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किसान भवन, चंडीगढ़ में श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत को समर्पित छबील लगाई

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

चंडीगढ ।  श्री गुरु अर्जन देव जी की शहादत को समर्पित किसान भवन, सेक्टर-35, चंडीगढ़ में ठंडे-मीठे जल की छबील लगाई गई। इस अवसर पर किसान भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा संगत में ठंडा-मीठा जल, छोले और कड़ाह प्रसाद वितरित किया गया और गुरु साहिब जी की शिक्षाओं को याद किया गया।

 

इस दौरान स. अजयपाल सिंह बराड़ डी.एम.ओ., परवेज़ सिंह चौहान केयर टेकर, रविंदर सिंह गिल, परमिंदर मंगत, नवीन वर्मा, रोशन, हरीश, अश्वनी, नरेश, करनवीर सिंह, अर्शदीप कौर बुट्टर, संत सिंह, गुरप्रीत सिंह समेत स. सुखविंदर सिंह गिल, पंजाब मंडी बोर्ड यूनियन के सदस्यों और पंजाब मंडी बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा तन-मन-धन से सेवा की गई।

 

इस अवसर पर संगत को गुरु साहिब जी की शहादत से प्रेरणा लेते हुए मानवता की सेवा और सरबत दा भला के संदेश पर चलने का आह्वान किया गया।

मुख्यमंत्री ने कसुम्पटी में पार्किंग सुविधा का लोकार्पण किया

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
शिमला  । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज यहां एसडीए कॉम्प्लेक्स, कसुम्पटी में बहुमंजिला पार्किंग सुविधा का लोकार्पण किया। इस पार्किंग परिसर का निर्माण 28.37 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है, जिसमें 315 वाहनों के पार्किंग की व्यवस्था की गई।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

उन्होंने कहा कि यह पार्किंग सुविधा स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों के लिए लाभदायक सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने इस पार्किंग सुविधा के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त बजट का प्रावधान किया था। शिमला शहर में पार्किंग स्थलों की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है और राज्य सरकार अधिक पार्किंग सुविधाओं के निर्माण पर विशेष बल दे रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला को अधिक व्यवस्थित और सुचारु शहर बनाने के लिए राज्य सरकार 246 करोड़ रुपये की लागत से भूमिगत यूटिलिटी डक्ट प्रणाली का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा कि शहर की सौंदर्यात्मक छवि को बढ़ाने के लिए शहर में केबलों को भूमिगत किया जा रहा है। इससे न केवल शहर का बुनियादी ढांचा मजबूत होगा, बल्कि शिमला की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

 

 

सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार शिमला की सर्कुलर रोड के सुधार एवं चौड़ीकरण पर भी 150 करोड़ रुपये व्यय कर रही है। उन्होंने कहा कि इस सड़क पर यातायात दबाव कम होने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुविधा मिलेगी।

 

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, लोक निर्माण एवं शहरी विकास मंत्री विक्रमादित्य सिंह, महापौर सुरेन्द्र चौहान, उप-महापौर उमा कौशल, पार्षदगण, लोक निर्माण विभाग के विशेष सचिव हरबंस सिंह ब्रसकॉन तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

मढोंल पंचायत विकास, खेल और सामाजिक चेतना का आदर्श उदाहरण – रोहित ठाकुर

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

जुब्बल-कोटखाई । मढोल पंचायत में आयोजित  मढोल प्रीमियर लीग प्रतियोगिता में शिक्षा मंत्री  रोहित ठाकुर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्र के विकास, शिक्षा, खेल, सामाजिक सहभागिता पर्यावरण संरक्षण तथा नशा उन्मूलन जैसे विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए और युवाओं का उत्साहवर्धन किया।

अपने संबोधन में रोहित ठाकुर ने कहा कि मढोल पंचायत न केवल जुब्बल.कोटखाई विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े गांवों में से एक है, बल्कि पूरे क्षेत्र में एक आदर्श गांव के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि यहां के युवाओं ने सामाजिक, सांस्कृतिक, खेल एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं, जो अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में विकास शिक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। एक समय ऐसा था जब प्रदेश विभिन्न विकास सूचकांकों में 21वें स्थान पर था लेकिन दूरदर्शी नीतियों और कठिन निर्णयों के परिणामस्वरूप आज हिमाचल प्रदेश देश के 28 राज्यों में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। यदि केंद्र शासित प्रदेशों को भी शामिल किया जाए तो प्रदेश पांचवें स्थान पर है जो समस्त हिमाचल वासियों के लिए गर्व का विषय है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रदेश की परफॉर्मेंस रेटिंग इंडेक्स में भी उत्कृष्ट स्थिति रही है, जो विकास और सुशासन का महत्वपूर्ण संकेतक है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में हिमाचल प्रदेश को देश का सर्वाधिक साक्षर राज्य घोषित किया गया जो शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश की ऐतिहासिक उपलब्धि है। आजादी के समय प्रदेश की साक्षरता दर काफी नीचे थी, जबकि महिलाओं की शिक्षा की स्थिति अत्यंत चुनौतीपूर्ण थी। निरंतर प्रयासों और शिक्षा सुधारों के परिणामस्वरूप यह परिवर्तन संभव हो पाया है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि मढोल  युवक मंडल पिछले कई वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को सकारात्मक दिशा प्रदान कर रहा है। मंडल द्वारा प्रत्येक वर्ष नए नवाचारों और रचनात्मक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज हित में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है। उन्होंने युवक मंडल के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों को बधाई देते हुए उनकी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए 75 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की।

शिक्षा मंत्री ने युवाओं द्वारा खेल मैदान में पवेलियन निर्माण की मांग पर कहा कि इसके लिए शीघ्र ही प्राक्कलन तैयार किया जाएगा और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने बताया कि नागेश्वर देवता मंदिर के विकास के लिए पूर्व में घोषित 15 लाख रुपये में से 9 लाख रुपये जारी किए जा चुके हैं तथा शेष राशि भी जल्द उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नशे की बढ़ती समस्या समाज के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। सिंथेटिक ड्रग्स और अन्य मादक पदार्थों के खिलाफ केवल पुलिस विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज को एकजुट होकर इस लड़ाई में भागीदारी निभानी होगी। उन्होंने युवाओं से खेल, शिक्षा और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से समाज को नशा मुक्त बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग के माध्यम से लगभग करोड़ो रुपये के विकास कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत अनेक नई सड़क परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। पिछले साढ़े तीन वार्षिक मढोल पंचायत क्षेत्र में लगभग साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विकास कार्य स्वीकृत एवं क्रियान्वित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों के विकास की आधारशिला सड़कें होती हैं और इसी सोच के अनुरूप सरकार द्वारा क्षेत्र में आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आगामी डेढ़ वर्ष के भीतर अधिकांश विकास कार्य पूर्ण कर जनता को समर्पित किए जाएंगे।

कार्यक्रम के अंत में शिक्षा मंत्री ने क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों, मातृशक्ति, युवाओं, पंचायत प्रतिनिधियों, युवक मंडल तथा आयोजन समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रतियोगिता में भाग लेने वाली सभी टीमों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि खेलों में जीत और हार से अधिक महत्वपूर्ण खेल भावना अनुशासन और सहभागिता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि  मढोल पंचायत भविष्य में भी विकासए सामाजिक जागरूकता और युवा नेतृत्व के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगी।
विजेताओं को किया सम्मानित 
आयोजित की गई क्रिकेट प्रतियोगिता में कुल 80 टीमों ने भाग लिया और फाइनल मुकाबले में मढोल क्रिकेट टीम ने शवसधार क्रिकेट टीम को हराकर विजेता का खिताब अपने नाम किया। शिक्षा मंत्री द्वारा विजेता टीम को 01 लाख 51 हजार रुपए की राशि और उप विजेता रही टीम को 77 हजार रूपये की प्रस्तावित राशि प्रदान की गई। इसके अलावा प्रतियोगिता के दौरान मैन ऑफ द मैच रहे खिलाड़ियों को एक-एक देवदार का पौधा भी वितरित किया गया।
मढोल प्रीमियर लीग के समापन समारोह में विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने की शिरकत
जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत मढोल में आयोजित मढोल प्रीमियर लीग क्रिकेट प्रतियोगिता के समापन समारोह में रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने बतौर विशिष्ट अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए खेलों को युवाओं के सर्वांगीण विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
विधायक ने कहा कि खेल गतिविधियां युवाओं में अनुशासन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार की खेल प्रतियोगिताएं प्रतिभाओं को निखारने के साथ-साथ युवाओं को नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने प्रतियोगिता के सफल आयोजन के लिए आयोजक समिति, स्थानीय पंचायत तथा क्षेत्रवासियों को बधाई दी।

इस अवसर पर विधायक ने मढोल प्रीमियर लीग के आयोजनकर्ताओं को अपनी ऐच्छिक निधि से 50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी क्षेत्र में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।

समापन समारोह के दौरान विधायक ने विजेता एवं उपविजेता टीमों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया तथा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों की सराहना की। उन्होंने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ आगे भी विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग लेने और प्रदेश तथा देश का नाम रोशन करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में पंचायत प्रतिनिधि, आयोजन समिति के सदस्य, स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, खिलाड़ी तथा बड़ी संख्या में खेल प्रेमी उपस्थित रहे। प्रतियोगिता के सफल आयोजन को लेकर क्षेत्र के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला।

इस अवसर पर  जिला परिषद सदस्य नेहा मेहता, अध्यक्ष पंचायत समिति कमलेश जागटा, उपाध्यक्ष लोकपाल शशखोली, पंचायत समिति सदस्य सुनम बंटा, ग्राम पंचायत मढोल की प्रधान आशा झांगटा, उपप्रधान बबलू झांगटा, युवक मंडल मढोल के प्रधान बॉबी जस्टा, उपप्रधान बंटू धारटा व सचिव रोविन चौहान सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

शूलिनी यूनिवर्सिटी ने रचा इतिहास, QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में देश की नंबर-1 प्राइवेट यूनिवर्सिटी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो।

सोलन । हिमाचल प्रदेश की प्रतिष्ठित शूलिनी यूनिवर्सिटी ने वैश्विक उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में दुनिया की शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों की सूची में स्थान बनाया है। यूनिवर्सिटी को वैश्विक स्तर पर 452वां तथा भारत में समग्र श्रेणी में 10वां स्थान प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही शूलिनी यूनिवर्सिटी लगातार चौथे वर्ष देश की नंबर-1 निजी विश्वविद्यालय बनी हुई है।

 

 

QS क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS Quacquarelli Symonds) द्वारा जारी वर्ष 2027 की रैंकिंग में 106 देशों की 1,500 से अधिक विश्वविद्यालयों को शामिल किया गया है। भारत की 52 विश्वविद्यालयों को इस सूची में स्थान मिला है, जो अब तक की सर्वाधिक संख्या है। इनमें शूलिनी यूनिवर्सिटी एकमात्र निजी विश्वविद्यालय है, जिसने लगातार चार रैंकिंग चक्रों में राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष-10 में अपनी जगह बनाए रखी है।

 

 

पिछले कुछ वर्षों में शूलिनी यूनिवर्सिटी ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वर्ष 2023 में 801-1000 बैंड से शुरुआत करने वाली यूनिवर्सिटी 2024 में 771-780, 2025 में 587, 2026 में 503 और अब 2027 में 452वें स्थान पर पहुंच गई है। यह लगातार सुधार संस्थान की शैक्षणिक गुणवत्ता, अनुसंधान क्षमता और वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

 

 

रैंकिंग में सबसे उल्लेखनीय सुधार “साइटेशन प्रति फैकल्टी” श्रेणी में दर्ज किया गया है, जिसमें शूलिनी यूनिवर्सिटी ने वैश्विक स्तर पर 138वें स्थान से छलांग लगाकर 76वां स्थान हासिल किया है। 62 स्थानों की यह बढ़त भारतीय संस्थानों में अनुसंधान प्रभाव के क्षेत्र में सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है। QS रैंकिंग में इस मानदंड का 20 प्रतिशत वेटेज है, जो किसी संस्थान की शोध गुणवत्ता और वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

 

संस्थापक चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने कहा कि यह उपलब्धि वर्षों की दूरदर्शी सोच, शोध के प्रति समर्पण और नवाचार की संस्कृति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि शूलिनी का उद्देश्य केवल एक विश्वविद्यालय बनाना नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में सार्थक योगदान देने वाला वैश्विक संस्थान स्थापित करना था।

 

 

प्रो-चांसलर विशाल आनंद ने कहा कि आज के छात्र वैश्विक अवसरों, उत्कृष्ट शोध और उद्योग से जुड़े अनुभवों की तलाश में हैं। इस प्रकार की रैंकिंग विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर अवसर सृजित करने में मदद करती है।

 

 

वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने कहा कि भारत का भविष्य उन संस्थानों पर निर्भर करेगा जो शोध, नवाचार और समस्या समाधान को प्राथमिकता देते हैं। यह उपलब्धि ऐसे शैक्षणिक वातावरण के निर्माण की दिशा में शूलिनी के प्रयासों को दर्शाती है, जहां विद्यार्थी और शोधकर्ता विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकें।

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी ने हाल के वर्षों में अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विश्वविद्यालय ने पेटेंट, कॉपीराइट, ट्रेडमार्क और डिजाइन सहित 2,000 से अधिक बौद्धिक संपदा आवेदन दर्ज किए हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालय का H-इंडेक्स 150 से अधिक है तथा इसके 19 वैज्ञानिक स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा जारी दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल हैं।

 

 

इस वर्ष की शुरुआत में QS वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग्स बाय सब्जेक्ट 2026 में भी शूलिनी यूनिवर्सिटी को सात विषयों में विश्व की शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में स्थान मिला था। यही नहीं, एम्प्लॉयर रेप्युटेशन और सस्टेनेबिलिटी जैसे मानकों में भी विश्वविद्यालय ने उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है।

 

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी के इनोवेशन एवं टेक्नोलॉजी प्रेसिडेंट प्रो. आशीष खोसला ने कहा कि यह सफलता गुणवत्तापूर्ण शोध, वैश्विक सहयोग, अत्याधुनिक तकनीक और विद्यार्थियों को नवाचार के लिए प्रोत्साहित करने वाली दीर्घकालिक रणनीति का परिणाम है।

 

 

गौरतलब है कि शूलिनी यूनिवर्सिटी से ऊपर रैंक प्राप्त करने वाले सभी नौ भारतीय संस्थान सरकारी वित्तपोषित हैं और कई दशकों पुराने हैं, जबकि वर्ष 2009 में स्थापित शूलिनी यूनिवर्सिटी ने कम समय में अपनी अलग पहचान बनाते हुए देश और दुनिया में उत्कृष्टता का नया मानदंड स्थापित किया है।

समाज सुधार एवं जन कल्याण सेवा समिति लगाएगी निःशुल्क चिकित्सा शिविर, जरूरतमंदों को मिलेगी सहायक सामग्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला । समाज सुधार एवं जन कल्याण सेवा समिति, ब्लॉक रोहड़ू की एक महत्वपूर्ण बैठक ब्लॉक अध्यक्ष श्री सुरत राम झामटा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सबीर दास रगोरटा, जिला अध्यक्ष जे.पी. चौहान तथा युवा प्रदेश अध्यक्ष सतवंत सिंह (अंकु) विशेष रूप से उपस्थित रहे।

 

बैठक में समिति द्वारा क्षेत्र में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित करने तथा दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों को सहायक सामग्री निःशुल्क उपलब्ध करवाने के संबंध में विस्तृत चर्चा की गई। संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों द्वारा अपने-अपने क्षेत्रों से पात्र लाभार्थियों की सूचियां प्रस्तुत की गईं। साथ ही निर्णय लिया गया कि 20 जून 2026 तक और अधिक पात्र व्यक्तियों की पहचान कर सूची तैयार की जाएगी, ताकि कोई भी जरूरतमंद इस सुविधा से वंचित न रहे।

बैठक में क्षेत्र की खस्ताहाल सड़कों और खदराला-सुंगरी-नरेण बहाली सड़क पर चल रहे मेटलिंग कार्य की गुणवत्ता पर भी चिंता व्यक्त की गई। इस अवसर पर ब्लॉक अध्यक्ष सुरत राम झामटा ने कहा कि रोहड़ू उपमंडल के अंतर्गत विभिन्न सड़कों पर दीवार निर्माण एवं मरम्मत कार्य आवश्यकता के अनुरूप और संतोषजनक ढंग से नहीं हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग के संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्यों का नियमित निरीक्षण नहीं किया जा रहा है, जिससे सरकार द्वारा स्वीकृत बजट राशि का समुचित उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पा रहा।

 

समिति ने इस संबंध में अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग रोहड़ू को ज्ञापन सौंपते हुए उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में संगठन के सहयोग से मौके का निरीक्षण करवाने तथा सड़क कार्यों की गुणवत्ता की जांच करने की मांग की।

 

इसके अतिरिक्त बैठक में विद्युत विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों के कारण उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में कथित वृद्धि पर भी रोष व्यक्त किया गया। इस विषय पर भी संबंधित विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर जनता की शिकायतों का समाधान करवाने पर विचार-विमर्श किया गया। समिति ने कहा कि आम लोगों की समस्याओं को विभागों तक पहुंचाकर उनके शीघ्र समाधान के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।

 

बैठक में महिला इकाई ब्लॉक अध्यक्ष अनीता राणा, उपाध्यक्ष चम्पा झामटा, कमला देवी (डिम्पल नेगी), वरिष्ठ समाजसेवी कमलेश समरैक, पिंकी देवी, रामकृष्ण संग्रेल (अध्यक्ष, ग्राम पंचायत सुंदरनगर), रामचरण कायथ,

किशाऊ बांध परियोजना में हिमाचल को मिली बड़ी सफलता, आठ वर्ष पुराना वित्तीय विवाद सुलझा : मुख्यमंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना में प्रदेश के हितों की रक्षा करते हुए एक और मील पत्थर हासिल किया है।

 

मुख्यमंत्री के सतत प्रयासों से लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित होने वाली 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना टौंस नदी पर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर प्रस्तावित है।

 

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश हित की मजबूती से पैरवी की और पिछले आठ वर्षों से परियोजना की वित्तीय लागत वहन करने से संबंधित गतिरोध को समाप्त करने में बड़ी सफलता हासिल की है।

 

 

भारत सरकार ने परियोजना केे जल घटक के रूप में लाभान्वित होने वाले राज्यों दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक के रूप में होने वाली लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है।

 

मुख्यमंत्री के दृढ़ प्रयासों के फलस्वरूप प्रदेश को होने वाला वित्तीय बोझ कम होगा, जबकि पूर्व की सरकार ऐसा करने में सफल नहीं हो पाई थी। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश हित में इसे स्वीकार नहीं किया।

 

उन्होंने कहा कि परियोजना के जल घटक के लिए भारत सरकार 90 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध करवा रही है, इस स्थिति में विद्युत घटक के लिए इसी प्रकार की सहायता न मिलना अनुचित था।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस परियोजना के कारण विस्थापन का सबसे अधिक प्रभाव हिमाचल प्रदेश की आबादी पर पड़ेगा और राज्य को इससे अधिक नुकसान होगा। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना न्यायसंगत नहीं था तथा राष्ट्र निर्माण में हिमाचल प्रदेश के योगदान की उचित प्रतिपूर्ति की जानी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि परियोजना के पूर्ण होने के उपरान्त राज्य को विद्युत घटक के रूप में प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी। इससे राज्य के वित्तीय संसाधनों में महत्त्वपूर्ण वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सदैव प्रदेश और प्रदेशवासियों के हितों को सर्वाेपरि रखा है तथा उनकी प्रभावी ढंग से रक्षा सुनिश्चित की है। उन्होंने बिजली परियोजनाओं में राज्य के वैध अधिकार, लंबित बकाया राशि तथा अन्य हितों की लड़ाई में हिमाचल प्रदेश की एक बड़ी जीत बताया।

 

बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, लाभान्वित राज्यों के मुख्यमंत्री, संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के. के. पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह तथा ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति भी उपस्थित थे।

कसौली में विकास को मिली नई रफ्तार: 225 करोड़ की सिंचाई और पेयजल योजनाओं पर तेजी से काम — मुकेश अग्निहोत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

सोलन ।  कसौली विधानसभा क्षेत्र में लगभग 225 करोड़ रुपए की सिंचाई व पेयजल योजनाओं का कार्य अंतिम चरण में प्रगति पर है। मुकेश अग्निहोत्री आज कसौली विधानसभा क्षेत्र के कुमारहट्टी में एक ‘आभार सभा’ समारोह में उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित कर रहे थे।

 

इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर भी उपस्थित थे।
मुकेश अग्निहोत्री ने इस अवसर पर ग्राम पंचायत के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों का गांव के समग्र विकास में अहम योगदान होता हैं। उन्होंने आशा जताई कि नवनिर्वाचित प्रतिनिधि प्रदेश सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने में सहयोग देंगे।

 

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कसौली विधानसभा क्षेत्र के लिए 135 करोड़ रुपए से गिरी पेयजल आपूर्ति योजना का कार्य लगभग 90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है तथा शेष कार्य लोगों के सहयोग से शीघ्र पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पेजयल योजना के बनने से 17 ग्राम पंचायतों के लगभग 180 गांव के 55 हजार लोगों को लाभ मिलेगा।

 

मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पट्टा बरावरी सिंचाई योजना का कार्य भी प्रगति पर है। यह योजना लगभग 4.50 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित की जा रही है। इस योजना के पूर्ण होने से 10 गांव की लगभग 116 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी, जिससे किसान लाभान्वित होंगे।

 

उन्होंने कहा कि लगभग 1.15 करोड़ रुपए की लागत से हरिपुर सिंचाई योजना का कार्य भी प्रगति पर है। इस योजना के निर्माण से 54 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी जिससे 08 गांव के निवासियों को लाभ मिलेगा।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कसौली विधानसभा क्षेत्र में एशियन विकास बैंक के सहयोग से 38 करोड़ रुपए की पेयजल आपूर्ति योजना का कार्य भी प्रगति पर है।

 

उन्होंने कहा कि इस योजना से लगभग 10 ग्राम पंचायत के निवासियों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति होगी।
उन्होंने कहा कि 47 करोड़ रुपए की लागत से परवाणू सीवरेज योजना का कार्य भी प्रगति पर है। इस योजना के प्रथम जा़ेन का कार्य पूर्ण हो चुका है और दूसरे ज़ोन का कार्य शीघ्र पूर्ण हो जाएगा। इस कार्य के पूर्ण होने से लोगों को और बेहतर सीवरेज सुविधा मिलेगी।

 

 

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस अवसर पर नवनिर्वाचित प्रतिनिधि को बधाई दी। उन्होंने आशा जताई कि ग्राम पंचायत चेवा के प्रधान अपनी ग्राम पंचायत को आदर्श पंचायत के रूप में विकसित करेंगे।
कसौली के विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने कहा कि ग्राम पंचायत प्रतिनिधि समाज में एक महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत के विकास के लिए प्रदेश सरकार का भरपूर सहयोग रहेगा।

 

ग्राम पंचायत चेवा के प्रधान रमेश चौहान ने इस अवसर पर सभी गणमान्यों का स्वागत किया।
इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष विनय कुमार, प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव विनोद जिंटा, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी विपणन एवं उपभोक्ता संघ लिमिटेड के अध्यक्ष महेश्वर सिंह चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम के उपाध्यक्ष अनुराग शर्मा, जोगिंद्रा केन्द्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष मुकेश शर्मा, प्रदेश जल प्रबंधन बोर्ड के सदस्य सुरेंद्र सेठी, प्रदेश खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम निदेशक मण्डल के सदस्य जतिन साहनी, हिमाचल प्रदेश व्यापार कल्याण बोर्ड के सदस्य शोभित बहल, कांग्रेस पार्टी के अरविंद गुप्ता व राजेन्द्र ठाकुर, उपायुक्त सोलन मनमोहन शर्मा, जल शक्ति विभाग सोलन के अधीक्षण अभियंता संजीव सोनी, उप पुलिस अधीक्षक परवाणू अनिल कुमार सहित विभिन्न के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य गणमान्य व्यक्ति व ग्रामीण उपस्थित थे।

हिमाचल के विकास में केंद्र का बड़ा योगदान, हर क्षेत्र में हुए रिकॉर्ड कार्य : नड्डा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित “12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के” अभियान के अंतर्गत शिमला में आयोजित बुद्धिजीवी सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, रसायन एवं उर्वरक मंत्री तथा भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष भारत के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में लिखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि ये 12 वर्ष केवल एक सरकार के कार्यकाल नहीं, बल्कि विकसित भारत की मजबूत आधारशिला रखने वाले परिवर्तनकारी वर्ष हैं।

 

जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार 4399 दिनों तक देश के प्रधान सेवक के रूप में कार्य करते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह उपलब्धि केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि देश की 140 करोड़ जनता के विश्वास, समर्थन और आशाओं का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जब देश ने आजादी के 75 वर्ष पूरे किए, तब प्रधानमंत्री मोदी ने अमृतकाल का आह्वान करते हुए वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प रखा था और पिछले 12 वर्षों में उस संकल्प की मजबूत नींव रखी जा चुकी है।

 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश की राजनीति जातिवाद, परिवारवाद, तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द घूमती थी। आम नागरिक यह मान चुका था कि सरकारें बदलती हैं लेकिन व्यवस्था नहीं बदलती। जनता ने अपनी परिस्थितियों से समझौता कर लिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने इस सोच को बदलते हुए राजनीति को सेवा, सुशासन और जवाबदेही का माध्यम बनाया। आज आम नागरिक भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का साहस करता है क्योंकि उसे विश्वास है कि सरकार उसकी सुनेगी।

 

नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश को “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का मंत्र दिया। पहले सरकारें सबके वोट से बनती थीं लेकिन किसी एक परिवार, जाति या क्षेत्र तक सीमित हो जाती थीं। आज मोदी सरकार 140 करोड़ भारतीयों की सरकार के रूप में कार्य कर रही है।

 

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके करोड़ों कार्यकर्ताओं ने जिन संकल्पों के लिए दशकों तक संघर्ष किया, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें पूरा करके दिखाया। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाना, अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण, मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक जैसी कुप्रथा से मुक्ति दिलाना तथा नागरिकता संशोधन अधिनियम लागू करना ऐसे ऐतिहासिक निर्णय हैं जिन्हें पहले की सरकारें केवल राजनीतिक कारणों से टालती रहीं।

 

नड्डा ने कहा कि मोदी सरकार को लगातार तीसरी बार जनता का आशीर्वाद मिला है। वर्ष 2014 के बाद हुए तीनों लोकसभा चुनावों में भाजपा देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पिछले वर्षों में हुए 75 प्रमुख चुनावों में से 43 में भाजपा और एनडीए को विजय प्राप्त हुई है। आज देश के 78 प्रतिशत नागरिक भाजपा और एनडीए शासित राज्यों में रहते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और भाजपा की जनहितकारी नीतियों पर जनता के विश्वास का प्रमाण है।

 

उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के आधारभूत ढांचे में अभूतपूर्व क्रांति आई है। रेलवे के विद्युतीकरण में 200 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत रेलवे विद्युतीकरण पूरा हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्गों, सुरंगों, फोरलेन परियोजनाओं और आधुनिक परिवहन नेटवर्क ने देश की तस्वीर बदल दी है। उन्होंने कहा कि आज भारत में विश्वस्तरीय सड़कें और बुनियादी ढांचा तैयार हो रहा है।

 

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में 4 लाख 30 हजार किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़कें बनाई गई हैं जबकि हिमाचल प्रदेश में 14,400 किलोमीटर से अधिक ग्रामीण सड़क नेटवर्क विकसित किया गया है। इससे गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में बड़ी सफलता मिली है।

 

उन्होंने कहा कि उज्ज्वला योजना के माध्यम से करोड़ों महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली है। हिमाचल प्रदेश में लगभग डेढ़ लाख परिवारों को गैस कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। जल जीवन मिशन के माध्यम से देशभर में करोड़ों घरों तक नल से जल पहुंचाया गया है तथा हिमाचल प्रदेश में शत-प्रतिशत घरों को पेयजल सुविधा से जोड़ा गया है।

 

नड्डा ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत देशभर में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया है। हिमाचल प्रदेश में लगभग दो लाख शौचालय बनाए गए हैं। यह अभियान केवल निर्माण कार्य नहीं बल्कि महिलाओं के सम्मान और गरिमा की रक्षा का अभियान है।

 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से करोड़ों गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। हिमाचल प्रदेश में भी एक लाख से अधिक परिवार इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

 

स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए ऐतिहासिक विस्तार का उल्लेख करते हुए नड्डा ने कहा कि वर्ष 2014 में देश में लगभग 376 मेडिकल कॉलेज थे जो आज बढ़कर 820 से अधिक हो चुके हैं। हिमाचल प्रदेश में चंबा, हमीरपुर और नाहन में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं जबकि बिलासपुर में एम्स की स्थापना प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हुई है।

 

उन्होंने कहा कि भारत आज रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। रक्षा निर्यात में 5700 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और भारत अब दुनिया के अनेक देशों को रक्षा सामग्री निर्यात कर रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल, स्वदेशी रक्षा उपकरण और आधुनिक सैन्य तकनीक भारत की बढ़ती ताकत का प्रमाण हैं।

 

आतंकवाद और नक्सलवाद पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने वाला राष्ट्र बन चुका है। नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार से स्थिति में ऐतिहासिक सुधार हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 की सफलता, गगनयान मिशन की तैयारी, मोबाइल निर्माण, सेमीकंडक्टर उत्पादन, डिजिटल इंडिया, वंदे भारत ट्रेनें, आधुनिक एयरपोर्ट और ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क भारत के नए आत्मविश्वास की पहचान हैं।

 

नड्डा ने कहा कि आज का भारत आत्मविश्वासी, सशक्त और विश्व मंच पर नेतृत्व करने वाला भारत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अमृतकाल की ओर अग्रसर है और भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के लिए पूर्ण समर्पण और निष्ठा के साथ कार्य कर रहा है।

एमएसएमई सशक्तिकरण की दिशा में हिमाचल की बड़ी छलांग, केंद्र ने की प्रशंसा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

 शिमला । हिमाचल प्रदेश में राइजिंग एंड एक्सेलेरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस (रैंप) कार्यक्रम के क्रियान्वयन की व्यापक समीक्षा बैठक आज उद्योग निदेशालय में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने की। बैठक में आयुक्त उद्योग डॉ. यूनुस और संयुक्त निदेशक, उद्योग विभाग उद्योग विभाग,  अनिल ठाकुर, तथा संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग उद्योग विभाग  रमेश वर्मा, , सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

बैठक में मंत्रालय द्वारा स्वीकृत विभिन्न हस्तक्षेपों के तहत राज्य में हुई प्रगति की समीक्षा की गई। उद्योग आयुक्त ने बताया कि रैंप कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। एमएसएमई स्मार्ट पहल के तहत 1,080 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों का डिजिटल तत्परता आकलन पूरा किया गया है। वहीं एमएसएमई ग्रीनिंग पहल के अंतर्गत 890 इकाइयों में संसाधन दक्षता एवं स्वच्छ उत्पादन अध्ययन कर पर्यावरण अनुकूल औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया गया है।

 

उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए राज्य में 48 प्री-इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनसे औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पॉलिटेक्निक संस्थानों के लगभग 19 हजार युवा जुड़े हैं। यह पहल नवाचार को बढ़ावा देने और भावी उद्यमियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

 

एमएसएमई इकाइयों की वित्तीय पहुंच को बेहतर बनाने के लिए इनवॉइस मार्ट और आरएक्सआईएल के साथ समझौता ज्ञापन हस्ताक्षरित किए गए हैं। इसके माध्यम से एमएसएमई, राज्य सार्वजनिक उपक्रमों, बोर्डों एवं निगमों को व्यापार देयक छूट प्रणाली मंच से जोड़ा जा रहा है, जिससे भुगतान में देरी की समस्या का समाधान होगा। बैठक में बताया गया कि सामाजिक समावेशन रैंप कार्यक्रम का प्रमुख आधार है, जिसके तहत महिला एवं वंचित वर्गों द्वारा संचालित उद्यमों को वित्तीय और व्यावसायिक अवसरों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

 

सामाजिक समावेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 1,325 ग्रामीण महिला उद्यमियों को हिमाचल प्रदेश राज्य हस्तशिल्प एवं हथकरघा निगम तथा हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। कार्यक्रम के तहत 60 महिला उद्यमियों की पहचान कर उनमें से 20 के लिए विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इसके अतिरिक्त 16 वित्तीय एवं नेटवर्किंग बैठकों के माध्यम से 257 महिला उद्यमियों को लाभ पहुंचाया गया।

 

प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। जिला उद्योग केंद्रों, एकल खिड़की स्वीकृति प्राधिकरणों तथा उद्योग निदेशालय में 7,492 पुराने अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया गया है।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की प्रगति पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डॉ. रजनीश ने योजना के विभिन्न घटकों की समीक्षा करते हुए इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने वित्तीय संस्थानों से योजना के सभी पात्र कारीगरों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि देशभर में लाभार्थियों को टूलकिट उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा रही है तथा शेष पात्र कारीगरों को भी शीघ्र टूलकिट उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

 

समीक्षा के दौरान योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अधिक से अधिक पारंपरिक कारीगरों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
डॉ. रजनीश ने रैंप कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए हिमाचल प्रदेश के प्रयासों की सराहना करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में हासिल उपलब्धियों की प्रशंसा की।

 

उन्होंने कहा कि राज्य ने कार्यक्रम के उद्देश्यों को धरातल पर उतारने में उल्लेखनीय कार्य किया है। बैठक में यह भी बताया गया कि उद्योग निदेशालय भविष्य में अंतरराष्ट्रीय अध्ययन एवं अनुभव यात्राओं का आयोजन करेगा, ताकि एमएसएमई विकास के वैश्विक सर्वोत्तम मॉडल अपनाकर राज्य के उद्यमिता तंत्र को और मजबूत किया जा सके।

 

पाबुच ब्राह्मणों की अनूठी ज्ञान परंपरा पर बनी फिल्म ‘मैं हूँ पाबुच’ MIFF 2026 में चयनित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । प्रख्यात फिल्मकार डॉ. देव कन्या ठाकुर द्वारा निर्देशित वृत्तचित्र फिल्म मैं हूँ पाबुच का चयन प्रतिष्ठित 19वें मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) 2026 में प्रदर्शन हेतु किया गया है। फिल्म का भारतीय प्रीमियर 16 जून 2026 को प्रातः 10:00 बजे ऑडी-2, एफडी-एनएफडीसी कॉम्प्लेक्सपेडर रोडमुंबई में होगा।

 

 

इस वृत्तचित्र का चयन डॉक्यूमेंट्री श्रेणी के प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में किया गया है। प्रिज़्म सेक्शन में भारत तथा विश्व भर की उत्कृष्टनवाचारपूर्ण और प्रभावशाली फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता हैजो अपनी विशिष्ट कथावस्तु और सिनेमाई उत्कृष्टता के लिए जानी जाती हैं।

 

 

मैं हूँ पाबुच हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के खड़काहन गांव में निवास करने वाले पाबुच ब्राह्मण समुदाय की अद्भुत एवं अपेक्षाकृत अल्पज्ञात सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत करती है। यह फिल्म सदियों से जीवित एक ऐसी ज्ञान परंपरा की पड़ताल करती हैजो आज भी हिमालयी क्षेत्र के दूरस्थ गांवों में जीवंत रूप से संरक्षित और विकसित हो रही है।

 

 

वृत्तचित्र इस विशिष्ट परंपरा की ऐतिहासिक जड़ों को प्राचीन कश्मीर से जोड़ता हैजो कभी शिक्षा और विद्वत्ता का प्रमुख केंद्र हुआ करता था। कश्मीर की शारदा पांडुलिपियां भारत की महत्वपूर्ण ज्ञान-संपदाओं में शामिल थींजिनके अध्ययन हेतु देशभर से विद्वान वहां पहुंचते थे। इन्हीं में हिमाचल प्रदेश के ब्राह्मण भी शामिल थेजिन्होंने कश्मीर जाकर शारदा लिपि तथा उससे संबंधित ज्ञान परंपराओं का अध्ययन किया। अपने क्षेत्रों में लौटने के बाद उन्होंने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ज्ञान और लिपि की नई परंपराओं का विकास किया।

 

 

इस बौद्धिक यात्रा का एक अनूठा परिणाम पवुची पांडुलिपि परंपरा हैजिसे पाबुच ब्राह्मण समुदाय आज भी संरक्षित किए हुए है। फिल्म समुदाय की विशिष्ट ज्ञान प्रणाली सांचा विद्या पर प्रकाश डालती है। सांचा” वैदिक ज्ञान का एक संक्षिप्त किंतु अत्यंत गूढ़ संकलन हैजिसके माध्यम से पाबुच ब्राह्मण लोगों को मार्गदर्शन और समाधान प्रदान करते हैं।

 

हिमाचल की जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय मंच: MIFF 2026 में प्रदर्शित होगी ‘मैं हूँ पाबुच’
हिमाचल की जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय मंच: MIFF 2026 में प्रदर्शित होगी ‘मैं हूँ पाबुच’

वृत्तचित्र यह दर्शाती है कि यह संपूर्ण और जीवंत ज्ञान प्रणाली आज भी गांव में फल-फूल रही है। यहां 15वीं शताब्दी से संबंधित पांडुलिपियों को अत्यंत सावधानी से संरक्षित किया गया है। लगभग प्रत्येक परिवार इन अमूल्य ग्रंथों की रक्षा करता है तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांचा परंपरा के माध्यम से पवुची विद्या का संरक्षण और संवहन किया जा रहा है। यह फिल्म भारत की समृद्ध बौद्धिक विरासत तथा स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के महत्व की सशक्त अभिव्यक्ति है।

 

 

मुंबई अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (MIFF) की स्थापना वर्ष 1990 में हुई थी और यह दक्षिण एशिया का सबसे पुराना तथा सबसे बड़ा गैर-फीचर फिल्मों का महोत्सव है। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NFDC) द्वारा आयोजित यह महोत्सव वृत्तचित्रलघु कथा तथा एनीमेशन फिल्मों के लिए विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित मंच के रूप में स्थापित है। यह महोत्सव दुनिया भर के फिल्मकारोंसिनेप्रेमियों और फिल्म उद्योग से जुड़े पेशेवरों को एक साथ लाकर संवादसांस्कृतिक आदान-प्रदान और रचनात्मक सहयोग को बढ़ावा देता है।

 

 

प्रतिष्ठित प्रिज़्म सेक्शन में मैं हूँ पाबुच का चयन हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह चयन हिमालयी क्षेत्र में सदियों से संरक्षित एक अद्वितीय जीवंत ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान करेगा।

Shoolini University

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