सरकार के निर्देश के बाद भी ऊपरी क्षेत्र में बाहर से आने वाले लोगो को नही दी जा रही जवाबदेही होम क्वारंटीन की सुविधा

विशेषर नेगी

शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के तहत रामपुर में सरकार के सख्त निर्देशों के बाद भी बाहरी प्रदेशों से आ रहे लोगो को होम क्वारंटीन के लिए पशुओं से भी बदतर स्थिति में रहना पड़ रहा है। जो किरायेदार लॉकडाउन में अपने घर चले गए थे अब काम के लिए जब दोबारा वापिस आने लगे है तो मकान मालिक उन्हें किरायेदार के रूप में कोरोना के डर से स्वीकारने के लिए राजी नही है। ऐसे में प्रशासन व पंचायतों की आपसी तालमेल की कमी से क्वारंटीन होने वालो की पेचीदगियां बढ़ रही है।
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वर्तमान में दत्तनगर नामक स्थान में बाहरी राज्यो से आने वाले लोगों को ए बस्ती से दूर नदी किनारे वीरान खंडहर नुमा अस्थाई पशु शालाओं में कवरन्टीन किया जा रहा है । सुविधा के नाम पर यहां न बिजली न पानी और न ही खाना और न ही इंसान के रहने लायक स्थान है। क्वारंटीन किए गए लोग राम भरोसे दिन काटने पर मजबूर है । ऐसा भी नही की यह कोई पहला मामला हो। इस से पहले भी बाहर से आने वालों को यही कवरन्टीन किया जाता रहा है। इन खंडहरों में बाकायदा स्वास्थ्य विभाग की ओर से होम क्वारंटीन का बोर्ड भी दरवाजे पर चस्पा किया जाता है।अपनों से संवाद करना हो तो मोबाइल चार्ज व्यवथा न होने से सम्पर्क नहीं होता । ऐसे में होम कवरन्टीन के नाम पर लोग काला पानी ली सजा भुगतने पर मज़बूर है। कवरन्टीन किए गए लोग चाहते है की उन्होंने तो जैसे तैसे समय निकालाए भविष्य में ऐसी स्थिति किसी और को न देखनी पड़े। यूपी बिजनौर से आए गज राम सिंह ने बताया कि वे यहां मजदूरी करते हैं। लॉक डाउन के दौरान वे घर गए थे अब वहां से हम पास बनाकर यहां आए। हमें यहां क्वारंटीन किया गया है। लेकिन ऐसी जगह रखा गया है जहां नदी किनारे जानवर भी नहीं रह सकते हैं । सांप का खतरा है पीने का पानी नही मिल रहा है ।खाने की भी दिक्कत है। यहां आगे पशु मरने के बाद साड रहे हैं। वे जिसके यहां किराएदार थेए उन्होंने पहले तो आने के लिए कहा लेकिन अब वे फोन नही उठा रहे है।
यूपी बिजनौर से आए संजय श्रीवास्तव ने बताया वे मजबूरी का काम दत्त नगर में करते थे।घर जाने के बाद वापिस की अब अनुमति मिली है। गांव से निकलने के बाद रास्ते में भी उनकी सारी नियमानुसार जांच हुई और जब यह रामपुर आए तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और यहां भेजा गया । वे 7 तारीख को यहां पहुंचे रात को सड़क में खड़े थे तो किसी ने हमें यहां ठहरा दिया। हमारे मोबाइल स्विच ऑफ है ना हम घर बात कर सकते हैंए ना पानी हैए ना बिजली है,ना खाने की व्यवस्था । अजय कुमार बिजनौर से आए व्यक्ति ने बताया वह 2 दिन से भूखे थे।
दो रोज बाद रात को 11:00 बजे खाना बनाया ।किसी ने उन्हें खाने के लिए राशन दिया। बहुत दिक्कत हो रही है। ना लाइट है ना बिजली है। रात को नींद नहीं आ रही है। मच्छर सोने नहीं देते हैं ।रात को बाहर बैठ बैठ कर के दिन निकाल रहे हैं। फोन भी नहीं कर सकते हैं। बच्चे भी इंतजार कर रहे होंगे।दत्त नगर निवासी मोहन सिंह ने बताया कि सामने जो खंडहर नुमा पशुशाला हैं ।यहां पर बाहर से आने वाले लोगो को करन्टीन किया जा रहा है। सरकार की ओर से होम कवरन्टीन का बोर्ड लगाया जाता है। उसके बाद इनके खाने पीने रहने की के लिए कोई नहीं पूछता है। हाल ही में रखे गए लोगों को भी उन्होंने स्वयं खाने-पीने की यथा सामर्थ्य व्यवस्था कर रहे है। पहले भी ऐसी ही स्थिति थी। दत्त नगर पंचायत की वार्ड सदस्य पूनम ठाकुर ने बताया ए यहां पर कुछ मजदूर रखे हैं ।उनकी सरकार की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है ।स्वास्थ्य विभाग वाले आए और उन्होंने क्वारंटीन का बोर्ड चस्पा कर दिया है।
अब किसी ने यह नहीं देखा की उनका 14 दिन तक राशन पानी व्यवस्था कैसी हो । क्या खाएंगे क्या करेंगे अब यह जिम्मेदारी किसकी है। प्रशासन से अनुरोध है कि इस ओर ध्यान दें ।यह रहने लायक स्थान नहीं है । इस से पहले भी यहां इसी तरह आदमी रखे गए थे ।
तहसीलदार रामपुर विपिन ठाकुर ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा पहले भी निर्देश जारी किए गए है, उसके अनुसार सभी पंचायत प्रधानों को निर्देश है कि जो भी बाहर से व्यक्ति होम क्वारंटीन के लिए आएगा उसकी व्यवस्था पंचायत को करनी होगी। सुविधाओं का भी ध्यान रखना होगा। पंचायत की जिम्मेवारी होगी होम कवरन्टीन के जो दिशा निर्देश है उनका की अनुपाल हो। इसके बाद भी कोई आवश्यकता हो तो वह लिखित रूप में एसडीम ऑफिस में अपना पक्ष रख सकते हैं । उन्होंने कहा कि दत्तनगर का मामला उन के ध्यान में आया है जांच की जाएगी।