आदर्श हिमाचल ब्यूरों
नई दिल्ली/शिमला । भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय द्वारा 24-25 अगस्त को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित पीएमएफएमई कॉन्क्लेव-2026 में प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के तहत समग्र प्रदर्शन के लिए हिमाचल प्रदेश को मध्यम राज्य श्रेणी में द्वितीय रनर-अप घोषित किया गया।
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन राज्य का पुरस्कार केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान द्वारा प्रदान किया गया, जिसे उद्योग विभाग, हिमाचल प्रदेश की ओर से संयुक्त निदेशक रमेश वर्मा ने ग्रहण किया।
उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि पीएमएफएमई योजना के तहत प्रदेश को द्वितीय रनर-अप का सम्मान मिलना हिमाचल के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को प्रोत्साहित करने, महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने तथा मूल्य संवर्धन और उद्यमिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रदेश सरकार के प्रयासों को दर्शाती है।
प्रधान सचिव (उद्योग) एम. सुधा ने कहा कि यह पुरस्कार अधिकारियों, स्वयं सहायता समूहों और विभिन्न हितधारकों के समर्पण एवं समन्वित प्रयासों का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि विभाग का मुख्य फोकस संस्थागत वित्त तक पहुंच बढ़ाने, इनक्यूबेशन सुविधाओं के विस्तार और पूरे प्रदेश में सतत आजीविका के अवसर सृजित करने पर है।
उद्योग निदेशक आदित्य नेगी ने कहा कि यह उपलब्धि जिला उद्योग केंद्रों, बैंकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) और स्वयं सहायता समूहों के साथ विभाग के सहयोगात्मक प्रयासों को रेखांकित करती है। विभाग नवाचार, उत्पाद गुणवत्ता और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सहायता को और मजबूत करेगा।
पीएमएफएमई योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्कृष्ट योगदान के लिए जिला नोडल अधिकारी, शिमला श्री संजय कंवर को सर्वश्रेष्ठ जिला नोडल अधिकारी पुरस्कार तथा जिला संसाधन व्यक्ति (डीआरपी) श्री रविंद्र सिंह को सर्वश्रेष्ठ डीआरपी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्य प्रमुख कार्यक्रम प्रबंधक जतिन बहल और मार्केटिंग प्रबंधक आस्था नेगी भी उपस्थित रहीं।
कॉन्क्लेव के दौरान आयोजित पीएमएफएमई बाजार में रस कलिनरी कंपनी के श्री आर्यन शर्मा और श्री शांतनु शर्मा ने स्टॉल लगाकर अपने उत्पाद ‘कुल्लुत बेवरेजेस’ का प्रदर्शन भी किया।
प्रदेश में पीएमएफएमई योजना के तहत अब तक 2,906 ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं। इनकी कुल परियोजना लागत 191.73 करोड़ रुपये है, जबकि 73.17 करोड़ रुपये की सब्सिडी सहायता प्रदान की गई है। यह प्रदेश में सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को औपचारिक रूप देने और खाद्य प्रसंस्करण इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है।
योजना के अंतर्गत महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को भी विशेष रूप से सशक्त किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 16,083 एसएचजी सदस्यों को 59.29 करोड़ रुपये की सीड कैपिटल राशि प्रदान की गई है। इससे महिला किसानों और एसएचजी सदस्यों को खाद्य प्रसंस्करण गतिविधियों से जुड़ने तथा अपनी आजीविका को मजबूत करने में सहायता मिली है।
सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को उत्पादों की गुणवत्ता और प्रक्रियाओं में सुधार के लिए प्रदेश में तीन इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय (सीएसके एचपीकेवी), पालमपुर; कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कुकुमसेरी, लाहौल-स्पीति; तथा डॉ. वाई.एस. परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी, सोलन शामिल हैं।
उद्योग निदेशालय, हिमाचल प्रदेश नोडल विभाग के रूप में जिला उद्योग केंद्रों, बैंकों, एसएचजी, एफपीओ, जिला नोडल अधिकारियों, जिला संसाधन व्यक्तियों और अन्य हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित कर योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व हिमाचल प्रदेश को वर्ल्ड फूड इंडिया-2023 में पीएमएफएमई के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, जिसे राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया था।
पीएमएफएमई कॉन्क्लेव-2026 में प्रदेश को मिला यह सम्मान हिमाचल प्रदेश की सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने, सतत आजीविका के अवसर पैदा करने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयासों का प्रमाण है। उद्योग विभाग ने योजना के क्रियान्वयन को और मजबूत करते हुए प्रदेश के अधिक से अधिक खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, किसानों, एसएचजी और अन्य हितधारकों तक इसका लाभ पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।











