आदर्श हिमाचल ब्यूरों
मण्डी| पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंडी जिले के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान वे अपने विधानसभा क्षेत्र बालीचौकी भी पहुंचे, जहां बीते दो दिनों की भारी बारिश के कारण भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं से भारी तबाही मची है। दर्जनों घर जमींदोज हो चुके हैं। जयराम ठाकुर ने बताया कि प्रदेश भर में आपदा का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कुल्लू, चंबा, बिलासपुर और ऊना जैसे जिलों में भी व्यापक नुकसान की खबरें हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश इस समय भीषण प्राकृतिक संकट से गुजर रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री ने आपदा पीड़ितों को राहत सामग्री एवं नगद आर्थिक सहायता भी प्रदान की। उन्होंने 48 प्रभावित परिवारों को नकद सहायता दी, जिनके घर, दुकान या पशुशालाएं बर्बाद हो गई हैं। इसके अलावा 150 से अधिक कंबल, गद्दे, तिरपाल, राशन और बर्तन की किट्स वितरित की गईं।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा की वजह से प्रदेश में हजारों लोग प्रभावित हुए हैं। उनके घर और जमीनें बह गई हैं। लोगों के बाग और फसलें नष्ट हो गई है। हजारों लोगों को विस्थापित होकर अपने रिश्तेदारों के यहां या किराए के मकानों में शरण लेनी पड़ी है। ऐसे में आपदा प्रभावितों को ज्यादा से ज्यादा और जल्दी से जल्दी सहायता की जानी चाहिए। आपदा के दौर में देर से मिली सहायता का कोई मतलब नहीं रहता है। जिनके घर चले गए और उनके रहने के लिए कोई जगह नहीं है उनके लिए बाद में मिली किसी भी सहायता का महत्व नहीं रहता। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए कहा कि आपदा की स्थिति को देखते हुए लोगों की जल्दी से जल्दी और ज्यादा से ज्यादा मदद की जाए। जिससे लोग प्रकृति की इस मार से बच सकें। नेता प्रतिपक्ष ने सभी आपदा प्रभावितों के मुद्दे को राज्य सरकार और विधानसभा में उठाने और ज्यादा से ज्यादा मदद दिलवाने का आश्वासन दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी कहा कि आपदा का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसकी वजह से प्रदेश में आपदा प्रभावितों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। जो आपदा डेढ़ महीने पहले मंडी और उसके आसपास के कुछ इलाकों तक ही केंद्र थी अब प्रदेश भर में विभिन्न रूपों में नजर आ रही है। किन्नौर, ऊना और चम्बा में भी इसका प्रकोप बढ़ रहा है। शिमला में मुख्यमंत्री आवास के ऊपर ही लैंडस्लाइड हुई और सैकड़ो लोग होटल में जाकर ठहरे और अभी भी खतरा वहां पर बना हुआ है। आपदा की वजह से ऐसी जगह पर तबाही हुई है, जहां पर कोई कभी सोच नहीं सकता था। सराज विधानसभा क्षेत्र में ही 12 से 14 हजार फीट की ऊंचाई से कटाव शुरु हुआ जहां पर लोग न के बराबर रहते थे। आपदा के कारण और उससे बचाव के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए हमें फिर से अध्ययन की आवश्यकता है। हमें नए स्तर पर नीतियां बनाकर उसे क्रियान्वित करनी होगी। जिससे आपदा के प्रभाव को न्यूनतम किया जा सके और लोगों के जान माल की क्षति रोकी जा सके।