आदर्श हिमाचल ब्यूरो
बिलासपुर । नशे की समस्या आज केवल एक व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक चुनौती बन चुकी है। तंबाकू, शराब तथा अन्य मादक पदार्थों का सेवन व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ-साथ परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी बाधा उत्पन्न करता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए भारत सरकार द्वारा संचालित “नशा मुक्त भारत अभियान” जन-जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से एक स्वस्थ एवं नशामुक्त भारत के निर्माण का प्रयास कर रहा है।
नशे के दुष्प्रभाव अत्यंत व्यापक हैं। यह कैंसर, हृदय रोग, यकृत रोग, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों, सड़क दुर्घटनाओं, घरेलू हिंसा तथा समयपूर्व मृत्यु जैसी अनेक समस्याओं का कारण बनता है। सबसे अधिक चिंता का विषय यह है कि युवा वर्ग नशे के दुष्चक्र में तेजी से फंस रहा है। जीवन की चुनौतियों, तनाव, साथियों के दबाव तथा भ्रामक सामाजिक प्रभावों के कारण कई युवा नशे की ओर आकर्षित हो जाते हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और भविष्य प्रभावित होता है।
नशा केवल व्यक्ति को नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है। इसके कारण पारिवारिक संबंध कमजोर होते हैं, आर्थिक संसाधनों का नुकसान होता है तथा सामाजिक ताना-बाना भी प्रभावित होता है। इसलिए नशा मुक्ति केवल स्वास्थ्य का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व का भी विषय है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), बिलासपुर नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। संस्थान द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा, जागरूकता कार्यक्रमों, परामर्श सेवाओं तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से नशा-निवारण के प्रयासों को निरंतर सशक्त बनाया जा रहा है। हमारा मानना है कि सही जानकारी, समय पर परामर्श और समाज के सहयोग से नशे की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
लेफ्टिनेंट जनरल (डॉ.) दलजीत सिंह ने विशेष रूप से युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों तथा समाज के सभी जिम्मेदार नागरिकों से आग्रह किया है कि वे नशे के विरुद्ध एक जनआंदोलन खड़ा करें। अपने परिवार, मित्रों और समुदाय को जागरूक करें तथा यदि कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा हो तो उसे सहायता और उपचार प्राप्त करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि नशे की लत एक बीमारी है और इसका उपचार संभव है। आवश्यकता है संवेदनशीलता, सहयोग और सकारात्मक दृष्टिकोण की।

उन्होंने कहा कि सभी नागरिक यह संकल्प लें कि स्वयं नशे से दूर रहेंगे, दूसरों को भी इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएंगे और एक स्वस्थ, सुरक्षित तथा सशक्त भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे।











