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शिमला में 500 से अधिक विद्यार्थी बनेंगे ‘विश्व नेता’, 16 से शुरू होगा IIMUN युवा सम्मेलन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । दुनिया के सबसे बड़े युवा-नेतृत्व वाले संगठनों में से एक माने जाने वाले इंडियाज इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आई.आई.एम.यू.एन.) की ओर से शिमला में 16 से 18 अक्तूबर 2026 तक तीन दिवसीय सिटी-लेवल काउंसिल का आयोजन ऑकलैंड हाउस स्कूल में किया जाएगा। कोविड के बाद लंबे अंतराल के पश्चात शिमला लौट रहे इस सम्मेलन में हिमाचल प्रदेश भर से 500 से अधिक छात्र प्रतिनिधि एक साझा मंच पर जुटेंगे और स्थानीय, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

 

सम्मेलन में स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभावक, प्रधानाचार्य तथा विभिन्न क्षेत्रों की जानी-मानी हस्तियां शामिल होंगी। यह आयोजन युवाओं में संवाद, आलोचनात्मक सोच, नेतृत्व क्षमता और प्रभावी संप्रेषण को बढ़ावा देने वाला माहौल तैयार करेगा। तीन दिवसीय कार्यक्रम में उद्घाटन समारोह, बहस व चर्चा पर आधारित कमेटी सत्र, समाधान तैयार करने की गतिविधियां, योग, सामाजिक कार्यक्रम और उत्कृष्ट प्रतिनिधियों को सम्मानित करने के लिए समापन समारोह शामिल होंगे।

 

कमेटी सत्रों के दौरान विद्यार्थी विश्व नेताओं की भूमिका निभाएंगे और समाज तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय को प्रभावित करने वाले ज्वलंत मुद्दों पर व्यवस्थित चर्चा करेंगे। इन विचार-विमर्शों के माध्यम से प्रतिभागियों को अलग-अलग दृष्टिकोणों को समझने, अपनी बात रखने, व्यावहारिक समाधान खोजने तथा अपनी वाक्पटुता और निर्णय क्षमता को निखारने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

 

सम्मेलन का शुभारंभ 16 अक्तूबर को उद्घाटन समारोह के साथ होगा, जिसके बाद तीन दिनों तक चर्चाओं और संवादात्मक गतिविधियों का सघन कार्यक्रम चलेगा। 18 अक्तूबर को समापन समारोह में विभिन्न कमेटियों के उत्कृष्ट प्रतिनिधियों को उनकी भागीदारी और योगदान के लिए सम्मानित किया जाएगा।

 

आई.आई.एम.यू.एन. वर्तमान और भावी नेताओं को सहयोग, संवाद और जिम्मेदार नेतृत्व के महत्व के प्रति जागरूक करने की दिशा में कार्य करता है, जिसका आधार भारतीय संस्कृति और मूल्य हैं। संगठन की उपस्थिति 40 देशों के 275 शहरों में है और अपने मॉडल यूनाइटेड नेशंस सम्मेलनों के माध्यम से इसने शैक्षणिक संस्थानों और युवाओं का एक व्यापक नेटवर्क तैयार किया है। इसका सम्मेलन प्रारूप विद्यार्थियों को वास्तविक मुद्दों पर विचार करने, आम सहमति की ओर बढ़ने और कार्ययोग्य लक्ष्यों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है। इससे कक्षा की पढ़ाई को व्यावहारिक नेतृत्व अनुभव से जोड़ने में मदद मिलती है।

 

शिमला सम्मेलन हिमाचल प्रदेश के विद्यार्थियों को अलग-अलग पृष्ठभूमि के साथियों से जुड़ने का अवसर देता है। युवाओं को एक साझा मंच पर लाकर यह पहल सूझबूझ भरी चर्चा को प्रोत्साहित करने, दृष्टिकोण को व्यापक बनाने और आत्मविश्वासी, सामाजिक रूप से जागरूक तथा जिम्मेदार पीढ़ी तैयार करने का प्रयास करती है।

टैक्सी परमिट की अवधि 15 साल करने का वादा पूरा, केंद्र के समक्ष मजबूती से उठाया था मामला – जयराम ठाकुर

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

चंबा । नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि टैक्सी परमिट की समय सीमा 12 साल से बढ़ाकर 15 साल करवाने का वादा करते हुए उन्होंने 28 अगस्त को प्रदेश के टैक्सी ऑपरेटर्स यूनियन का अनशन समाप्त करवाया था। आज यह वादा पूरा हुआ है। उन्होंने कहा कि हमने अपनी ओर से जो संभव था, वह किया और केंद्र सरकार के समक्ष टैक्सी ऑपरेटरों की पूरी बात रखी। प्रदेश सरकार यदि पहले से ही पूरी ईमानदारी और गंभीरता से प्रयास करती, तो यह काम बिना किसी आंदोलन और अनशन के भी हो सकता था।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि हिमाचल प्रदेश एक पर्यटन आधारित राज्य है और पर्यटन को बढ़ावा देने में टैक्सी ऑपरेटरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। कोरोना काल में जब पाबंदियों के कारण पर्यटन ठप पड़ गया था, टैक्सियां नहीं चल रही थीं और परिवहन क्षेत्र प्रभावित हुआ था, तब उनकी सरकार ने ऑपरेटरों की समस्याओं को समझते हुए टैक्सियों, बसों और ट्रकों का दो साल का टैक्स माफ किया था। इतना ही नहीं, जिन ऑपरेटरों ने पहले ही टैक्स जमा करवा दिया था, उन्हें उनका पैसा वापस भी किया गया था।

बांग्लादेश मॉडल का महिमामंडन करने वालों पर राहुल गांधी चुप क्यों, कांग्रेस देश को दे जवाब : डॉ. सीमा ठाकुर

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता डॉ. सीमा ठाकुर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि लोकतंत्र बचाने का दावा करने वाली कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह भारत में किस प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था चाहती है। उन्होंने कहा कि जेएनयू की छात्रा एवं आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा वोहरा के बांग्लादेश संबंधी कथित बयान ने कांग्रेस की राजनीतिक दिशा और उसके विरोध प्रदर्शनों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

डॉ. सीमा ठाकुर ने कहा कि 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के सम्मेलन के लिए जारी वीडियो संदेश में नेहा वोहरा ने कथित तौर पर कहा कि बांग्लादेश के जेन-जी आंदोलन ने उन्हें रास्ता दिखाया और आंदोलनकारियों को लाल सलाम भेजा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ऐसे विचारों से सहमत हैं? यदि नहीं, तो कांग्रेस नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

 

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि वर्ष 2024 में बांग्लादेश में हुए हिंसक घटनाक्रम को पूरी दुनिया ने देखा। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के आकलन के अनुसार उस दौरान लगभग 1,400 लोगों की मौत हुई हो सकती है। हजारों लोग घायल हुए और अल्पसंख्यकों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आईं। ऐसे घटनाक्रम से जुड़े आंदोलन को भारत के युवाओं के सामने आदर्श के रूप में प्रस्तुत करना गंभीर चिंता का विषय है।

 

डॉ. सीमा ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी लगातार ‘पॉलिटिकल रेजिस्टेंस’ की बात करते हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिरोध और अराजकता में स्पष्ट अंतर है। भारत में सत्ता परिवर्तन का रास्ता जनता के जनादेश और संवैधानिक प्रक्रियाओं से होकर गुजरता है, न कि हिंसा और अव्यवस्था से।

 

उन्होंने कहा कि दिल्ली में चुनाव आयोग के विरुद्ध हुए विरोध प्रदर्शनों में नेहा वोहरा की भागीदारी और राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी की उपस्थिति को लेकर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। चुनाव आयोग पर आरोप लगाने से पहले ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक है। संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर निराधार सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के हित में नहीं है।

 

 

डॉ. सीमा ठाकुर ने कहा कि विभिन्न देशों के आंदोलनों में इस्तेमाल हुए प्रतीकों और नारों को लेकर भी चर्चा हो रही है। ऐसे प्रतीकों का प्रयोग अपने आप में किसी साजिश का प्रमाण नहीं है, लेकिन राजनीतिक नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत रहें।

 

उन्होंने प्रशांत भूषण से जुड़े कथित हिंसात्मक बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी भी प्रकार के खून-खराबे की वकालत अस्वीकार्य है। ऐसे बयानों की प्रामाणिकता की जांच होनी चाहिए और हिंसा का समर्थन करने वाले किसी भी विचार की स्पष्ट निंदा की जानी चाहिए।

 

डॉ. सीमा ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस तीन सवालों का जवाब दे—क्या वह बांग्लादेश जैसे हिंसक घटनाक्रम को भारत के लिए आदर्श मानती है, क्या राहुल गांधी नेहा वोहरा के कथित बयान से सहमत हैं और क्या कांग्रेस शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक विरोध के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है?

 

उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक विरोध का सम्मान करती है, लेकिन हिंसा और अराजकता का महिमामंडन स्वीकार नहीं करेगी। भारत का लोकतंत्र संविधान, जनादेश और कानून के शासन से मजबूत होगा, न कि राजनीतिक अस्थिरता से।

विश्व शरीर रचना दिवस पर एम्स बिलासपुर ने देहदान संकल्पकर्ताओं को किया सम्मानित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

बिलासपुर । शरीर रचना विभाग ने विश्व शरीर रचना दिवस के अवसर पर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए देहदान का संकल्प लेने वाले व्यक्तियों के सम्मान में ‘देहदानी वंदन समारोह’ का आयोजन किया। कार्यक्रम में 34 देहदान संकल्पकर्ताओं के साथ उनके परिजनों, संकाय सदस्यों और एमबीबीएस विद्यार्थियों ने भाग लिया।

एम्स बिलासपुर की ओर से कार्यकारी निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने समाज के प्रति इस योगदान के लिए देहदान संकल्पकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। शरीर रचना विभागाध्यक्ष
डॉ. निधि पुरी ने चिकित्सा विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना समझने तथा मानव शरीर के प्रति सम्मान, संवेदनशीलता और उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने में देहदान के महत्व पर प्रकाश डाला।

 

कार्यक्रम के दौरान संकल्पकर्ताओं ने अपने अनुभव और देहदान का निर्णय लेने के बाद सामने आई सामाजिक चुनौतियाँ साझा कीं। उन्होंने मृत्यु के बाद भी समाज की सेवा करने की इच्छा व्यक्त करते हुए देहदान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उनके अनुभवों ने इस संकल्प में निहित उदारता और जनसेवा की भावना को उजागर किया।

एम्स बिलासपुर में स्वैच्छिक देहदान कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2022 में देहदान समिति के गठन के साथ हुई थी। तब से अब तक 79 व्यक्ति देहदान का संकल्प ले चुके हैं।

 

शरीर रचना विभाग के अतिरिक्त प्राध्यापक डॉ. संजय शर्मा ने संकल्पकर्ताओं की प्रतिबद्धता और उनके परिवारों के महत्वपूर्ण सहयोग की सराहना की। उन्होंने स्वैच्छिक देहदान के प्रति समाज में जागरूकता और समझ बढ़ाने का आह्वान किया।

ड्रोन निर्माण, रोबोटिक्स, अंतरिक्ष-समय के मॉडल और एआई आधारित भूस्खलन चेतावनी प्रणाली रहे आकर्षण का केंद्र

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो 

शिमला ।  ऑकलैंड हाउस स्कूल बॉयज़ में वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में विद्यार्थियों ने विज्ञान, तकनीक, पर्यावरण संरक्षण और अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े विभिन्न विषयों पर आधारित आकर्षक एवं नवोन्मेषी मॉडल प्रस्तुत कर अपनी रचनात्मकता, तकनीकी दक्षता और वैज्ञानिक सोच का परिचय दिया।

 

जयपी यूनिवर्सिटी ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (JUIT), वाकनाघाट, सोलन के कुलपति राजेंद्र कुमार शर्मा ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत की।

 

प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा स्वयं तैयार किए गए ड्रोन, रोबोटिक हाथ, इंटरैक्टिव ड्रोन एरिना, वॉर्टेक्स टनल और ब्रह्मांडीय पैमाने से संबंधित मॉडल विशेष आकर्षण रहे। विद्यार्थियों ने एक लचीली शीट के माध्यम से अंतरिक्ष-समय के मुड़ने की अवधारणा को प्रदर्शित किया। इसके अलावा वार्प स्पेस, डार्क मैटर, डार्क एनर्जी, बाह्य ग्रहों और अंतरिक्ष में मानव जीवन की संभावनाओं से जुड़े विषयों को भी रोचक ढंग से प्रस्तुत किया।

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वायत्त स्वार्मिंग तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग, चिकित्सा में नैनो टेक्नोलॉजी, पीजोइलेक्ट्रिक ऊर्जा उत्पादन और हाइड्रोपोनिक्स पर आधारित परियोजनाओं ने विद्यार्थियों की तकनीकी समझ को प्रदर्शित किया। एआई आधारित प्रारंभिक भूस्खलन चेतावनी प्रणाली विशेष रूप से उल्लेखनीय रही, जिसमें आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्राकृतिक आपदाओं से जुड़ी चुनौतियों का समाधान खोजने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों ने जीन एडिटिंग और जीन नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

 

प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों ने प्रकाश, गति, चुंबकत्व, मानव शरीर और ग्रहों से संबंधित सरल एवं संवादात्मक प्रयोग प्रस्तुत किए, जबकि बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों ने तंत्रिका तंत्र, स्मार्ट मशीनों और उन्नत इंजीनियरिंग जैसे जटिल विषयों पर काम किया। प्रदर्शनी ने विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान को व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ने तथा अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासा को नए आयाम देने का अवसर प्रदान किया।

 

इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल अपने वैज्ञानिक ज्ञान, बल्कि मॉडल निर्माण, टीमवर्क, प्रस्तुतीकरण और समस्या समाधान की क्षमता का भी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम के दौरान पोलो हॉकी मैच का आयोजन भी किया गया, जिसने विज्ञान और नवाचार के साथ खेल भावना तथा सर्वांगीण विकास के महत्व को रेखांकित किया।

गारंटियां पूरी करने में नाकाम रही सुक्खू सरकार, अब फिर प्रदेश की जनता को गुमराह करने में जुटी सरकार: जयराम ठाकुर

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आदर्श हिमाचर ब्यूरों 

 

शिमला। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि नए जिलों के गठन को लेकर आयोग बनाकर कांग्रेस सरकार सिर्फ चुनाव से पहले इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है, जबकि उसे अच्छी तरह पता है कि वर्तमान में पूरे देश में जनगणना का काम चल रहा है। जनगणना के दौरान किसी भी तरह की रेवेन्यू यूनिट क्रिएट नहीं की जा सकती, क्योंकि परिसीमन फ्रीज होता है।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि इस मुद्दे पर भाजपा का क्या स्टैंड होगा, इस पर पार्टी चर्चा कर फैसला लेगी। हमारी सरकार में भी इस बारे में काफी विश्लेषण हुआ था, लेकिन राज्य की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हम आगे नहीं बढ़े। जयराम ठाकुर ने कहा कि वर्तमान कांग्रेस सरकार चुनाव पूर्व दी गई अपनी गारंटियों पर फेल हो गई है। अब लोगों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है, इसलिए चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बदलने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिलेगी, क्योंकि प्रदेश की जनता अब इन तरीकों से वाकिफ हो चुकी है।

पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय ठियोग में 11वीं-12वीं के विज्ञान विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

ठियोग/शिमला। पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी), ठियोग, जिला शिमला में 14 अक्टूबर 2026 को विज्ञान संकाय के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों के लिए एक विशेष करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा, भविष्य के रोजगार, आधुनिक तकनीकी विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा उद्यमिता के क्षेत्र में उपलब्ध संभावनाओं से परिचित कराना था, ताकि वे अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य के लक्ष्यों के अनुरूप सोच-समझकर करियर का चयन कर सकें।

 

इस अवसर पर प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान, पीएच.डी., एसएनजीएनसी, आईजीएमसी शिमला एवं विजिटिंग फैकल्टी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला ने विद्यार्थियों को करियर संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। उनके साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग की स्नातकोत्तर छात्राएँ भूमिका वर्मा एवं  नाज़िया खान भी उपस्थित रहीं। दोनों ने विद्यार्थियों के मनोवैज्ञानिक परीक्षण, व्यक्तिगत रुचियों की समझ, करियर संबंधी मार्गदर्शन तथा विद्यार्थियों की विभिन्न मनोवैज्ञानिक चिंताओं पर संवाद के माध्यम से कार्यक्रम में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

 

 

भविष्य के करियर और बदलती रोजगार व्यवस्था पर विशेष व्याख्यान

प्रो. (डॉ.) चौहान ने “2030 और उसके बाद के लिए भविष्य-तैयार रूपरेखा: नौकरी तलाशने वालों से रोजगार सृजित करने वालों तक” विषय पर अपना व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रोजगार के स्वरूप में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), रोबोटिक्स, स्वचालन, जैव प्रौद्योगिकी, डेटा साइंस तथा डिजिटल तकनीकों के विकास से अनेक पारंपरिक व्यवसायों में बदलाव आ रहा है और नए करियर विकल्प भी विकसित हो रहे हैं।

 

उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि भविष्य में सफलता प्राप्त करने के लिए केवल पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान तक सीमित रहना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए विषय की गहरी समझ, तार्किक चिंतन, समस्या समाधान की क्षमता, रचनात्मकता, व्यावहारिक ज्ञान और निरंतर सीखने की आदत विकसित करना आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि करियर का चयन सामाजिक दबाव, दूसरों की देखा-देखी अथवा केवल लोकप्रिय व्यवसायों को ध्यान में रखकर नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों को अपनी रुचियों, शैक्षणिक क्षमता, व्यक्तिगत विशेषताओं और दीर्घकालिक लक्ष्यों का आकलन करके उचित निर्णय लेना चाहिए।

 

विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए विविध करियर संभावनाएँ
व्याख्यान में विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। इनमें इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, जैव प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, फार्मास्यूटिकल साइंस, पर्यावरण विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा तथा वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल रहे।

 

प्रो. (डॉ.) चौहान ने बताया कि आधुनिक समय में अनेक करियर ऐसे हैं जिनमें विज्ञान के साथ कंप्यूटर तकनीक, प्रबंधन, संचार कौशल और विश्लेषणात्मक सोच का समन्वय आवश्यक होता है। इसलिए विद्यार्थियों को विभिन्न विषयों और व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच उपलब्ध संभावनाओं को समझना चाहिए।

 

उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए उपयुक्त पाठ्यक्रमों, प्रवेश परीक्षाओं, पात्रता मानदंडों, छात्रवृत्तियों तथा संस्थानों की जानकारी समय रहते प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। विद्यार्थियों को सलाह दी गई कि वे किसी भी पाठ्यक्रम का चयन करने से पहले उसकी शैक्षणिक आवश्यकताओं, भविष्य की संभावनाओं और अपनी व्यक्तिगत रुचि का उचित मूल्यांकन करें।

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल कौशल का महत्व
कार्यक्रम का एक प्रमुख विषय कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल तकनीकों का बढ़ता प्रभाव रहा। विद्यार्थियों को बताया गया कि आधुनिक तकनीक का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग शिक्षा, अनुसंधान, सूचना विश्लेषण तथा रचनात्मक कार्यों में सहायक हो सकता है।
व्याख्यान में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ आलोचनात्मक चिंतन, तार्किक क्षमता, संवाद कौशल, नेतृत्व, टीम भावना, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने की क्षमता भी आवश्यक है।

 

विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया गया कि वे विज्ञान प्रदर्शनियों, शोध परियोजनाओं, नवाचार प्रतियोगिताओं तथा व्यावहारिक गतिविधियों में भाग लें। इससे उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, आत्मविश्वास और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता विकसित हो सकती है।
साथ ही, डिजिटल माध्यमों से प्राप्त जानकारी की सत्यता जाँचने, गोपनीयता बनाए रखने और तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने के महत्व को भी रेखांकित किया गया।

 

नौकरी तलाशने से रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश

 

व्याख्यान का एक महत्वपूर्ण पक्ष उद्यमिता और नवाचार रहा। प्रो. (डॉ.) चौहान ने विद्यार्थियों को प्रेरित किया कि वे करियर की सफलता को केवल सरकारी या निजी नौकरी प्राप्त करने तक सीमित न रखें, बल्कि स्वरोजगार, उद्यम स्थापना और नए विचारों को व्यावहारिक रूप देने की संभावनाओं पर भी विचार करें।

 

उन्होंने बताया कि विज्ञान के विद्यार्थी तकनीकी स्टार्टअप, स्वास्थ्य संबंधी नवाचार, डिजिटल सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण, जैव प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा तथा वैज्ञानिक परामर्श जैसे क्षेत्रों में नए अवसर विकसित कर सकते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं की पहचान करने और विज्ञान एवं तकनीक की सहायता से उनके व्यावहारिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित किया। ऐसे प्रयास भविष्य में नए उद्यमों के विकास, रोजगार सृजन तथा समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक हो सकते हैं।

 

इसके साथ ही वित्तीय साक्षरता, योजना निर्माण, सहयोगात्मक कार्य और व्यावहारिक अनुभव के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
मनोवैज्ञानिक परीक्षण और व्यक्तिगत करियर मार्गदर्शन
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के मनोविज्ञान विभाग की छात्राओं  भूमिका वर्मा एवं  नाज़िया खान ने विद्यार्थियों को मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने मनोवैज्ञानिक परीक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी रुचियों, योग्यताओं, व्यक्तिगत विशेषताओं और करियर संबंधी प्राथमिकताओं पर विचार करने का अवसर दिया।

 

इसके बाद विद्यार्थियों से संवाद किया गया, जिसमें उनकी शैक्षणिक चिंताओं, करियर चयन को लेकर अनिश्चितताओं, निर्णय लेने में आने वाली कठिनाइयों तथा अन्य मनोवैज्ञानिक समस्याओं पर चर्चा की गई।
दोनों छात्राओं ने आत्म-जागरूकता, आत्मविश्वास, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक दृष्टिकोण के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि उपयुक्त करियर का चयन करते समय केवल परीक्षा के अंकों को ही आधार नहीं बनाना चाहिए, बल्कि विद्यार्थी की रुचि, क्षमता, परिस्थितियों और भविष्य की आकांक्षाओं को भी ध्यान में रखना आवश्यक है।

 

इस पहल ने करियर काउंसलिंग में मनोविज्ञान की उपयोगिता को रेखांकित किया। इससे विद्यार्थियों को अपने व्यक्तित्व और आवश्यकताओं को बेहतर ढंग से समझने तथा उपलब्ध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक विकल्पों पर अधिक विचारपूर्ण निर्णय लेने की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

 

उच्च शिक्षा और भविष्य की तैयारी पर बल

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को स्नातक पाठ्यक्रमों, व्यावसायिक शिक्षा, प्रवेश परीक्षाओं, छात्रवृत्तियों और अनुसंधान के अवसरों के बारे में समय रहते जानकारी एकत्र करने की सलाह दी गई। उन्हें अपनी शैक्षणिक तैयारी के साथ व्यावहारिक कौशल, डिजिटल दक्षता, संचार क्षमता और अनुसंधान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।

 

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि बदलती दुनिया में निरंतर सीखना और नई परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को विकसित करना सफलता की महत्वपूर्ण शर्तें हैं। विद्यार्थियों को कठिनाइयों का सामना धैर्यपूर्वक करने, आवश्यकता पड़ने पर उचित मार्गदर्शन लेने और अपने लक्ष्यों के प्रति जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने का संदेश दिया गया।

पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, ठियोग में आयोजित इस करियर काउंसलिंग सत्र ने विज्ञान संकाय के कक्षा 11वीं एवं 12वीं के विद्यार्थियों को आधुनिक करियर विकल्पों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उद्यमिता, उच्च शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया।
प्रो. (डॉ.) बी. एस. चौहान के विशेषज्ञ व्याख्यान तथा  भूमिका वर्मा और  नाज़िया खान द्वारा प्रदान किए गए मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं करियर मार्गदर्शन ने कार्यक्रम को बहुआयामी स्वरूप प्रदान किया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश था कि विद्यार्थियों को वैज्ञानिक ज्ञान के साथ रचनात्मकता, तार्किक चिंतन, डिजिटल दक्षता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और नवाचार की भावना विकसित करनी चाहिए। ऐसी क्षमताएँ उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने, उपयुक्त करियर चुनने और समाज के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार कर सकती हैं।
यह सत्र विद्यार्थियों को अपने भविष्य के प्रति जागरूक, आत्मविश्वासी और जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रहा।

राहुल गांधी झूठे आरोपों की राजनीति छोड़ें, लोकतंत्र में आरोपों के साथ प्रमाण देना भी जरूरी : श्रीकांत शर्मा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार चुनावी पराजय का सामना कर रही है, लेकिन राहुल गांधी अपनी राजनीतिक कार्यशैली में सुधार करने के बजाय बार-बार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को जनता का विश्वास हासिल करने के लिए आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाकर जनता को परेशान तो किया जा सकता है, लेकिन जनता का विश्वास और चुनावी विजय हासिल नहीं की जा सकती।

 

 

श्रीकांत शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में प्रत्येक राजनीतिक दल और नेता को सवाल उठाने तथा आरोप लगाने का अधिकार है, लेकिन आरोपों के समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार गंभीर राजनीतिक आरोप लगाते हैं, लेकिन जब उनसे प्रमाण मांगे जाते हैं तो वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पाते। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक जवाबदेही और प्रमाण आधारित सार्वजनिक चर्चा अत्यंत महत्वपूर्ण है। कांग्रेस नेतृत्व को समझना चाहिए कि केवल आरोपों को दोहराने से वे सत्य सिद्ध नहीं हो जाते।

 

भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने ‘चौकीदार चोर है’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के खिलाफ व्यापक राजनीतिक अभियान चलाया था, लेकिन चुनाव परिणामों में जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि उस समय भी कांग्रेस नेतृत्व ने सकारात्मक राजनीतिक विकल्प प्रस्तुत करने के बजाय आरोपों की राजनीति को प्राथमिकता दी थी। शर्मा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आज भी उसी राजनीतिक रणनीति को दोहरा रहे हैं और चुनावी पराजय के वास्तविक कारणों का विश्लेषण करने के बजाय दूसरों को जिम्मेदार ठहराने का प्रयास कर रहे हैं।

 

 

श्रीकांत शर्मा ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व लंबे समय से राहुल गांधी को पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, लेकिन लगातार चुनावी चुनौतियों के बावजूद संगठन और राजनीतिक रणनीति में अपेक्षित बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस बार-बार राहुल गांधी की राजनीतिक री-लॉन्चिंग का प्रयास करती है, लेकिन प्रत्येक चुनावी चुनौती के बाद पार्टी को नए सिरे से अपनी रणनीति समझाने की आवश्यकता पड़ जाती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को अब आत्मचिंतन करना चाहिए कि कांग्रेस का जनाधार मजबूत करने के लिए केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय संगठनात्मक स्तर पर क्या सुधार आवश्यक हैं।

 

भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर किसी भी प्रकार की आपत्ति उठाने के लिए संवैधानिक और कानूनी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं। यदि राहुल गांधी या कांग्रेस पार्टी के पास मतदाता सूची में अनियमितताओं के प्रमाण हैं, तो उन्हें संबंधित चुनाव अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़कों पर प्रदर्शन करना राजनीतिक अधिकार है, लेकिन आम नागरिकों को अनावश्यक असुविधा पहुंचाने या बिना पर्याप्त प्रमाण के चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाने से बचना चाहिए।

 

श्रीकांत शर्मा ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और सत्यापन की प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए कहा कि चुनाव आयोग का दायित्व पात्र मतदाताओं के नाम सूची में सुनिश्चित करना तथा अपात्र या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों की विधिसम्मत जांच करना है। उन्होंने दावा किया कि सत्यापन के दौरान कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें संबंधित व्यक्तियों के नाम या पते की पुष्टि नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे। साथ ही उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना निर्धारित प्रक्रिया और उचित अवसर के मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए।

 

शर्मा ने कहा कि राहुल गांधी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि वे किन विशिष्ट मामलों में मतदाता सूची की प्रक्रिया पर आपत्ति जता रहे हैं और उनके पास उसके समर्थन में कौन-से दस्तावेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता चुनावी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और सभी राजनीतिक दलों को इस प्रक्रिया में रचनात्मक सहयोग देना चाहिए। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हटाया गया है, तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं और ऐसे मामलों का तथ्यात्मक समाधान होना चाहिए।

 

भाजपा प्रदेश प्रभारी ने कहा कि कांग्रेस को चुनावी पराजय के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय जनता के बीच जाकर अपनी नीतियों, कार्यक्रमों और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय मतदाता करते हैं और प्रत्येक राजनीतिक दल को जनादेश का सम्मान करना चाहिए।

 

श्रीकांत शर्मा ने राहुल गांधी से आत्मचिंतन करने का आग्रह करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने राजनीतिक भविष्य के लिए आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से आगे बढ़कर ठोस तथ्यों, सकारात्मक कार्यक्रमों और जनता से सीधे संवाद पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा, निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की रक्षा के पक्ष में है।

शूलिनी विव में ‘भारत पिचाथॉन’ का आयोजन: 10 स्टार्टअप्स ने इन्वेस्टर्स के सामने अपनी पिच पेश की

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

सोलन । शूलिनी यूनिवर्सिटी ने ‘भारत पिचाथॉन 5.0’ के हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ एडिशन की मेज़बानी की। यह ‘हेडस्टार्ट नेटवर्क फ़ाउंडेशन’ का एक नेशनल स्टार्टअप इनिशिएटिव है जो नए उद्यमियों (entrepreneurs) को इन्वेस्टर्स, मेंटर्स और इंडस्ट्री लीडर्स से जोड़ता है। शूलिनी यूनिवर्सिटी इस इवेंट की वेन्यू और नॉलेज पार्टनर थी, और शूलिनी पहल फ़ाउंडेशन (SPF) इसकी इनक्यूबेशन पार्टनर थी। इस इवेंट में वेंचर कैपिटलिस्ट, फ़ाउंडर्स, रिसर्चर्स और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स शामिल हुए।

 

‘भारत पिचाथॉन’ भारत का सबसे बड़ा पिचिंग इनिशिएटिव है और यह खास तौर पर टियर 2 और टियर 3 शहरों में ज़्यादा क्षमता वाले स्टार्टअप्स की तलाश करता है। अपने पहले चार एडिशन में, इसे 4,000 से ज़्यादा एप्लीकेशन मिले, 800 से ज़्यादा पिच आयोजित किए गए, 1,300 से ज़्यादा इन्वेस्टर कनेक्शन बनाए गए और 30 से ज़्यादा स्टार्टअप्स को ₹100 करोड़ से ज़्यादा फ़ंड जुटाने में मदद मिली।

 

इस रीजनल एडिशन के लिए हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से 40 एप्लीकेशन आए। एक इंडिपेंडेंट एक्सपर्ट पैनल ने 13 स्टार्टअप्स को शॉर्टलिस्ट किया, और उनमें से 10 स्टार्टअप्स (जिनमें SPF द्वारा इनक्यूबेट किए गए पांच स्टार्टअप्स भी शामिल थे) ने एक जूरी के सामने अपनी पिच पेश की। इस जूरी में ब्लूम वेंचर्स (Blume Ventures) और TiE चंडीगढ़ से जुड़े इन्वेस्टर्स शामिल थे। जूरी ने स्टार्टअप्स को प्रोडक्ट में अंतर (product differentiation), कस्टमर एक्विजिशन, प्राइसिंग और स्केलेबिलिटी के आधार पर परखा और हर फ़ाउंडर को उनके बिज़नेस मॉडल और ग्रोथ स्ट्रैटेजी पर फ़ीडबैक दिया।

 

ये स्टार्टअप्स हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, लीगल टेक्नोलॉजी, कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और लोकल मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों से थे।

 

ब्लूम वेंचर्स में प्लेटफ़ॉर्म के वाइस प्रेसिडेंट और हेडस्टार्ट नेटवर्क फ़ाउंडेशन के डायरेक्टर, मिस्टर गौतम शिवरामकृष्णन ने कहा कि सफल कंपनियाँ यूनिवर्सिटी कैंपस से भी शुरू हो सकती हैं। उन्होंने ग्रेऑरेंज और स्पेस-टेक्नोलॉजी स्टार्टअप पिक्सेल का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर फ़ाउंडर्स बड़े सपने देखें और बाहरी मदद का इंतज़ार किए बिना काम शुरू कर दें, तो अगला एप्पल हिमाचल प्रदेश से भी निकल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उम्मीद है कि वे बेंगलुरु के इनोवेटर्स के साथ “हैकिंग इन द हिल्स” नाम की एक पहल के लिए वापस आएँगे।

 

शूलिनी यूनिवर्सिटी के चांसलर प्रो. पी. के. खोसला ने हिस्सा लेने वालों का स्वागत करते हुए युवा उद्यमियों को बड़े और महत्वाकांक्षी विचारों पर भरोसा करने और कड़ी मेहनत, सावधानी से योजना बनाने और दूर की सोच के साथ उन पर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया।

 

प्रो-चांसलर प्रो. विशाल आनंद ने कहा, “फाउंडर्स को कोशिश करने, फेल होने और फिर से कोशिश करने की गुंजाइश मिलनी चाहिए। शूलिनी का स्टार्टअप इकोसिस्टम स्टूडेंट्स और स्टार्टअप्स को फैकल्टी मेंटर्स, लैब्स और साथियों से जुड़ने का मौका देता है, ताकि वे कम जोखिम के साथ अपने आइडिया को टेस्ट कर सकें। हर आइडिया कंपनी नहीं बन पाता। हमारा मकसद स्टूडेंट्स को हर कोशिश से सीखने और आगे बढ़ते रहने में मदद करना है।”

क्लासरूम से परे इनोवेशन पर एक पैनल डिस्कशन में, शूलिनी यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. अतुल खोसला ने शूलिनी के उस लक्ष्य के बारे में बात की जिसके तहत वे एक ऐसी यूनिवर्सिटी बनाना चाहते हैं जहाँ शिक्षा, रिसर्च और एंटरप्रेन्योरशिप मिलकर काम करें। उन्होंने वैज्ञानिक खोजों को कमर्शियल प्रोडक्ट्स में बदलने के लिए इंडस्ट्री और एकेडेमिया के बीच मज़बूत पार्टनरशिप की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

 

ऐ आई और इनोवेशन के प्रेसिडेंट प्रो. आशीष खोसला ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च और ड्रग डिस्कवरी के क्षेत्र में बदलाव ला रहा है। उन्होंने नए वेंचर्स के लिए ग्रीन एनर्जी, हेल्दी एजिंग और कैंसर रिसर्च को अच्छे क्षेत्रों के तौर पर बताया।

शूलिनी यूनिवर्सिटी की चीफ लर्निंग ऑफिसर प्रो. आशू खोसला ने स्टूडेंट्स से कहा कि वे सफलता को जमा किए गए पैसे से नहीं, बल्कि उन समस्याओं को हल करने से मापें जिन्हें वे सुलझाते हैं। उन्होंने उन्हें क्रिएटिव बने रहने और अपने विषयों से हटकर दूसरी चीज़ों में भी दिलचस्पी लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

अब जूरी के स्कोर नेशनल सिलेक्शन के लिए हेडस्टार्ट नेटवर्क फाउंडेशन की सेंट्रल एक्सपर्ट टीम के पास भेजे जाएँगे। अगले दो महीनों में 20 से ज़्यादा शहरों में ‘भारत पिचाथॉन 5.0’ आयोजित किया जाएगा। इसके ग्रोथ प्रोग्राम के लिए चुने गए स्टार्टअप्स की घोषणा नवंबर के आखिर तक की जाएगी और उन्हें जनवरी से ‘गो-टू-मार्केट’ स्ट्रैटेजी और इन्वेस्टमेंट के लिए तैयार होने में मदद मिलेगी। दिसंबर में, 12 से 15 स्टार्टअप्स को बेंगलुरु में होने वाले ‘फ्रंटियर टेक समिट’ में इन्वेस्टर्स के सामने अपना आइडिया पेश करने (पिच करने) के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा।

रैंप वॉक से रॉक बैंड तक, सांस्कृतिक कार्यक्रम में दिखा प्रतिभाओं का शानदार संगम

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आदर्श हिमाचल बयूरों

शिमला ।  ऑडिटोरियम में कहानियों, दृष्टिकोणों और आवाज़ों की एक टेपेस्ट्री जीवंत हो उठी, जब “वर्ड वीव 2026” ने सांस्कृतिक प्रदर्शन और अकादमिक उत्सव के एक जीवंत कार्यक्रम के साथ अपने दो दिवसीय उत्सव का समापन किया।

 

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत के साथ हुई। संस्थागत परंपराओं के अनुसार, उत्सव के दूसरे दिन की मुख्य अतिथि, डा मीनाक्षी फेथ पॉल, सेवानिवृत्त प्राचार्या, राजीव गांधी सरकार के योग्य प्राचार्य डॉ गोपाल चौहान को सम्मानित करने के लिए एक औपचारिक रोसेट पिनिंग और अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। महाविद्यालय की वरिष्ठ संकाय सदस्य, डा शालिनी चौहान, डा अनुप्रिया शर्मा, डॉ. अंशू कौशल, निर्णायकों के सम्मानित पैनल, सेंट बीडीस महाविद्यालय से डॉ. दीप्ति पठानिया, आरकेएमवी, शिमला से डॉ. उपमा शर्मा और राजकीय महाविद्यालय संजौली से डॉ. हरीश भारद्वाज, विशेष अतिथि, आरकेएमवी, शिमला से डॉ. संध्या शर्मा और भाग लेने वाले संस्थानों के समर्पित प्रभारी शिक्षक, जिन्होंने कार्यक्रम के समन्वय का मार्गदर्शन किया, इन सभी का स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन से कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत हुई। इसके बाद इंग्लिश लिटरेरी सोसाइटी की प्रेसिडेंट एवं उत्सव की मुख्य समन्वयक डा पूनम किमता चौहान ने स्वागत भाषण दिया, जिससे दिन के लिए गर्मजोशी भरा और जश्न का माहौल तैयार हो गया।

 

सांस्कृतिक प्रदर्शन में प्रस्तुतियों का जीवंत मिश्रण प्रस्तुत किया गया। रैंप वॉक के दो राउंड ने मंच पर रंग और ऊर्जा ला दी, जबकि कैप्शन लेखन, मोनोलॉग, एकल नृत्य, संगीत प्रदर्शन और एक समूह गीत ने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और प्रतिभा को उजागर किया। दर्शकों ने एक अंग्रेजी नाटक, एक हिंदी नाटक और एक वृत्तचित्र स्क्रीनिंग का भी आनंद लिया। रॉक बैंड प्रदर्शन, बॉल डांस और पंजाबी फ्यूजन डांस ने कार्यक्रम में और विविधता ला दी।

मुख्य अतिथि ने पुरस्कार वितरण समारोह से पहले सभा को संबोधित किया, जिसमें प्रतिभागियों की उपलब्धियों को मान्यता दी गई और उनका जश्न मनाया गया। कार्यक्रम का समापन डा अंशु कौशल के धन्यवाद ज्ञापन, एक जोशीले नाटी प्रदर्शन और राष्ट्रगान के साथ हुआ।

 

वर्ड वीव 2026 के दूसरे दिन साहित्य, संस्कृति और प्रदर्शन का एक यादगार उत्सव पेश किया गया, जिसमें उत्सव की एकीकृत थीम के तहत आवाज़ों और प्रतिभाओं की एक समृद्ध श्रृंखला को एक साथ लाया गया। इस मौके पर राजकीय महाविद्यालय चौरा मैदान के अन्य शिक्षक, डा यश देश डुलता, डा पी अल वर्मा, डा स्नेह, डा राजीव शर्मा, डा निखिल सरता, डा सुधीर, डा शिल्पा चौहान, डा सुमित गुप्ता, डा अजय, डा अंजू शर्मा, डा किशोरी लाल, डा दिव्या चौहान, डा कमलेश, डा कामिनी शांडिल, डा रीना डोगरा, डा नेहा कटोच, मिस प्रगति कश्यप, मिस प्रतिभा, मिस अंजना एवं ग़ैर शिक्षक गण भी मौजूद रहे।

 

इस दो दिवसीय लिटरेरी फेस्टिवल के सफल आयोजन में अंग्रेजी विभाग के सभी शिक्षक डा पूनम किमता चौहान, प्रेसीडेंट, इंग्लिश लिटरेरी सोसाइटी, डा अंशु कौशल, डा प्रियंका विनता, डा वीना शर्मा, मिस मिताली धरियोला, मिस रितिका धतवालिया, मिस सुष्मिता नेगी एवं इंग्लिश लिटरेरी सोसाइटी के छात्र सदस्य नमन ठाकुर, वाइस प्रेसिडेंट, श्रुति,सेक्रेट्री, शैव्या, ज्वाइंट सेक्रेट्री, कुणाल, ट्रेजरर, हर्षिनी, साक्षी, खुशी, वेंकटेश, दिग्विजय सिंह कंवर का कुशल सहयोग रहा।

 

परिणाम:

निबंध लेखन प्रतियोगिता

तीसरा: काश्वी अधिकारी- राजकीय महाविद्यालय संजौली

दूसरा: साक्षी- राजीव गांधी महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

प्रथम: तन्वी- आरकेएमवी, शिमला

वैकल्पिक समापन लेखन प्रतियोगिता

तीसरा: आंचल सिंह-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

दूसरा: सुनिधि शर्मा- राजकीय महाविद्यालय संजौली

प्रथम: अनन्या शर्मा- सेंट बीड्स कॉलेज

भाषण प्रतियोगिता

तीसरा: दीया- राजीव गांधी महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

दूसरा: पल्लवी शर्मा-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

प्रथम: सृजन शर्मा: सेंट बीड्स कॉलेज

काव्य पाठ प्रतियोगिता

तीसरा: अक्षरा हैट्टा- आरकेएमवी, शिमला

दूसरा: वेदांशु वर्मा- राजकीय महाविद्यालय संजौली

प्रथम: कुणाल-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

पोस्टर बनाओ प्रतियोगिता

तीसरा: सलोनी-राजकीय महाविद्यालय संजौली

दूसरा: ममता-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

प्रथम: तनुज ठाकुर-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

पुस्तक/साहित्यिक ट्रेलर प्रतियोगिता

तीसरा: आर्यन-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

दूसरा: मोहित-राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

प्रथम: हर्षनी: राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय, चौड़ा मैदान

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