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विधान सभा अध्यक्ष ने दी प्रदेश तथा देश वासियों को क्रिसमस की बधाई।

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला। हिमाचल प्रदेश विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानियां ने देश तथा प्रदेश वासियों को क्रिसमस की बधाई दी है अपने बधाई सन्देश में पठानियां ने कहा कि क्रिसमस का पावन पर्व पूरे देश सहित विश्वभर में हर्ष, उल्लास और भाईचारे के वातावरण में मनाया जाता है। यह पर्व ईसाई धर्म के प्रवर्तक प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है, जो प्रेम, करुणा, त्याग और मानवता की सेवा का संदेश देता है। हर वर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाने वाला यह त्योहार न केवल ईसाई समुदाय के लिए, बल्कि सभी धर्मों और वर्गों के लोगों के लिए आपसी सौहार्द और शांति का प्रतीक बन चुका है।

 

पठानियां ने कहा कि क्रिसमस के अवसर पर शहरों और कस्बों में स्थित गिरजाघरों को आकर्षक रोशनी, रंग-बिरंगी सजावट, फूलों और क्रिसमस ट्री से सजाया जाता है और विशेष प्रार्थना सभाओं का आयोजन किया जाता है। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेकर प्रार्थनाओं के द्वारा विश्व शांति, आपसी प्रेम, सद्भाव और मानव कल्याण की कामना करते है। क्रिसमस के दिन बच्चों व युवाओं में विशेष उत्साह देखने को मिलता है। सांता क्लॉज के रूप में सजे स्वयंसेवक बच्चों को उपहार, टॉफी और चॉकलेट इत्यादि बाँटते हैं।

 

उन्होंने कहा कि प्रभु यीशु मसीह का जीवन हमें सत्य, अहिंसा, क्षमा और मानव सेवा का मार्ग दिखाता है। उन्होंने समाज में फैली नकारात्मकता, हिंसा और भेदभाव को दूर कर आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया। क्रिसमस का पर्व भारत की सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक सहिष्णुता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता है।

 

पठानियां ने सभी को क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रभु यीशु मसीह के उपदेशों को जीवन में अपनाकर ही हम एक बेहतर, शांतिपूर्ण और समृद्ध समाज का निर्माण कर सकते हैं।

एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी ने राजीव गांधी सरकारी कॉलेज, चौरा मैदान के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

 

शिमला । एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी और राजीव गांधी सरकारी कॉलेज, चौरा मैदान, शिमला ने आज औपचारिक रूप से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करना और संयुक्त गतिविधियों को बढ़ावा देना है।

 

एमओयू पर हस्ताक्षर राजीव गांधी सरकारी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गोपाल चौहान ने अपने कॉलेज की ओर से किए, जबकि एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी की ओर से रजिस्ट्रार डॉ. आर.एल. शर्मा ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर डॉ. पी.एल. वर्मा और डॉ. राकेश शर्मा सहित राजीव गांधी सरकारी कॉलेज के अन्य शिक्षक भी मौजूद थे।

 

यह साझेदारी संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रमों जैसे सेमिनार, कार्यशालाएं, वेबिनार और मूल्य वर्धित पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने के लिए तैयार की गई है। यह छात्रों के लिए इंटर्नशिप, प्रतियोगिताओं और सामुदायिक सेवा कार्यक्रमों में भाग लेने के अवसर भी प्रदान करेगी। शिक्षक विशेषज्ञ व्याख्यान, फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी), पाठ्यक्रम संवर्धन और शैक्षणिक मार्गदर्शन में सहयोग करेंगे।

 

एमओयू की एक महत्वपूर्ण विशेषता शैक्षणिक बुनियादी ढांचे और सुविधाओं का साझा उपयोग है, जैसे पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, आईसीटी संसाधन और सेमिनार हॉल, ताकि संयुक्त शोध और शिक्षण गतिविधियों का समर्थन किया जा सके। यह दोनों संस्थानों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित किए बिना किया जाएगा।

 

सही क्रियान्वयन और समीक्षा सुनिश्चित करने के लिए, दोनों संस्थानों के नामित शिक्षक सदस्य मिलकर एक संयुक्त समन्वय समिति बनाएंगे, जो कम से कम साल में एक बार बैठक करेगी। यह समझौता हस्ताक्षर की तारीख से तीन वर्षों के लिए प्रभावी रहेगा और आपसी सहमति से इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।
यह सहयोग एपीजी शिमला यूनिवर्सिटी और राजीव गांधी सरकारी कॉलेज की हिमाचल प्रदेश में शैक्षणिक उत्कृष्टता, शोध और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

एसजेवीएन ने राजस्थान में 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना की सीओडी को हासिल किया।

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शिमला ।  भूपेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एसजेवीएन ने अवगत कराया है कि एसजेवीएन ने आज राजस्थान के 1000 मेगावाट क्षमता वाले बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना की वाणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) सफलतापूर्वक हासिल की है। यह उपलब्धि देश की विद्युत उत्पादन क्षमता को सुदृढ़ करने की दिशा में कंपनी की यात्रा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

 

 गुप्ता ने इस शानदार उपलब्धि के लिए सभी कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता न सिर्फ एसजेवीएन की तकनीकी उत्कृष्टता को प्रदर्शित करती है, अपितु कर्मचारियों, ठेकेदारों और सभी स्टेकहोल्डर्स के समर्पण और समन्वित प्रयासों को भी दर्शाती है।

SJVN achieves COD of 1000 MW Bikaner Solar Power Project in Rajasthan.
SJVN achieves COD of 1000 MW Bikaner Solar Power Project in Rajasthan.

 

 गुप्ता ने आगे बताया कि 1000 मेगावाट बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना राजस्थान के बीकानेर जिले में अवस्थित है और इसे एसजेवीएन अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली अधीनस्थ कंपनी एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एसजीईएल) के माध्यम से कार्यान्वित कर रहा है। यह परियोजना प्रचालन के प्रथम वर्ष में 2,454.55 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पन्न करेगी और 25 वर्षों में कुल मिलाकर लगभग 56,838 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पन्न करेगी। अधिकतम उपयोग शुल्क ₹2.57 प्रति यूनिट तय किया गया है, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती ग्रीन ऊर्जा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इस परियोजना से उत्पन्न होने वाली सौर ऊर्जा की राजस्थान, जम्मू एवं कश्मीर और उत्तराखंड राज्यों को आपूर्ति की जाएगी।

 

 अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक) ने इसमें शामिल सभी कार्मिकों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और बताया कि यह परियोजना राजस्थान के बीकानेर ज़िले में बांदरवाला गांव के समीप पूर्ण रूप से खरीदी गई 5,000 एकड़ भूमि पर बनाई गई है। यह देश के सबसे ज़्यादा सोलर एनर्जी वाले इलाकों में से एक है। उन्होंने आगे कहा कि इस परियोजना की कमीशनिंग से भारत सरकार के वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

 

 सिपन कुमार गर्ग निदेशक (वित्त) एसजेवीएन ने कहा कि यह परियोजना ₹5,492 करोड़ की लागत से बनाई गई है और इसे डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (डीसीआर) मोड के तहत पूरा किया गया है, जिसमें देश में बने सोलर फोटोवोल्टिक सेल और मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया है, जिससे मेक इन इंडिया पहल को बढ़ावा मिला है। ग्रिड को स्वच्छ ऊर्जा देने के अलावा, इस परियोजना से अनुमानित 27,85,077 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

इससे पूर्व, भारत की माननीय राष्ट्रपति, श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने दिनांक 3 जनवरी 2023 को जयपुर, राजस्थान में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी।

 

 

1000 मेगावाट की बीकानेर सौर ऊर्जा परियोजना को भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम (सीपीएसयू) योजना – फेस II, ट्रेंच III के तहत विकसित किया गया है। डीसीआर मोड के तहत लागू होने से स्वदेशी सौर विनिर्माण इकोसिस्टम को और अधिक बढ़ावा मिलने की संभावना है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर में चिकित्सा छात्रों एवं कर्मचारियों के लिए नशा-विरोधी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

बिलासपुर । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश) में आज नशीले पदार्थों (विशेषकर चिट्टा) के दुरुपयोग के विरुद्ध संस्थान के चिकित्सा छात्रों एवं कर्मचारियों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन संस्थान के सभागार में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य भावी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों में नशा-मुक्त जीवनशैली को प्रोत्साहित करना तथा समाज में नशा-विरोधी संदेश को सुदृढ़ करना था।

 

कार्यक्रम में अतिथि वक्ता के रूप में श्री अशोक तिवारी, पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश तथा डॉ. आकृति शर्मा, भारतीय पुलिस सेवा, कमांडेंट, प्रथम भारतीय रिज़र्व बटालियन, बंगराह, जिला ऊना, हिमाचल प्रदेश उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम के प्रारंभ में संस्थान के कार्यकारी निदेशक, लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह (सेवानिवृत्त) द्वारा दोनों अतिथि वक्ताओं को पारंपरिक हिमाचली शॉल, टोपी एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर अपने स्वागत एवं धन्यवाद संबोधन में कार्यकारी निदेशक महोदय ने कहा कि अत्यंत व्यस्त कार्यसूची के बावजूद माननीय अतिथियों का एम्स बिलासपुर पधारकर प्रशिक्षु चिकित्सा छात्रों एवं संस्थान के कर्मचारियों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना सराहनीय एवं प्रेरणादायी है। उन्होंने इसके लिए संस्थान की ओर से दोनों गणमान्य अतिथियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

 

अपने संबोधन में  पुलिस महानिदेशक, हिमाचल प्रदेश ने चिट्टा जैसे घातक नशीले पदार्थों के कारण समाज में उत्पन्न हो रही गंभीर चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए युवाओं से नशे से दूर रहने का आह्वान किया।  तिवारी ने प्रशिक्षु छात्रों से चिकित्सा क्षेत्र में अपेक्षित संवेदनशीलता की आवश्यकता और महत्ता पर बल देते हुए यह आह्वन भी किया कि एक चिकित्सक का पेशा चुनौतीपूर्ण और कठिनाइयों से भरा है और वह अपनी व्यक्तिगत मनोस्थिति और समस्याओं के बावजूद मरीजों के उपचार में तन्मयता से लगा रहता है। अतः आप भी प्यार और संवेदनशीलता से इस पेशे की महत्ता को बरकरार रखें और देश के विकास में अपना योगदान दें। वहीं, डॉ. आकृति शर्मा, ने चिकित्सा छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि भावी चिकित्सक होने के नाते उनसे समाज में अनुकरणीय, जिम्मेदार एवं संवेदनशील आचरण की अपेक्षा की जाती है तथा नशे के विरुद्ध जागरूकता फैलाने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

 

 

कार्यकारी निदेशक ने अपने वक्तव्य में यह भी स्पष्ट किया कि समाज से नशा रूपी इस बुराई को जड़ से समाप्त करने के लिए एम्स बिलासपुर पूरी दृढ़ता के साथ इस संघर्ष में खड़ा है तथा भविष्य में भी इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नशा-मुक्त समाज के निर्माण हेतु निरंतर प्रयास करता रहेगा।

 

 

उक्त कार्यक्रम में संस्थान के सभी वरिष्ठ अधिकारी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. रूपाली पारलेवार, कुलसचिव, संकाय सदस्य, चिकित्सक, नर्सिंग अधिकारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन नशामुक्त समाज के संकल्प के साथ किया गया।
यह कार्यक्रम एम्स बिलासपुर की सामाजिक प्रतिबद्धता, जनहितकारी दृष्टिकोण एवं युवाओं के सर्वांगीण विकास के प्रति संस्थान की संवेदनशीलता को दर्शाता है।

गरीब सुमना पर विपदा पड़ी तो कामगार कल्याण बोर्ड ने दिया सहारा

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आदर्श हिमाचल विशेष रिपोर्ट

     हमीरपुर।  एक तो गरीबी और ऊपर से पति की असामयिक मृत्यु और उस पर तीन-तीन बच्चों एवं वृद्ध सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी। किसी महिला पर इस तरह की विपदा आन पड़े तो ऐसे में, वह उस विपदा से कैसे निपटे? वह किससे मदद मांगे।

 

लेकिन, किसी श्रमिक परिवार की कोई भी महिला या अन्य श्रमिक ऐसी विपरीत परिस्थितियों से घिर जाए और वह हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत हो तो उसे बोर्ड की ओर से काफी मदद मिल सकती है।

 

 

कुछ ऐसी ही परिस्थितियों से घिरी जिला हमीरपुर के भरेड़ी क्षेत्र के गांव घुरालड़ा की सुमना देवी को कामगार कल्याण बोर्ड ने बहुत बड़ा सहारा प्रदान किया है। अगर बोर्ड की कल्याणकारी योजनाएं न होती तो आज शायद सुमना देवी, उसके बच्चों और सास-ससुर को न जाने कितनी मुसीबतें झेलनी पड़तीं।

 

सुमना देवी और उसके पति प्रवीण कुमार दिहाड़ी-मजदूरी और खेती-बाड़ी करके अपनी गुजर-बसर कर रहे थे। इन्हांेने भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड में भी अपना पंजीकरण करवा रखा था। कुछ वर्ष पूर्व प्रवीण कुमार को बीमारी ने घेर लिया और लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व उनकी असामयिक मृत्यु हो गई। इससे सुमना देवी, उसके तीन बच्चों और वृद्ध सास-ससुर पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। बच्चों की पढ़ाई तो दूर, परिवार के दैनिक खर्चे चलाना भी मुश्किल हो गया।
पूरी तरह से आस छोड़ चुकी सुमना देवी के लिए भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड की योजनाएं बहुत बड़ी उम्मीदें लेकर आईं। सुमना देवी और उनके पति बोर्ड में पंजीकृत श्रमिक थे। इसलिए, वे इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र थे। पति की असामयिक मृत्यु पर सुमना देवी को बोर्ड ने 2.20 लाख रुपये की आर्थिक मदद जारी की। इससे पूरे परिवार को बहुत बड़ा सहारा मिला।

 

अब बीएससी नर्सिंग का कोर्स कर रही बड़ी बेटी, ग्यारहवीं कक्षा में पढ़ रहे बेटे और छोटी बेटी की फीस के लिए भी सुमना देवी ने बोर्ड में आवेदन कर दिया है। इससे सुमना देवी को घर-परिवार को चलाने के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई की चिंता करने की आवश्यकता भी नहीं है।

 

यही नहीं, अब उसने जर्जर हो चुके अपने पुराने मकान की जगह नया मकान बनाने के लिए भी कामगार कल्याण बोर्ड से 3 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्राप्त करने के लिए आवेदन किया है। भविष्य में बच्चों की शादी के लिए भी उसे बोर्ड की ओर से आर्थिक मदद मिल सकती है

गरीब सुमना पर विपदा पड़ी तो कामगार कल्याण बोर्ड ने दिया सहारा
गरीब सुमना पर विपदा पड़ी तो कामगार कल्याण बोर्ड ने दिया सहारा

 

हिमाचल प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष नरदेव सिंह कंवर ने बताया कि बोर्ड की 14 कल्याणकारी योजनाएं सुमना देवी जैसी गरीब श्रमिकों के परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही हैं।

शिक्षा का सुदृढ़ीकरण प्रदेश सरकार का लक्ष्य- हर्षवर्धन चौहान

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों   
नाहन ।  उद्योग, संसदीय कार्य एवं श्रम रोजगार मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने आज शिलाई विधानसभा क्षेत्र के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला टिम्बी में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में पहुंचने पर क्षेत्रवासियों तथा विद्यालय प्रबंधन द्वारा उद्योग मंत्री का पारंपरिक वाद्य यंत्रों सहित भव्य स्वागत किया गया।
उद्योग मंत्री ने टिम्बी स्कूल में 4.50 लाख से निर्मित मंच का लोकार्पण किया तथा 10 लाख से टाइलों व ग्राउंड के हुए जीर्णोद्धार कार्य का निरीक्षण किया।
उद्योग मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का स्तर बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है ताकि ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध हो सके। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बेहतर आधारभूत ढांचा, आधुनिक शिक्षण सुविधाएं तथा योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थी भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न श्रेणियों के 6500 शिक्षकों की भर्ती की गई तथा उनकी नियुक्ति दूर-दराज क्षेत्रों में रिक्त पड़े पदो पर की गई है।उन्होंने कहा कि छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने के उद्देश्य से सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से अंग्रेजी मीडियम की शिक्षा शुरू की गई है तथा प्रथम चरण में प्रदेश के 100 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, परिश्रम और नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया ताकि उनका पूर्ण व्यक्तित्व निखर सकें। उद्योग मंत्री ने विद्यार्थियों को मेहनत, अनुशासन और लगन के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने को कहा। उन्होंने कहा कि आज का विद्यार्थी ही कल का भविष्य है और सही मार्गदर्शन एवं अवसर मिलने पर वे प्रदेश और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य शिलाई विधानसभा क्षेत्र को मॉडल विधानसभा क्षेत्र बनाना है, जिसके दृष्टिगत इस कार्यकाल में अभी तक शिलाई विधान सभा क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, बिजली तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए लगभग 300 करोड़ की विकासात्मक योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है।
इससे पूर्व उद्योग मंत्री ने दीप प्रज्वलन कर वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
उद्योग मंत्री ने वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह के दौरान विद्यालय के मेधावी छात्र-छात्राओं को शैक्षणिक, खेल तथा सांस्कृतिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुस्कृत भी किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य अनिल कुमार शर्मा ने विद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट तथा संस्थान की उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। विद्यालय प्रबंधन तथा क्षेत्र वासियों द्वारा मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया।
उद्योग मंत्री ने टिम्बी स्कूल द्वारा प्रस्तुत सभी मांगों के लिए 15 लाख, स्कूल के लिए 300 डेस्क, साइंस लैब, कल्चरल पोशाक के लिए 1 लाख देने की घोषणा की।
इस दौरान अध्यक्ष मार्केटिंग कमेटी सीता राम शर्मा, एसडीएम जसपाल, उपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा हेमेंद्र बाली, अधिशाषी अभियंता जल शक्ति शिलाई प्रदीप चौहान,एसएमसी अध्यक्ष कुलदीप सिंह चौहान, जिला परिषद सदस्य चमेली चौहान, उप प्रधान कुलदीप सिंह चौहान, अध्यक्षा कांग्रेस महिला मोर्चा श्याम कला, ओएसडी अत्तर राणा, रवींद्र राणा, रण सिंह चौहान, लाल सिंह चौहान,सोहन सिंह सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधि तथा स्थानीय लोग मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने आई.जी.एम.सी. में हुई घटना की जांच 24 दिसम्बर तक पूर्ण कर कार्रवाई करने के दिए निर्देश मुख्य मंत्री ।

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने  यहां स्वास्थ्य विभाग, इंदिरा गांधी चिकित्सा महाविद्यालय, शिमला और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों और आई.जी.एम.सी. शिमला में 22 दिसम्बर को हुई घटना पर विस्तृत चर्चा की गई।

 

मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग, आई.जी.एम.सी और निदेशालय चिकित्सा शिक्षा के अधिकारियों से इस घटना से जुड़े सभी तथ्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी ली।

 

सुक्खू ने कहा कि इस घटना की जांच 24 दिसम्बर, 2025  तक पूर्ण कर अतिशीघ्र उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि हर संस्थान में पेशेवरों का व्यवहार सौम्य और शांत होना चाहिए। इससे व्यक्तित्व के साथ-साथ संस्थान की छवि भी झलकती है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आई.जी.एम.सी. से पढ़ाई करने के उपरान्त चिकित्सकों ने राज्य का नाम देश और विदेश में रौशन किया है। आई.जी.एम.सी. में हुई घटना निंदनीय है। किसी भी संस्थान में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

 

सुक्खू ने निदेशालय चिकित्सा शिक्षा को सीनियर रेजिडेंसी करने के लिए चिकित्सा महाविद्यालय में आने वाले चिकित्सकों को इंडक्शन टेªनिंग प्रदान करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सीनियर रेजिडेंसी प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने विगत तीन वर्षों के दौरान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक महत्त्वाकांक्षी पहल की हैं। चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ को संस्थान और अस्पताल में बेहतर वातावरण प्रदान करने के लिए विश्व-स्तरीय मानकों को अपनाया जा रहा है।

 

 

सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को न केवल सुदृढ़ कर रही है बल्कि इस क्षेत्र में आदर्श राज्य बनने के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश में आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास और विस्तार पर तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य संस्थानों में दो दशकों से इस्तेमाल हो रहे पुराने चिकित्सा उपकरणों को नए और अत्याधुनिक उपकरणों से बदला जा रहा है।

 

 

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल ने चिकित्सा शिक्षा से सम्बन्धित विभिन्न सुझाव दिए।
मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव स्वास्थ्य संदीप कदम, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. गोपाल बेरी, एम.एस. आई.जी.एम.सी डॉ.राहुल राव, अतिरिक्त निदेशक नीरज कुमार गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

हिमाचल प्रदेश: आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर ने की मारपीट, मरीज के नाक से निकला खून 

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

 

शिमला ।प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी शिमला में डॉक्टर द्वारा मरीज की पिटाई करने का मामला सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि डॉक्टर मरीज में मुंह पर घूंसे मार रहा है।

आईजीएमसी शिमला के श्वास रोग विभाग में मरीज के साथ चिकित्स्क ने मारपीट की है। मारपीट में मरीज के नाक से खून निकला है। *वहीं, घटना के बाद मरीज भड़क गए हैं और डॉक्टर की बर्खास्तगी की मांग की जा रही है। मरीज का नाम अर्जुन बताया जा रहा है जो कि इलाज के लिए अस्पताल आया था। परिजनों का आरोप है की डॉक्टर ने तू-तड़ाक कर बात शुरू की, जिसके बाद डॉक्टर मरीज के साथ मारपीट पर उतर गया।* वीडियो में साफ देखा जा सकती है कि डॉक्टर मरीज में मुंह पर घूंसे मार रहा है। आईजीएमसी अस्पताल प्रबंधन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। मामले में कौन कितना दोषी है, इसका खुलासा जांच के बाद ही हो पाएगा। वीडियो का लिंक मरीज के साथ आए परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर दिया और डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए।

 

बताया जा रहा है कि शिमला के कुपवी के रहने वाले एक निजी अकादमी में पढ़ाने वाले मरीज के साथ मारपीट की गई है। वह आईजीएमसी में एंडोस्कॉपी करवाने आए थे। परिजनों ने आरोपी डॉक्टर और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की है।

 

बताया जा रहा है कि मरीज एंडोस्कॉपी करवाने आया था तो डॉक्टर ने उन्हें कुछ देर के लिए बेड पर आराम करने के लिए कहा था। इस दौरान जब वह खाली पड़े बेड पर सो रहे तो मास्क पहन कर एक डॉक्टर आया और बदतमीजी करने लगा। इस पर मरीज के तीमारदारों ने कहा कि डॉक्टर ने उन्हें यहां आराम करने के लिए कहा है। लेकिन डॉक्टर ने आपा खोते हुए बदतमीजी की और मारपीट की। हालांकि, दूसरी तरफ से मरीज ने बचाव में लात मारी थी।

 

डॉक्टर ने मरीज के चेहरे पर इतने मुक्के मारे कि मरीज के नाक से खून निकल गया। घटना के बाद जब परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो पुलिस भी मौके पर पहुंची और पीड़ितों को अपने साथ थाने ले गई। फिलहाल, मामले की जांच की जा रही है।

 

आईजीएमसी अस्पताल प्रबंधन ने उस घटना की जांच शुरू कर दी है, जिसमें कथित तौर पर एक डॉक्टर ने एक मरीज पर हमला किया था। अस्पताल प्रबंधन शाम 5 बजे तक रिपोर्ट मिलने के बाद इस मामले पर फैसला लेगा। हॉस्पिटल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राहुल राव ने बताया कि शुरुआती जांच पल्मोनरी डिपार्टमेंट के हेड की अध्यक्षता वाली एक कमेटी कर रही है ।

उपमंडल रोहड़ू को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम — एसडीएम धर्मेश रामौत्रा

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रोहड़ू । उपमंडल रोहड़ू को बेसहारा पशु मुक्त बनाने तथा उपायुक्त शिमला द्वारा जारी निर्देशों के प्रभावी अनुपालन को लेकर  चांशल कॉन्फ्रेंस हॉल, उपमंडल कार्यालय रोहड़ू में उप-मंडलाधिकारी (ना.)  धर्मेश रामौत्रा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

 

बैठक में जानकारी दी गई कि पशुपालन विभाग द्वारा जिला शिमला में कुल 272 मवेशियों को आवारा पशु के रूप में चिन्हित किया गया है, जिनके शीघ्र एवं सुरक्षित पुनर्वास के निर्देश जारी किए गए हैं। उपमंडल रोहड़ू क्षेत्र में नगर परिषद रोहड़ू अंतर्गत 25 तथा नगर पंचायत चिड़गांव अंतर्गत 20 बेसहारा पशु चिन्हित किए गए हैं।

 

 

एसडीएम श्री धर्मेश रामौत्रा ने कहा कि सड़क किनारे विचरण करने वाले बेसहारा पशु यातायात दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं तथा शीत ऋतु में इनके जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि पशुओं का मानवीय एवं सुरक्षित पुनर्वास प्रशासन की प्राथमिकता है।

 

बैठक में निर्णय लिया गया कि नगर परिषद रोहड़ू क्षेत्र के चिन्हित पशुओं को रोहड़ू के समीप स्थित गौशाला में तथा नगर पंचायत चिड़गांव क्षेत्र के पशुओं को चिड़गांव के निकट स्थित गौशाला में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त लंबा खाटल (समोली) में नवनिर्मित गौ-सदन में भी सभी चिन्हित आवारा पशुओं को चरणबद्ध तरीके से स्थानांतरित किया जाएगा।

 

 

एसडीएम ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि पशुओं के सुरक्षित परिवहन, स्वास्थ्य जांच, देखभाल एवं आवश्यक उपचार की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समस्त कार्यवाही पशु कल्याण अधिनियम, 1960 एवं शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप की जाएगी।

 

उन्होंने बताया कि सभी चिन्हित बेसहारा पशुओं को 15 दिनों के भीतर निकटतम गौ-सदनों एवं पशु आश्रयों में स्थानांतरित कर उपमंडल को बेसहारा पशु मुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में प्री-क्रिसमस पार्टी का आयोजन, सांस्कृतिक विविधता की झलक

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला।  एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने अपने परिसर में हर्षोल्लास के साथ प्री-क्रिसमस समारोह का आयोजन किया। इस अवसर पर छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारी एक साथ एकत्रित होकर त्योहार की खुशियाँ और उत्सव की भावना साझा करते नजर आए। यह आयोजन सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सौहार्द को सुदृढ़ करने की विश्वविद्यालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत संगीतमय प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें नेक्स्टजेन सीटीपीएल से आयुष गुप्ता, मलावी की अंतरराष्ट्रीय छात्रा रोडा ओलुवागबोटेमी अडेकोला, प्रवेश परामर्शदाता अमित तथा विधि संकाय की सोनाक्षी ने क्रिसमस कैरल्स और अन्य उत्सव गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुतियों को दर्शकों ने खूब सराहा और पूरे कार्यक्रम में उल्लास का माहौल बना रहा।
विभिन्न राज्यों और देशों से आए छात्रों की उत्साही भागीदारी ने विश्वविद्यालय के बहुसांस्कृतिक वातावरण को प्रतिबिंबित किया। यह कार्यक्रम सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक सशक्त मंच बना और छात्र समुदाय के बीच “एकता में विविधता” के संदेश को और मजबूत किया।

 

समारोह में प्रो-चांसलर डॉ. रमेश चौहान, सलाहकार इंजीनियर सुमन विक्रांत, कुलसचिव डॉ. आर.एल. शर्मा, डीन अकादमिक्स डॉ. आनंद मोहन, डीन फैकल्टी डॉ. अश्वनी शर्मा, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. नीलम शर्मा तथा निदेशक प्रवेश उषा चौहान की गरिमामयी उपस्थिति रही। सभी अतिथियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की और छात्रों को शिक्षा के साथ-साथ सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।

 

कार्यक्रम का समापन कुलसचिव डॉ. आर.एल. शर्मा द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने छात्रों और आयोजकों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी तथा सभी छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को क्रिसमस एवं नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए आने वाले वर्ष में शांति, खुशहाली और सफलता की कामना की।

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