ऑकलैंड हाउस स्कूल में ‘इनबॉर्न टैलेंट्स को डिकोड करने’ पर रूपांतरणकारी कार्यशाला का आयोजन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । ऑकलैंड हाउस स्कूल, शिमला में कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए “इनबॉर्न टैलेंट्स को डिकोड करने हेतु डीएमआईटी (DMIT)” विषय पर एक प्रभावशाली और ज्ञानवर्धक कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ. बी. एस. चौहान, विज़िटिंग प्रोफेसर, एसएनएनसी आईजीएमसी शिमला रहे, जो एक प्रसिद्ध नैनोटेक्नोलॉजी वैज्ञानिक, डीएमआईटी विशेषज्ञ, एनएलपी मास्टर प्रैक्टिशनर, स्वास्थ्य एवं पोषण सलाहकार तथा राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त मोटिवेशनल स्पीकर हैं।

 

डॉ. चौहान ने विस्तार से बताया कि किस प्रकार डर्मेटोग्लिफिक्स मल्टीपल इंटेलिजेंस टेस्ट (DMIT) विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए वैज्ञानिक रूप से उपयोगी है। उन्होंने रेखांकित किया कि डीएमआईटी, जिसका प्रयोग विश्व के 40 से अधिक देशों में किया जा रहा है, विद्यार्थियों की 8 प्रकार की बहु-बुद्धिमत्ता (Multiple Intelligences) तथा IQ, EQ, AQ और CQ को 95% से अधिक सटीकता के साथ मापने में सक्षम है। इसने अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, कोरिया और रूस जैसे उच्च शैक्षिक सूचकांक और वैश्विक पेटेंट पंजीकरण वाले देशों के सफल शैक्षिक मॉडल से भी तुलना स्थापित की।

 

> “शिक्षा बाल्टी भरने का काम नहीं है, बल्कि आग जलाने का काम है।” – डब्ल्यू. बी. यीट्स।
डॉ. चौहान ने इस कथन को डीएमआईटी की उस क्षमता से जोड़ा, जो आत्मबोध और आत्मविश्वास को प्रज्वलित करती है।

 

यह कार्यशाला प्रधानाचार्य सुश्री स्मारकी समंतराय के नेतृत्व में आयोजित की गई। इसमें 300 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। इनमें से 4 विद्यार्थियों का डीएमआईटी परीक्षण मौके पर ही किया गया। उत्साहजनक प्रतिक्रिया के बाद 11 विद्यार्थियों का परीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा तथा अतिरिक्त 10 विद्यार्थियों को उनकी सक्रिय भागीदारी के आधार पर हिमालयन राइज़ (MSME पंजीकृत संगठन) द्वारा प्रायोजित किया जाएगा।

वैश्विक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य

डॉ. चौहान ने स्पष्ट किया कि हार्वर्ड विश्वविद्यालय के हॉवर्ड गार्डनर (1983) ने 8 प्रकार की बुद्धिमत्ता की अवधारणा दी थी और डीएमआईटी इन्हें प्रारंभिक अवस्था में पहचानने का व्यावहारिक साधन है। उन्होंने बताया कि यूनेस्को की रिपोर्ट के अनुसार 70% विद्यार्थी गलत करियर विकल्प चुनते हैं, जबकि विश्व आर्थिक मंच (2023) का अनुमान है कि आज स्कूल में प्रवेश करने वाले 65% विद्यार्थी भविष्य में उन नौकरियों में काम करेंगे जो अभी अस्तित्व में नहीं हैं।

डीएमआईटी भारतीय विद्यार्थियों को आने वाले समय के करियर जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं रोबोटिक्स, अंतरिक्ष अनुसंधान, जेनेटिक इंजीनियरिंग, सतत ऊर्जा, साइबर सुरक्षा, रक्षा सेवाएँ, सिविल सेवाएँ, चिकित्सा और अभियांत्रिकी में मार्गदर्शन दे सकता है। साथ ही इसने तैयारी को NEET, JEE, UPSC, SSC और SSB जैसी परीक्षाओं से जोड़ा, यह कहते हुए कि अपनी जन्मजात प्रतिभा को जानना विद्यार्थियों को 30–40% तक अतिरिक्त लाभ प्रदान करता है।

विद्यालय की दृष्टि एवं सहयोग

इस अवसर पर हिमालयन राइज़ और ऑकलैंड हाउस स्कूल के बीच विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को अपस्किल करने हेतु एक एमओयू (MOU) प्रस्तावित किया गया। प्रधानाचार्य सुश्री समंतराय ने कहा:

> “यह कार्यशाला राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है और हमारे युवाओं को इंडिया@2047 के लिए तैयार करती है। जैसा कि आइंस्टीन ने कहा था – हर कोई प्रतिभाशाली है, लेकिन यदि आप मछली को पेड़ पर चढ़ने की क्षमता से परखेंगे, तो वह जीवनभर खुद को मूर्ख समझेगी। डीएमआईटी यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी बच्चा ऐसा न महसूस करे।”

 

विद्यार्थी एवं शिक्षक योगदान

इस कार्यक्रम का संचालन  समृति चौहान,  प्रतिभा सूद और  मंजीला ने किया। रिपोर्ट तैयार करने, पंजीकरण एवं समन्वय में जिन विद्यार्थियों ने सक्रिय योगदान दिया, उनमें प्रमुख हैं – तेजस्वी शर्मा, माधवी महाजन, निहारिका शर्मा, गुरबानी कौर, लक्षिता, सान्वी भरोटा, आराध्या पिर्टा, आराध्या कैथ, आभा सावंत, शरण्या शर्मा, आन्वी भरोटा, आकाशरा, अमन उस्मान, रैना शर्मा, आभा चौहान, गौरी खन्ना, शेरिल गुप्ता, भार्गवी सिंह, दिविता राठौर, नव्या वर्मा, अरुणिमा लोथेटा, पृथा डोगर, आराध्या गांगटा, मोक्ष शर्मा, आशना वर्मा, मेहक शर्मा, दीवा मेहता, आयुषी राणा, अमृता पांडे और इशिता।

इस अवसर पर  शैरिन वर्मा (पूर्व ऑकीट),  प्रिधि ठाकुर और आयुष दस्ता भी हिमालयन राइज़ की ओर से उपस्थित रहे।

कार्यशाला का समापन विद्यार्थियों और शिक्षकों की सराहना के साथ हुआ, जिसने वैज्ञानिक आधार पर करियर नियोजन और समग्र विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत की ।