आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला । डॉ. राजीव बिंदल, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, मंत्रिगण, कांग्रेस विधायकों एवं नेताओं पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में लाखों बीपीएल परिवारों का गला घोंटने का काम कांग्रेस सरकार द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। बीपीएल चयन के लिए नए नियम बनाकर, बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के, जिलाधीशों के माध्यम से आनन-फानन में बीपीएल सूचियों से नाम काटे जा रहे हैं।
डॉ. बिंदल ने कहा कि कुछ जिलों में कल जो बीपीएल सूचियां प्रकाशित हुई हैं, उनमें लगभग 90 प्रतिशत तक पुराने बीपीएल परिवारों के नाम गायब कर दिए गए हैं, जो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गरीबों को योजनाओं से बाहर करने की साजिश है।
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस पूरी चयन प्रक्रिया में पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों—वार्ड पंच, प्रधान, उप-प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला परिषद सदस्य—किसी को भी विश्वास में नहीं लिया गया, न कोई बैठक बुलाई गई और न ही जमीनी स्तर की सच्चाई जानी गई। उन्होंने कहा कि यह काम सीधे-सीधे कांग्रेस के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और मुख्यमंत्री के दबाव में प्रशासन से करवाया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि तथ्यों के साथ प्रभावित गरीब परिवारों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं। नाहन विकास खंड सहित विभिन्न पंचायतों में जिन वास्तविक गरीब परिवारों के नाम बीपीएल सूची से काटे गए हैं, उनमें आशा देवी (पत्नी जिया राम), सद्दीक (पुत्र नूर मुहम्मद), पार्वती देवी (पत्नी स्व. महिपाल), रजनी (पत्नी स्व. राजवीर), अनीता देवी (पत्नी स्व. मान सिंह), निश्चा देवी (पत्नी स्व. सलिन्द्र सिंह), जतीन चौहान (पत्नी स्व. निर्मल सिंह), नीलम ठाकुर (पत्नी स्व. सुरजन सिंह), अलखदेव सिंह (पुत्र पनराम), राजेंद्र सिंह (पुत्र स्व. बलदेव सिंह), बनारसी दास (पुत्र आशुराम), जाहिदा (पत्नी स्व. नजीर), कमला देवी (पत्नी हंसराज), जद्वी देवी (पत्नी स्व. ओम पाल सिंह) सहित दर्जनों नाम शामिल हैं।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह केवल उदाहरण हैं, जबकि वास्तविक संख्या हजारों में है और पूरी सूची भाजपा द्वारा संलग्न की गई है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार अत्यंत निर्धन परिवारों पर इस स्तर की तानाशाही की जा रही है। कांग्रेस सरकार गरीबों की विरोधी है और अब जब उसका असली चेहरा उजागर हो रहा है तो मंत्रीगण भूख हड़ताल जैसे नाटक कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
डॉ. बिंदल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पर पूरी तरह ताला लगा दिया गया है। पंचायतों में विकास के लिए जारी धनराशि प्रदेश सरकार ने वापस मंगवा ली है और शेष राशि से होने वाले कार्य भी रोक दिए गए हैं, जिससे गांवों में सड़क, पानी, भवन और अन्य बुनियादी विकास कार्य ठप पड़े हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में दिए गए बयान के अनुसार कांग्रेस सरकार अगले छह महीनों तक पंचायत चुनाव नहीं करवाना चाहती, जो पूरी तरह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों की शक्तियां छीनकर कुछ अधिकारियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है, ताकि कांग्रेस नेता गांवों में मनमानी, दादागिरी और भ्रष्टाचार कर सकें। यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा डाका है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि मनरेगा के कार्य लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और केंद्र सरकार द्वारा लाई गई वीबी–जी राम जी योजना को भी प्रदेश में शुरू नहीं किया गया है। विकसित भारत के लक्ष्य के तहत बनी इस योजना से गरीबों को मिलने वाली 125 दिन की रोजगार गारंटी से प्रदेश के ग्रामीणों को जानबूझकर वंचित किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ बीपीएल सूची से नाम काटकर लाखों गरीब परिवारों का हक छीना जा रहा है, दूसरी तरफ रोजगार योजनाएं बंद कर गरीबों की आजीविका पर हमला किया जा रहा है और तीसरी तरफ पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। यह कांग्रेस सरकार का असली चेहरा है।
डॉ. राजीव बिंदल ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा इस अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा नामों, दस्तावेज़ों और तथ्यों के साथ कांग्रेस सरकार की गरीब विरोधी नीतियों को जनता के सामने लाती रहेगी और गरीबों, पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीण हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।











