एक अर्धसैनिक बल (CAPF) का जवान अपनी शिकायतों के समाधान के लिए कहाँ जाए -वीके शर्मा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला ‌। मूल प्रश्न यह है— क्या भारतीय न्यायपालिका एक “खेल” बनकर रह गई है?
एक अर्धसैनिक बल (CAPF) का जवान अपनी शिकायतों के समाधान के लिए कहाँ जाए?
क्या भविष्य में कोई न्यायपालिका पर विश्वास करेगा?

क्या हम अपने पड़ोसी देशों की राह पर चल रहे हैं—जहाँ पक्षपात, भाई-भतीजावाद और अक्षमता हावी है?

CAPF विधेयक 2026 पूर्णतः पक्षपात, अक्षमता और मनोबल गिराने वाला कदम है, जो अंततः व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में ले जा सकता है। यह समाज में और अधिक विभाजन पैदा कर रहा है, जो राष्ट्रीय एकता के लिए खतरनाक है।
इसके अलावा, यह न्यायपालिका को भी हास्यास्पद स्थिति में ला देता है—मानो उसे सरकार के निर्देशानुसार ही निर्णय देने होंगे, अन्यथा सरकार अपनी सुविधा अनुसार कानून बदल सकती है।
सरकार जनता को क्या संदेश देना चाहती है? कि वह केवल उन्हीं निर्णयों का सम्मान करती है जो उसके पक्ष में हों?

मुख्य विवाद

यह विधेयक सरकार के उस कड़े रुख के रूप में देखा जा रहा है, जो मई 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध है। उस निर्णय में निम्न निर्देश दिए गए थे:
• CAPF में IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति (deputation) को धीरे-धीरे कम किया जाए
• कैडर समीक्षा की जाए
• सीधे भर्ती CAPF अधिकारियों को बेहतर पदोन्नति अवसर दिए जाएँ, ताकि ठहराव (stagnation) दूर हो सके

विधेयक की प्रमुख बातें:
• इसमें एक “notwithstanding clause” शामिल है, जिससे यह पूर्व कानूनों और न्यायालय के आदेशों को भी निष्प्रभावी कर सकता है

सरकार / IPS लॉबी का दृष्टिकोण:
• इसे प्रशासनिक सुधार बताया जा रहा है, बेहतर समन्वय और नेतृत्व के लिए

विपक्ष और CAPF अधिकारियों का दृष्टिकोण:
• सर्वोच्च न्यायालय की अवहेलना
• हजारों CAPF अधिकारियों का मनोबल गिराना
• CAPF के अपने नेतृत्व के विकास की कीमत पर IPS हितों की रक्षा करना

मनोबल और प्रभावशीलता

समय तेजी से बीत रहा है, क्योंकि मनोबल सीधे युद्ध क्षमता को प्रभावित करता है।
CAPF जवान ही नक्सल ऑपरेशनों, सीमा संघर्षों और आंतरिक तैनाती में सबसे अधिक बलिदान देते हैं।

जब अनुभवी फील्ड अधिकारी देखते हैं कि उनके करियर की सीमा तय है, जबकि बाहर से आए अधिकारी कम अनुभव के बावजूद नेतृत्व संभाल लेते हैं, तो यह गहरी निराशा पैदा करता है।
कई सेवानिवृत्त अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इससे बलों की “एथोस” (आत्मा/संस्कृति) कमजोर हो रही है।
CAPF बनाम IPS अनुभव

CAPF कैडर अधिकारी:
• जंगल, पहाड़ी और संघर्ष क्षेत्रों में 20–30 वर्षों का अनुभव
• विस्फोटक, सामरिक युद्ध, छोटे दल संचालन में विशेषज्ञता

IPS अधिकारी:
• राज्य पुलिस भूमिकाएँ—शहरी कानून व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक कार्य तक
• CAPF में प्रतिनियुक्ति अक्सर 2–3 वर्ष की
• कई बार इसे “करियर अवसर” के रूप में देखा जाता है

परिणाम:
IPS अधिकारी बिना पूर्व अनुभव के सीधे वरिष्ठ पदों (DIG/IG) पर नियुक्त हो जाते हैं।
कम समय में वे पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त कर लेते हैं, जिससे कैडर अधिकारियों में असंतोष बढ़ता है।पदोन्नति और वास्तविकता

यह केवल धारणा नहीं, बल्कि वास्तविक स्थिति है:
• CAPF अधिकारियों को पहली पदोन्नति (AC → Dy Commandant) के लिए 10–18 वर्ष लग जाते हैं
• IPS अधिकारियों के उच्च पदों पर होने से पूरी पदोन्नति श्रृंखला रुक जाती है
• IPS (2012 बैच) अधिकारी ~14 वर्षों में DIG बन सकते हैं
• जबकि CAPF अधिकारी 16+ वर्षों के बाद भी पहली पदोन्नति का इंतजार करते हैं

न्यायालय का दृष्टिकोण

सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2025 में:
• CAPF अधिकारियों को OGAS (Organised Group A Service) का दर्जा दिया
• IPS प्रतिनियुक्ति को IG स्तर तक धीरे-धीरे कम करने का आदेश दिया
• मनोबल गिरने और करियर रुकने को गंभीर समस्या माना

सरकार की पुनर्विचार याचिका अक्टूबर 2025 में खारिज कर दी गई

वर्तमान विधेयक सुधार के बजाय यथास्थिति (status quo) को बनाए रखने का प्रयास करता है।
यह निर्णय भविष्य में कितना टिकेगा, यह तब स्पष्ट होगा जब इन बलों की वास्तविक क्षमता की परीक्षा होगी।

आंकड़े और न्यायालय की टिप्पणियाँ यह दर्शाती हैं कि आपकी चिंता केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि उन बलों के भीतर व्यापक भावना है जो देश की सुरक्षा का

 

फ़ील्ड आपरेशन में जवानों से लेकर इन्स्पेक्टर तक के पदों का अधिक जोखिम रहता है। आंकड़े के अनुसार CAPF में 4663 जवानों ने और 166 कैडर अधिकारियों ने सर्वोच्च बलिदान दिए हैं जिसमें IPS अधिकारियों का आंकड़ा शुन्य है। जवानों की सुरक्षा में देश की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता देने की आपरेशन सिस्टम में सुधार लाने की बहुत जरूरत है।

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