शूलिनी विश्वविद्यालय का पुष्प उत्सव: 500+ आगंतुकों ने देखा 200 से अधिक फूलों का अनोखा प्रदर्शन

0
1

आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

सोलन । शूलिनी विश्वविद्यालय के तीन दिवसीय वार्षिक पुष्प उत्सव में 500 से अधिक आगंतुकों ने भाग लिया। इस दौरान विश्वविद्यालय के फार्मों में उगाई गई 200 से अधिक किस्मों के फूलों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के वन विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. पंकज खुल्लर ने किया। उन्होंने वानिकी और मृदा संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं में अपने अनुभव साझा किए।

 

इस अवसर पर दुरलभ सिंह पुरी (रॉयल हॉर्टिकल्चरल सोसाइटी, यूके के आजीवन सदस्य) ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास लोगों को प्रकृति और पौधों के प्रति जागरूक बनाते हैं। उन्होंने बेगोनिया को अपना पसंदीदा पौधा बताया और इसकी देखभाल से मिलने वाले अनुभवों को साझा किया।
उत्सव में स्कूली छात्रों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिनमें सेंट ल्यूक स्कूल, सोलन पब्लिक स्कूल, गीता आदर्श विद्यालय और सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल के विद्यार्थी शामिल रहे। आयोजन में लकी ड्रॉ भी रखा गया, जिसमें 25 आगंतुकों को पुष्प उपहार प्रदान किए गए।

 

इस वर्ष 200 से अधिक प्रकार के पौधों का प्रदर्शन किया गया, जिनमें ऑर्किड, एंथुरियम, पिंक क्विल, ब्रोमेलियाड, रेनकुलस, बर्ड्स ऑफ पैराडाइज और बेगोनिया प्रमुख रहे। कुछ पौधे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंगवाए गए, जैसे क्रिसमस कैक्टस, जबकि बीज जर्मनी और इटली से आयात किए गए।

 

लैंडस्केप एवं इनोवेटिव प्रोजेक्ट्स के निदेशक सुरेश शर्मा ने बताया कि यह उत्सव अब अपने 13वें वर्ष में है और पहले 20 पौधों से शुरू होकर आज 200+ प्रजातियों तक पहुंच चुका है, जिनमें 10-15 दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां भी शामिल हैं।
महोत्सव में स्थिरता (Sustainability) को विशेष महत्व दिया गया। अपशिष्ट सामग्री से बनी कलाकृतियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

 

स्थिरता और सामुदायिक सहभागिता की निदेशक पूनम नंदा ने छात्रों के योगदान की सराहना की।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जिनमें कुलाधिपति प्रो. पी. के. खोसला, प्रो-चांसलर विशाल आनंद, कुलपति प्रो. अतुल खोसला, उपाध्यक्ष अवनी खोसला और निदेशक निष्ठा शुक्ला आनंद शामिल रहे।

 

यह पुष्प उत्सव न केवल सौंदर्य का उत्सव बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।