शूलिनी यूनिवर्सिटी ने रचा इतिहास, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में देश की नंबर-1 प्राइवेट यूनिवर्सिटी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो।

सोलन । हिमाचल प्रदेश की प्रतिष्ठित शूलिनी यूनिवर्सिटी ने वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दुनिया की शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों की सूची में स्थान बनाया है। यूनिवर्सिटी को वैश्विक स्तर पर 452वां तथा भारत में समग्र श्रेणी में 10वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही शूलिनी यूनिवर्सिटी लगातार चौथे वर्ष देश की नंबर-1 निजी विश्वविद्यालय बनी हुई है।

 

 

QS क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS Quacquarelli Symonds) द्वारा जारी वर्ष 2027 की रैंकिंग में 106 देशों की 1,500 से अधिक विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। भारत की 52 विश्वविद्यालयों को इस सूची में स्थान मिला है, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। इनमें शूलिनी यूनिवर्सिटी एकमात्र निजी विश्वविद्यालय है, जिसने लगातार चार रैंकिंग चक्रों में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष-10 में अपनी जगह बनाए रखी है।

 

 

पिछले कुछ वर्षों में शूलिनी यूनिवर्सिटी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2023 में 801-1000 बैंड से शुरुआत करने वाली यूनिवर्सिटी 2024 में 771-780, 2025 में 587, 2026 में 503 और अब 2027 में 452वें स्थान पर पहुंच गई है। यह लगातार सुधार संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

 

 

रैंकिंग में सबसे उल्लेखनीय सुधार “साइटेशन प्रति फैकल्टी” श्रेणी में दर्ज किया गया है, जिसमें शूलिनी यूनिवर्सिटी ने वैश्विक स्तर पर 138वें स्थान से छलांग लगाकर 76वां स्थान हासिल किया है। 62 स्थानों की यह बढ़त भारतीय संस्थानों में अनुसंधान प्रभाव के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। QS रैंकिंग में इस मानदंड का 20 प्रतिशत वेटेज है, जो किसी संस्थान की शोध गुणवत्ता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

 

संस्थापक चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की दूरदर्शी सोच, शोध के प्रति समर्पण और नवाचार की संस्कृति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शूलिनी का उद्देश्य केवल एक विश्वविद्यालय बनाना नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने वाला वैश्विक संस्थान स्थापित करना था।

 

 

प्रो-चांसलर विशाल आनंद ने कहा कि आज के छात्र वैश्विक अवसरों, उत्कृष्ट शोध और उद्योग से जुड़े अनुभवों की तलाश में हैं। इस प्रकार की रैंकिंग विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर सृजित करने में मदद करती है।

 

 

वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने कहा कि भारत का भविष्य उन संस्थानों पर निर्भर करेगा जो शोध, नवाचार और समस्या समाधान को प्राथमिकता देते हैं। यह उपलब्धि ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण की दिशा में शूलिनी के प्रयासों को दर्शाती है, जहां विद्यार्थी और शोधकर्ता विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी ने हाल के वर्षों में अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन सहित 2,000 से अधिक बौद्धिक संपदा आवेदन दर्ज किए हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय का H-इंडेक्स 150 से अधिक है तथा इसके 19 वैज्ञानिक स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं।

 

 

इस वर्ष की शुरुआत में QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट 2026 में भी शूलिनी यूनिवर्सिटी को सात विषयों में विश्व की शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में स्थान मिला था। यही नहीं, एम्प्लॉयर रेप्युटेशन और सस्टेनेबिलिटी जैसे मानकों में भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।

 

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी के इनोवेशन एवं टेक्नोलॉजी प्रेसिडेंट प्रो. आशीष खोसला ने कहा कि यह सफलता गुणवत्तापूर्ण शोध, वैश्विक सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक और विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने वाली दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम है।

 

 

गौरतलब है कि शूलिनी यूनिवर्सिटी से ऊपर रैंक प्राप्त करने वाले सभी नौ भारतीय संस्थान सरकारी वित्तपोषित हैं और कई दशकों पुराने हैं, जबकि वर्ष 2009 में स्थापित शूलिनी यूनिवर्सिटी ने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाते हुए देश और दुनिया में उत्कृष्टता का नया मानदंड स्थापित किया है।