टअप, स्वास्थ्य संबंधी नवाचार, डिजिटल सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा तथा वैज्ञानिक परामर्श जैसे क्षेत्रों में नए अवसर विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की पहचान करने और विज्ञान एवं तकनीक की सहायता से उनके व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। ऐसे प्रयास भविष्य में नए उद्यमों के विकास, रोजगार सृजन तथा समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

 

इसके साथ ही वित्तीय साक्षरता, योजना निर्माण, सहयोगात्मक कार्य और व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
मनोवैज्ञानिक परीक्षण और व्यक्तिगत करियर मार्गदर्शन
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं  भूमिका वर्मा एवं  नाज़िया खान ने विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने मनोवैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचियों, योग्यताओं, व्यक्तिगत विशेषताओं और करियर संबंधी प्राथमिकताओं पर विचार करने का अवसर दिया।

 

इसके बाद विद्यार्थियों से संवाद किया गया, जिसमें उनकी शैक्षणिक चिंताओं, करियर चयन को लेकर अनिश्चितताओं, निर्णय लेने में आने वाली कठिनाइयों तथा अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर चर्चा की गई।
दोनों छात्राओं ने आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि उपयुक्त करियर का चयन करते समय केवल परीक्षा के अंकों को ही आधार नहीं बनाना चाहिए, बल्कि विद्यार्थी की रुचि, क्षमता, परिस्थितियों और भविष्य की आकांक्षाओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

 

इस पहल ने करियर काउंसलिंग में मनोविज्ञान की उपयोगिता को रेखांकित किया। इससे विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा उपलब्ध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकल्पों पर अधिक विचारपूर्ण निर्णय लेने की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

 

उच्च शिक्षा और भविष्य की तैयारी पर बल

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्नातक पाठ्यक्रमों, व्यावसायिक शिक्षा, प्रवेश परीक्षाओं, छात्रवृत्तियों और अनुसंधान के अवसरों के बारे में समय रहते जानकारी एकत्र करने की सलाह दी गई। उन्हें अपनी शैक्षणिक तैयारी के साथ व्यावहारिक कौशल, डिजिटल दक्षता, संचार क्षमता और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

 

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बदलती दुनिया में निरंतर सीखना और नई परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को विकसित करना सफलता की महत्वपूर्ण शर्तें हैं। विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना धैर्यपूर्वक करने, आवश्यकता पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने और अपने लक्ष्यों के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।

पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, ठियोग में आयोजित इस करियर काउंसलिंग सत्र ने विज्ञान संकाय के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को आधुनिक करियर विकल्पों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्यमिता, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।
प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान के विशेषज्ञ व्याख्यान तथा  भूमिका वर्मा और  नाज़िया खान द्वारा प्रदान किए गए मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं करियर मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि विद्यार्थियों को वैज्ञानिक ज्ञान के साथ रचनात्मकता, तार्किक चिंतन, डिजिटल दक्षता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नवाचार की भावना विकसित करनी चाहिए। ऐसी क्षमताएँ उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने, उपयुक्त करियर चुनने और समाज के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार कर सकती हैं।
यह सत्र विद्यार्थियों को अपने भविष्य के प्रति जागरूक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।