सुख-आश्रय से अबकी बरसात चैन से सोये अभिषेक

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों
ऊना ।  पहले बरसात आते ही ऊना जिले के बहडाला के अभिषेक कुमार की चिंता बढ़ जाती थी। कच्चे मकान की छत और दीवारों को लेकर मन में यही सवाल रहता कि इस बार बारिश कितनी परेशानी लेकर आएगी। पक्का घर बनाने की इच्छा थी, लेकिन दिहाड़ी-मजदूरी से होने वाली सीमित आमदनी में यह संभव नहीं हो पा रहा था। बरसात आते ही यह चिंता और गहरा जाती थी। लेकिन इस बार अभिषेक ने बरसात चिंता में नहीं, चैन से गुजारी। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू हुई मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना के तहत मिली तीन लाख रुपये की सहायता ने उनके पक्के घर की हसरत पूरी करने में महत्वपूर्ण मदद की। अपनी जमा पूंजी के साथ योजना से मिली सहायता से 24 वर्षीय अभिषेक ने अपनी पक्के घर की हसरत पूरी हो गई है।
वर्ष 2006 में पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी अभिषेक के सामने आ गई। उनके पिता दिहाड़ी-मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। वर्ष 2016 में मां का भी निधन हो गया। माता-पिता के जाने के बाद अभिषेक को कम उम्र में ही अपनी जिंदगी संभालने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। उन्होंने मजदूरी की और इसके साथ अपनी पढ़ाई भी पूरी की।
कच्चे मकान में रहते हुए बरसात के दिनों में परेशानी बनी रहती थी। नया पक्का मकान बनाने की जरूरत महसूस होती थी, लेकिन रोजमर्रा के खर्चों के बीच इसके लिए रकम जुटा पाना आसान नहीं था। इसी दौरान अभिषेक को मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना की जानकारी मिली।
उन्होंने स्थानीय आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क किया। इसके बाद उन्हें जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय, ऊना से जोड़ा गया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद योजना के तहत आवास निर्माण के लिए उन्हें तीन लाख रुपये की सहायता चार किस्तों में मिली। अभिषेक ने अपनी जमा पूंजी के साथ इस सहायता का उपयोग कर उसी भूमि पर नया पक्का मकान तैयार किया है।
सुख-आश्रय योजना के तहत अभिषेक को जीवन-यापन के लिए हर माह चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता भी मिल रही है। उनका कहना है कि माता-पिता के जाने के बाद जीवन संभालना मुश्किल था। सरकार से मिली सहायता से घर बनाने में मदद मिली और हर माह मिलने वाली आर्थिक सहायता से रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भी सहारा मिल रहा है।
अभिषेक मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त करते हैं।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना 28 फरवरी, 2023 को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर शुरू की गई थी। योजना के तहत माता-पिता का संरक्षण खो चुके बच्चों और युवाओं की शिक्षा, देखभाल, आवास और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए सहायता का प्रावधान किया गया है।
हिमाचल प्रदेश ने अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का कानूनी दर्जा दिया है। पात्र बच्चों और युवाओं को 27 वर्ष की आयु तक सहायता दी जा रही है। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, विवाह सहायता और आवास के साथ पात्र युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए दो लाख रुपये तक की सहायता का भी प्रावधान है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना हरीश मिश्रा ने बताया कि योजना के तहत पात्र बच्चों और युवाओं को शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, विवाह सहायता और आवास निर्माण सहित विभिन्न जरूरतों के लिए सहायता प्रदान की जा रही है।
उपायुक्त ऊना जतिन लाल ने कहा कि मुख्यमंत्री
सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार जिला प्रशासन पात्र बच्चों और युवाओं तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना जरूरतमंद बच्चों और युवाओं को शिक्षा, आवास तथा जीवन की अन्य आवश्यक जरूरतों में सहारा दे रही है।