भारत की नई वैश्विक आर्थिक दिशा: शिक्षा, नवाचार और स्थिरता का संगम

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय (कोटशेरा), चौड़ा मैदान, शिमला, RIS नई दिल्ली एवं देश भगत विश्वविद्यालय, मंडी गोबिंदगढ़, पंजाब द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय (8-9 मई 2026) अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “नवीन वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा” (Navigating the Indian Economy in New Global Economic Order) के समापन एवं वैलेडिक्टरी समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. हरीश कुमार, निदेशक उच्च शिक्षा, हिमाचल प्रदेश रहे।

 

उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका लगातार सशक्त हो रही है। तकनीकी विकास और नवाचार से प्रगति संभव है, लेकिन पर्यावरणीय स्थिरता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने ग्रीन इकॉनमी, अनुसंधान एवं नवाचार, सीड फंडिंग तथा कोलेटरल-फ्री लोन की अवधारणा को भारत के भविष्य के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी राष्ट्र मजबूत शैक्षणिक संस्थानों के बिना आगे नहीं बढ़ सकता। उच्च शिक्षा का दायित्व है कि वह आदर्श नागरिकों के साथ-साथ कुशल नेतृत्व तैयार करे। भारत की जनसांख्यिकीय लाभांश उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय (कोटशेरा), को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी।

 

सम्मेलन के संरक्षक डॉ. गोपाल चौहान, प्राचार्य, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय (कोटशेरा), ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन न केवल महाविद्यालय के लिए गौरव का विषय है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक जगत के लिए भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डॉ. चौहान ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा और अनुसंधान ही किसी राष्ट्र की प्रगति की नींव होते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस प्रकार के सम्मेलन विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और सहयोग का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने विशेष रूप से निजी-सरकारी साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर हुई चर्चाओं को भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

 

सम्मेलन संयोजक डॉ. राकेश शर्मा तथा आयोजन सचिव डॉ. पी.एल. वर्मा ने सम्मेलन की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में अनुसंधान को बढ़ावा, निजी-सरकारी साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं शिक्षा जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। शोध-पत्रों का हाइब्रिड रूप में प्रस्तुतिकरण हुआ। भूराजनीतिक परिदृश्य और भारतीय अर्थव्यवस्था के निहितार्थ पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। ग्रामीण एवं कृषि अर्थव्यवस्था की चुनौतियों और अवसरों पर विमर्श हुआ। लाहौल-स्पीति में हो रहे परिवर्तन, उच्च हिमालयी वनस्पति एवं पशुधन में बदलाव तथा मानव पूंजी के महत्व पर विशेष सत्र आयोजित किए गए।

 

डॉ. अनुप्रिया शर्मा, संयोजक, अनुसंधान एवं विकास प्रकोष्ठ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, सहयोगी संस्थानों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया।

 

 

यह सम्मेलन भारतीय अर्थव्यवस्था की चुनौतियों और अवसरों पर गहन विमर्श का मंच बना। इसमें शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की भूमिका को स्पष्ट किया गया। सम्मेलन ने यह संदेश दिया कि भारत का भविष्य तकनीकी प्रगति, पर्यावरणीय स्थिरता, अनुसंधान, नवाचार और मजबूत शैक्षणिक संस्थानों पर आधारित है।