लोकतंत्र और संविधान की आड़ में हिंसा एवं अराजकता को संरक्षण देना कांग्रेस की राजनीति का चिंताजनक चेहरा : संजीव कटवाल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल ने कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था को अस्थिर करने वाली बयानबाजी, हिंसा और अराजकता को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और उनसे जुड़े आरोपों ने कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं, जिनका जवाब पार्टी नेतृत्व को देना चाहिए।

 

संजीव कटवाल ने कहा कि ‘रेजीम चेंज’ के नाम पर जिस प्रकार की चर्चाएं और कथित योजनाओं के दावे सामने आ रहे हैं, वे गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां सरकार बदलने का एकमात्र संवैधानिक रास्ता जनता का जनादेश है। किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी अथवा असंवैधानिक गतिविधि के माध्यम से सत्ता परिवर्तन की सोच लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे किसी भी आरोप की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और तथ्यों को देश के सामने रखा जाना चाहिए।

 

भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सनातन धर्म और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सोच को लेकर भी लगातार सवाल उठते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयान और राजनीतिक गतिविधियां करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं के प्रति असंवेदनशीलता प्रदर्शित करती हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी धर्म, आस्था अथवा सांस्कृतिक परंपरा का अपमान उचित नहीं है। राहुल गांधी को स्पष्ट करना चाहिए कि उनकी पार्टी सभी धार्मिक आस्थाओं के प्रति समान सम्मान की नीति पर क्यों नहीं चलती दिखाई देती।

 

कटवाल ने दिल्ली में आयोजित राजनीतिक प्रदर्शनों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का उल्लेख करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर यह दावा किया जा रहा है कि भीड़ जुटाने के लिए लोगों को 6,000 से 10,000 रुपये तक दिए जा रहे हैं तथा काले कोट पहनने जैसी शर्तें रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि इन दावों की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। यदि इनमें सच्चाई पाई जाती है तो यह राजनीतिक नैतिकता और जनविश्वास से जुड़ा गंभीर प्रश्न होगा। उन्होंने कहा कि जनसमर्थन जनता के विश्वास से अर्जित होता है, धनबल से नहीं।

 

संजीव कटवाल ने एनएसयूआई कार्यकर्ता द्वारा एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ कथित बदसलूकी और मारपीट के मामले पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाले पुलिसकर्मियों, विशेषकर महिला अधिकारियों, के साथ दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेतृत्व ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई और कानून के समान अनुपालन का समर्थन करता है।

 

उन्होंने राजस्थान में दिल्ली पुलिस के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराए जाने से जुड़े आरोपों पर भी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। कटवाल ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई पर कानूनी आपत्ति उठाना प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार है, लेकिन किसी भी मामले में तथ्यों और विधिक प्रक्रिया का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।

 

अंत में संजीव कटवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी लोकतंत्र, संविधान, कानून के शासन और शांतिपूर्ण राजनीतिक अभिव्यक्ति के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपील की कि वह संबंधित वीडियो, प्रदर्शनकारियों को भुगतान के आरोपों तथा पुलिस अधिकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार पर स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दे। उन्होंने कहा कि देश की जनता राजनीतिक दलों से जिम्मेदार आचरण, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं के पालन की अपेक्षा करती है।

वीरभद्र सिंह ने राजनीति में ही नहीं, प्रदेशवासियों के दिलों पर भी किया राज – मुकेश अग्निहोत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

रामपुर ।  बुशहर स्पोर्ट्स कल्चर एंड एनवायरनमेंट एसोसिएशन की ओर से आयोजित विशेष कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण रविवार को सराहन में किया गया। इस दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री बतौर मुख्यातिथि शामिल हुए जबकि शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, चेयरमैन पर्यटन विकास निगम आर एस बाली सहित अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहे।

 

 

इस दौरान उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने न केवल हिमाचल प्रदेश की राजनीति पर राज किया, बल्कि लगभग पांच दशकों तक प्रदेशवासियों के दिलों में भी अपनी विशेष जगह बनाए रखी। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह एक युगपुरुष, दूरदर्शी राजनेता और आधुनिक हिमाचल प्रदेश के निर्माता थे, जिनका प्रदेश के विकास में योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

 

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि वीरभद्र सिंह केवल रामपुर अथवा रोहड़ू के नेता नहीं थे, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश में उनकी समान स्वीकार्यता और लोकप्रियता थी। प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में लोग उनका सम्मान करते थे। चाहे ऊना, कांगड़ा और हमीरपुर हो या कुल्लू, आनी, पांगी, भरमौर तथा लाहौल-स्पीति जैसे दुर्गम क्षेत्र, हर जगह उनका विशेष प्रभाव और लोगों से आत्मीय जुड़ाव था।

 

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह का राजनीतिक अनुभव अत्यंत व्यापक था। उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह सहित अनेक प्रधानमंत्रियों के साथ काम किया। उनका राजनीतिक जीवन अनुभव, जनसेवा और विकास के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण रहा है।

 

वीरभद्र सिंह की राजनीतिक पाठशाला से मिली जनसेवा की प्रेरणा

उप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक जीवन में वीरभद्र सिंह के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्हें उनके मंत्रिमंडल में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसे वह अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने ही उन्हें राजनीति में आगे बढ़ने का मार्ग दिखाया।

उन्होंने कहा, “मैं वीरभद्र सिंह की राजनीतिक पाठशाला का विद्यार्थी रहा हूं। उनकी शिक्षा और मार्गदर्शन का ही परिणाम है कि मैं पिछले 25 वर्षों से लगातार विधायक के रूप में जनता की सेवा कर रहा हूं।”

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में अनेक विधायकों, सांसदों और नेताओं को तैयार किया। उनके नेतृत्व में राजनीति की बारीकियां सीखने वाले अनेक जनप्रतिनिधियों ने प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुकेश अग्निहोत्री ने ठाकुर कौल सिंह और ठाकुर रामलाल जैसे वरिष्ठ नेताओं के राजनीतिक योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन नेताओं ने लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और कई विधानसभा चुनाव जीतकर जनता का विश्वास अर्जित किया। उनका राजनीतिक अनुभव नई पीढ़ी के नेताओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

 

रामपुर और रोहड़ू क्षेत्र के विकास में वीरभद्र सिंह की दूरदर्शिता का अहम योगदान

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि रामपुर और रोहड़ू क्षेत्र में हुए अभूतपूर्व विकास कार्य वीरभद्र सिंह की दूरदर्शी सोच का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा भी था जब प्रदेश की राजनीति के सभी रास्ते रोहड़ू की ओर जाते थे। वीरभद्र सिंह का राजनीतिक प्रभाव और जनाधार इतना व्यापक था कि प्रदेश की राजनीति में उनकी केंद्रीय भूमिका रही।

 

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने रामपुर से विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन इस क्षेत्र के विकास में उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। रामपुर और आसपास के क्षेत्रों में स्थापित जलविद्युत परियोजनाएं, सड़कों का विस्तार तथा आधारभूत ढांचे का विकास उनकी दूरदर्शी सोच का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि आज रामपुर और इसके आसपास के क्षेत्रों में दिखाई देने वाला विकास वीरभद्र सिंह की विकासपरक नीतियों और पहाड़ी क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने प्रदेश के दूरदराज और जनजातीय क्षेत्रों के विकास को भी विशेष प्राथमिकता दी। उनकी सोच थी कि विकास का लाभ हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक क्षेत्र तक पहुंचे।

 

डॉ. परमार ने हिमाचल बनाया, वीरभद्र सिंह ने दिया आधुनिक स्वरूप

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में दो महान नेताओं के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। इनमें हिमाचल निर्माता डॉ. वाई.एस. परमार और आधुनिक हिमाचल के निर्माता वीरभद्र सिंह शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यदि डॉ. वाई.एस. परमार नहीं होते तो हिमाचल प्रदेश का गठन संभव नहीं हो पाता और यदि वीरभद्र सिंह नहीं होते तो आज हिमाचल प्रदेश का जो विकसित और आधुनिक स्वरूप दिखाई देता है, उसकी कल्पना करना कठिन होता।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

गरीब और जरूरतमंद की सेवा हमेशा रही सर्वोच्च प्राथमिकता

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरभद्र सिंह राजनीति के कुशल रणनीतिकार होने के साथ-साथ संवेदनशील जन नेता भी थे। उन्होंने लगभग पांच दशकों तक प्रदेश की राजनीति को दिशा दी, लेकिन उनके राजनीतिक जीवन का मूल उद्देश्य गरीब, कमजोर और जरूरतमंद वर्गों की सेवा करना रहा।

उन्होंने कहा कि गरीबों का कल्याण और समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना वीरभद्र सिंह के एजेंडे में हमेशा सर्वोपरि रहा। यही कारण है कि आज भी प्रदेश के लाखों लोग उन्हें आदर और सम्मान के साथ याद करते हैं।

 

वीरभद्र सिंह की विरासत को संजोने के लिए प्रतिबद्ध प्रदेश सरकार

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के योगदान और उनकी महान विरासत का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर उनकी आदमकद प्रतिमा स्थापित कर उन्हें सम्मान दिया है।

उन्होंने कहा कि रिज मैदान पर देश और प्रदेश की महान विभूतियों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और वीरभद्र सिंह का स्थान भी उन्हीं महान व्यक्तित्वों के बीच है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में वीरभद्र सिंह की आदमकद प्रतिमाओं की स्थापना उनके प्रति जनता के अटूट सम्मान और स्नेह का प्रतीक है।

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि वीरभद्र सिंह ऐसे जन नेता थे जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता। वह हिमाचल प्रदेश के इतिहास और प्रदेशवासियों के दिलों में सदैव जीवित रहेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार वीरभद्र सिंह के दिखाए मार्ग पर आगे बढ़ते हुए हिमाचल प्रदेश के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। उनके आदर्श, विचार और दूरदर्शी सोच आने वाली पीढ़ियों को भी जनसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।

 

 

वीरभद्र सिंह के नेतृत्व में हिमाचल ने विकास के नए आयाम स्थापित किए – रोहित ठाकुर

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के गौरव थे, जिन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से प्रदेश के विकास को नई दिशा प्रदान की। उनके नेतृत्व और दूरदर्शी सोच का ही परिणाम है कि कभी विकास के मामले में पिछड़े पहाड़ी राज्यों में गिने जाने वाले हिमाचल प्रदेश की आज एक विकास मॉडल के रूप में पहचान है।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के निर्माण और विकास में डॉ. वाई.एस. परमार, ठाकुर रामलाल और वीरभद्र सिंह जैसे महान नेताओं का अतुलनीय योगदान रहा है। इन नेताओं की दूरदर्शिता, जनसेवा की भावना और विकासपरक नीतियों के कारण ही प्रदेश वर्तमान स्थिति तक पहुंचा है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2003 में जब वह और मुकेश अग्निहोत्री पहली बार विधायक बने थे, उस समय वीरभद्र सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्हें वीरभद्र सिंह का वह मूल मंत्र आज भी याद है, जिसमें वह *‘सर्वत्र हिमाचल, सर्वत्र विकास’* की भावना पर जोर देते थे। उन्होंने कहा कि यही सोच कांग्रेस सरकार की विकास नीति का आधार रही है और इसी दृष्टिकोण के साथ प्रदेश निरंतर आगे बढ़ रहा है।

 

*महान नेताओं की स्मृतियों को संजोना हमारा नैतिक दायित्व*

शिक्षा मंत्री ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अमर नहीं होता, लेकिन समाज और प्रदेश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान नेताओं के विचार और आदर्श हमेशा जीवित रहते हैं। ऐसे जननायकों का स्मरण करना और उनकी विरासत को आगे बढ़ाना हम सभी का नैतिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह जैसे नेताओं ने हिमाचल प्रदेश को एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। डॉ. वाई.एस. परमार के समय से लेकर वीरभद्र सिंह के कार्यकाल तक प्रदेश ने विकास के विभिन्न पड़ाव तय किए और अपनी अलग पहचान बनाई। समय के साथ परिवर्तन आवश्यक है, लेकिन विकास की मूल भावना, सिद्धांतों और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

रोहित ठाकुर ने कहा कि यदि हम अपने महान नेताओं की विचारधारा से दूर हो जाएंगे, तो हिमाचल प्रदेश की विशिष्ट पहचान भी प्रभावित होगी। इसलिए उनके आदर्शों और सिद्धांतों को आत्मसात करते हुए प्रदेश के विकास के लिए निरंतर कार्य करना आवश्यक है।

 

लोक निर्माण विभाग में वर्तमान सरकार के कार्यकाल में हुए महत्वपूर्ण कार्य

शिक्षा मंत्री ने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वह अपने विभाग में अच्छा कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सड़क निधि (सीआरएफ), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) सहित विभिन्न योजनाओं के तहत सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लोक निर्माण विभाग को वर्तमान सरकार के कार्यकाल में उल्लेखनीय स्वीकृतियां और बजट आवंटन प्राप्त हुए हैं। इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हाल ही में झाकड़ी क्षेत्र के लिए लगभग 127 करोड़ रुपये की राशि से संबंधित स्वीकृति प्राप्त हुई है, जो क्षेत्र के विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि सड़कें प्रदेश की अर्थव्यवस्था, ग्रामीण संपर्क और पर्यटन विकास की आधारशिला हैं। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित होने से लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंच बनाने में सहायता मिलती है। शिक्षा मंत्री ने कार्यक्रम के आयोजकों, युवा नेता राहुल सैनी, मंडल कांग्रेस के पदाधिकारियों और सभी सहयोगियों को इस आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम महान नेताओं के योगदान को याद करने और उनकी विचारधारा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह तथा कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि वीरभद्र सिंह सहित प्रदेश के महान नेताओं द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते हुए हिमाचल प्रदेश विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ता रहेगा। शिक्षा मंत्री ने सभी लोगों से महान नेताओं के आदर्शों को अपनाने और हिमाचल प्रदेश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

 

 

पूरा हिमाचल प्रदेश वीरभद्र सिंह की कर्मस्थली और जन्मभूमि रहा – विक्रमादित्य सिंह

इस अवसर पर लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह को किसी विशेष स्थान तक सीमित नहीं किया जा सकता। पूरा हिमाचल प्रदेश उनकी कर्मस्थली और जन्मभूमि रहा है। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह मां भीमाकाली को सदैव अपनी आराध्य शक्ति मानते थे और अपने लंबे राजनीतिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव के बावजूद मां भीमाकाली का आशीर्वाद लेते रहे।

उन्होंने कहा कि मां भीमाकाली के प्रांगण में वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण सभी लोगों की सामूहिक भावना थी। उनकी जन्मस्थली सराहन में इस प्रतिमा का अनावरण उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि अष्टमी का दिन इस आयोजन के लिए सबसे उपयुक्त था, क्योंकि मुख्यमंत्री रहते हुए भी वीरभद्र सिंह प्रदेश के किसी भी कोने में हों, अष्टमी के दिन मां भीमाकाली का आशीर्वाद लेने सराहन अवश्य आते थे।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि वीरभद्र सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल में हिमाचल प्रदेश का चौमुखी विकास सुनिश्चित किया। वह छः बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और उनके नेतृत्व में विकास की मजबूत नींव रखी गई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में वीरभद्र सिंह की सोच को आगे बढ़ाते हुए हिमाचल प्रदेश के हर क्षेत्र का विकास किया जाएगा। विशेष रूप से रामपुर विधानसभा क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों के विकास को आगे ले जाना सभी का दायित्व है।

 

रामपुर विधानसभा क्षेत्र में सड़क विकास कार्य प्रगति पर

लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग सहित सभी विभागों के माध्यम से अनेक विकास कार्य किए जा रहे हैं। उनका प्रयास रहा है कि प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार की योजनाओं का अधिकतम लाभ क्षेत्र को मिले तथा अधिक से अधिक सड़कों का उन्नयन किया जाए।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में लगभग 250 करोड़ रुपये की लागत से सड़क उन्नयन के कार्य चल रहे हैं। इन कार्यों से ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क सुविधा बेहतर होगी और लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि झाकड़ी के ब्रॉनी खड्ड पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से लंबित थी। उन्होंने कई बार दिल्ली जाकर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से इस विषय में सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पिछले दिन उनके जन्मदिन के अवसर पर रामपुर विधानसभा क्षेत्र को यह शुभ उपहार मिला और पुल निर्माण के लिए 127 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हितों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखना उनका दायित्व है। प्रदेश के विकास के लिए वह निरंतर इसी भावना के साथ कार्य करते रहेंगे।

 

युग पुरुष को हमेशा याद रखा जाएगा – आर एस बाली

हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के चेयरमैन आर एस बाली ने कहा कि इतिहास के पन्नों में पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण लिखा जाएगा। उन्होंने प्रदेश के हर वर्ग के लिए हमेशा अपना जीवन दिया है। उन्होंने स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को हिमाचल प्रदेश का युगपुरुष बताते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन प्रदेश की सेवा और विकास के लिए समर्पित किया। उनका योगदान सदियों तक याद रखा जाएगा और आने वाली पीढ़ियां उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।

उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। उन्होंने हर बुजुर्ग, महिला, युवा और बच्चे की समस्याओं को अपनी समस्या समझा तथा जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। हिमाचल प्रदेश के विकास में उनके योगदान को हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

आर एस बाली ने प्रतिभा सिंह का आभार व्यक्त करते हुए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह तथा समारोह में उपस्थित सभी वरिष्ठ नेताओं और जनप्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वीरभद्र सिंह की विचारधारा, जनसेवा की भावना और विकास की विरासत को आगे बढ़ाना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने विश्वास जताया कि लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह भी उनके पदचिन्हों पर चलते हुए प्रदेश की सेवा करेंगे।

 

पूर्व सांसद एवं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस प्रतिभा सिंह, विधायक कुलदीप सिंह राठौर, विधायक मोहन लाल ब्राक्टा, प्रदेश कांग्रेस सह प्रभारी विदित चौहान, हिमफैड चेयरमैन महेश्वर चौहान, पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर, पूर्व मंत्री राम लाल ठाकुर, पूर्व सीपीएस नीरज भारती, पूर्व यूथ कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष मोनिका भारती, पूर्व विधायक किशोरी लाल, पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष चंद्र प्रभा नेगी, जैनब चंदेल, अध्यक्ष एससी डिपार्टमेंट रमेश चौहान, युवा नेता विकास कल्टा, निदेशक पर्यटन निगम यशपाल सोनी, जिला परिषद सदस्य सुरेंद्र रेटका, जिला परिषद सदस्य रौनी राणा, जिला परिषद सदस्य अनुराधा, निदेशक कैलाश फेडरेशन त्रिलोक भूलनी, पूर्व यूथ कांग्रेस अध्यक्ष निगम भंडारी, महेंद्र स्तान, स्थानीय नेता बृज लाल, डॉ अमरीन कौर सेखों, जिलाध्यक्ष कांग्रेस कमेटी हरि किशन हिमराल, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष लाल चंद शर्मा, जय सिंह मेहता, संजीव सोनी, शेर सिंह, राहुल सोनी, दीपक सूद सहित कई गणमान्य मौजूद रहे।

शिमला में जलवायु-अनुकूल पादप स्वास्थ्य एवं सतत कृषि पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 

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शिमला ।  ‘जलवायु सहनशीलता, खाद्य सुरक्षा एवं सतत कृषि के लिए अगली पीढ़ी की पादप स्वास्थ्य रणनीतियाँ’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी में देशभर के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, शिक्षाविद्, शोधकर्ता, विद्यार्थी एवं कृषि उद्योग जगत के प्रतिनिधि भाग लेकर जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों, उभरते पादप रोगों तथा जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए नवीन वैज्ञानिक तकनीकों और प्रभावी रणनीतियों पर विचार-विमर्श करेंगे।

 

संगोष्ठी के संयोजक एवं पादप संरक्षण विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा ने बताया कि इस राष्ट्रीय आयोजन का संयुक्त रूप से आयोजन इंडियन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी (उत्तरी क्षेत्र), इंडियन पोटैटो एसोसिएशन, शिमला, इंडियन सोसायटी ऑफ प्लांट पैथोलॉजिस्ट्स, लुधियाना, हिमालयन फाइटोपैथोलॉजिकल सोसायटी, सोलन तथा भाकृअनुप-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र, शिमला द्वारा किया जा रहा है।

 

उन्होंने बताया कि संगोष्ठी के उद्घाटन समारोह में महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर, राजस्थान के पूर्व कुलपति डॉ. एस. एस. चाहल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। वहीं उत्तर बंग कृषि विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल के पूर्व कुलपति डॉ. स्वरूप कुमार चक्रवर्ती तथा डॉ. वाई. एस. परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन के कुलपति डॉ. एच. एस. बावेजा विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।

 

डॉ. शर्मा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण नए पादप रोगों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, फसल उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा के समक्ष गंभीर चुनौतियाँ उत्पन्न हो रही हैं। ऐसे समय में यह राष्ट्रीय संगोष्ठी विशेष महत्त्व रखती है। इसमें पर्यावरण-अनुकूल, वैज्ञानिक एवं नवाचार आधारित पादप रोग प्रबंधन रणनीतियों के विकास तथा टिकाऊ कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दो दिवसीय वैज्ञानिक कार्यक्रम के अंतर्गत मुख्य व्याख्यान, आमंत्रित विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी सत्र, मौखिक एवं पोस्टर शोध प्रस्तुतियाँ तथा वैज्ञानिक पुरस्कार सत्र आयोजित किए जाएंगे। संगोष्ठी में जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न पादप रोग, आणविक निदान तकनीक, जीनोमिक्स, जीनोम संपादन, जैविक नियंत्रण, समेकित रोग प्रबंधन, रोग प्रतिरोधी फसल किस्मों के विकास तथा आधुनिक एवं पर्यावरण-अनुकूल फसल संरक्षण तकनीकों जैसे महत्त्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।

 

भाकृअनुप-केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बताया कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का एक प्रमुख आकर्षण ‘किसान–उद्योग–शोधकर्ता–नीति निर्माता संवाद’ होगा। इसका मुख्य उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचारों को किसानों के खेतों तक प्रभावी रूप से पहुँचाना तथा प्रयोगशाला से खेत तक तकनीक हस्तांतरण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना है। इस विशेष संवाद मंच के माध्यम से वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, कृषि उद्योग प्रतिनिधियों एवं किसानों के बीच सीधा विचार-विमर्श होगा, जिससे नवीन कृषि तकनीकों को अपनाने, संस्थागत सहयोग बढ़ाने तथा सतत कृषि विकास के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने में सहायता मिलेगी।

 

संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. संतोष वाटपाडे ने बताया कि इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों, कृषि एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालयों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी), अनुसंधान संगठनों तथा प्रमुख कृषि व्यवसाय कंपनियों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, असम, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मेघालय, तमिलनाडु सहित देश के विभिन्न राज्यों से वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता अपने शोध निष्कर्षों तथा नवीन तकनीकी उपलब्धियों को प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि यह संगोष्ठी वैज्ञानिक ज्ञान एवं अनुभवों के आदान-प्रदान, बहुविषयक अनुसंधान सहयोग तथा नवीन पादप स्वास्थ्य प्रबंधन तकनीकों के विकास के लिए एक महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगी। साथ ही, इसके माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान के परिणामों को किसानों तक पहुँचाने, फसलों को जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों से सुरक्षित रखने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने तथा किसानों की आजीविका को सुदृढ़ बनाने की दिशा में नई संभावनाएँ विकसित होंगी।

राज्य स्तरीय शतरंज चैंपियनशिप 2026: शिमला में खिलाड़ियों ने दिखाया दमखम

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला ।   हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज चैंपियनशिप 2026 का आयोजन 18 अक्टूबर 2026 को द ट्यूटर, संजौली, शिमला में उत्साहपूर्ण वातावरण में किया गया। इस प्रतियोगिता में 27 खिलाड़ियों तथा 6 प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों सहित कुल 33 व्यक्तियों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों और युवा खिलाड़ियों में शतरंज के प्रति रुचि विकसित करना, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना तथा शिक्षा और खेल के बीच सार्थक समन्वय को बढ़ावा देना था। प्रतियोगिता का आयोजन द ट्यूटर, संजौली, शिमला तथा हिमालयन राइज एमएसएमई के सहयोग से किया गया।

 

 

इस चैंपियनशिप में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने अपनी बौद्धिक क्षमता, एकाग्रता, रणनीतिक सोच, धैर्य और खेल भावना का प्रदर्शन किया। यह आयोजन केवल प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और खेल प्रेमियों के लिए शतरंज के शैक्षिक, बौद्धिक और सामाजिक महत्त्व को समझने का अवसर भी बना।

 

उद्घाटन समारोह में  बी. के. शर्मा ने किया खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन

प्रतियोगिता के उद्घाटन समारोह में भारत सरकार के अर्धसैनिक बलों के पूर्व उपमहानिरीक्षक श्री बी. के. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए शतरंज को बुद्धि, रणनीति, धैर्य और दूरदर्शिता का खेल बताया। उन्होंने कहा कि शतरंज में प्रत्येक चाल के पीछे विचार करना, संभावित परिणामों का आकलन करना और परिस्थितियों के अनुसार उचित निर्णय लेना आवश्यक होता है।

 

शतरंज का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। भारत की प्राचीन बौद्धिक परंपरा में प्रचलित चतुरंग को आधुनिक शतरंज के ऐतिहासिक विकास से जोड़ा जाता है। समय के साथ यह खेल विश्वभर में लोकप्रिय हुआ और आज विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है।

श्री शर्मा ने शतरंज के माध्यम से विद्यार्थियों में धैर्य, अनुशासन, आत्मनियंत्रण, योजनाबद्ध चिंतन और हार से सीखने की भावना विकसित करने के महत्त्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में शतरंज गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ बौद्धिक खेलों में भी अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिल सकें।

डॉ. बी. एस. चौहान ने शतरंज के शैक्षिक और सामाजिक महत्त्व पर प्रकाश डाला

प्रतियोगिता के दौरान डॉ. बी. एस. चौहान ने पर्यवेक्षक के रूप में आयोजन की गतिविधियों का अवलोकन किया तथा खिलाड़ियों, विद्यार्थियों और आयोजकों से संवाद किया। उन्होंने शतरंज के इतिहास, उसकी बौद्धिक परंपरा और आधुनिक शिक्षा में उसकी उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए।

डॉ. चौहान ने शतरंज को तार्किक चिंतन, एकाग्रता, समस्या समाधान और निर्णय लेने की क्षमता का अभ्यास कराने वाला महत्त्वपूर्ण खेल बताया। शतरंज में खिलाड़ी को अपनी चाल के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी की संभावित चालों पर भी विचार करना पड़ता है। इससे विभिन्न विकल्पों का विश्लेषण करने, परिणामों का अनुमान लगाने और सोच-समझकर निर्णय लेने का अभ्यास होता है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि शतरंज में सफलता के लिए धैर्य, निरंतर अभ्यास, आत्मनियंत्रण और अनुशासन आवश्यक हैं। ये गुण विद्यार्थियों के शैक्षिक जीवन के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत और सामाजिक विकास में भी सहायक हो सकते हैं। प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सक्रिय भागीदारी ने बौद्धिक खेलों को शिक्षा और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के साथ जोड़ने की उपयोगिता को उजागर किया।

समापन समारोह में डॉ. अंजू शर्मा ने खिलाड़ियों को किया प्रोत्साहित

समापन समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. अंजू शर्मा रहीं। वे हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य, हिमाचल प्रदेश सरकार के उच्चतर शिक्षा विभाग में पूर्व ओएसडी तथा उन्नत अध्ययन की पूर्व अध्येता रही हैं। उन्होंने अपने पूर्व दायित्वों के दौरान शिक्षा और प्रशासन से जुड़े क्षेत्रों में योगदान दिया।

डॉ. अंजू शर्मा ने प्रतियोगिता में भाग लेने वाले खिलाड़ियों की सराहना की तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में खेलों की भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शतरंज जैसी गतिविधियाँ विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, चुनौतियों का सामना करने, अपनी गलतियों से सीखने और उपलब्ध संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं।

शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यपुस्तकीय ज्ञान और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता, जिम्मेदारी, निर्णय क्षमता और जीवन की चुनौतियों का सामना करने की योग्यता विकसित करना भी है। इस दृष्टि से शतरंज जैसे बौद्धिक खेल विद्यालयी तथा उच्च शिक्षा के वातावरण को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाने में योगदान दे सकते हैं।

डॉ. अंजू शर्मा की उपस्थिति ने प्रतिभागियों और आयोजकों का उत्साह बढ़ाया। प्रतियोगिता में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि उचित अवसर, नियमित अभ्यास और प्रोत्साहन मिलने पर विद्यार्थी अपनी क्षमताओं को बेहतर ढंग से विकसित कर सकते हैं।

विभिन्न वर्गों में विजेताओं ने हासिल किए पदक

चैंपियनशिप में विभिन्न आयु वर्गों के खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा, एकाग्रता और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन किया। विभिन्न वर्गों में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों के नाम इस प्रकार हैं।

बालिका वर्ग

12 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — दिव्यांशी; रजत पदक — आन्वी; कांस्य पदक — यशस्वी।

14 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — स्नेहा; रजत पदक — माही; कांस्य पदक — संस्कृति।

बालिका खुला वर्ग: स्वर्ण पदक — पायल; रजत पदक — शिवांशी।

बालक वर्ग

10 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — अथर्व; रजत पदक — सहश्रद; कांस्य पदक — आरव कियान।

14 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — आदित्य; रजत पदक — आरव; कांस्य पदक — पार्थ।

19 वर्ष से कम आयु वर्ग: स्वर्ण पदक — सिद्धार्थ; रजत पदक — मोक्ष; कांस्य पदक — हार्दिक।

बालक खुला वर्ग: स्वर्ण पदक — हर्षल; रजत पदक — विशाल; कांस्य पदक — शुभम।

आयोजकों ने सभी पदक विजेताओं को बधाई दी तथा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले प्रत्येक खिलाड़ी के प्रयासों की सराहना की। प्रतियोगिता में भागीदारी स्वयं में सीखने, अनुभव प्राप्त करने और भविष्य के लिए अपनी खेल क्षमता विकसित करने का अवसर है।

सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों और निर्णायकों के नाम

प्रतियोगिता में कुल 27 खिलाड़ियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों के नाम निम्नलिखित हैं:

रियान उदय राम सिंह, अथर्व राणा, सहश्रद चौहान, आरन श्रीवास्तव, पार्थ शर्मा, आदित्य वर्मा, आरन डी. चौहान, केशव चौहान, शौर्य कौल, दिव्यांशी, यशस्वी यादव, आन्वी, कृष, पायल ठाकुर, शिवांशी अग्रवाल, स्नेहा सिंह, संस्कृति, माही कल्टा, स्निग्धा लोहिया, हार्दिक वर्मा, मोक्ष, कृति कुमार, कृष्ण कुमार, उप्पला दीक्षित राव, सिद्धार्थ वर्मा, सचिन कुमार और रितुंजय चौहान।

प्रतियोगिता के संचालन में 6 प्रशिक्षकों एवं निर्णायकों ने सहयोग दिया। उनके नाम हैं: सुश्री पलक भ्वांता, श्री शुंभांगी, सुश्री अंचल कलडाइक, सुश्री शावेरी शर्मा, श्री हर्षिस्ट और सुश्री शमाली पटीयाल।

आयोजन समिति ने सभी खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों, निर्णायकों, अभिभावकों और सहयोगियों के योगदान की सराहना की। प्रतियोगिता के सफल संचालन में उनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण रही।

विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शतरंज की बढ़ती उपयोगिता

आज के समय में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। विद्यार्थियों को केवल तथ्यों को याद करने के बजाय उनका विश्लेषण करने, समस्याओं का समाधान खोजने, रचनात्मक दृष्टिकोण अपनाने और बदलती परिस्थितियों में उचित निर्णय लेने की आवश्यकता है। शतरंज इन क्षमताओं का अभ्यास करने के लिए एक उपयोगी मंच प्रदान करता है।

विद्यालयों में शतरंज क्लब, नियमित अभ्यास सत्र और अंतरविद्यालय प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा पहचानने का अवसर दे सकती हैं। महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में शतरंज गतिविधियाँ स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, नेतृत्व, आत्मविश्वास और विभिन्न पृष्ठभूमियों के विद्यार्थियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित कर सकती हैं।

शतरंज का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि इसमें सफलता केवल शारीरिक क्षमता पर निर्भर नहीं करती। अभ्यास, विश्लेषण, रणनीति और धैर्य के माध्यम से विभिन्न आयु और पृष्ठभूमि के खिलाड़ी अपनी क्षमता को बेहतर बना सकते हैं। डिजिटल युग में ऑनलाइन शतरंज मंचों और प्रशिक्षण संसाधनों ने सीखने के अवसरों का विस्तार किया है। तकनीक के उपयोग के साथ नियमित अभ्यास, निष्पक्ष खेल और संतुलित डिजिटल आदतों को भी महत्त्व दिया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप अनुभवात्मक शिक्षा, आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को प्रोत्साहित करना विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उपयोगी है। शतरंज जैसी गतिविधियाँ इन शैक्षिक उद्देश्यों को व्यवहार में लाने का एक माध्यम बन सकती हैं।

मुख्य समन्वयक ने व्यक्त किया आभार

मुख्य समन्वयक श्री अजय वर्मा ने चैंपियनशिप की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए खिलाड़ियों, अभिभावकों, अतिथियों, शिक्षकों, प्रशिक्षकों, निर्णायकों और आयोजन से जुड़े सभी व्यक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने, प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और खेल के माध्यम से जीवनोपयोगी गुण विकसित करने के अवसर प्रदान करते हैं।

उन्होंने शतरंज को विद्यालयों, महाविद्यालयों और सामुदायिक स्तर पर अधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थी इस बौद्धिक खेल से जुड़ सकें। इसके लिए अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों, खेल संगठनों और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग महत्त्वपूर्ण है।

द ट्यूटर, संजौली, शिमला तथा हिमालयन राइज एमएसएमई के सहयोग से आयोजित इस चैंपियनशिप ने शिमला में शतरंज गतिविधियों को प्रोत्साहित करने और युवा प्रतिभाओं को साझा मंच प्रदान करने की दिशा में सकारात्मक पहल की। आयोजन का व्यापक संदेश यह रहा कि खेल और शिक्षा परस्पर पूरक हैं तथा दोनों मिलकर विद्यार्थियों में अनुशासन, आत्मविश्वास, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत बना सकते हैं।

भविष्य के लिए सकारात्मक संदेश

हिमाचल प्रदेश राज्य शतरंज चैंपियनशिप 2026 ने यह रेखांकित किया कि शतरंज केवल चालों और प्रतिस्पर्धा का खेल नहीं, बल्कि सोचने, सीखने और स्वयं को बेहतर बनाने की निरंतर प्रक्रिया है। यह विद्यार्थियों को धैर्यपूर्वक प्रयास करने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने, अपनी गलतियों से सीखने और प्रतिद्वंद्वी के प्रति सम्मान बनाए रखने का अभ्यास कराता है।

इस आयोजन से विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, अभिभावकों, शिक्षकों और खेल प्रेमियों को प्रेरणा मिल सकती है कि वे युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराएँ। ऐसी पहलें हिमाचल प्रदेश में बौद्धिक खेलों की संस्कृति को मजबूत करने और शिक्षा के साथ खेलों के संतुलित समावेश को बढ़ावा देने में योगदान दे सकती हैं।

ग्रामीण विकास मंत्री ने कॉन्वेंट स्कूल जुन्गा के वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि की शिरकत

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

  1. शिमला ।  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आज क्योंथल कॉन्वेंट स्कूल जुन्गा में आयोजित वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और विद्यार्थियों के उज्जवल भविष्य व स्वस्थ जीवन की कामना की। इस दौरान उन्होंने विद्यालय के विकास के लिए विद्यालय समिति को 25 हजार रुपए प्रदान करने की घोषणा की।

 

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकों को बधाई देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। छोटे बच्चों को शिक्षा प्रदान करना धैर्य, लगन और समर्पण का कार्य है। शिक्षकों को एक ही विषय बार-बार समझाकर बच्चों की आयु एवं समझ के अनुरूप उन्हें सीखने के लिए प्रेरित करना पड़ता है। उन्होंने शिक्षकों की मेहनत और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा उनके भविष्य की मजबूत नींव तैयार करती है।

 

उन्होंने कहा कि क्योंथल कॉन्वेंट स्कूल ने तीन बच्चों से अपनी यात्रा शुरू कर आज एक बेहतर मुकाम हासिल किया है। यह विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है कि यहां से शिक्षा प्राप्त कर विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य बच्चों को योग्य नागरिक बनाना तथा उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करना है।

मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे कड़ी मेहनत, अनुशासन एवं लगन के साथ शिक्षा प्राप्त करें तथा भविष्य में अपने क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को आश्वस्त किया कि स्कूल की आवश्यकताओं एवं विकास से जुड़े विषयों पर हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

 

*जुन्गा क्षेत्र का किया जा रहा विकास सुनिश्चित*

ग्रामीण विकास मंत्री ने जुन्गा क्षेत्र के विकास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसके विकास के लिए वर्तमान प्रदेश सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। क्षेत्र में विभिन्न विकासात्मक कार्यों एवं लंबित योजनाओं का निर्माण कार्य प्रगति पर है और क्षेत्र को सड़क, पानी व बिजली की मूलभूत व आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।

 

स्वास्थ्य सेवाओं का उल्लेख करते हुए अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आईजीएमसी शिमला एवं अटल सुपर स्पेशियलिटी आयुर्विज्ञान संस्थान चमियाना में बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा उपकरणों एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए सरकार द्वारा पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

 

इस अवसर पर विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समारोह में विद्यार्थियों, अभिभावकों, शिक्षकों तथा स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

 

 

ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह में विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन एवं विभिन्न गतिविधियों में उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया। उन्होंने सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर पंचायती राज मंत्री ने लोगों की विभिन्न समस्याओं को भी सुना और प्राप्त हुई सभी उचित मांगों का चरणबद्ध ढंग से निपटारा करने का आश्वासन दिया।

 

 

इस अवसर पर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अशोक ठाकुर, क्योंथल स्कूल के संस्थापक एवं प्रधानाचार्य महेंद्र शर्मा, बीडीसी चेयरमैन तारा चंद जी, बीडीसी उपाध्यक्ष मेहतेंद्र, प्रधान जुन्गा पंचायत रामलाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।

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रूट्स कंट्री स्कूल बाघी का वार्षिक दिवस “शिल्प 2026” समारोह आयोजित, शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने की अध्यक्षता

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला । शिक्षा मंत्री ने 23 वें वार्षिक दिवस के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि इस स्कूल में शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दो दशकों से अभूतपूर्व कार्य हो रहा है। यहां केवल हिमाचल के ही नहीं भारत के कोने-कोने से बच्चे पढ़ रहे हैं और अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रहे है। बोर्डिंग स्कूल की वजह से बच्चे कई चीजों के निपुण बन रहे हैं और यहां शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में भी बच्चे बढ़ चढ़ कर भाग ले रहे है। बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव यहां मजबूत की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिंदगी एक संघर्ष है और जिंदगी की चुनौतियों को जिसने पार कर लिया उसने हमेशा इतिहास लिखा है।

 

उन्होंने कहा कि रूट्स कंट्री स्कूल की सफलता की कहानी दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर परिश्रम, समर्पण और दूरदर्शी सोच का प्रेरणादायक उदाहरण है।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 में मात्र 21 विद्यार्थियों के साथ शुरू हुआ यह विद्यालय आज लगभग 1,000 विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर रहा है। यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि नहीं, बल्कि अभिभावकों के विश्वास, शिक्षकों की मेहनत और विद्यालय प्रबंधन की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। उन्होंने विद्यालय के विकास में सुनील और प्रीति रोहटा के योगदान की विशेष रूप से सराहना करते हुए कहा कि बद्दी जैसे क्षेत्र में एक छोटे से प्रयास को प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करना असाधारण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ने पिछले 23 वर्षों में हिमाचल प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया है। सीबीएसई परीक्षाओं में शत-प्रतिशत परिणाम का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा को किफायती बनाए रखने, विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाने तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को अवसर प्रदान करने के प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने लंदन स्थित ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित वर्ल्ड लीडर्स समिट में विद्यालय को मिली पहचान को भी गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्राकृतिक एवं शांत वातावरण विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अनुकूल है। छात्रावास व्यवस्था बच्चों में अनुशासन, आत्मनिर्भरता, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने में सहायक होती है।

 

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में कोई न कोई विशिष्ट प्रतिभा होती है और शिक्षकों एवं अभिभावकों का दायित्व है कि वे बच्चों की क्षमताओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने के उचित अवसर प्रदान करें। शिक्षा के साथ खेलकूद, संगीत, कला और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को महत्व देना भी आवश्यक है।

 

उन्होंने विद्यालय में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले विद्यार्थियों की उपस्थिति को *“विविधता में एकता”* का सुंदर उदाहरण बताया। दक्षिण भारत से लेकर पूर्वी भारत, बंगाल, गुजरात और लद्दाख तक के विद्यार्थियों का एक ही परिसर में शिक्षा ग्रहण करना राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने विशेष रूप से लद्दाख से आने वाले विद्यार्थियों की उल्लेखनीय संख्या का जिक्र करते हुए इसे विद्यालय की व्यापक पहुंच और अभिभावकों के विश्वास का प्रतीक बताया।

 

हिमाचल प्रदेश की शैक्षणिक प्रगति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य ने साक्षरता और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विकास किया है। उन्होंने नई पीढ़ी को उपलब्ध बेहतर शैक्षणिक अवसरों का सदुपयोग करने और समाज एवं राष्ट्र के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। रूट्स कंट्री स्कूल जैसे संस्थान बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए तैयार करने तथा समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यालय के सभी विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई दी तथा अभिभावकों, शिक्षकों और समस्त स्टाफ का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा व्यक्त की कि रूट्स कंट्री स्कूल भविष्य में भी इसी समर्पण, दूरदर्शिता और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ नई ऊंचाइयां हासिल करेगा तथा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान को और मजबूत बनाएगा।

 

उन्होंने बताया की वर्तमान हिमाचल प्रदेश सरकार के कार्यकाल में अभूतपूर्व विकास कार्य हर क्षेत्र में सुनिश्चित किये जा रहे हैं। आज जुब्बल कोटखाई विधानसभा में करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य प्रगति पर हैं।

 

 

विद्यालय में विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, टीम भावना और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से वर्ष 2026 के लिए स्कूल पदाधिकारियों एवं विभिन्न हाउस के प्रतिनिधियों की नियुक्ति की गई है। रोहठा को हेड बॉय, अर्शिता मिश्रा को हेड गर्ल, स्टैंजिन सिंगे को वाइस हेड बॉय तथा तान्वी भाटिया को वाइस हेड गर्ल नियुक्त किया गया है।

 

विद्यालय में विद्यार्थियों की सहभागिता बढ़ाने और खेलकूद सहित अन्य गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए चार हाउस गठित किए गए हैं।

*विक्टर हाउस* : कप्तान समर प्रताप सिंह, उपकप्तान चोकोयंग, स्पोर्ट्स कप्तान अब्दुल फैज के तथा हाउस मैनेजर ममनाजीत कौर।

*वारियर हाउस* : कप्तान अनुराग ठाकुर, उपकप्तान रिया सैनी, स्पोर्ट्स कप्तान अंजेल खोतला तथा हाउस मैनेजर फोरम।

*क्रूसेडर हाउस* : कप्तान अर्शिता यादव, उपकप्तान अदिराज, स्पोर्ट्स कप्तान रोनित वर्मा तथा हाउस मैनेजर कनुष लोहन।

*पायनियर हाउस* : कप्तान सम्राट सैनी, उपकप्तान ऋषि केश्वरवानी, स्पोर्ट्स कप्तान निंगमाई वांगमो तथा हाउस मैनेजर आलोक राणा।

इस मौके पर विद्यालय समिति द्वारा मुख्यातिथि को शॉल, टोपी और स्मृति चिन्ह  देकर सम्मानित भी किया गया।

इस दौरान एसडीएम डॉ मनु वर्मा, खंड विकास अधिकारी स्पर्श,  ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष जितेंद्र मेहता,  जिला परिषद् सदस्य रेखा चौहान , स्थानीय पंचायत प्रधान हरि प्रकाश शौकटा, ग्राम पंचायत रत्नाड़ी सुनील ठाकुर पंचायत, लायक राम औसटा, डायरेक्टर सुनील रोहटा, प्रिंसिपल रूट्स कंट्री स्कूल कृति रोहटा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

 

फोरलेन टनल निर्माण कार्य की नवीनतम स्थिति की रिपोर्ट के लिए गठित की कमेटी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला अनुपम कश्यप ने  फोरलेन प्रभावित समिति के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की। बैठक में निर्माणाधीन भूमिगत टनल से संजौली-भटाकुफर-ढली के आवासीय इलाकों के भवनों में आई दरारों के मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा फोरलेन कम्पनियों को दिए गए निर्देशों की अनुपालना न करने बारे विस्तार से चर्चा की गई।

 

बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में फोरलेन टनल की ब्लास्टिंग से आवासीय इलाकों में आई दरारों के कारण टनल का निर्माण कार्य बंद किया गया है। उन्होंने बताया कि आईआईटी रुड़की की टीम को फोरलेन टनल से प्रभावित क्षेत्र तथा क्षतिग्रस्त भवन, जिनमें दरारें आई हुई है, के निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए नियुक्त किया गया है जिसने टनल व आसपास के क्षेत्र का एक बार दौरा कर लिया है। यह टीम आगामी एक हफ्ते के भीतर अपनी विस्तृत रिर्पोट जिला प्रशासन को सौंप देगी, उसी आधार पर टनल निर्माण से संबंधित आगामी निर्णय लिया जाएगा।

 

बैठक के दौरान फोरलेन कम्पनी द्वारा चोरी-छिपे किए जा रहे टनल के निर्माण कार्य का मामला भी प्रभावित समिति के प्रतिनिधियों द्वारा उठाया गया, जिस पर उपायुक्त द्वारा दोनों अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारियों की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई जिसमें सदस्य के रूप में उपमंडल दंडाधिकारी शिमला ग्रामीण, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग कसुम्पटी वृत तथा तहसीलदार शिमला ग्रामीण शामिल किए गए है। इस कमेटी को फोरलेन टनल निर्माण कार्य की नवीनतम स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के लिए 22 अक्टूबर को निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए है।

 

बैठक में एडीएम कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, एडीएम प्रोटोकॉल ज्ञान सागर नेगी, जिला राजस्व अधिकारी शिवानी भारद्वाज, फोरलेन प्रभावित समिति के प्रतिनिधियों सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

 

 

 

 

 

 

उपायुक्त कार्यालय में पीएसी की बैठक, मंत्री जगत सिंह नेगी ने विकास कार्यों की प्रगति का लिया जायजा

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केलांग  । उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में पीएसी (PAC) की बैठक आयोजित की गई। बैठक में पिछली बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करने के साथ-साथ लाहौल-स्पीति जिले में विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रहे विकास कार्यों एवं प्रस्तावित परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

बैठक में जल शक्ति विभाग के अंतर्गत सीवरेज व्यवस्था, कृषि विभाग के अंतर्गत करगा में कोल्ड स्टोरेज की स्थापना, केलांग में अग्निशमन केंद्र, त्रिलोकीनाथ मैदान के सौंदर्यीकरण तथा तकनीकी शिक्षा विभाग से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई।

 

इसके अतिरिक्त एसकेटीटी भूमि अधिग्रहण, सीमा सड़क संगठन (BRO) से संबंधित कार्यों, सड़क किनारे यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास तथा हेलिपोर्ट निर्माण के लिए वन अधिकार अधिनियम (FRA) और वन संरक्षण अधिनियम (FCA) से संबंधित स्वीकृतियों के मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

 

बैठक में कुकुमसेरी कॉलेज मैदान, एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की वर्तमान स्थिति तथा उदयपुर सिविल अस्पताल से संबंधित मामलों की समीक्षा की गई। वन संरक्षण अधिनियम (FCA) से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया तथा संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

 

कृषि एवं बागवानी क्षेत्र को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नाबार्ड के सहयोग से पौध सामग्री उपलब्ध करवाने की योजना तथा संबंधित परियोजना की स्वीकृति के विषय पर चर्चा की गई। सर्दियों के दौरान निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए गोंधला में शीतकालीन जलापूर्ति व्यवस्था तथा प्रत्येक घर तक एंटी-फ्रीज व्यवस्था उपलब्ध करवाने के विषय पर भी विचार-विमर्श किया गया।

 

बैठक में जिले के 60 विद्यालयों में सोलर पैनल स्थापित करने की योजना की समीक्षा की गई। इसके अलावा तिंदी में पर्यटक सूचना केंद्र के निर्माण एवं उसके पूर्ण होने के बाद संचालन, जिस्पा में क्लाइम्बिंग वॉल के निर्माण, विद्यालयों के लिए ईंधन लकड़ी की व्यवस्था तथा काजा में उच्च ऊंचाई प्रशिक्षण एवं खेल केंद्र (High Altitude and Sports Centre) से संबंधित मुद्दों पर भी चर्चा की गई।

 

पर्यटन सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए सिस्सू में नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर की स्थापना तथा गुस्ख्यार में वन स्टॉप सेंटर भवन के निर्माण से संबंधित विषय भी बैठक के एजेंडे में शामिल रहे।

 

बैठक में मंत्री जगत सिंह नेगी ने विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को लंबित कार्यों में तेजी लाने, आवश्यक स्वीकृतियों से जुड़े मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित करने तथा विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और जनहित से जुड़ी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने पर विशेष ध्यान देने को कहा।

इस बैठक में विधायक अनुराधा राणा, एसडीएम कुनिका एकर्स, एसडीएम उदयपुर ओम प्रकाश, परियोजना अधिकारी अश्वनी कुमार, डीएसपी केडी शर्मा, तहसीलदार विकास कुमार, नायब तहसीलदार शेर सिंह, बीडीओ मनीष राय, अधिशाषि अभियंता जलशक्ति विभाग अजय गुप्ता, अधिशाषी अभियंता लोक निर्माण विभाग अश्वनी गुलेरिया, अधिशाषि अभियंता विद्युत विभाग सूर्या शर्मा,सहित राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

एसआईआर पर भ्रम फैलाने के बजाय तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर बात करे कांग्रेस – राकेश जमवाल

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‌आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला। भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चुनावी प्रक्रिया जैसे संवेदनशील विषय पर राजनीतिक बयानबाजी के बजाय तथ्यों, आंकड़ों और प्रमाणों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एसआईआर को लेकर जनता के बीच भ्रम और आशंकाएं पैदा कर रही है, जबकि मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

 

जमवाल ने कहा कि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री एवं लेखक सुरजीत एस. भल्ला ने अंग्रेजी दैनिक द इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित अपने विश्लेषण में एसआईआर से जुड़े आंकड़ों और दावों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार वर्ष 2024 में ही लगभग 7.3 करोड़ युवा मतदाता पंजीकृत नहीं थे। यह आंकड़ा दर्शाता है कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में पहले से मौजूद कमियों को भी गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।

 

उन्होंने कहा कि प्रारूप मतदाता सूचियों में लगभग 13 करोड़ नाम चिह्नित होने या शामिल नहीं होने के दावे को सीधे तौर पर इतने ही नागरिकों के मताधिकार से वंचित होने का प्रमाण बताना उचित नहीं है। प्रारूप सूची और अंतिम मतदाता सूची में स्पष्ट अंतर होता है। इस दौरान दावे, आपत्तियां, दस्तावेजों का सत्यापन और नियमानुसार सुधार की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होती है।

 

राकेश जमवाल ने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि एसआईआर की प्रक्रिया में वास्तव में कितने पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए, ऐसे मामलों के प्रमाण क्या हैं और संबंधित शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटना गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच तथा नियमानुसार सुधार सुनिश्चित होना चाहिए।

 

जमवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग, ईवीएम और मतदाता सूचियों जैसे विषयों पर लगातार राजनीतिक विवाद खड़े कर रही है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं के निर्णयों पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन आरोपों की विश्वसनीयता के लिए ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है।

 

उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना चाहिए और अपात्र, मृत अथवा दोहरे पंजीकरण जैसी त्रुटियों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अंतर्गत सुधारा जाना चाहिए। मतदाता सूची का पुनरीक्षण पारदर्शी, निष्पक्ष और जवाबदेह तरीके से होना चाहिए।

 

जमवाल ने कहा कि कांग्रेस को एसआईआर के संबंध में उठाई गई अपनी आपत्तियों का तथ्यात्मक आधार जनता के सामने रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए चुनावी प्रक्रियाओं पर विश्वास, संस्थागत जवाबदेही और प्रत्येक पात्र मतदाता के अधिकारों की सुरक्षा आवश्यक है। राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे जनता को सही जानकारी दें और चुनावी सुधारों पर सार्थक संवाद को प्राथमिकता दें।

विधायक हरीश जनारथा ने गरबा-डांडिया कार्यक्रम में की शिरकत, छात्र-छात्राओं का बढ़ाया उत्साह

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला। शिमला शहरी विधायक  हरीश जनारथा ने राजीव गांधी खेल परिसर, संजौली (पुराना एसपीएम ग्राउंड) में रोटारैक्ट, गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज शिमला के छात्र-छात्राओं द्वारा आयोजित गरबा एवं डांडिया कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की शानदार प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उनका उत्साहवर्धन किया।

 

कार्यक्रम के आयोजन के लिए विद्यार्थियों ने विधायक हरीश जनारथा से मुलाकात कर खेल परिसर में गरबा एवं डांडिया कार्यक्रम आयोजित करने का आग्रह किया था। विद्यार्थियों के आग्रह पर विधायक ने आवश्यक सहयोग प्रदान किया, जिससे छात्र-छात्राओं को अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।

 

कार्यक्रम के दौरान विधायक ने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए भविष्य में भी हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। उन्होंने सभी को शारदीय नवरात्रों की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि गरबा और डांडिया जैसे सांस्कृतिक आयोजन हमारी समृद्ध परंपराओं को जीवंत रखने के साथ-साथ युवाओं की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक एकता की भावना को मजबूत करते हैं। विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी से सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए बेहतर मंच मिलता है।

 

  • इस अवसर पर स्थानीय पार्षद अंकुश वर्मा भी उपस्थित रहे।
Shoolini University

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