राज्य स्तरीय शतरंज चैंपियनशिप 2026: शिमला में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला ।   हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज चैंपियनशिप 2026 का आयोजन 18 अक्टूबर 2026 को द ट्यूटर, संजौली, शिमला में उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। इस प्रतियोगिता में 27 खिलाड़ियों तथा 6 प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों सहित कुल 33 व्यक्तियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा खिलाड़ियों में शतरंज के प्रति रुचि विकसित करना, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षा और खेल के बीच सार्थक समन्वय को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिता का आयोजन द ट्यूटर, संजौली, शिमला तथा हिमालयन राइज एमएसएमई के सहयोग से किया गया।

 

 

इस चैंपियनशिप में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने अपनी बौद्धिक क्षमता, एकाग्रता, रणनीतिक सोच, धैर्य और खेल भावना का प्रदर्शन किया। यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और खेल प्रेमियों के लिए शतरंज के शैक्षिक, बौद्धिक और सामाजिक महत्त्व को समझने का अवसर भी बना।

 

उद्घाटन समारोह में  बी. के. शर्मा ने किया खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन

प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के अर्धसैनिक बलों के पूर्व उपमहानिरीक्षक श्री बी. के. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए शतरंज को बुद्धि, रणनीति, धैर्य और दूरदर्शिता का खेल बताया। उन्होंने कहा कि शतरंज में प्रत्येक चाल के पीछे विचार करना, संभावित परिणामों का आकलन करना और परिस्थितियों के अनुसार उचित निर्णय लेना आवश्यक होता है।

 

शतरंज का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। भारत की प्राचीन बौद्धिक परंपरा में प्रचलित चतुरंग को आधुनिक शतरंज के ऐतिहासिक विकास से जोड़ा जाता है। समय के साथ यह खेल विश्वभर में लोकप्रिय हुआ और आज विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

श्री शर्मा ने शतरंज के माध्यम से विद्यार्थियों में धैर्य, अनुशासन, आत्मनियंत्रण, योजनाबद्ध चिंतन और हार से सीखने की भावना विकसित करने के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में शतरंज गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ बौद्धिक खेलों में भी अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिल सकें।

डॉ. बी. एस. चौहान ने शतरंज के शैक्षिक और सामाजिक महत्त्व पर प्रकाश डाला

प्रतियोगिता के दौरान डॉ. बी. एस. चौहान ने पर्यवेक्षक के रूप में आयोजन की गतिविधियों का अवलोकन किया तथा खिलाड़ियों, विद्यार्थियों और आयोजकों से संवाद किया। उन्होंने शतरंज के इतिहास, उसकी बौद्धिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा में उसकी उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. चौहान ने शतरंज को तार्किक चिंतन, एकाग्रता, समस्या समाधान और निर्णय लेने की क्षमता का अभ्यास कराने वाला महत्त्वपूर्ण खेल बताया। शतरंज में खिलाड़ी को अपनी चाल के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी की संभावित चालों पर भी विचार करना पड़ता है। इससे विभिन्न विकल्पों का विश्लेषण करने, परिणामों का अनुमान लगाने और सोच-समझकर निर्णय लेने का अभ्यास होता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शतरंज में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास, आत्मनियंत्रण और अनुशासन आवश्यक हैं। ये गुण विद्यार्थियों के शैक्षिक जीवन के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में भी सहायक हो सकते हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी ने बौद्धिक खेलों को शिक्षा और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के साथ जोड़ने की उपयोगिता को उजागर किया।

समापन समारोह में डॉ. अंजू शर्मा ने खिलाड़ियों को किया प्रोत्साहित

समापन समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. अंजू शर्मा रहीं। वे हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य, हिमाचल प्रदेश सरकार के उच्चतर शिक्षा विभाग में पूर्व ओएसडी तथा उन्नत अध्ययन की पूर्व अध्येता रही हैं। उन्होंने अपने पूर्व दायित्वों के दौरान शिक्षा और प्रशासन से जुड़े क्षेत्रों में योगदान दिया।

डॉ. अंजू शर्मा ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की सराहना की तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेलों की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शतरंज जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, चुनौतियों का सामना करने, अपनी गलतियों से सीखने और उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं।

शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, जिम्मेदारी, निर्णय क्षमता और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की योग्यता विकसित करना भी है। इस दृष्टि से शतरंज जैसे बौद्धिक खेल विद्यालयी तथा उच्च शिक्षा के वातावरण को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाने में योगदान दे सकते हैं।

डॉ. अंजू शर्मा की उपस्थिति ने प्रतिभागियों और आयोजकों का उत्साह बढ़ाया। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि उचित अवसर, नियमित अभ्यास और प्रोत्साहन मिलने पर विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकते हैं।

विभिन्न वर्गों में विजेताओं ने हासिल किए पदक

चैंपियनशिप में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, एकाग्रता और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। विभिन्न वर्गों में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं।

बालिका वर्ग

12 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — दिव्यांशी; रजत पदक — आन्वी; कांस्य पदक — यशस्वी।

14 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — स्नेहा; रजत पदक — माही; कांस्य पदक — संस्कृति।

बालिका खुला वर्ग: स्वर्ण पदक — पायल; रजत पदक — शिवांशी।

बालक वर्ग

10 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — अथर्व; रजत पदक — सहश्रद; कांस्य पदक — आरव कियान।

14 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — आदित्य; रजत पदक — आरव; कांस्य पदक — पार्थ।

19 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — सिद्धार्थ; रजत पदक — मोक्ष; कांस्य पदक — हार्दिक।

बालक खुला वर्ग: स्वर्ण पदक — हर्षल; रजत पदक — विशाल; कांस्य पदक — शुभम।

आयोजकों ने सभी पदक विजेताओं को बधाई दी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी के प्रयासों की सराहना की। प्रतियोगिता में भागीदारी स्वयं में सीखने, अनुभव प्राप्त करने और भविष्य के लिए अपनी खेल क्षमता विकसित करने का अवसर है।

सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों के नाम

प्रतियोगिता में कुल 27 खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों के नाम निम्नलिखित हैं:

रियान उदय राम सिंह, अथर्व राणा, सहश्रद चौहान, आरन श्रीवास्तव, पार्थ शर्मा, आदित्य वर्मा, आरन डी. चौहान, केशव चौहान, शौर्य कौल, दिव्यांशी, यशस्वी यादव, आन्वी, कृष, पायल ठाकुर, शिवांशी अग्रवाल, स्नेहा सिंह, संस्कृति, माही कल्टा, स्निग्धा लोहिया, हार्दिक वर्मा, मोक्ष, कृति कुमार, कृष्ण कुमार, उप्पला दीक्षित राव, सिद्धार्थ वर्मा, सचिन कुमार और रितुंजय चौहान।

प्रतियोगिता के संचालन में 6 प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों ने सहयोग दिया। उनके नाम हैं: सुश्री पलक भ्वांता, श्री शुंभांगी, सुश्री अंचल कलडाइक, सुश्री शावेरी शर्मा, श्री हर्षिस्ट और सुश्री शमाली पटीयाल।

आयोजन समिति ने सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, निर्णायकों, अभिभावकों और सहयोगियों के योगदान की सराहना की। प्रतियोगिता के सफल संचालन में उनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण रही।

विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शतरंज की बढ़ती उपयोगिता

आज के समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को केवल तथ्यों को याद करने के बजाय उनका विश्लेषण करने, समस्याओं का समाधान खोजने, रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने और बदलती परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने की आवश्यकता है। शतरंज इन क्षमताओं का अभ्यास करने के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान करता है।

विद्यालयों में शतरंज क्लब, नियमित अभ्यास सत्र और अंतरविद्यालय प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर दे सकती हैं। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शतरंज गतिविधियाँ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नेतृत्व, आत्मविश्वास और विभिन्न पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

शतरंज का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसमें सफलता केवल शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती। अभ्यास, विश्लेषण, रणनीति और धैर्य के माध्यम से विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि के खिलाड़ी अपनी क्षमता को बेहतर बना सकते हैं। डिजिटल युग में ऑनलाइन शतरंज मंचों और प्रशिक्षण संसाधनों ने सीखने के अवसरों का विस्तार किया है। तकनीक के उपयोग के साथ नियमित अभ्यास, निष्पक्ष खेल और संतुलित डिजिटल आदतों को भी महत्त्व दिया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप अनुभवात्मक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करना विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उपयोगी है। शतरंज जैसी गतिविधियाँ इन शैक्षिक उद्देश्यों को व्यवहार में लाने का एक माध्यम बन सकती हैं।

मुख्य समन्वयक ने व्यक्त किया आभार

मुख्य समन्वयक श्री अजय वर्मा ने चैंपियनशिप की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए खिलाड़ियों, अभिभावकों, अतिथियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, निर्णायकों और आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेल के माध्यम से जीवनोपयोगी गुण विकसित करने के अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने शतरंज को विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामुदायिक स्तर पर अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस बौद्धिक खेल से जुड़ सकें। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों, खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग महत्त्वपूर्ण है।

द ट्यूटर, संजौली, शिमला तथा हिमालयन राइज एमएसएमई के सहयोग से आयोजित इस चैंपियनशिप ने शिमला में शतरंज गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और युवा प्रतिभाओं को साझा मंच प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल की। आयोजन का व्यापक संदेश यह रहा कि खेल और शिक्षा परस्पर पूरक हैं तथा दोनों मिलकर विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत बना सकते हैं।

भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश

हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज चैंपियनशिप 2026 ने यह रेखांकित किया कि शतरंज केवल चालों और प्रतिस्पर्धा का खेल नहीं, बल्कि सोचने, सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की निरंतर प्रक्रिया है। यह विद्यार्थियों को धैर्यपूर्वक प्रयास करने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने, अपनी गलतियों से सीखने और प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान बनाए रखने का अभ्यास कराता है।

इस आयोजन से विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, अभिभावकों, शिक्षकों और खेल प्रेमियों को प्रेरणा मिल सकती है कि वे युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराएँ। ऐसी पहलें हिमाचल प्रदेश में बौद्धिक खेलों की संस्कृति को मजबूत करने और शिक्षा के साथ खेलों के संतुलित समावेश को बढ़ावा देने में योगदान दे सकती हैं।