हिमाचल के विकास में केंद्र का बड़ा योगदान, हर क्षेत्र में हुए रिकॉर्ड कार्य : नड्डा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित “12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” अभियान के अंतर्गत शिमला में आयोजित बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये 12 वर्ष केवल एक सरकार के कार्यकाल नहीं, बल्कि विकसित भारत की मजबूत आधारशिला रखने वाले परिवर्तनकारी वर्ष हैं।

 

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4399 दिनों तक देश के प्रधान सेवक के रूप में कार्य करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता के विश्वास, समर्थन और आशाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब देश ने आजादी के 75 वर्ष पूरे किए, तब प्रधानमंत्री मोदी ने अमृतकाल का आह्वान करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प रखा था और पिछले 12 वर्षों में उस संकल्प की मजबूत नींव रखी जा चुकी है।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश की राजनीति जातिवाद, परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द घूमती थी। आम नागरिक यह मान चुका था कि सरकारें बदलती हैं लेकिन व्यवस्था नहीं बदलती। जनता ने अपनी परिस्थितियों से समझौता कर लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सोच को बदलते हुए राजनीति को सेवा, सुशासन और जवाबदेही का माध्यम बनाया। आज आम नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस करता है क्योंकि उसे विश्वास है कि सरकार उसकी सुनेगी।

 

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र दिया। पहले सरकारें सबके वोट से बनती थीं लेकिन किसी एक परिवार, जाति या क्षेत्र तक सीमित हो जाती थीं। आज मोदी सरकार 140 करोड़ भारतीयों की सरकार के रूप में कार्य कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके करोड़ों कार्यकर्ताओं ने जिन संकल्पों के लिए दशकों तक संघर्ष किया, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें पूरा करके दिखाया। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण, मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाना तथा नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करना ऐसे ऐतिहासिक निर्णय हैं जिन्हें पहले की सरकारें केवल राजनीतिक कारणों से टालती रहीं।

 

नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार को लगातार तीसरी बार जनता का आशीर्वाद मिला है। वर्ष 2014 के बाद हुए तीनों लोकसभा चुनावों में भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पिछले वर्षों में हुए 75 प्रमुख चुनावों में से 43 में भाजपा और एनडीए को विजय प्राप्त हुई है। आज देश के 78 प्रतिशत नागरिक भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में रहते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भाजपा की जनहितकारी नीतियों पर जनता के विश्वास का प्रमाण है।

 

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के आधारभूत ढांचे में अभूतपूर्व क्रांति आई है। रेलवे के विद्युतीकरण में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों, फोरलेन परियोजनाओं और आधुनिक परिवहन नेटवर्क ने देश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा कि आज भारत में विश्वस्तरीय सड़कें और बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा है।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 4 लाख 30 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं जबकि हिमाचल प्रदेश में 14,400 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़क नेटवर्क विकसित किया गया है। इससे गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में बड़ी सफलता मिली है।

 

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली है। हिमाचल प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से देशभर में करोड़ों घरों तक नल से जल पहुंचाया गया है तथा हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत घरों को पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है।

 

नड्डा ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देशभर में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। हिमाचल प्रदेश में लगभग दो लाख शौचालय बनाए गए हैं। यह अभियान केवल निर्माण कार्य नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा का अभियान है।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी एक लाख से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक विस्तार का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 376 मेडिकल कॉलेज थे जो आज बढ़कर 820 से अधिक हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में चंबा, हमीरपुर और नाहन में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं जबकि बिलासपुर में एम्स की स्थापना प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुई है।

 

उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रक्षा निर्यात में 5700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और भारत अब दुनिया के अनेक देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, स्वदेशी रक्षा उपकरण और आधुनिक सैन्य तकनीक भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण हैं।

 

आतंकवाद और नक्सलवाद पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने वाला राष्ट्र बन चुका है। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता, गगनयान मिशन की तैयारी, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर उत्पादन, डिजिटल इंडिया, वंदे भारत ट्रेनें, आधुनिक एयरपोर्ट और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भारत के नए आत्मविश्वास की पहचान हैं।

 

नड्डा ने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वासी, सशक्त और विश्व मंच पर नेतृत्व करने वाला भारत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अमृतकाल की ओर अग्रसर है और भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए पूर्ण समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य कर रहा है।

एमएसएमई सशक्तिकरण की दिशा में हिमाचल की बड़ी छलांग, केंद्र ने की प्रशंसा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

 शिमला । हिमाचल प्रदेश में राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैंप) कार्यक्रम के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा बैठक आज उद्योग निदेशालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने की। बैठक में आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस और संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग उद्योग विभाग,  अनिल ठाकुर, तथा संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग उद्योग विभाग  रमेश वर्मा, , सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

बैठक में मंत्रालय द्वारा स्वीकृत विभिन्न हस्तक्षेपों के तहत राज्य में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। उद्योग आयुक्त ने बताया कि रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। एमएसएमई स्मार्ट पहल के तहत 1,080 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का डिजिटल तत्परता आकलन पूरा किया गया है। वहीं एमएसएमई ग्रीनिंग पहल के अंतर्गत 890 इकाइयों में संसाधन दक्षता एवं स्वच्छ उत्पादन अध्ययन कर पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है।

 

उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए राज्य में 48 प्री-इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लगभग 19 हजार युवा जुड़े हैं। यह पहल नवाचार को बढ़ावा देने और भावी उद्यमियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

एमएसएमई इकाइयों की वित्तीय पहुंच को बेहतर बनाने के लिए इनवॉइस मार्ट और आरएक्सआईएल के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं। इसके माध्यम से एमएसएमई, राज्य सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों एवं निगमों को व्यापार देयक छूट प्रणाली मंच से जोड़ा जा रहा है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या का समाधान होगा। बैठक में बताया गया कि सामाजिक समावेशन रैंप कार्यक्रम का प्रमुख आधार है, जिसके तहत महिला एवं वंचित वर्गों द्वारा संचालित उद्यमों को वित्तीय और व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,325 ग्रामीण महिला उद्यमियों को हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम तथा हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के तहत 60 महिला उद्यमियों की पहचान कर उनमें से 20 के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त 16 वित्तीय एवं नेटवर्किंग बैठकों के माध्यम से 257 महिला उद्यमियों को लाभ पहुंचाया गया।

 

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। जिला उद्योग केंद्रों, एकल खिड़की स्वीकृति प्राधिकरणों तथा उद्योग निदेशालय में 7,492 पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. रजनीश ने योजना के विभिन्न घटकों की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से योजना के सभी पात्र कारीगरों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि देशभर में लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है तथा शेष पात्र कारीगरों को भी शीघ्र टूलकिट उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

 

समीक्षा के दौरान योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक पारंपरिक कारीगरों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
डॉ. रजनीश ने रैंप कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में हासिल उपलब्धियों की प्रशंसा की।

 

उन्होंने कहा कि राज्य ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में उल्लेखनीय कार्य किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योग निदेशालय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन एवं अनुभव यात्राओं का आयोजन करेगा, ताकि एमएसएमई विकास के वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल अपनाकर राज्य के उद्यमिता तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

 

पाबुच ब्राह्मणों की अनूठी ज्ञान परंपरा पर बनी फिल्म ‘मैं हूँ पाबुच’ MIFF 2026 में चयनित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । प्रख्यात फिल्मकार डॉ. देव कन्या ठाकुर द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र फिल्म मैं हूँ पाबुच का चयन प्रतिष्ठित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 में प्रदर्शन हेतु किया गया है। फिल्म का भारतीय प्रीमियर 16 जून 2026 को प्रातः 10:00 बजे ऑडी-2, एफडी-एनएफडीसी कॉम्प्लेक्सपेडर रोडमुंबई में होगा।

 

 

इस वृत्तचित्र का चयन डॉक्यूमेंट्री श्रेणी के प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में किया गया है। प्रिज़्म सेक्शन में भारत तथा विश्व भर की उत्कृष्टनवाचारपूर्ण और प्रभावशाली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता हैजो अपनी विशिष्ट कथावस्तु और सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए जानी जाती हैं।

 

 

मैं हूँ पाबुच हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के खड़काहन गांव में निवास करने वाले पाबुच ब्राह्मण समुदाय की अद्भुत एवं अपेक्षाकृत अल्पज्ञात सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती है। यह फिल्म सदियों से जीवित एक ऐसी ज्ञान परंपरा की पड़ताल करती हैजो आज भी हिमालयी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में जीवंत रूप से संरक्षित और विकसित हो रही है।

 

 

वृत्तचित्र इस विशिष्ट परंपरा की ऐतिहासिक जड़ों को प्राचीन कश्मीर से जोड़ता हैजो कभी शिक्षा और विद्वत्ता का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। कश्मीर की शारदा पांडुलिपियां भारत की महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदाओं में शामिल थींजिनके अध्ययन हेतु देशभर से विद्वान वहां पहुंचते थे। इन्हीं में हिमाचल प्रदेश के ब्राह्मण भी शामिल थेजिन्होंने कश्मीर जाकर शारदा लिपि तथा उससे संबंधित ज्ञान परंपराओं का अध्ययन किया। अपने क्षेत्रों में लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ज्ञान और लिपि की नई परंपराओं का विकास किया।

 

 

इस बौद्धिक यात्रा का एक अनूठा परिणाम पवुची पांडुलिपि परंपरा हैजिसे पाबुच ब्राह्मण समुदाय आज भी संरक्षित किए हुए है। फिल्म समुदाय की विशिष्ट ज्ञान प्रणाली सांचा विद्या पर प्रकाश डालती है। सांचा” वैदिक ज्ञान का एक संक्षिप्त किंतु अत्यंत गूढ़ संकलन हैजिसके माध्यम से पाबुच ब्राह्मण लोगों को मार्गदर्शन और समाधान प्रदान करते हैं।

 

हिमाचल की जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय मंच: MIFF 2026 में प्रदर्शित होगी ‘मैं हूँ पाबुच’
हिमाचल की जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय मंच: MIFF 2026 में प्रदर्शित होगी ‘मैं हूँ पाबुच’

वृत्तचित्र यह दर्शाती है कि यह संपूर्ण और जीवंत ज्ञान प्रणाली आज भी गांव में फल-फूल रही है। यहां 15वीं शताब्दी से संबंधित पांडुलिपियों को अत्यंत सावधानी से संरक्षित किया गया है। लगभग प्रत्येक परिवार इन अमूल्य ग्रंथों की रक्षा करता है तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांचा परंपरा के माध्यम से पवुची विद्या का संरक्षण और संवहन किया जा रहा है। यह फिल्म भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत तथा स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के महत्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।

 

 

मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी और यह दक्षिण एशिया का सबसे पुराना तथा सबसे बड़ा गैर-फीचर फिल्मों का महोत्सव है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) द्वारा आयोजित यह महोत्सव वृत्तचित्रलघु कथा तथा एनीमेशन फिल्मों के लिए विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित मंच के रूप में स्थापित है। यह महोत्सव दुनिया भर के फिल्मकारोंसिनेप्रेमियों और फिल्म उद्योग से जुड़े पेशेवरों को एक साथ लाकर संवादसांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देता है।

 

 

प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में मैं हूँ पाबुच का चयन हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह चयन हिमालयी क्षेत्र में सदियों से संरक्षित एक अद्वितीय जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।

ऊर्जा क्षेत्र के अनुभवी अधिकारी राजेश कुमार चंदेल ने संभाली एसजेवीएन की नई जिम्मेदारी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला ।  भूपेन्द्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, एवं  अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक) ने विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत नवरत्न सीपीएसई, एसजेवीएन के निदेशक (परियोजनाएं) के रूप में कार्यभार ग्रहण करने पर  राजेश कुमार चंदेल को हार्दिक बधाई दी है।

 

 नई दिल्ली स्थित एसजेवीएन के संपर्क कार्यालय में  पार्थजीत डे, निदेशक (वित्त) और  पंकज पोरवाल, मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा एसजेवीएन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने  राजेश कुमार चंदेल का स्वागत किया।

 चंदेल, वर्तमान में एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक के ओएसडी के रूप में कार्यरत रहे। इससे पूर्व उन्होने अक्टूबर, 2025 से नेपाल में स्थित एसजेवीएन की दोनों पूर्ण स्वामित्व वाली अधीनस्थ कंपनियों, अर्थात; एसजेवीएन अरुण-3 पावर डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एसएपीडीसी) तथा एसजेवीएन लोअर अरुण पावर डेवलपमेंट कंपनी प्राइवेट लिमिटेड (एसएलपीडीसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में 900 मेगावाट अरुण-3 जलविद्युत परियोजना तथा 669 मेगावाट लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना के कार्यों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया।

विद्युत क्षेत्र, विशेषत: हाइड्रो क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक के व्यापक अनुभव के साथ  राजेश कुमार चंदेल परियोजनाओं की अवधारणा, आयोजना, निष्पादन, निगरानी तथा अखिल भारत, नेपाल एवं भूटान में अंतरराष्ट्रीय समन्वय के क्षेत्र में श्रेष्ठता रखते हैं। जटिल विद्युत परियोजनाओं के निष्पादन के लिए सशक्त नेतृत्व क्षमता, तकनीकी दक्षता, पारस्परिक संवाद कौशल तथा व्यापक समन्वय क्षमता उनकी प्रमुख विशेषताएं हैं।

इससे पूर्व,  चंदेल ने भूटान में पुनात्सांगछू हाइड्रो इलैक्ट्रिक पावर अथॉरिटी (पीएचपीए-II) के प्रबंध निदेशक एवं सदस्य सचिव के रूप में 1020 मेगावाट पुनात्सांगछू जलविद्युत परियोजना की सफल कमीशनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2020 में, उन्होंने परियोजना प्रमुख के रूप में 66 मेगावाट धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना को अवधारणा से निर्माण चरण तक नेतृत्व प्रदान किया।

 राजेश कुमार चंदेल ने हिमाचल प्रदेश में स्थित 1500 मेगावाट नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन की हेड रेस टनल के निर्माण कार्य में लगभग आठ वर्षों तक महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने कारपोरेट मुख्यालय में कारपोरेट निगरानी एवं समन्वय विभाग, कारपोरेट सुविधा प्रबंधन विभाग तथा निदेशक (सिविल) कार्यालय के साथ  विभिन्न महत्वपूर्ण भूमिकाओं का निर्वहन किया। उन्होंने वर्ष 1990 में हिमुडा से अपने करियर की शुरुआत की तथा 5 मई 1994 को एसजेवीएन में पदभार ग्रहण किया।

14 सितंबर, 1971 को हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के महरे गांव में जन्में  राजेश कुमार चंदेल सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक तथा बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री धारक हैं।  चंदेल द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया), कोलकाता के फेलो सदस्य और चार्टर्ड इंजीनियर भी हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजकीय उच्च विद्यालय, टौणी देवी, हमीरपुर से सम्पन्न की।  चंदेल की धर्मपत्नी  दलजीत चंदेल है तथा उनका पुत्र  रोहित चंदेल है।

                                                         

कांग्रेस में बढ़ती गुटबाजी, 2027 चुनाव से पहले संगठन के सामने बड़ी चुनौती

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में हर पांच वर्ष बाद सत्ता परिवर्तन की परंपरा रही है, लेकिन किसी भी राजनीतिक दल की सफलता उसके संगठन की मजबूती, जमीनी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और नेतृत्व की कार्यशैली पर निर्भर करती है। वर्तमान समय में प्रदेश कांग्रेस के भीतर बढ़ती गुटबाजी, नेताओं के बीच मतभेद और कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

 

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मुख्यमंत्री और सरकार को पार्टी संगठन तथा कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता है। कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और नेताओं के बीच तालमेल की कमी भविष्य में पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है। वर्ष 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और आंतरिक मतभेदों को समाप्त करने की बड़ी जिम्मेदारी है।

 

 

विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में स्वर्गीय Virbhadra Singh की राजनीतिक विरासत, कांग्रेस संगठन की एकजुटता और कार्यकर्ताओं की मेहनत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आज भी वीरभद्र परिवार का प्रभाव प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जाता है।

 

 

राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी बनी हुई है कि लोक निर्माण मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता Vikramaditya Singh की लोकप्रियता प्रदेशभर में बढ़ रही है। युवा वर्ग के साथ-साथ कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में भी उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वहीं होली लॉज को प्रदेश कांग्रेस की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है, जिसका पार्टी की दिशा और रणनीति पर लंबे समय से प्रभाव रहा है।

 

 

वर्तमान परिदृश्य में पूर्व विधायक एवं पूर्व मुख्य संसदीय सचिव Neeraj Bharti का नाम भी चर्चा में है। कांगड़ा की राजनीति में उनकी एक अलग पहचान रही है और युवाओं के बीच उनका प्रभाव माना जाता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि ऐसे जनाधार वाले नेताओं की उपेक्षा या संगठन से दूरी कार्यकर्ताओं में असंतोष का कारण बन सकती है।

 

 

पिछले कुछ वर्षों के दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं जैसे हर्ष महाजन ,सुधींर शर्मा ,राजिंदर राणा  और कार्यकर्ताओं का पार्टी छोड़कर अन्य दलों में जाना भी संगठन के लिए चिंता का विषय रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक स्तर पर संवाद और समन्वय को मजबूत नहीं किया गया तो इसका असर पार्टी की एकजुटता पर पड़ सकता है।

 

इसके अतिरिक्त सरकार और संगठन के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए जिन कुछ व्यक्तियों को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं, उनके अपेक्षित परिणाम न दे पाने की चर्चाएं भी राजनीतिक गलियारों में सुनने को मिल रही हैं। इससे सरकार, संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच संवाद को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

 

 

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कांग्रेस को वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूत स्थिति बनाए रखनी है तो संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना होगा। कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं को प्राथमिकता देनी होगी तथा सभी वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं को साथ लेकर चलने की रणनीति अपनानी होगी। यही पार्टी की एकजुटता और भविष्य की सफलता का आधार बन सकता है।

 

 

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से समय-समय पर यह दावा किया जाता रहा है कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रभावी ढंग से कार्य कर रही है। ऐसे में आने वाले समय में पार्टी किस प्रकार संगठनात्मक चुनौतियों से निपटती है, इस पर राजनीतिक पर्यवेक्षकों की नजर बनी रहेगी।

मुख्यमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में आरडीजी सहित हिमाचल के प्रमुख मुद्दे उठाए

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वीरवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में भाग लिया। बैठक का विषय ‘विकसित भारत के लिए समावेशी मानव विकास’ था।
बैठक में देशभर में समावेशी विकास सुनिश्चित करने तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण को ठोस परिणामों में परिवर्तित करने की रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

 

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के समक्ष मौजूदा वित्तीय चुनौतियों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रधानमंत्री से राज्य के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का आग्रह किया, जो राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति, प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान, जलविद्युत परियोजनाओं में मुफ्त बिजली के हिस्से में कमी तथा जीएसटी व्यवस्था से उत्पन्न राजस्व हानि का आकलन कर सके।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की प्रगति में हिमाचल प्रदेश महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहा है, लेकिन उक्त परिस्थितियों के कारण राज्य को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार राज्य को उसका न्यायोचित हिस्सा प्रदान करने का अनुरोध किया।

 

*उन्होंने कहा कि राजस्व घाटा अनुदान की समाप्ति से प्रदेश की अर्थव्यवस्था बहुत प्रभावित हुई है। पहाड़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों की मांग पर जारी की गई 25,000 करोड़ रुपये की धनराशि नुकसान की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने विकास गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए इस राशि को बढ़ाकर 50,000 करोड़ रुपये करने का आग्रह किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का ‘ग्रीन फ्रंटियर’ है और विकसित भारत के लक्ष्य को वास्तविक रूप देने के लिए केंद्र सरकार को राज्य की विशेष आवश्यकताओं पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय वन प्रबंधन संस्थान के एक अध्ययन के अनुसार हिमाचल प्रदेश देश को प्रतिवर्ष लगभग 90,000 करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करता है, लेकिन इसके अनुरूप राज्य को कोई पर्याप्त आर्थिक प्रतिपूर्ति नहीं मिल रही है।

 

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लगभग 13,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन होने के बावजूद राज्य को मुफ्त बिजली का उचित हिस्सा नहीं मिल रहा है। इसके अतिरिक्त भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) से राज्य को लगभग 7,000 करोड़ रुपये की बकाया राशि भी प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं का सबसे अधिक प्रभाव झेलने के बावजूद प्रदेश को केंद्र द्वारा घोषित 1,500 करोड़ रुपये की विशेष सहायता राशि का अभी भी इंतजार है। उन्होंने कहा कि वर्तमान जीएसटी व्यवस्था के कारण पिछले आठ वर्षों में राज्य को लगभग 25,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ा है।

 

मुख्यमंत्री ने मानव विकास सूचकांकों में प्रदेश की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वर्ष 2025 में पूर्ण साक्षर घोषित हुआ तथा वर्ष 2026 में स्कूल शिक्षा प्रदर्शन ग्रेडिंग सूचकांक में राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया। वर्ष 2022 में उनकी सरकार के कार्यभार संभालने के समय राज्य इस सूचकांक में 21वें स्थान पर था। उच्च शिक्षा में प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात 43 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से 28.4 प्रतिशत अधिक है। उन्होंने राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन का उल्लेख किया।

 

सुक्खू ने कहा कि सौर ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, पंप स्टोरेज तथा बैटरी स्टोरेज जैसी पहलों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश हरित ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने चंद्रभागा-रावी-ब्यास लिंक परियोजना के क्रियान्वयन के दौरान राज्य के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस योजना का उद्देश्य राज्य के लगभग 1.5 लाख निर्धन परिवारों की पहचान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।

 

मुख्यमंत्री ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर हवाई संपर्क की आवश्यकता पर बल देते हुए गग्गल हवाई अड्डे के विस्तार और विकास का मुद्दा उठाया, ताकि हिमाचल प्रदेश को ‘वन स्टेट, वन इंटरनेशनल डेस्टिनेशन’ के रूप में विकसित किया जा सके।

 

उन्होंने बच्चों के पोषण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा शिक्षा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच डेटा साझाकरण को महत्त्वपूर्ण बताते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित, सूचना प्रौद्योगिकी समर्थित तथा साक्ष्य-आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार द्वारा नशे के विरुद्ध चलाए जा रहे व्यापक अभियान की भी जानकारी दी। उन्होंने खुफिया तंत्र को सुदृढ़ बनाने और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

 

बैठक में विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, उप-राज्यपाल, केंद्रीय मंत्री, विशेष आमंत्रित सदस्य, नीति आयोग के उपाध्यक्ष, सदस्य व मुख्य कार्यकारी अधिकारी तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत भी उपस्थित थे।

कालीबाड़ी ऑडिटोरियम में हिमांशु कुमरा को ‘सुदर्शन गौर कला गौरव सम्मान’ से नवाजा गया

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

 

शिमला । अगर मन में कुछ करने की तमन्ना हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता और यह कर दिखाया है शिमला के जाने माने समाजसेवी  हिमांशु कुमरा ने जिन्हें समाज के प्रति उनकी उपलब्धियों को लेकर ऑल इंडिया आर्टिस्ट एसोसिएशन मुंबई के अध्यक्ष वा बॉलीवुड अभिनेता  रोहिताश गौर व उप अध्यक्ष  रेखा गौर  ने कालीबारी ऑडिटोरियम में हिमांशु कुमरा को सुदर्शन गौर कला गौरव सम्मान दे कर सम्मानित किया और उन्हें उज्वल भविष्य की शुभकामनाएं एवं बधाई दी।

 

इस अवसर पर हिमांशु कुमरा ने कहा कि यह अवार्ड उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा वो सबसे महेवपूर्ण अवार्ड है और इस अवसर पर उनके साथ उनकी धर्मपत्नी संतोष कुमरा भी उपस्थित थी ।

 

हिमांशु कुमरा ने इसका श्रेय अपने माता पिता वा अपने गुरुजनों को देते हुए कहा कि उनकी मेहनत और विश्वास से ही वो आज इस मुकाम तक पहुंच पाये हे और आगे भविष्य में भी समाज सेवा करते रहेंगे ।

कांग्रेस सरकार के घड़ियाली आंसू, केंद्र की हजारों करोड़ की मदद पर क्यों नहीं बोलते मुख्यमंत्री? — राकेश जमवाल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला  भाजपा प्रदेश मुख्यप्रवक्ता एवं विधायक राकेश जमवाल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू द्वारा नीति आयोग की बैठक में केंद्र सरकार के प्रति व्यक्त किए गए विचारों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार प्रदेश की जनता के सामने केवल घड़ियाली आंसू बहाने का काम कर रही है। वास्तविकता यह है कि केंद्र सरकार हिमाचल प्रदेश को लगातार आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है, लेकिन अपनी वित्तीय विफलताओं को छिपाने के लिए कांग्रेस सरकार केंद्र पर दोषारोपण कर रही है।

 

 

राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री एक ओर केंद्र से भेदभाव का आरोप लगाते हैं, जबकि दूसरी ओर आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025-26 और 2026 के दौरान हिमाचल प्रदेश को विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के अंतर्गत भारी वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है।
उन्होंने कहा कि केवल विशेष पूंजीगत निवेश सहायता योजना (SASCI) के अंतर्गत ही हिमाचल प्रदेश को कई किश्तों में सहायता प्रदान की गई। इनमें ₹301.62 करोड़, ₹150 करोड़, ₹58.08 करोड़, ₹185.30 करोड़, ₹100 करोड़, ₹20 करोड़, ₹250 करोड़, ₹545 करोड़, पुनः ₹545 करोड़, ₹212.21 करोड़, ₹27.23 करोड़, ₹259 करोड़, ₹44.88 करोड़, ₹58.94 करोड़, ₹350 करोड़, ₹139.79 करोड़ तथा ₹77.50 करोड़ की सहायता शामिल है। यह राशि मिलाकर लगभग ₹3,325 करोड़ से अधिक बैठती है।

 

 

जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह भी बताना चाहिए कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘प्राइड ऑफ हिल्स’ विशेष सहायता योजना के अंतर्गत लगभग ₹3,920 करोड़ की सहायता उपलब्ध करवाई गई है। इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार ने आपदा राहत एवं पुनर्वास के लिए भी उदारतापूर्वक सहायता दी।

 

उन्होंने कहा कि NDRF के माध्यम से प्रदेश को अलग-अलग किश्तों में लगभग ₹107.15 करोड़, ₹451.44 करोड़, ₹23.52 करोड़, ₹601.92 करोड़, ₹37.50 करोड़, ₹254.62 करोड़ तथा ₹451.44 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। इसी प्रकार SDRF के माध्यम से दो किश्तों में ₹198.80 करोड़-₹198.80 करोड़ तथा SDMF के अंतर्गत दो बार ₹49.70 करोड़-₹49.70 करोड़ की सहायता जारी की गई।

 

भाजपा नेता ने कहा कि CAMPA के तहत लगभग ₹35.20 करोड़ और ₹107.61 करोड़, ग्रामीण स्थानीय निकायों को ₹105.60 करोड़, ₹17.20 करोड़, ₹67.95 करोड़, ₹101.93 करोड़, ₹68.64 करोड़, ₹102.45 करोड़ तथा अन्य अनुदान, जबकि शहरी स्थानीय निकायों को ₹53.34 करोड़, ₹35.56 करोड़, ₹35.56 करोड़ और ₹53.34 करोड़ की सहायता प्रदान की गई।

 

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में भी केंद्र सरकार ने ग्रामीण एवं शहरी स्वास्थ्य अनुदानों के माध्यम से लगातार सहायता दी। विभिन्न किश्तों में ₹15.36 करोड़, ₹28.44 करोड़, ₹44.13 करोड़, ₹18.53 करोड़, ₹31.29 करोड़, ₹44.74 करोड़, ₹16.77 करोड़, ₹31.33 करोड़, ₹54.30 करोड़, ₹57.90 करोड़ सहित अनेक अनुदान हिमाचल प्रदेश को प्राप्त हुए।

 

राकेश जमवाल ने कहा कि मुख्यमंत्री यह बताएं कि जब केंद्र सरकार लगातार सहायता उपलब्ध करा रही है, तब प्रदेश की आर्थिक स्थिति क्यों बिगड़ रही है? कर्मचारियों, पेंशनरों, ठेकेदारों और विकास कार्यों के भुगतान में देरी क्यों हो रही है? इसका उत्तर केंद्र सरकार नहीं बल्कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार को देना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश को विशेष प्राथमिकता दी है। राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण विकास, पर्यटन, आपदा पुनर्वास और पूंजीगत निवेश के क्षेत्र में रिकॉर्ड सहयोग दिया गया है। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार राजनीतिक लाभ के लिए भेदभाव का झूठा नैरेटिव खड़ा करने का प्रयास कर रही है।

 

राकेश जमवाल ने कहा कि प्रदेश की जनता जानती है कि केंद्र सरकार लगातार हिमाचल के साथ खड़ी रही है। सच्चाई यह है कि आर्थिक कुप्रबंधन और गलत प्राथमिकताओं के कारण प्रदेश की वित्तीय स्थिति कमजोर हुई है। अपनी विफलताओं से ध्यान हटाने के लिए मुख्यमंत्री बार-बार केंद्र पर आरोप लगाते हैं, लेकिन तथ्य और आंकड़े उनकी बातों का खंडन करते हैं।

बलसन क्षेत्र के शीरगुली गांव में भीषण अग्निकांड, तीन मकान आग की चपेट में

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

 

शिमला । बलसन क्षेत्र के शीरगुली गांव में मंगलवार को भीषण आगजनी की घटना सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आग लायक राम बकसेठ के मकान से शुरू हुई, जिसने देखते ही देखते आसपास के अन्य मकानों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
अब तक तीन मकानों के आग की चपेट में आने की सूचना है। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही समय में लपटों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने अपने स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया, जबकि प्रशासन एवं अग्निशमन विभाग को भी घटना की सूचना दी गई।

 

 

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस अग्निकांड में करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। प्रभावित परिवारों की संपत्ति, घरेलू सामान तथा अन्य कीमती वस्तुएं आग में जलकर राख हो गई हैं।

 

घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है तथा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

स्थानीय लोगों ने सरकार एवं प्रशासन से प्रभावित परिवारों को शीघ्र राहत एवं उचित मुआवजा प्रदान करने की मांग की है।

प्रदेश सरकार व्यवसाय में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को श्रम एवं रोजगार विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इन योजनाओं का लाभ सभी पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभाग को प्रमाण-पत्र एवं लाइसेंस आदि सेवाओं की प्रक्रिया को पूर्णतः ऑनलाइन एवं डिजिटाइज करने के निर्देश दिए ताकि लोगों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्ट-अप योजना-2023 के अंतर्गत युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान 500 अतिरिक्त युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने के लिए 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिसके लिए बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

 

 

उन्होंने कहा कि इसी वित्तीय वर्ष में 500 युवाओं को ई-रिक्शा खरीदने के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 50 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान भी प्रदान किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करवाना तथा पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देना है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में व्यापार एवं उद्योग को प्रोत्साहित करने तथा व्यवसाय करने में सुगमता (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1969 तथा उससे संबंधित नियमों में संशोधन किया है। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत अधिनियम को पूरे प्रदेश में और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा तथा दुकानों एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को चौबीस घंटे संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस निर्णय से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, उद्यमियों को अधिक सुविधाएं प्राप्त होगी तथा उपभोक्ताओं को सुविधा अनुसार खरीदारी करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व्यवसाय करने में सुगमता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अनुपालन प्रणाली को सरल एवं प्रभावी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा एवं उनके कल्याण को भी समान रूप से प्राथमिकता दी जा रही है।

 

 

उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, मुख्य सचिव के.के. पंत, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, सचिव प्रियंका बसु इंग्टी, श्रम आयुक्त वीरेंद्र शर्मा और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

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