चौकी में 7 दिवसीय महायज्ञ समापन पर श्रीमद भागवत पुराण ग्रंथ को दी विदाई

 ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यूपेंन्द्र कांत मिश्रा ने मुख्यातिथि की शिरकत

चौकी में 7 दिवसीय महायज्ञ समापन पर श्रीमद भागवत पुराण ग्रंथ को दी विदाई
चौकी में 7 दिवसीय महायज्ञ समापन पर श्रीमद भागवत पुराण ग्रंथ को दी विदाई
आदर्श हिमाचल ब्यूरो 
आनी। बटाला पंचायत के  चौकी गाँव स्थित देवता चौकी नारायण मंदिर  में 7 दिवसीय महायज्ञ एवं श्रीमद भागवत कथा रविवार को विधिवत समापन  हो गया। इस महायज्ञ के अंतिम दिन हवनपाठ पूर्णाहुति आदि कार्यक्रम हुए। महायज्ञ के समापन अवसर पर कथावाचक आचार्य नित्य देव शास्त्री  ने भागवत भक्ति के विविध आयामों पर प्रकाश डाला। इस दौरान पूरा पंडाल “बांके बिहारी लाल की जय”के जयकारों से गूंज उठा।कथा की शुरूआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यजमान परिवार की ओर से पूजन अर्चना और दीप जलाने के साथ  कथा वाचक आचार्य नित्य देव ने किया। कथा व्यास ने बताया कि श्रीमदभागवत का अर्थ है भगवान में रत लीन हो जाना। उन्होंने अंतिम दिन  गोपी लीला का  वर्णन करते हुए भक्तों को उद्धव-गोपी संवाद का रसास्वादन कराया। उन्होंने कहा  कि गुरु से मिलने और मंदिर कभी खाली हाथ नहीं जाना चाहिए।आचरण को निष्काम भाव से करते रहना चाहिए. और अच्छे भक्त का यही लक्षण है।
आचार्य नित्य देव ने कहा कि  कथा सुनने से मन की व्यथा दूर हो जाती है । इस मौके पर मन्दिर कमेटी के प्रधान अनुप ठाकुर  ने बताया कि इस महायज्ञ में आउटर सिराज, आनी, बटाला, शमशर, परकौट, शगागी, कोट तथा खनाग क्षेत्र  सहित लगभग 30 गाँव की जनता ने इस धार्मिक आयोजन में  श्रद्धापूर्वक भाग लिया । 7 दिवसीय महायज्ञ के समापन अवसर पर मुख्यतिथि आनी  ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष यूपेन्द्र कांत मिश्रा ने यज्ञ में भाग लेते हुए हवन की संपूर्णता में अपनी आहूति डाली।उन्होंने इस मौके पर लोगों को धार्मिक आयोजन की बधाई दी और कहा कि ऐसे आयोजन से क्षेत्र की सुख समृद्धि के अलावा मन की शुद्धि होती है और धर्म  की स्थापना भी होती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल के हर गाँव में देवी देवता निवास करते हैं और इस सुंदर प्रदेश को देवभूमि के नाम से भी जाना जाता है।  उन्होंने  इस महायज्ञ के सफल आयोजन के लिए  मन्दिर कमेटी को 21 हजार  रुपये की राशि प्रदान की। श्रीमद् भागवत कथा व यज्ञ की संपूर्णता पर मन्दिर कमेटी के प्रधान अनुप ठाकुर ने कथास्थल से पवित्र  श्रीमद भागवत ग्रंथ और अतिथि   देवी देवताओं को भावपूर्ण  विदाई दी।
Ads