आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला। ढल्ली आशियाना-2 कॉलोनी एक बार फिर सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर निगम शिमला ने पात्र परिवारों की अनदेखी कर संपन्न परिवारों और रिश्तेदारों को मकान आवंटित किए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक ही परिवार को दो-दो मकान दे दिए गए, जबकि उनके तीन सदस्य पहले से सरकारी नौकरी में हैं और कृष्णानगर में तीन मंज़िला मकान भी है। इतना ही नहीं, कई परिवारों के पास कर्सोग, सुन्नी, मंडी, बिलासपुर, कालका, दिल्ली और पंजाब तक ज़मीन-जायदाद मौजूद है।
खुलासा यह भी हुआ है कि कॉलोनी में मां-बेटी, मामा-भांजे, ताया-भतीजे जैसे रिश्तेदारों को मकान दिए गए हैं। लोगों का आरोप है कि निगम ने मकान पीजी, सबलेट और यहां तक कि गौ सदन कार्यालय के लिए भी बांटे।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि —
जब पात्र गरीब परिवार मकान के इंतज़ार में हैं, तो संपन्न और सरकारी नौकरी वाले परिवारों को क्यों तरजीह दी गई?
रिश्तेदारों को आवंटन करना क्या सीधी धांधली और पक्षपात नहीं है?
नगर निगम शिमला अब तक कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा?
स्थानीय निवासियों की मांग है कि नगर निगम उन परिवारों की कड़ी जांच करे जिनके पास पहले से अलग-अलग ज़िलों में ज़मीन-जायदाद और मकान हैं तथा जिनके कई सदस्य सरकारी नौकरियों में हैं।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस आवंटन घोटाले की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।