आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला ।14 फ़रवरी 2019 भारतीय इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक है, जिसे देश कभी भुला नहीं सकता। जम्मू–कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग पर पाकिस्तान द्वारा पाले-पोसे गए आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफ़िले को ले जा रही बस पर विस्फोट कर दिया।
इस कायराना हमले में सीआरपीएफ के 40 वीर जवान शहीद हुए तथा 35 से अधिक गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना ने पूरे राष्ट्र को गहरे शोक और आक्रोश में डुबो दिया। यह ऐसा ज़ख़्म है, जो आज भी हर देशवासी के हृदय में उतना ही ताज़ा है।
भारत ने इस हमले के बाद आतंक के आगे झुकने से इनकार किया और 26 फ़रवरी 2019 को भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकानों पर प्रहार कर शहीदों को न्याय दिलाया। आज भी भारत आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होकर मजबूती से खड़ा है।
शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।
हिमाचल प्रदेश के पुलवामा बलिदानी
सीआरपीएफ वीर शहीद तिलक राज को श्रद्धांजलि
(सातवीं पुण्यतिथि)
वीरभूमि हिमाचल प्रदेश के जांबाज़ सपूत शहीद तिलक राज का जन्म 02 मई 1988 को ग्राम धेवा-जदरोह, उपमंडल ज्वाली में हुआ। गांववासी उन्हें स्नेहपूर्वक “सानू” कहकर पुकारते थे।
उनके पिता लायक राम, माता विमला देवी तथा छोटे भाई बलदेव सिंह हैं।
शहीद तिलक राज 26 मार्च 2007 को केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) में भर्ती हुए और देश सेवा को अपना जीवन-धर्म बनाया। वर्ष 2015 में उनका विवाह श्रीमती सावित्री देवी से हुआ। उनके दो पुत्र—वरुण एवं विवान हैं। शहादत के समय उनके छोटे पुत्र विवान की आयु मात्र 22 दिन थी।
आज दोनों बच्चे डलहौजी पब्लिक स्कूल, चंबा में अध्ययनरत हैं तथा उनकी शिक्षा का संपूर्ण व्यय श्री वीरेंद्र (मुकेश) अंबानी द्वारा वहन किया जा रहा है—जो राष्ट्र की ओर से एक संवेदनशील और सराहनीय सहयोग है।
फरवरी 2019 में शहीद तिलक राज छुट्टी समाप्त कर ड्यूटी पर लौटे थे और अप्रैल में पुनः घर आने का आश्वासन देकर गए थे, किंतु नियति को कुछ और ही स्वीकार्य था।
14 फ़रवरी 2019 को जम्मू–श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अवंतिपोरा के समीप गोरीपोरा में हुए आतंकी हमले में देश ने अपने 40 वीर सपूतों को खो दिया। इसी हमले में हिमाचल प्रदेश ने भी अपना लाल—शहीद तिलक राज—खो दिया।
शहीद तिलक राज न केवल एक साहसी जवान थे, बल्कि क्रिकेट और कबड्डी के उत्कृष्ट खिलाड़ी भी थे। उन्होंने कबड्डी में राज्य स्तर तक प्रतिभागिता की थी। छुट्टियों के दौरान वे गांव के बच्चों को खेलों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, अनुशासन और भाईचारे का संदेश देते तथा खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन करते थे।
वे एक लोकनायक और लोक कलाकार भी थे। हिमाचली संस्कृति पर आधारित उनके गीत—
“मेरा सिद्धू शराबी”, “गद्दन”, “मेरी मोनिका”—
आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय हैं। उनकी कला, सरलता और निःस्वार्थ सेवा उन्हें एक प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व बनाती है।
आज उनके गांव में शहीद तिलक राज की स्मृति में उनकी प्रतिमा स्थापित है। प्रत्येक वर्ष 14 फ़रवरी को प्रातः समस्त गांववासी एकत्र होकर प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हैं तथा उनकी स्मृति में विद्यालयी बच्चों के कबड्डी एवं अन्य खेलों का आयोजन किया जाता है।
अखिल भारतीय पूर्व अर्धसैनिक कल्याण एवं समन्वय संघ तथा एक्स-पैरामिलिट्री कल्याण संगठन हिमाचल प्रदेश के अध्यक्ष सेवानिवृत्त DIGP श्री वी.के. शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार एवं मुख्य संरक्षक श्री एम.एल. ठाकुर के नेतृत्व में, पालमपुर एवं कांगड़ा इकाइयों के पदाधिकारी, सीआरपीएफ पिंजौर से अधिकारीगण तथा सभी अर्धसैनिक बलों के प्रतिनिधि उपस्थित होकर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं और शहीद परिवार को सम्मानित करते हैं।
इस अवसर पर बलदेव राणा, सी.एस. खड़वाल, मंकोटिया सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहते हैं। आजकल
यह दिन प्रेम के रूप में भी मनाया जाता है । प्रेम का दिन हर दिन मनाया जाना चाहिए लेकिन देश के लिए अपने सर्वोच्च बलिदान देने वाले जांबाजों को कभी भुलना नहीं चाहिए।
“किसी ने वेलेंटाइन डे पर मोहब्बत को वक़्त दिया,
कुछ जांबाज़ों ने मातृभूमि को अपना रक्त दिया।”











