आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की कोई स्थाई नीति नहीं, सदन में बोले CM सुक्खू

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए फिलहाल कोई स्थाई नीति नहीं है। विधायक प्रकाश राणा और डॉ. जनक राज द्वारा पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार नियमित और संविदा कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर हर महीने लगभग 1,172 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके मुकाबले आउटसोर्स कर्मचारियों पर खर्च काफी कम है। इस मद में सरकार लगभग 19 करोड़ रुपए प्रति माह खर्च करती है। सरकार ने सदन को यह भी बताया कि विभिन्न विभागों में करीब 13,000 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं।

 

 

राज्य के खजाने पर पेंशन का बोझ भी काफी अधिक बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पेंशनरों को कुल 10,536 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पेंशन से संबंधित आंकड़े कोषागार और अकाउंट्स संगठन द्वारा रखे जाते हैं और इसमें विभाग या श्रेणी के आधार पर कोई अलग-अलग वर्गीकरण नहीं होता, क्योंकि सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक ही पेंशनर श्रेणी में रखा जाता है।हिमाचल में आउटसोर्स कर्मचारियों के भविष्य पर बड़ा सवाल ❗
सदन में सुखविंदर सिंह सुक्खू का बयान—अभी तक कोई स्थायी नीति नहीं 😟
सालों से सेवा दे रहे हजारों कर्मचारियों को आखिर कब मिलेगा हक और सुरक्षा?
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