व्यक्तित्व विकास और मानवीय क्षमता पर GDC ठियोग में विशेष कार्यशाला

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

ठियोग । महाविद्यालय ठियोग में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, मानवीय क्षमताओं की पहचान, करियर जागरूकता तथा भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल-विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से करियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में एक विशेष Upskilling Workshop का सफल आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय “Personal Transformation and Human Potential” रहा। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भूपिंदर सिंह ठाकुर के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में किया गया, जिसमें विज्ञान, वाणिज्य एवं कला संकायों के लगभग 100 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता डॉ. बृजेश सिंह, प्रोफेसर, SNGNC, IGMC, Shimla ने विद्यार्थियों को व्यक्तिगत रूपांतरण और मानवीय क्षमता के विभिन्न आयामों से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन केवल डिग्री प्राप्त करने का समय नहीं है, बल्कि यह स्वयं को पहचानने, अपनी क्षमताओं को विकसित करने, सही दिशा निर्धारित करने तथा भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने का महत्वपूर्ण चरण है। उन्होंने Self-Awareness, Self-Confidence, Emotional Intelligence, Positive Habits, Goal Setting, Growth Mindset तथा व्यक्तिगत क्षमता के विकास जैसे विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की।

 

डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में दुनिया तेजी से बदल रही है। तकनीकी विकास, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल परिवर्तन और रोजगार के बदलते स्वरूप ने युवाओं के सामने नई संभावनाओं के साथ-साथ नई चुनौतियां भी प्रस्तुत की हैं। ऐसे वातावरण में केवल पारंपरिक अकादमिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी रुचियों एवं क्षमताओं को समझने, निरंतर सीखने, परिस्थितियों के अनुसार स्वयं को ढालने और जीवन तथा करियर से संबंधित विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे असफलताओं को अंत नहीं बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर मानें।

 

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग का प्रतिनिधित्व करते हुए श्री यमन चौहान ने “Youth Issues and Peak Performance” विषय पर विद्यार्थियों के साथ महत्वपूर्ण संवाद किया। उन्होंने युवाओं के सामने आने वाली सामाजिक, भावनात्मक एवं शैक्षणिक चुनौतियों, तनाव प्रबंधन, सकारात्मक सोच, आत्म-नियंत्रण तथा उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आवश्यक मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उनका सत्र अत्यंत संवादात्मक एवं सहभागितापूर्ण रहा। विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया और अपने अनुभव भी साझा किए।

 

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों की व्यक्तिगत रुचियों, क्षमताओं एवं व्यक्तित्व संबंधी आयामों को बेहतर ढंग से समझने के उद्देश्य से Psychometric Testing भी आयोजित किया गया। चयनित विद्यार्थियों ने इस प्रक्रिया में उत्साहपूर्वक भाग लिया। इनमें सुश्री तुषाली, सुश्री प्रिया, सुश्री निताक्षी, श्री जयंत, श्री आयुष तथा श्री रजत सहित अन्य विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही। विद्यार्थियों को यह भी समझाया गया कि मनोमितीय परीक्षण आत्म-अन्वेषण एवं करियर संबंधी जागरूकता में सहायक उपकरण हो सकते हैं, लेकिन इनके परिणामों को किसी व्यक्ति के भविष्य के संबंध में अंतिम या निश्चित निर्णय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। किसी भी करियर निर्णय में व्यक्तिगत रुचि, क्षमता, परिस्थितियां, शैक्षणिक प्रदर्शन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन जैसे अनेक पहलुओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

 

कार्यक्रम की संयोजक एवं करियर काउंसलिंग सेल की प्रभारी डॉ. अनीता राठौर ने कार्यशाला के आयोजन एवं समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय-समय पर विषय विशेषज्ञों एवं मनोवैज्ञानिकों के साथ संवाद का अवसर मिलना उनके आत्मविश्वास और करियर संबंधी स्पष्टता को बढ़ाने में उपयोगी है। उन्होंने कार्यशाला में सहयोग करने वाले सभी विशेषज्ञों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।

 

इस अवसर पर डॉ. राजेश आज़ाद, डीन साइंसेज, तथा काउंसलिंग सेल के सदस्य प्रो. श्रद्धा शांडिल, प्रो. विक्रांत गौतम, प्रो. बृज मोहन, प्रो. रितिका पंजटा एवं प्रो. पूनम सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षक उपस्थित रहे। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की और भविष्य में इस प्रकार के कौशल-विकास एवं करियर-उन्मुख कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

 

महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. भूपिंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी एवं तेजी से बदलते दौर में विद्यार्थियों का विकास केवल कक्षा-कक्ष तक सीमित नहीं रहना चाहिए। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ-साथ आत्मविश्वास, विवेक, संवेदनशीलता, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को विकसित करने की क्षमता पैदा करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं विद्यार्थियों को अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने तथा उन्हें सकारात्मक दिशा में उपयोग करने का अवसर प्रदान करती हैं।

 

डॉ. ठाकुर ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय ठियोग विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत, सामाजिक, मनोवैज्ञानिक एवं व्यावसायिक विकास को भी प्राथमिकता देता है। उन्होंने कहा कि भविष्य के रोजगार एवं जीवन की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु विद्यार्थियों में lifelong learning, adaptability, communication skills, emotional maturity, digital awareness और problem-solving abilities का विकास अत्यंत आवश्यक है।

 

उन्होंने कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए करियर काउंसलिंग सेल, डॉ. अनीता राठौर, दोनों विशेषज्ञ वक्ताओं, सभी सहयोगी शिक्षकों तथा सहभागी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यशाला से प्राप्त ज्ञान एवं अनुभव विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं को पहचानने, सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा अपने शैक्षणिक एवं व्यावसायिक भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने में सहायता प्रदान करेगा।

 

समग्र रूप से कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा, करियर, व्यक्तिगत विकास, मानवीय क्षमता और भविष्य के आवश्यक कौशलों के प्रति अधिक जागरूक बनाना तथा उन्हें बदलते सामाजिक, तकनीकी और व्यावसायिक परिवेश की चुनौतियों के लिए तैयार करना रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि व्यक्तिगत परिवर्तन की शुरुआत स्वयं की पहचान से होती है और अपनी क्षमता पर विश्वास, निरंतर सीखने की इच्छा तथा सकारात्मक प्रयासों के माध्यम से प्रत्येक विद्यार्थी अपने जीवन में बेहतर प्रदर्शन और सार्थक उपलब्धियों की दिशा में आगे बढ़ सकता है।