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व्यावहारिक शिक्षण और आधुनिक तकनीक से शिक्षकों को सशक्त बना रहा एपीजी शिमला विश्वविद्यालय

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में “Teaching-Learning and Research: Practical Applications” विषय पर एक सप्ताह के फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (FDP) का आज विश्वविद्यालय परिसर में शुभारंभ हुआ। 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किए जा रहे इस छह दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की शिक्षण क्षमताओं, अनुसंधान कौशल, नवाचार क्षमता तथा उच्च शिक्षा में व्यावहारिक अकादमिक अनुप्रयोगों को और अधिक सुदृढ़ करना है।

 

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य प्रो. ममता मोक्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। इस अवसर पर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. देविंदर शर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य अकादमिक सदस्य उपस्थित रहे।

 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रो. ममता मोक्ता ने राष्ट्र निर्माण में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल विद्यार्थियों को ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें सही दिशा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से नवाचार को अपनाने, निरंतर अपने ज्ञान को अद्यतन करने तथा ऐसी विशेषज्ञता विकसित करने का आह्वान किया, जिससे वे विद्यार्थियों के लिए प्रभावी मार्गदर्शक और समाज के लिए उपयोगी पेशेवर बन सकें।

 

प्रो. मोक्ता ने कहा कि व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत विकास के लिए सही दिशा और मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों से अपने कौशल को निरंतर विकसित करने तथा शिक्षण में नए और रचनात्मक तरीकों को अपनाने का आग्रह किया, ताकि विद्यार्थी और समाज किसी भी चुनौती के समाधान के लिए शिक्षकों की ओर विश्वास के साथ देख सकें। उन्होंने एक ऐसे शिक्षण वातावरण के निर्माण पर भी जोर दिया, जो विद्यार्थियों को उभरती हुई चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए तैयार करे।

 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं डीन फैकल्टी, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय, ने शिक्षण एवं अकादमिक जीवन में प्रभावी संचार के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बेहतर संवाद शिक्षकों को विद्यार्थियों के साथ अधिक प्रभावी ढंग से जुड़ने में मदद करता है और शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावशाली बनाता है। उन्होंने उच्च शिक्षा में नए नवाचारों और अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

 

कुलपति प्रो. डॉ. देविंदर शर्मा ने कहा कि फैकल्टी डेवलपमेंट केवल कक्षा शिक्षण तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से निरंतर अनुसंधान अभिविन्यास, नवाचारपूर्ण सोच और व्यावसायिक अनुभव विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जिन शिक्षकों के पास मजबूत अनुसंधान क्षमता, नवाचार की समझ और व्यापक व्यावसायिक अनुभव होता है, वे विद्यार्थियों का बेहतर मार्गदर्शन कर उन्हें सफल अकादमिक एवं व्यावसायिक करियर के लिए तैयार कर सकते हैं।

 

इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, मीडिया विशेषज्ञों और विषय विशेषज्ञों को बतौर रिसोर्स पर्सन शामिल किया गया है। कार्यक्रम के प्रमुख रिसोर्स पर्सन्स में प्रो. डॉ. हरीश ठाकुर, विभागाध्यक्ष, राजनीति विज्ञान विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय; प्रो. डॉ. राजकुमार सिंह, वाणिज्य विभाग, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं मुख्य संपादक, Indian Journal of Finance; प्रो. डॉ. अश्वनी शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं डीन फैकल्टी, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय; डॉ. महेश शर्मा (UIT), हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला तथा सुश्री दीक्षा शर्मा, कम्युनिकेशन एवं पर्सनैलिटी कोच, संस्थापक, OneUp Learning एवं प्रिंसिपल/मनोवैज्ञानिक शामिल हैं।

 

कार्यक्रम के दौरान शिक्षण-अधिगम, अनुसंधान, संचार, नवाचार, व्यावसायिक विकास तथा उच्च शिक्षा में व्यावहारिक अनुप्रयोगों से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे। FDP का उद्देश्य शिक्षकों को अकादमिक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान तथा समकालीन शिक्षण एवं अनुसंधान पद्धतियों से परिचित होने के अवसर प्रदान करना है।

 

उद्घाटन सत्र के अंत में प्रो. आनंद मोहन, डीन अकादमिक्स, एपीजी शिमला विश्वविद्यालय, ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने मुख्य अतिथि, कुलपति, रिसोर्स पर्सन्स तथा सभी शिक्षक सदस्यों का कार्यक्रम में उपस्थिति एवं सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

 

यह फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम एपीजी शिमला विश्वविद्यालय की शिक्षक विकास, अनुसंधान उत्कृष्टता, नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण-अधिगम को बढ़ावा देने की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाता है। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को बदलते शैक्षणिक एवं व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप सक्षम बनाना तथा उन्हें नई पीढ़ी के विद्यार्थियों का प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन एवं सशक्तिकरण करने के लिए तैयार करना है।

तीन दिवसीय सांस्कृतिक उत्सव में संगीत, नृत्य, एंकरिंग और फैशन प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

सोलन । शूलिनी यूनिवर्सिटी के वार्षिक अंतर-विभागीय सांस्कृतिक उत्सव ‘मंचतंत्र 2026’ में फार्मास्युटिकल साइंसेज फैकल्टी ने ओवरऑल ट्रॉफी जीती, जबकि फैकल्टी ऑफ़ एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी एवं बायोइंजीनियरिंग दूसरे स्थान पर रही। 8 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय उत्सव में विभिन्न फैकल्टी के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने संगीत, नृत्य, एंकरिंग, फैशन शो और अन्य सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में भाग लिया। उत्सव की शुरुआत 7 अक्टूबर को फ्लैश मॉब के साथ हुई।

 

फ्लैश मॉब प्रतियोगिता में मीडिया एवं लिबरल आर्ट्स फैकल्टी, लीगल साइंसेज फैकल्टी और योगानंद स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस ने पहला स्थान हासिल किया। फार्मास्युटिकल साइंसेज दूसरे स्थान पर रही, जबकि एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी एवं बायोइंजीनियरिंग को उनके प्रदर्शन के लिए विशेष प्रशंसा पुरस्कार दिया गया।

 

एंकरिंग प्रतियोगिता में बेसिक साइंसेज एवं एग्रीकल्चर फैकल्टी ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि फार्मास्युटिकल साइंसेज दूसरे स्थान पर रही। वेस्टर्न डुएट सिंगिंग प्रतियोगिता में फार्मास्युटिकल साइंसेज विजेता बनी और इंजीनियरिंग फैकल्टी ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। सेमी-क्लासिकल डुएट डांस में बेसिक साइंसेज एवं एग्रीकल्चर ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि मीडिया एवं लिबरल आर्ट्स, लीगल साइंसेज और योगानंद स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस दूसरे स्थान पर रहे।

 

‘द मिसिंग तत्व’ प्रतियोगिता में फार्मास्युटिकल साइंसेज ने जीत दर्ज की। लिबरल आर्ट्स और लीगल साइंसेज ने बेसिक साइंसेज एवं एग्रीकल्चर के साथ संयुक्त रूप से दूसरा स्थान हासिल किया। बॉलीवुड मेडले सॉन्ग प्रतियोगिता में इंजीनियरिंग फैकल्टी विजेता रही, जबकि एप्लाइड साइंसेज और बायोटेक्नोलॉजी एवं बायोइंजीनियरिंग दूसरे स्थान पर रही।

 

ग्रुप फोक डांस और थीम-बेस्ड फैशन शो, दोनों प्रतियोगिताओं में मैनेजमेंट साइंसेज फैकल्टी ने पहला स्थान हासिल किया। ग्रुप फोक डांस में बायोटेक्नोलॉजी फैकल्टी दूसरे स्थान पर रही, जबकि फैशन शो में मीडिया एवं लिबरल आर्ट्स, लीगल साइंसेज और योगानंद स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस ने दूसरा स्थान प्राप्त किया। फैकल्टी की भागीदारी के लिए दिए गए पुरस्कार में भी फार्मास्युटिकल साइंसेज पहले स्थान पर रही, जबकि मीडिया एवं लिबरल आर्ट्स, लीगल साइंसेज और योगानंद स्कूल ऑफ स्पिरिचुअलिटी एंड हैप्पीनेस दूसरे स्थान पर रहे।

 

मंचतंत्र 2026 की प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल में संगीत, फैशन और नृत्य के क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल थे। ‘मिस क्वीन ऑफ हिमालय’ और ‘मिस पहाड़न’ की विजेता तथा ‘मिस हिमाचल बेस्ट रैंप वॉक मॉडल’ का खिताब जीत चुकीं श्वेता ठाकुर ने फैशन शो का मूल्यांकन किया। हर्ष संधू ने गायन प्रतियोगिताओं के निर्णायक की भूमिका निभाई, जबकि सोलन के डांसर और एसजे डांसिंग ज़ोन अकादमी के सह-संस्थापक नवीन पॉल जॉनी ने नृत्य प्रस्तुतियों का मूल्यांकन किया।

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी में सस्टेनेबिलिटी और कम्युनिटी एंगेजमेंट की निदेशक श्रीमती पूनम नंदा ने सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को बधाई दी। उन्होंने कहा, “मंचतंत्र विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा दिखाने, आत्मविश्वास बढ़ाने और टीम के साथ काम करने का अवसर देता है। यह उत्सव विभिन्न फैकल्टी के विद्यार्थियों और फैकल्टी को एक मंच पर लाता है, जहां वे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के साथ एक-दूसरे से सीखते हैं। मैं इस आयोजन को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी विद्यार्थियों, और शिक्षकों को बधाई देती हूं।

राहुल गांधी के पास आरोपों का शोर है, लेकिन सबूतों के नाम पर शून्य बटे सन्नाटा: अनुराग सिंह ठाकुर

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

दिल्ली/शिमला  भारतीय जनता पार्टी के लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री  अनुराग ठाकुर ने  सोमवार को नई दिल्ली स्थित पाटी के केंद्रीय कार्यालय मेंप्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पर चुनाव आयोग, न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं पर निराधार आरोप लगाकरअराजकता फैलाने का आरोप लगाया। श्री ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधीवोट चोरी के आरोपों के समर्थन में प्रमाण प्रस्तुत करें और बताएं कि किसमतदाता का अधिकार छीना गया। उन्होंने कांग्रेस के आपातकाल, जबरननसबंदी और लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का उल्लेख करते हुए विपक्ष केदोहरे रवैये पर सवाल उठाए। पूर्व केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी से अमर्यादितभाषा छोड़कर तथ्यों, प्रमाणों और लोकतांत्रिक जवाबदेही के आधार परराजनीति करने का आग्रह किया।

 

अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी कहने के लिए तो नेता प्रतिपक्ष हैं, लेकिन उन्हें न तथ्यों का पता है, न तर्कों का और न ही नियम-कायदों व कानून का। उन्हें बस यह पता है कि अराजकता कैसे फैलानी है, अस्थिरताकैसे लानी है, संवैधानिक पदों और संस्थाओं को नीचा कैसे दिखाना है तथादुनिया भर में भारत का नाम बदनाम करके देश की छवि को कमजोर कैसेकरना है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश को आज इतने अस्थिर, अराजक औरअगंभीर नेता प्रतिपक्ष के तमाशे और नखरे झेलने पड़ रहे हैं। राहुल गांधी केलबों पर वोट चोरी का आरोप रहता है, जबकि दरअसल वे जनादेश सेसीनाजोरी कर रहे हैं। राहुल गांधी की राजनीति का पूरा पैटर्न ही हवा हवाईहै। हम तो कहेंगे कि राहुल गांधी हवा हवाई नेता हैं। उनकी बातें, आरोप, हरकतें, प्रदर्शन, तथ्य, तर्क और आंकड़े, सब कुछ हवा हवाई है। जबकिधरातल और असलियत में शून्य बटे सन्नाटा है। राहुल गांधी बार-बार आरोपलगाते हैं और फिर अदालत में जाकर माफी मांगते हैं। यह उनका ट्रैक रिकॉर्डहै। हम इतना ही कहेंगे कि “धूल चेहरे पर थी और वे आईना साफ करतेरहे।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 99 चुनाव हारने के बाद भी राहुल गांधी हर सीजनमें यही देखते हैं कि किस पर आरोप लगाना है और ठीकरा कहां फोड़ना है। कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम, कभी मुख्य चुनाव आयुक्त, तो कभीकिसी और को निशाना बनाया जाता है। अब तो स्थिति यह हो गई है किराहुल गांधी सड़क छाप भाषा का प्रयोग कर रहे हैं और निराधार आरोप लगारहे हैं। मगर राहुल गांधी, देश को शोर नहीं, सच चाहिए; आरोप नहीं, प्रमाणचाहिए और राजनीतिक बयान नहीं, स्पष्ट जवाब चाहिए। राहुल गांधीमहामहिम राष्ट्रपति जी के पास गए, जहां उनसे शिकायत के साथ सबूत देनेको कहा गया। लेकिन राहुल गांधी वहां भी बगलें झांकने लगे, भाग गए औरचुप्पी साध ली। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने भी राहुल गांधी से साफ-साफ कह दियाकि वे न्यायालय को अपनी राजनीति का रणक्षेत्र नहीं बना सकते।

 

 

ठाकुर ने कहा कि अब तो राहुल गांधी को यह भी सिखाना पड़ेगा किकिसी मामले की सुनवाई चल रही हो, तो अदालत और मुख्य न्यायाधीश सेसंपर्क करने की प्रक्रिया क्या होती है। अब राहुल गांधी मुख्य न्यायाधीश सेमिलने की बात करने लगे हैं, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है। दरअसल, कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी देश की न्यायिक व्यवस्था कोधमकाने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि हमारी बात नहीं मानी गई, तो हमआपके खिलाफ भी सड़कों पर उतर आएंगे। इस पर अदालत ने भी कहा किउन्हें याचिका दायर करनी होगी। राहुल गांधी पहले भी कई बार अदालत मेंमाफी मांग चुके हैं। अब उन्हें लगता है कि वे सड़कों पर जाकर बार-बार झूठबोलेंगे और उसे दोहराएंगे, तो लोग उसे सच मान लेंगे। राहुल गांधी औरकांग्रेस पार्टी का फंडा बिल्कुल स्पष्ट है – राज नहीं तो अराजकता फैला दो। देश की जनता को अदालत के सामने अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। राहुल गांधी को भी अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। लेकिन राहुलगांधी और कांग्रेस पार्टी अपने आपको एक अतिरिक्त-संवैधानिक संस्थामानते हैं। नेहरू-गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी खुद को नियम, कानून औरसंविधान से ऊपर मानते हैं।

 

अनुराग ठाकुर ने कहा कि यह वही परिवार और पार्टी है, जिन्होंने देश कोअपनी जागीर मानकर रखा है। राहुल गांधी जिस संविधान को हाथ में लेकरचलते हैं, उस संविधान को आपातकाल के समय कांग्रेस के दमन से बचानेका प्रयास देश की जनता, भाजपा और कई अन्य दलों ने किया था। कांग्रेसने तो संविधान को कुचलने का काम किया। जिस पार्टी और परिवार नेसंविधान जलाने का काम किया हो, जिस पार्टी और परिवार ने भारत केलाखों युवाओं की जबरन नसबंदी कराई हो और डेढ़ लाख से अधिक लोगोंको जेलों में डाल दिया हो, जहां जेलें कम पड़ गई हों और मीडिया के लोगोंतक को जेल में डाल दिया गया हो, आज वही संविधान बचाने की बात कररहे हैं। जिस पार्टी और परिवार के लोगों ने धांधली करके चुनाव जीते हों औरफिर देश में आपातकाल लगा दिया हो, वे आज चुनावों में धांधली की बातकैसे कर सकते हैं? हम राहुल गांधी को 1989 का चुनाव भी याद दिलानाचाहते हैं। नकली गांधी बनाम असली गांधी, यानी राजीव गांधी बनामराजमोहन गांधी के बीच हुए चुनाव में कितने मतदान केंद्रों पर लूट हुई थी? राहुल गांधी को देश की आज की युवा पीढ़ी को यह भी बताना चाहिए। इंदिरा गांधी के समय जो कुछ हुआ, उसे भी आज की पीढ़ी को पाठ्यपुस्तकोंमें पढ़ाया जाना चाहिए।

 

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ईवीएम तथा चुनावआयोग पर सवाल इसलिए खड़े करते हैं, क्योंकि वे वापस मतपत्रों कीव्यवस्था लाना चाहते हैं। इसकी वजह यह है कि मतपत्रों को लूटने काइतिहास कांग्रेस पार्टी का रहा है। 99 चुनाव हारने के बाद भी राहुल गांधीचुनाव आयोग पर आरोप लगाने पहुंच जाते हैं। देश की न्यायपालिका कोधमकाना, संवैधानिक संस्थाओं को धमकी देना और उन्हें अपनी जागीरमानना, यही राहुल गांधी और कांग्रेस का इतिहास रहा है। अंग्रेजी में एककहावत है – “What you see, what you are”, यानी जो आपको दिखाईदेता है, वही आपकी सोच को दर्शाता है। आप चुनाव जीतने के लिए जिसतरह के हथकंडों की कल्पना करते हैं, वही आरोप दूसरों पर लगाने लगते हैं। यही कांग्रेस पार्टी की राजनीति है। राहुल गांधी चुनाव आयोग पर आरोप तोलगाते हैं, लेकिन सबूत कहां हैं? राहुल गांधी ने नवंबर में सबूत देने की बातकही थी। क्या उन्होंने अब तक कोई सबूत दिया है? क्या राहुल गांधी ने अपनेआरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत किया है? चुनाव आयोग के किसीफैसले से असहमति जताना लोकतंत्र में आपका अधिकार है, लेकिन किसीसंवैधानिक पदाधिकारी पर आरोप लगाने और असहमति जताने में बहुत बड़ाअंतर है। यदि राहुल गांधी आरोप लगाते हैं, तो सबूत भी देने होंगे। राहुलगांधी बताएं कि किस नियम या कानून का उल्लंघन हुआ? कौन-सा आदेशगलत था? किस मतदाता के अधिकार का हनन हुआ और उसके समर्थन मेंउन्होंने कौन-सा प्रमाण प्रस्तुत किया?

ठाकुर ने कहा कि हम खुले मंच से, इस सभा से और आपकी सभी प्रेसकॉन्फ्रेंसों के माध्यम से पूछते हैं कि किस-किस का वोट काटा गया औरकिसे वोट डालने के अधिकार से वंचित किया गया? राहुल गांधी पूरे देश केआंकड़े सामने नहीं लाते हैं। जिन क्षेत्रों में एसआईआर की प्रक्रिया चली, वहांचार से पांच महीने तक का समय दिया गया। यदि राहुल गांधी को विपक्ष केनेता के रूप में सवाल पूछने का अधिकार है, तो लगाए गए आरोपों के प्रमाणदेना भी विपक्ष की जिम्मेदारी है। देश के सामने सबूत रखिए और अपने दावोंकी स्वतंत्र जांच का समर्थन कीजिए। यदि राहुल गांधी के आरोपों के समर्थनमें प्रमाण नहीं हैं, तो इस पर स्पष्टता दीजिए। लोकतंत्र में जवाबदेही केवलसरकार की नहीं, बल्कि नेता प्रतिपक्ष की भी होती है। इसलिए राहुल गांधीअपनी जिम्मेदारी समझते हुए जवाब दें और निराधार आरोप न लगाएं। जनादेश पसंद आए तो लोकतंत्र और चुनाव हार जाएं तो वोट चोरी, यहदोहरा रवैया नहीं चल सकता। लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जनादेश को बदनाम करने का लाइसेंस नहीं है। इसलिए हम राहुलगांधी और विपक्षी दलों से कहना चाहते हैं कि आरोपों की राजनीति बंद करेंऔर प्रमाणों के साथ बात करें। सबूत प्रस्तुत करें और निराधार आरोपलगाने, गंदे शब्दों तथा अमर्यादित भाषा का प्रयोग बंद करें। यह देश के नेताप्रतिपक्ष के पद के लिए उचित नहीं है। राहुल गांधी सड़क छाप राजनीति औरहवा हवाई बातें करना बंद करें।

ग्रुप मेडिकल कवर से रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस तक का सफर: इन बातों को जानना है बेहद ज़रूरी

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आदर्श हिमाचल की विशेष रिपाट लेखक –  अमरनाथ सक्सेना, चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड (पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड)

आजकल कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को कर्मचारी लाभ पैकेज के तहत ग्रुप मेडिकल कवरेज (जीएमसी) प्रदान करती हैं. कंपनियां वेतन के साथ-साथ आपको जो अतिरिक्त लाभ पेश करती हैं, उनमें यह एक महत्त्वपूर्ण भाग बनकर उभरा है. जीएमसी पॉलिसी नौकरीपेशा लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सुरक्षा तो देती है, लेकिन इसका कवरेज तब तक ही काम करता है जब तक कि आप उस कंपनी में काम करते हैं. यह बात साल 2020 में खास तौर पर सामने आई, जब भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने लॉकडाउन के बाद काम शुरू करने वाली कंपनियों के लिए कर्मचारियों को ग्रुप मेडिकल इंश्योरेंस देना अनिवार्य कर दिया. समय के साथ इसे लागू करने के नियम बेहद लचीले हो गए, लेकिन जीएमसी अब भी कर्मचारियों को मिलने वाला एक सामान्य लाभ है, जो कि नौकरी के दौरान ही मिलता है. क्या आपने कभी सोचा है कि अगली कंपनी आपको जीएमसी न पेश करे या सीमित कवर दे तो क्या होगा? अगर आप करियर में ब्रेक लेना चाहते हैं या फिर एक फ्रीलांसर के तौर पर काम करना चाहते हैं या कारोबारी बनना चाहते हैं, तो आप ये सब कैसे करेंगे? चिंता न करें; आपके पास जीएमसी के तहत मिलने वाले हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज को इंडिविजुअल रिटेल हेल्थ पॉलिसी में ट्रांसफर करने का विकल्प होता है; इसे ‘निरंतर लाभ’ भी कहा जाता है. आइए देखते हैं कि यह कैसे काम करता है.

कैसे ट्रांसफर करें?

सबसे पहले, अगर आपकी जीएमसी पॉलिसी आपके आश्रितों को कवर करती है, तो आप फैमिली फ्लोटर प्लान में ट्रांसफर कर सकते हैं. अगर आपकी पॉलिसी केवल आपको कवर करती है, तो आप उसे इंडिविजुअल रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में ट्रांसफर कर सकते हैं.

सबसे पहले जिस कंपनी ने आपको जीएमसी पेश किया है उन्हें सूचित करें और बताएं कि आप उसी इंश्योरेंस कंपनी में अपनी पॉलिसी को इंडिविजुअल प्लान में ट्रांसफर करना चाहते हैं. ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान हो इसके लिए आपका ग्रुप कवर खत्म हो या इसे रिन्यू करने की तारीख आ जाए, उससे कम से कम 30 दिन पहले इंश्योरेंस कंपनी को अपनी इच्छा बताएं. इसके अलावा, उनके रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट के बारे में सारी जानकारी पढ़ लें, अपनी ज़रूरतों को समझें और इसके बाद अपने लिए एक ऐसा प्लान चुनें जो आपके लिए सर्वश्रेष्ठ हो. एक बार जब आप अपने लिए सर्वश्रेष्ठ प्लान चुन लें, तो इसके बाद अपनी इंश्योरेंस कंपनी को ज़रूरी डॉक्यूमेंट प्रदान करने कहें जैसे कि प्रपोज़ल, ट्रांसफर फॉर्म इत्यादि. अब फॉर्म अच्छी तरह से भर लें, अपनी मौजूदा जीएमसी पॉलिसी की सारी जानकारी अच्छी तरह से साझा करें, मेडिकल हिस्ट्री और क्लेम हिस्ट्री के बारे में भी बताएं. कुल मिलाकर, फॉर्म में जो भी चीज़ें भरने कही गई हैं, उन्हें भरें और अपनी इंश्योरेंस कंपनी के पास जमा कर दें. एक बार जब आपका फॉर्म जमा हो जाता है, तो इसके बाद इंश्योरेंस कंपनी आपके फॉर्म की अच्छी तरह से जांच-पड़ताल करती है और फॉर्म स्वीकार करती है. अब आप नेट बैंकिंग, डेबिट या क्रेडिट कार्ड या यूपीआई के ज़रिए भुगतान कर सकते हैं. इसके अलावा, हो सकता है कि कंपनी आपकी क्लेम हिस्ट्री या हेल्थ डिक्लरेशन के आधार पर कुछ बदलाव/संशोधन करने कहे. कंपनी ने जो भी पेशकश की है उसे अच्छी तरह से देखें और फिर आगे बढ़ें.

 

ट्रांसफर करने के क्या फायदे हैं?

ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर आपने जीएमसी में वेटिंग पीरियड पहले ही पूरी कर ली है, तो पहले से हुई बीमारी या रोग के वेटिंग पीरियड को रिटेल पॉलिसी में एडजस्ट (आमतौर पर आपकी पिछली इंश्योरेंस राशि और उस पर मिलने वाले संचयी बोनस तक) कर दिया जाता है. जैसे कि आप जो रिटेल पॉलिसी लेना चाहते हैं उसमें खास बीमारी के लिए 4 साल का वेटिंग पीरियड है और आपका जीएमसी कवर 3 साल का है. तो इस तरह के मामले में, जीएमसी में पूरे किए गए वर्षों का भी ख्याल रखा जाएगा. यानी आपको उस बीमारी (उपरोक्त बताई गई क्रेडिट सीमा के अधीन) के लिए केवल 1 वर्ष का वेटिंग पीरियड पूरा करने की ज़रूरत है. जीएमसी पॉलिसी का दूसरा फायदा यह है कि ये ऐसी लोगों के समूह को कवरेज देती है, जिनकी इंश्योरेंस की ज़रूरतें एक जैसी होती हैं. रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको अपनी ज़रूरत के मुताबिक कवरेज पाने का मौका मिलता है. जीएमसी में अक्सर विभिन्न बीमारियों के लिए सब-लिमिट्स होती हैं जैसे कि मोतियाबिंद और मातृत्व कवर. रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको उच्च इंश्योरेंस राशि चुनने की सुविधा मिलती है, जो कि आपकी ज़रूरतों के मुताबिक होती है. अंत में, आप अपनी पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करके उसे अपनी ज़रूरत के मुताबिक बनाए रख सकते हैं, चाहे आप नौकरी बदलें या न बदलें.

इन बातों का खास ख्याल रखें: निरंतर लाभ के कई फायदे हैं. हालांकि ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू करने से पहले आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना होता है. आप अपनी जीएमसी पॉलिसी को रिटेल प्लान में उसी कंपनी के पास ट्रांसफर कर सकते हैं जहां से आपने जीएमसी पॉलिसी ली होती है. इसके अलावा, ट्रांसफर करना इंश्योरेंस कंपनी की जोखिम निर्धारण प्रक्रिया और दिशानिर्देशों पर निर्भर होता है. आमतौर पर जीएमसी पॉलिसी में मेडिकल चेकअप की ज़रूरत नहीं होती है, लेकिन अपनी पॉलिसी ट्रांसफर करते समय आपको एक सामान्य मेडिकल जांच करवानी पड़ सकती है. ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि ट्रांसफर के दौरान उनकी इंश्योरेंस राशि बढ़ जाए, ताकि उन्हें और बेहतर कवरेज मिले. हालांकि, इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि वेटिंग पीरियड का फायदा केवल जीएमसी की इंश्योरेंस राशि (और यदि कोई संचयी बोनस हो तो उसके साथ) पर ही लागू होगा. मानिए कि जीएमसी की इश्योरेंस राशि ₹3 लाख है और आप नई पॉलिसी में इंश्योरेंस राशि को ₹5 लाख तक बढ़ाना चाहते हैं. ऐसे में ₹3 लाख पर वेटिंग पीरियड का फायदा मिलेगा; लेकिन अतिरिक्त ₹2 लाख के लिए आपको वेटिंग पीरियड पूरा करने की ज़रूरत होगी. अंत में, यह देखना न भूलें कि आपकी नई पॉलिसी की क्या सीमाएं हैं और कौन सी चीज़ें इसमें अपवाद हैं. नई पॉलिसी के नियम और शर्तों को अच्छी तरह समझ लें, ताकि आपको यह स्पष्ट हो सके कि कवरेज कितना और इसकी क्या सीमाएं हैं. और सबसे ज़रूरी बात, अपनी पॉलिसी पर नज़र बनाए रखें और इसे समय-समय पर रिन्यू करें, ताकि यह हमेशा चालू रहे.

अपनी जीएमसी पॉलिसी को रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करना न केवल सुविधाजनक होता है, बल्कि इसमें आपको अपनी इच्छानुसार कवरेज और बेजोड़ फायदे भी मिलते हैं. उपरोक्त बातों को ध्यान में रखने हुए आप न केवल सूझबूझ भरा फैसला ले सकते हैं, बल्कि अपनी ट्रांसफर प्रक्रिया को भी बेहद आसान बना सकते हैं. अंत में, रिटेल पॉलिसी में ट्रांसफर करने से आपको और आपके प्रियजनों को सुरक्षा के साथ-साथ मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एक मज़बूत आर्थिक सुरक्षा भी मिलती है.

शूलिनी MBA लगातार पांचवीं बार भारत के टॉप 100 B-स्कूलों में शामिल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों
सोलन । शूलिनी यूनिवर्सिटी के मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) प्रोग्राम ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यूनिवर्सिटी को बिजनेस टुडे–MDRA बेस्ट B-स्कूल रैंकिंग 2026–२७ में लगातार पांचवीं बार भारत के टॉप 100 B-स्कूलों में जगह मिली है। शूलिनी MBA को देशभर में 85वीं रैंक मिली है।
शूलिनी बिजनेस स्कूल को हिमाचल प्रदेश में IIM सिरमौर के बाद दूसरा स्थान मिला है। वहीं, प्राइवेट B-स्कूलों की श्रेणी में शूलिनी ने भारत में 66वीं और हिमाचल प्रदेश में पहला रैंक हासिल किया है।
यह उपलब्धि शूलिनी यूनिवर्सिटी के उस प्रयास को दर्शाती है, जिसमें छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाय प्रैक्टिकल लर्निंग, इंडस्ट्री एक्सपोजर और जरूरी स्किल्स पर भी जोर दिया जाता है। इसका उद्देश्य छात्रों को बदलती इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए तैयार करना है।
रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) कैटेगरी में शूलिनी को भारत में 85वीं रैंक मिली है और हिमाचल प्रदेश में IIM सिरमौर के बाद दूसरा स्थान मिला है। वहीं, ऑनलाइन MBA कैटेगरी में शूलिनी ने भारत में 49वीं और हिमाचल प्रदेश में पहली रैंक हासिल की है।
मुख्य रैंकिंग
-भारत में 85वीं – कुल मिलाकर
-भारत में 66वीं – प्राइवेट B-स्कूल
  • हिमाचल प्रदेश में नंबर 1 – प्राइवेट B-स्कूल
  • भारत में 85वीं – रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI)
  • भारत में 49वीं – ऑनलाइन MBA
  • हिमाचल प्रदेश में नंबर 1 – ऑनलाइन MBA
  • हिमाचल प्रदेश में दूसरी – कुल मिलाकर और ROI कैटेगरी में
बिजनेस टुडे–MDRA रैंकिंग विभिन्न मानकों के आधार पर देशभर के मैनेजमेंट संस्थानों का मूल्यांकन करती है। शूलिनी की यह रैंकिंग उसके बेहतर शिक्षण, इंडस्ट्री से जुड़ाव और प्रैक्टिकल लर्निंग को बढ़ावा देने के लिए फैकल्टी और एकेडमिक टीमों के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी के फाउंडर-चांसलर प्रो. पी.के. खोसला ने कहा, “लगातार पांचवीं बार भारत के टॉप 100 B-स्कूलों में शामिल होना हमारी फैकल्टी, छात्रों और एकेडमिक टीम की लगातार मेहनत का परिणाम है। हमारा प्रयास है कि छात्र मैनेजमेंट की मजबूत समझ विकसित करने के साथ-साथ अपने ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों में लागू करना भी सीखें।”
वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने कहा, “यह सम्मान हमारे कैंपस और ऑनलाइन MBA, दोनों प्रोग्राम्स के लिए गर्व की बात है। शूलिनी में हम ऐसे भविष्य के लिए तैयार बिजनेस लीडर्स तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो बिजनेस की चुनौतियों को समझ सकें, उपलब्ध विकल्पों का सही मूल्यांकन कर सकें, सोच-समझकर फैसले ले सकें और अपने फैसलों के परिणामों की जिम्मेदारी ले सकें।”

राष्ट्रपति के सामने भी मुख्यमंत्री ने खोल दी अपने झूठ की गठरी, श्वेत पत्र जारी कर बताएं मेडिकल कॉलेजों में कितनी रोबोटिक मशीनें, कितने ट्रेंड सर्जन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

कांगड़ा/ नगरोटा बगवां । पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता स्वर्गीय विजय मनकोटिया  और स्वर्गीय रामचंद्र भाटिया  के आवास जाकर उनके परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदना जताकर दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद वह नगरोटा बगवां में कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों से मिले।

 

इसके बाद मीडिया से रूबरू होते हुए उन्होंने सुक्खू सरकार पर जमकर हमला बोला। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सरकार बनाने के लिए कांग्रेस ने झूठ बोलने की सारी हदें पार कर दी। नेता चौक-चौराहे पर खड़े होकर ठूंजा साल वाली नौकरी देने की कसमें खा रहे थे। पहले कैबिनेट में एक लाख और कुल पांच लाख नौकरियां देने की गारंटी दे रहे थे। अब सरकार बने 4 साल हो गए हैं।

 

उनकी चार लाख नौकरियां कहां गईं? नौकरियां देना तो दूर, उन्होंने हर साल पूर्व सरकार में आउटसोर्स पर रखे गए हजारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया। सरकार के अंदर रहम नाम की कोई चीज नहीं है। बीते कल ही मंडी के नेर चौक मेडिकल कॉलेज में कार्यरत एक आउटसोर्स कर्मी ने जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। क्योंकि सरकार ने बिना कुछ पूछे-समझे उसे नौकरी से निकाल दिया। सरकार प्रदेशवासियों से आंखें मूंद सकती है लेकिन जिसका परिवार है, वह कहां जाएगा? उनकी बातें सुनकर किसी का भी हृदय द्रवित हो जाएगा। आए दिन का हाल हो गया है, मित्रों के अलावा सरकार किसी के हित की चिंता नहीं कर रही है।

 

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और सुक्खू सरकार के बीच की कलह पूरे प्रदेश के सामने है। बड़ी-बड़ी बातें करने वाले मुख्यमंत्री बार-बार कैबिनेट की बैठकें टाल रहे हैं। उन्हें यह बताना चाहिए कि यह बैठकें क्यों टाली जा रही हैं, क्या कैबिनेट मंत्री ही बैठकों से किनारा कर रहे हैं क्योंकि सरकार में मंत्रिमंडल के बजाय मित्र मंडल की चल रही है? सरकार की नाकामी की कीमत पूरे प्रदेश के लोग चुका रहे हैं। और मुख्यमंत्री सिर्फ झूठ बोलकर अपनी नाकामियों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब उनके झूठ का भांडा फूट चुका है। पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश की जनता का भरोसा कांग्रेस से उठ गया है। लाहौल स्पीति में भी जिला परिषद के अध्यक्ष के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी की जीत के बाद 12 में से 11 जिला परिषद पर भारतीय जनता पार्टी के कब्जे से मुख्यमंत्री के सभी षड्यंत्र नाकाम हुए हैं।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने देश के राष्ट्रपति आदरणीय श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के सामने भी अपने झूठ की गठरी खोल दी। उन्होंने राष्ट्रपति को बताया कि हिमाचल प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी हो रही है? प्रदेश के पांच सौ से ज्यादा सर्जन ने रोबोटिक सर्जरी की ट्रेनिंग भी ले ली है। हैरानी इस बात की है कि क्या मुख्यमंत्री को यह पता नहीं है कि प्रदेश में कितने मेडिकल कॉलेज हैं और उन्होंने कितनी रोबोटिक सर्जरी की मशीन खरीदी हैं? प्रदेश के मेडिकल कॉलेज में कितने सर्जन हैं और उनमें से कितने सर्जन को रोबोटिक सर्जरी करने का प्रशिक्षण दिलवाया गया है।

 

लोग उनके इस दावे से हैरान हैं? चंबा और नाहन मेडिकल कॉलेज के मरीज रोबोटिक सर्जरी वाले ब्लॉक का पता पूछ रहे हैं। राष्ट्रपति के सामने किए गए अपने दावे को साबित करने के लिए मुख्यमंत्री को एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए, जिसमें वह प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज में हो रही रोबोटिक सर्जरी और रोबोटिक सर्जरी में प्रशिक्षित सर्जन का पूरा विवरण हो।

प्रतिभा पहचान से व्यक्तित्व विकास तक: डीएवी सरस्वती नगर सावरा में ‘व्यक्तिगत रूपांतरण एवं मानवीय क्षमता’ पर कार्यशाला

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

सावडा/शिमला ।डीएवी सरस्वती नगर, सावरा, जुब्बल में विद्यार्थियों की अंतर्निहित प्रतिभा, अभिरुचि, क्षमता और भविष्य की संभावनाओं को समझने के उद्देश्य से 3 से 6 अक्टूबर 2026 तक “व्यक्तिगत रूपांतरण एवं मानवीय क्षमता : डिजिटल तकनीकों एवं मनोमितीय परीक्षण के माध्यम से अंतर्निहित प्रतिभा की पहचान” विषय पर विशेष व्याख्यान-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया।

 

 

कार्यक्रम का आयोजन विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री अरुण शर्मा की अध्यक्षता में किया गया। इसमें कक्षा दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं के विज्ञान, वाणिज्य तथा कला संकाय के विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की। कार्यक्रम का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझने में सहायता प्रदान करना था कि महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं व्यवसायिक निर्णय लेने से पहले उनकी अभिरुचि, योग्यता, व्यक्तित्व, सीखने की शैली, रुचियों और अंतर्निहित क्षमताओं को समझना क्यों आवश्यक है।

 

 

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रोफेसर (डॉ.) बी. एस. चौहान, अतिथि आचार्य, आईजीएमसी शिमला, तथा डॉ. नितिका वर्मा, मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण प्रशिक्षक तथा विद्यार्थी परामर्शदाता, ने विद्यार्थियों के साथ संवाद किया।

 

विद्यार्थियों को केवल अंक नहीं, अपनी क्षमता समझने की आवश्यकता : अरुण शर्मा

 

विद्यालय के प्रधानाचार्य  अरुण शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थी अत्यधिक शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा, प्रवेश परीक्षाओं, अभिभावकीय अपेक्षाओं, साथियों की प्रतिस्पर्धा तथा तेजी से बदलते व्यवसायिक अवसरों के बीच शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे वातावरण में कक्षा दसवीं और बारहवीं के आसपास विषय एवं भविष्य के व्यवसाय का चयन विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण निर्णय बन जाता है।

 

उन्होंने कहा कि व्यवसायिक परामर्श केवल यह बताने तक सीमित नहीं होना चाहिए कि कौन-कौन से व्यवसाय उपलब्ध हैं। इससे पहले विद्यार्थियों को स्वयं को समझने का अवसर मिलना चाहिए।

 

प्रधानाचार्य ने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि, योग्यता, व्यक्तित्व, सीखने की शैली, क्षमता, रचनात्मकता और विकास के क्षेत्रों को समझकर ही उन्हें उचित दिशा प्रदान की जा सकती है।

उन्होंने इस प्रकार के कार्यक्रमों को विद्यालयी शिक्षा का नियमित एवं महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

चिकित्सा, गैर-चिकित्सा, कला और वाणिज्य को लेकर विद्यार्थियों ने व्यक्त किए विचार

कक्षा दसवीं के विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से उपयोगी रहा, क्योंकि वे शीघ्र ही अपने आगामी विषय-संयोजन और शैक्षणिक दिशा का चयन करने वाले हैं।

संवाद के दौरान अनेक विद्यार्थियों ने चिकित्सा क्षेत्र में जाने की इच्छा व्यक्त की, जबकि कई विद्यार्थियों ने गैर-चिकित्सा विज्ञान को अपने भविष्य के लिए उपयुक्त बताया। कुछ विद्यार्थियों ने कला तथा वाणिज्य विषयों को चुनने में भी रुचि दिखाई।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समझाया कि किसी भी विषय-संकाय को दूसरे से श्रेष्ठ या निम्न मानना उचित नहीं है। विषय का चयन विद्यार्थी की रुचि, योग्यता, शैक्षणिक तैयारी, व्यक्तित्व, प्रेरणा और भविष्य के लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए।

कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के विद्यार्थियों, विशेष रूप से चिकित्सा एवं गैर-चिकित्सा वर्ग के विद्यार्थियों ने भी विशेषज्ञों के साथ उत्साहपूर्वक संवाद किया।

व्यवसायिक परामर्श से प्रतिभा-आधारित परामर्श की ओर बढ़ने की आवश्यकता

प्रोफेसर (डॉ.) बी. एस. चौहान ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यालयों को पारंपरिक व्यवसायिक परामर्श से आगे बढ़कर प्रतिभा-आधारित, वैज्ञानिक एवं प्रमाण-आधारित परामर्श व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि सामान्यतः व्यवसायिक परामर्श का पहला प्रश्न होता है—“आप कौन-सा व्यवसाय चुनना चाहते हैं?” लेकिन इससे पहले यह समझना आवश्यक है कि “आप किस प्रकार के विद्यार्थी हैं, आपकी प्रमुख क्षमताएं और रुचियां क्या हैं तथा इन्हें किस दिशा में विकसित किया जा सकता है?”

उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने ब्रिटेन, जापान, थाईलैंड और संयुक्त अरब अमीरात सहित विभिन्न देशों की शैक्षणिक व्यवस्थाओं एवं संस्थानों का अध्ययन तथा भ्रमण किया है। उन्होंने शिक्षा में मनोविज्ञान, तकनीक, नवाचार और मानवीय क्षमता विकास के बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालयों में प्रतिभा पहचान, मनोमितीय परीक्षण, व्यक्तिगत परामर्श, मार्गदर्शन, परामर्शोत्तर अनुश्रवण और व्यवसायिक नियोजन को एक व्यवस्थित प्रक्रिया के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।

वैश्विक शिक्षा व्यवस्था के संदर्भ में भारत के सामने बड़ी चुनौती

कार्यशाला में भारत की शिक्षा व्यवस्था और वैश्विक शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा पर भी गंभीर चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय रैंकिंग में भारत के शीर्ष संस्थान अभी भी विश्व के सर्वोच्च स्तर पर पर्याप्त संख्या में स्थान नहीं बना पाए हैं। क्यूएस विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग 2027 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली 118वें और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुंबई 134वें स्थान पर हैं।

हालांकि इन रैंकिंग को किसी देश की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था का अंतिम मापदंड नहीं माना जा सकता, लेकिन ये आंकड़े भारत के सामने वैश्विक शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में मौजूद चुनौती को अवश्य रेखांकित करते हैं।

वहीं दूसरी ओर, भारत ने नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। वैश्विक नवाचार सूचकांक 2025 में भारत को 38वां स्थान प्राप्त हुआ है। इस प्रकार भारत की स्थिति को केवल चुनौतियों के संदर्भ में नहीं, बल्कि तेजी से हो रही प्रगति के संदर्भ में भी देखना आवश्यक है।

कार्यशाला में यह विचार सामने आया कि भारत को अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीक के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करना होगा।

नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत कभी विश्व के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में शामिल था, जहां दुनिया के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी ज्ञान प्राप्त करने आते थे। आज आवश्यकता है कि भारत पुनः ऐसा शैक्षणिक वातावरण विकसित करे, जहां ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार, रचनात्मकता और मानवीय विकास एक साथ आगे बढ़ें।

डिजिटल तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का महत्वपूर्ण पक्ष डिजिटल तकनीकों एवं मूल्यांकन उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन रहा।

इस दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों को निम्नलिखित विषयों एवं तकनीकों से परिचित कराया गया—

– डर्मेटोग्लिफिक्स बहु-बौद्धिकता परीक्षण
– ब्रेन जिम गतिविधियां
– ओमरोन कराडा स्कैन
– डीएनए प्रोफाइलिंग की संभावनाओं का परिचय
– मनोमितीय परीक्षणों के माध्यम से विद्यार्थी की विभिन्न विशेषताओं को समझने के तरीके
– तकनीक आधारित वैज्ञानिक विद्यार्थी परामर्श

विद्यार्थियों तथा शिक्षकों ने इन गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

प्रदर्शन में अनन्या जिंटा, आर्य देव, श्रिया, नमन चौहान, नन्या झालटा और अडू रिका झांटा सहित विद्यार्थियों ने भाग लिया। शिक्षकों में आरती शर्मा, अंशुमन नेगी, स्वाति शाक्तान, विनय कुमार, सुषमा घेजटा, पूजा ओक्टा और राहुल जिंटा ने सक्रिय सहभागिता की। विद्यालय के प्रधानाचार्य अरुण शर्मा तथा उपप्रधानाचार्य सुशील कुमार ने भी गतिविधियों में भाग लिया।

विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि किसी भी डिजिटल तकनीक या परीक्षण को विद्यार्थी के भविष्य का अंतिम निर्धारक नहीं माना जाना चाहिए। ऐसे उपकरणों का उपयोग मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन, शिक्षक के अवलोकन, शैक्षणिक प्रदर्शन, विद्यार्थी की रुचियों तथा विशेषज्ञ परामर्श के साथ समग्र रूप से किया जाना चाहिए।

शिक्षकों और विद्यार्थियों ने की कार्यक्रम की सराहना

विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और अंकों की दृष्टि से देखने के बजाय उनके समग्र व्यक्तित्व और संभावनाओं को समझने में सहायता करते हैं।

उपप्रधानाचार्य एवं वरिष्ठ अंग्रेजी शिक्षक श्री सुशील कुमार ने कहा कि विद्यार्थियों को अंकों से आगे बढ़कर अपनी वास्तविक क्षमताओं, रुचियों और व्यक्तित्व को समझने के अवसर मिलने चाहिए।

श्री विनय कुमार सहित अन्य शिक्षकों ने भी आधुनिक तकनीक, मनोविज्ञान और विद्यार्थी परामर्श को विद्यालयी शिक्षा से जोड़ने की पहल की सराहना की।

विद्यार्थियों ने भी कहा कि कार्यशाला ने उन्हें विषय चयन और भविष्य के व्यवसाय को लेकर एक नया दृष्टिकोण दिया तथा अपनी रुचियों एवं क्षमताओं के बारे में सोचने का अवसर प्रदान किया।

कार्यशाला से उभरे दस प्रमुख मार्गदर्शक सूत्र

कार्यशाला के दौरान विद्यालयों और अभिभावकों के लिए निम्नलिखित प्रमुख सुझाव सामने आए—

1. व्यवसाय सुझाने से पहले विद्यार्थी को समझें।
2. कक्षा दसवीं से पहले व्यवस्थित परामर्श की व्यवस्था विकसित करें।
3. मनोमितीय परीक्षण को विशेषज्ञ मानवीय परामर्श के साथ जोड़ें।
4. डिजिटल तकनीकों का जिम्मेदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपयोग करें।
5. विज्ञान, वाणिज्य और कला—सभी शैक्षणिक मार्गों को समान सम्मान दें।
6. मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
7. विद्यालय स्तर पर प्रतिभा पहचान एवं मार्गदर्शन व्यवस्था विकसित करें।
8. अभिभावकों को विद्यार्थी के भविष्य निर्माण में सहभागी बनाएं।
9. सफलता को केवल अंकों से नहीं, बल्कि रचनात्मकता, नवाचार, नेतृत्व, खेल, अनुसंधान और सामाजिक योगदान से भी मापें।
10. मनोविज्ञान, तकनीक, कौशल और व्यवसायिक अवसरों को जोड़कर भविष्य के लिए तैयार शिक्षा व्यवस्था विकसित करें।

भविष्य के विद्यार्थी परामर्श के लिए बन सकता है आदर्श मॉडल

कार्यक्रम से निकलकर सामने आया केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—“व्यवसायिक परामर्श व्यवसायों की सूची से नहीं, बल्कि विद्यार्थी को समझने से शुरू होना चाहिए।”

प्रधानाचार्य अरुण शर्मा ने दोनों विशेषज्ञों, विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विद्यालय भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते शैक्षणिक और व्यवसायिक वातावरण में विद्यार्थियों को निरंतर, वैज्ञानिक और संवेदनशील मार्गदर्शन की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का समापन व्यक्तिगत रूपांतरण, वैज्ञानिक परामर्श, तकनीक के जिम्मेदार उपयोग और मानवीय क्षमता के विकास के संकल्प के साथ हुआ।

डीएवी सरस्वती नगर, सावरा में आयोजित यह पहल केवल एक कार्यशाला नहीं, बल्कि शिक्षा को अंक-केंद्रित व्यवस्था से प्रतिभा-केंद्रित एवं मानवीय विकास-केंद्रित व्यवस्था की ओर ले जाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास के रूप में सामने आई।

संगठन की मजबूती और आगामी कार्यक्रमों को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हमीरपुर की मासिक बैठक सम्पन्न

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 आदर्श हिमाचल ब्यूरों
हमीरपुर । ब्लॉक कांग्रेस कमेटी हमीरपुर की मासिक बैठक सोमवार को यहां लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में ब्लॉक अध्यक्ष सुनील कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू और जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुमन भारती विशेष रूप से उपस्थित रहे।
 बैठक में कांग्रेस संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत एवं सक्रिय बनाने, आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की तैयारियों तथा जनहित से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों को लेकर विस्तारपूर्वक चर्चा एवं विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने संगठन की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा करते हुए आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिए आपसी समन्वय और एकजुटता के साथ कार्य करने पर जोर दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं से पार्टी की विचारधारा और नीतियों को आम जनता तक पहुंचाने तथा जनता से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाने का आह्वान किया गया।
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील कुमार ने कहा कि कांग्रेस संगठन की सबसे बड़ी ताकत उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। कार्यकर्ताओं के सम्मान और उनके सुझावों को हमेशा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही जनता की आवाज को प्रभावी ढंग से उठाने में सक्षम होता है। उन्होंने सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं से मिलजुलकर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और अधिक से अधिक लोगों को कांग्रेस की विचारधारा से जोड़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी द्वारा संगठनात्मक गतिविधियों को और गति दी जाएगी तथा जनता से जुड़े विभिन्न मुद्दों को उचित मंच पर प्रमुखता से उठाया जाएगा। कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ जनसेवा के कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
बैठक में कांग्रेस पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों तथा प्रदेश सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं एवं साढे तीन वर्ष की उपलब्धियों को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। पार्टी पदाधिकारियों ने भाजपा के दुष्प्रचार का करारा जवाब देने और केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों को बेनकाब करने के लिए व्यापक अभियान चलाने का निर्णय भी लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू जिला हमीरपुर के लिए एक से बढ़कर एक प्रोजेक्ट मंजूर कर रहे हैं। इससे जिला हमीरपुर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। इसका बूथ स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार होना चाहिए।
 इस अवसर पर मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू ने कहा कि वोट चोरी और कई अन्य राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति आम जन मानस को जागृत करने के लिए कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने व्यापक अभियान चलाया है। जिला हमीरपुर में भी इस अभियान के साथ-साथ आम लोगों को मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार की जनहितैषी नीतियों तथा साढे तीन वर्ष की उपलब्धियों से अवगत करवाया जाएगा तथा भाजपा के दुष्प्रचार का करारा जवाब दिया जाएगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू,कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुमन भारती,जिला प्रभारी सुशील शर्मा,मुनीश गुप्ता, जिला महासचिव निशा कटोच, राजेश आनंद,APMC अध्यक्ष अजय शर्मा, ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुनील कुमार,वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोहर लाल कानूगो, नीरज ठाकुर, साक्षी कुमारी, प्रधान नीलम, रीना, प्रशासनिक सचिव ओम प्रकाश, हेतराम, देवी दास शहंशाह,अनिल चौधरी, मनोज ठाकुर,मनोज शर्मा, सुनील ठाकुर, चंदन ठाकुर, रजत राणा,निशांत शर्मा सहित अन्य कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में सभी पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने संगठन की मजबूती, कार्यकर्ताओं के सम्मान तथा जनहित एवं जनसेवा के प्रति निरंतर समर्पित होकर कार्य करने का संकल्प लिया।
 बैठक के बाद पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में सुनील शर्मा बिट्टू ने कहा कि जिला के कई भाजपा नेता आए दिन मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू और प्रदेश सरकार के खिलाफ भ्रामक बयानबाजी करते रहते हैं। ऐसे नेताओं को बेनकाब करने और मुख्यमंत्री द्वारा जिला हमीरपुर में करवाए जा रहे अथाह विकास कार्यों से जन-जन को अवगत करवाने के लिए कांग्रेस कार्यकर्ता गांव-गांव में अभियान चलाएंगे।

शूलिनी की PhD स्कॉलर को IUFRO अकेसिया कॉन्फ्रेंस के लिए ANRF समर्थन

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 आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
सोलन  शूलिनी यूनिवर्सिटी की PhD स्कॉलर अन्वेषा बंद्योपाध्याय को हनोई, वियतनाम में 5 से 8 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली प्रतिष्ठित इंटरनेशनल यूनियन ऑफ़ फ़ॉरेस्ट रिसर्च ऑर्गनाइज़ेशन (IUFRO)
UFRO Acacia 2026 Conference में शामिल होने के लिए अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) से वित्तीय सहायता मिली है।
बायोटेक्नोलॉजी में PhD कर रहीं बंद्योपाध्याय डॉ. तरुण पाल के मार्गदर्शन में शोध कार्य कर रही हैं। IUFRO Acacia 2026 का आयोजन “Sustaining Acacia Plantations in a Dynamic Changing World” थीम के तहत हो रहा है। सम्मेलन में दुनिया भर के शोधकर्ता, वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और उद्योग विशेषज्ञ एकत्र होकर अकेसिया अनुसंधान और इसके टिकाऊ प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श करेंगे ।
सम्मेलन में अकेसिया की genetics और breeding, biodiversity, climate-resilient plantation management, pest and disease management, value-chain innovation, circular bioeconomy तथा sustainable development जैसे विषयों पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों के बीच वैज्ञानिक ज्ञान एवं अनुभव साझा करना तथा बदलते पर्यावरण और जलवायु परिस्थितियों में अकेसिया प्लांटेशन के टिकाऊ विकास के लिए सहयोग को बढ़ावा देना है।
ANRF से मिली यह सहायता  बंद्योपाध्याय को अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक मंच पर शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों के साथ संवाद करने तथा अकेसिया अनुसंधान, sustainable forestry और biotechnology के क्षेत्र में वैश्विक शोध गतिविधियों से जुड़ने का अवसर प्रदान करती है। यह उपलब्धि शूलिनी यूनिवर्सिटी में हो रहे शोध कार्यों और युवा शोधकर्ताओं को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंचों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

दून विधान सभा क्षेत्र के नवनिर्वाचित पंचायती राज प्रतिनिधियों के सम्मान समारोह में पहुंचे जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर साधा निशाना

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

सोलन: बीबीएन।  दून विधानसभा क्षेत्र के पंचायती राज संस्थाओं के नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सम्मान में बद्दी में आयोजित समारोह में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव रोकने के लिए हरसंभव षड्यंत्र किए, लेकिन भाजपा ने जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक मजबूती से लड़ी और सरकार को चुनाव करवाने के लिए विवश होना पड़ा। उन्होंने कहा कि आज जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक है। उन्होंने सभी से अपने क्षेत्रों के विकास और जनता की सेवा को प्राथमिकता देते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का आग्रह किया।

 

 

सभी नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों को सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा कि आज जनता के आशीर्वाद से चुने गए इन प्रतिनिधियों का सम्मान लोकतंत्र की जीत, जनभावनाओं की विजय और मुख्यमंत्री के तानाशाही की हार का प्रतीक है।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में आज मंत्रिमंडल नहीं, मित्र मंडल फैसले ले रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की इसी कार्यशैली का असर प्रदेश की व्यवस्था पर दिखाई दे रहा है और उद्योग नगरी बद्दी में अराजकता की स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि बद्दी-दून जैसे महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, विकास और उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए, लेकिन सरकार इन विषयों पर प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय अपने मित्रों को खुश करने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘हिमाचल ऑन सेल’ की मुहिम चल रही है और प्रदेश के हितों के साथ लगातार समझौते किए जा रहे हैं।

 

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि अब समय है कि भाजपा के सभी कार्यकर्ता और पंचायती राज संस्थाओं के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि, सभी कार्यकर्ता, पदाधिकारी एकजुट होकर जनता के बीच जाएं और सुक्खू सरकार की नाकामियों को प्रदेशवासियों के सामने रखें। प्रदेश के हितों की रक्षा और जनविरोधी निर्णयों के खिलाफ भाजपा मजबूती से संघर्ष करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि एकजुट होकर काम करें और आने वाले समय में हिमाचल प्रदेश में भाजपा की ऐतिहासिक विजय के लिए पूरी ताकत के साथ कार्य करें।

 

 

 

नवनिर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान सम्मेलन में शामिल होने बद्दी पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने नालागढ़ में पत्रकारों से बातचीत की। पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार औद्योगिक क्षेत्र में वसूली का बड़ा नेटवर्क चलवा रही है। अपनी और अपने चहेतों की जेब भरने के लिए सरकार प्रदेश में उद्योगों की वजह से होने वाले लाभों से प्रदेश को वंचित कर रही है। सरकार की इस अराजकता की वजह से उद्योग पलायन कर रहे हैं, जिससे प्रदेश को होने वाले आर्थिक लाभ और उत्पन्न होने वाली रोजगार की संभावनाएं समाप्त हो रही हैं। अपनी जेबें भरने के लिए सत्ता संरक्षित जो अराजकता औद्योगिक क्षेत्र में फैली है, उसका खामियाजा प्रदेश को भुगतना पड़ेगा।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि एक तरफ सरकार द्वारा संरक्षित लोगों द्वारा उद्योगों से वसूली का नेक्सस चलवाया जा रहा है, दूसरी तरफ सरकार टैक्स पर टैक्स लगाकर उद्योगों का मनोबल भी तोड़ रही है। व्यवस्था परिवर्तन का नारा देकर विजनलेस होकर मित्र हित में काम किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में प्लाटों के आवंटन के नाम पर करोड़ों की वसूली की जा रही है और सरकार द्वारा कुछ खास अधिकारियों को तैनाती देकर इंडस्ट्रीज का अलग तरीके से दोहन किया जा रहा है। औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण चरम पर है, लोगों का जीना मुश्किल हुआ है। रोज लोग धरने पर हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार अपने ही कामों में मस्त है। हालात यह हैं कि प्रदेश में एशिया की सबसे बड़ी फार्मा इंडस्ट्री अब यहां से छोड़कर जाने को विवश है। मुख्यमंत्री को झूठ बोलकर अपना समय काटने के बजाय प्रदेशवासियों के हितों पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि उद्योगों के पलायन से प्रदेश में निवेश का माहौल प्रभावित होगा और राज्य को मिलने वाला राजस्व भी कम होगा। उद्योगों के बाहर जाने से रोजगार के अवसर घटेंगे और इसका सीधा असर प्रदेश की आर्थिकी तथा युवाओं के भविष्य पर पड़ेगा।

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