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गुणवत्तायुक्त शिक्षा, पाठ्यक्रम शिक्षा और खेल संरचना सुदृढ़ करने पर दिया बल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला । शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने  यहां शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने, प्रशासनिक कामकाज को सुव्यवस्थित करने तथा राज्य में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।

 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि सीबीएसई पाठ्यक्रम आधारित शिक्षा का विस्तार राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि सरकार सीबीएसई स्कूलों के माध्यम से गुणवत्तायुक्त और समान शिक्षा देने के लिए प्रतिबद्ध है। शिक्षा विभाग द्वारा सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है, जिसे जल्द ही प्रदेश मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा अगले शैक्षणिक सत्र से 100 नए सीबीएसई स्कूल खोलने की योजना है, जिनमें से 94 स्कूलों के लिए मान्यता पहले ही मिल चुकी है, जबकि शेष को इस महीने के अंत तक मान्यता मिल जाएगी। सीबीएसई शिक्षकों के लिए अलग सब-केडर बनाया जाएगा।

 

 

शिक्षा मंत्री ने 1427 जॉब ट्रेनी पदों के लिए लिमिटेड डायरेक्ट रिक्रूटमेंट (एलडीआर) टेस्ट 2025दृ26 की समीक्षा की और अधिकारियों को इसे समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। यह एलडीआर परीक्षा 22 फरवरी, 2026 को आयोजित की जाएगी।
उन्होंने राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूलों के निर्माण प्रगति की भी समीक्षा की। यह स्कूल प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में विद्यार्थियों के समग्र और भविष्योन्मुख विकास के दृष्टिगत स्थापित किए जा रहे है। इन स्कूलों की स्थापना के लिए प्रदेश में 42 चिन्हित स्थानों के लिए 94.46 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन स्कूलों में आधुनिक शैक्षणिक संरचना और उन्नत खेल सुविधाओं का विकास किया जा रहा है ताकि छात्रों को गुणवत्ता शिक्षा और उनका समग्र विकास हो सके।

 

शिक्षा मंत्री ने खेल सुविधाओं को मजबूत करने और प्रदेश के सभी नौ खेल छात्रावास में कोच के खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने के निर्देश दिए।
रोहित ठाकुर ने कहा कि विभिन्न श्रेणियों के 389 सहायक प्रोफेसर पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और इसे आगे की कार्यवाही के लिए राज्य चयन आयोग को भेज दिया गया है। उन्होंने अन्य पदों की भर्ती में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।

शिक्षा मंत्री ने शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली की समीक्षा की
गुणवत्तायुक्त शिक्षा, पाठ्यक्रम शिक्षा और खेल संरचना सुदृढ़ करने पर दिया बल
पदोन्नत मुख्याध्यापकों को 31 दिसंबर तक पदभार ग्रहण करने के दिए निर्देश

उन्होंने कहा कि शून्य नामांकन वाले स्कूलों को विलय करने की प्रक्रिया में तेजी लाकर आवश्यकता अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि बायोलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स और गणित आदि विषयों के शिक्षक अंग्रेजी में पढ़ाने में सक्षम हों, इसके लिए शिक्षकों को कैप्सूल कोर्स करवाए जाने चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को छात्र परिवहन नीति तैयार करने को कहा। उन्होंने सभी पदोन्नत मुख्याध्यापकों को 31 दिसंबर तक अपनी नए पोस्टिंग स्थलों पर ज्वाइन करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानाचार्यों के लिए डीपीसी प्रक्रिया में भी तेजी लाने को भी कहा।

 

शिक्षा मंत्री ने कहा कि बागवानी को वोकेशनल विषय के रूप में शुरू करने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। उन्होंने अगले शैक्षणिक सत्र से इसे शुरू करने के लिए सभी औपचारिकताएं पूरी करने को कहा। यह पहल राज्य सरकार की कौशल-आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।
उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत पीजीटी, डीपीई और कंप्यूटर शिक्षकों के रिक्त पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया में भी तेजी लाने के निर्देश दिए, ताकि इसे प्रदेश मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से सक्षम 187 जेबीटी और अन्य 194 शास्त्री पदों की लंबित भर्ती प्रक्रिया को भी जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।

 

 

शिक्षा मंत्री ने राज्य में अगले महीने आयोजित होने वाले तीन राष्ट्रीय खेल आयोजनों की तैयारी की भी समीक्षा की। यह खेल प्रदेश में 10 वर्षों के उपरांत आयोजित किए जा रहे हैं।
परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा राजेश शर्मा, निदेशक स्कूल शिक्षा आशीष कोहली, अवर सचिव मनजीत और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित थे।

विदेशों में रोजगार का युवाओं का सपना हो रहा साकार, लाभार्थियों ने जताया आभार सरकार का

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आदर्श हिमाचल की विशेष रिपोर्ट
दीपक चंदेल मंडी जिला की बल्ह घाटी के बाल्ट गांव में रहते हैं। अभी छोट-मोटे कार्य कर किसी तरह अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। कठिनाइयां बहुत थीं, मगर उनका सपना विदेश में नौकरी का रहा है। आर्थिक हालात इतने अच्छे न होने से यह दूर की कौड़ी लग रहा था। ऐसे में उनके सपने को साकार करने में सहारा बनी प्रदेश की “सुक्खू सरकार”।
दीपक चंदेल का चयन बाइक राइडर ट्रेड में हुआ है और वे अब संयुक्त अरब अमिरात (यूएई) में रोजगार से अपने परिवार की बेहतर देखभाल कर पाएंगे। दीपक ने बताया कि अभी तक युवा अपने खर्च पर विदेशों में नौकरी ढूंढते रहे हैं। अब प्रदेश सरकार उन्हें यह अवसर उपलब्ध करवा रही है। रोजगार कार्यालय मंडी में आयोजित साक्षात्कार में भाग लिया और चयन के बाद अब उनका विदेश में नौकरी का सपना पूरा हुआ है। उन्होंने खुशी जताई कि इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। उन्होंने इस जनहितकारी नीति के लिए प्रदेश सरकार का आभार व्यक्त किया।
मंडी जिला के चयनित युवाओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
मंडी जिला के चयनित युवाओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
दीपक जैसे हजारों युवाओं के सपने साकार करने में मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की पहल पर राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विदेशों में रोजगार प्रदान करने की नीति कारगर सिद्ध हो रही है। इस पहल का उद्देश्य प्रदेश के युवाओं को न केवल हिमाचल में, अपितु विदेशों में भी सुरक्षित, पारदर्शी एवं सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध करवाना है। विदेश मंत्रालय द्वारा निर्धारित नियमों एवं दिशानिर्देशों के अनुरूप प्रदेश के युवाओं को विदेशों में कार्पोरेट व निजी क्षेत्र में भी रोजगार उपलब्ध करवाया जा रहा है, जिससे युवाओं को बेहतर एवं व्यापक रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। साथ ही फर्जी एजेंटों के माध्यम से होने वाली धोखाधड़ी की संभावनाएं भी कम हुई हैं।
इसके सफल कार्यान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम (एचपीएसईडीसी) के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई है। श्रम, रोजगार एवं ओवरसीज प्लेसमेंट विभाग, हिमाचल प्रदेश के माध्यम से एचपीएसईडीसी यह भर्तियां कर रहा है। इस पहल को पायलट आधार पर प्रदेश के चार जिलों कांगड़ा, हमीरपुर, ऊना तथा मंडी में शुरू किया गया है। चयनित युवाओं को विदेश में अपने कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न होने की स्थिति में संबंधित देश में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
मंडी जिला के चयनित युवाओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
मंडी जिला के चयनित युवाओं ने जताया मुख्यमंत्री का आभार
इसी कार्यक्रम के लाभार्थी पधर क्षेत्र के सरी गांव के भूपेंद्र कुमार ने बताया कि उनका चयन वेयरहाउस हेल्पर के पद के लिए हुआ है। वे बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण हैं और विदेश में कार्य कर बेहतर आय अर्जित करने का सपना देखते थे। चयन के उपरांत उन्हें विदेश स्थित कंपनी में कार्य का मौका मिला है जिससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकेंगे। उन्होंने इस प्रभावी योजना के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया है।
ग्राम पंचायत बथेरी, उप-तहसील कटौला के फरजंद अली ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद करते हुए कहा कि हिमाचल में पहली बार सरकार ने युवाओं को विदेशों में रोजगार उपलब्ध करवाने की दिशा में सराहनीय कदम उठाया है। उनके बेटे का भी चयन बाइक राइडर के पद पर हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार की भागीदारी से सुरक्षा का भरोसा बढ़ा है। युवाओं से आह्वान किया कि वे इस सुनहरे अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
क्षेत्रीय रोजगार अधिकारी अक्षय कुमार ने बताया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रोजगार के लिए मंडी में आयोजित साक्षात्कार के दौरान बाइक राइडर के पदों के लिए 44 युवाओं तथा वेयरहाउस हेल्पर के पदों के लिए पांच अभ्यर्थियों का चयन किया गया है। उन्होंने बताया कि बाइक राइडर को मासिक 70 हजार से एक लाख रुपए जबकि वेयरहाऊस हेल्पर को लगभग 34 हजार रुपए की आय होगी। वेतन के साथ उन्हें क्रमशः टिप एवं कमीशन तथा आवास एवं यातायात की सुविधा भी दी जाएगी।

सेवानिवृत्त अध्यापक जीवन सिंह राणा ने रची सफलता की नई इबारत

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आदर्श हिमाचल की विशेष रिपोर्ट
सेवानिवृत्ति के बाद अधिकतर लोग आराम और सुकून का जीवन चुनते हैं, लेकिन कांगड़ा जिला के नगरोटा सूरियां क्षेत्र के घार जरोट गांव से संबंध रखने वाले जीवन सिंह राणा ने इस सोच को पूरी तरह बदल कर रख दिया है। शिक्षा विभाग में प्रवक्ता पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने न केवल सक्रिय जीवन को अपनाया, बल्कि प्राकृतिक खेती के माध्यम से एक ऐसी मिसाल कायम की, जो आज क्षेत्र के सैकड़ों किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।
कृषक परिवार से ताल्लुक रखने वाले जीवन सिंह राणा ने सितंबर 2020 में पंजाब के बरनाला स्थित एक ड्रैगन फ्रूट फार्म का भ्रमण कर इस नई और लाभकारी फसल की बारीकियां सीखीं। इसके बाद उन्होंने अपने बेटे, सिविल इंजीनियर आशीष राणा और पत्नी कुन्ता राणा के साथ मिलकर कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में एक नई शुरुआत की। हिमाचल प्रदेश के बागवानी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन लेकर उन्होंने 6 कनाल भूमि में लाल छिलके वाली ड्रैगन फ्रूट किस्म के 450 पौधे लगाए।
उनकी मेहनत का परिणाम पहले ही सीजन में दिखाई देने लगा और दूसरे सीजन तक उन्हें लगभग 1 लाख 25 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। इस वर्ष अब तक वे लगभग 26 क्विंटल ड्रैगन फ्रूट 250 से 300 रुपये प्रतिकिलोग्राम की दर पर विक्रय कर चुके हैं जिससे उन्हें लगभग 7 लाख रुपये की आय हुई। भविष्य में वे इस खेती के दायरे को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं इस समय उनके बाग में 1125 पोल पर 4500 से अधिक पौधे लगे हुए हैं।
ड्रैगन फ्रूट को ‘सुपर फ्रूट’ कहा जाता है, लेकिन आज भी बहुत से लोग इसके स्वाद और औषधीय गुणों से अनजान हैं। राणा परिवार की मेहनत से न केवल यह फल क्षेत्र में लोकप्रिय हो रहा है, बल्कि इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है। प्रदेश एवं केन्द्र सरकार द्वारा भी उनको विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया गया है।
जीवन सिंह राणा ने वर्ष 2014 से ही प्राकृतिक खेती को अपनाना शुरू कर दिया था। उन्होंने कृषि विभाग से प्रशिक्षण लेकर विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ उठाया। साहीवाल नस्ल की गाय पालकर वे प्राकृतिक खेती की सभी आवश्यक सामग्रियां स्वयं तैयार करते हैं। इससे न केवल मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, बल्कि फसलें रोगों से भी सुरक्षित रहती हैं।
ड्रैगन फ्रूट के साथ-साथ वे स्ट्राॅबेरी, मक्का, गेहूं, धान (लाल बासमती), चना, अलसी, कोदरा, अदरक और हल्दी जैसी फसलों की भी सफल खेती कर रहे हैं। सब्जियों में लौकी, टिंडा, खीरा, करेला, घीया, भिंडी और बैंगन का उत्पादन किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त उनके खेतों में अमरूद, पपीता, जामुन, हरड़, बेहड़ा और आंवला जैसे फलदार पौधे भी लहलहा रहे हैं।
प्रदेश सरकार के कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर तकनीकी एवं वित्तीय सहायता प्रदान की गई। प्राकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना के तहत देसी गाय खरीद पर 20 हजार रुपये का अनुदान, गौशाला निर्माण, गौमूत्र भंडारण, ट्रैक्टर पर 2.5 लाख रुपये, बोरवेल पर 1 लाख 10 हजार रुपये, ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली पर 22 हजार रुपये तथा ड्रैगन फ्रूट पौधों व पाॅलीहाउस पर सब्सिडी प्रदान की गई।
जीवन सिंह राणा बताते हैं कि शुरुआत में उन्होंने 100 पोल पर 500 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाए थे, जिसके बाद 125 अतिरिक्त पोल लगाकर खेती का विस्तार किया गया। वे प्राकृतिक खेती के अंतर्गत मल्टी-क्राॅपिंग के प्रयोग भी कर रहे हैं, जिसमें भिंडी और मटर जैसी फसलें शामिल हैं।
इसी बाग में उन्होंने ट्रायल आधार पर ड्रैगन फ्रूट के बीच लगभग 50 पपीते के पौधे भी लगाए, जिनमें बहुत कम समय में फल आना शुरू हो गए हैं। राणा बताते हैं कि उनके ड्रैगन फ्रूट की मांग केवल हिमाचल प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य राज्यों से भी आर्डर मिल रहे हैं। इस वर्ष हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग के माध्यम से दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित प्रदर्शनी में उनके ड्रैगन फ्रूट का प्रदर्शन किया गया, जहां से यूरोप (इंग्लैंड) तक से आर्डर प्राप्त हुए।
जीवन सिंह राणा का कहना है कि उनकी सफलता में हिमाचल प्रदेश बागवानी विभाग और प्राकृतिक खेती योजनाओं का अहम योगदान है। वे कहते हैं कि यदि ईमानदारी और लगन से मेहनत की जाए तो गांव में रहकर भी सम्मानजनक जीवन, बेहतर स्वास्थ्य और अच्छी आय संभव है। वे अपनी जरूरत का अधिकांश स्वयं उत्पादन करते हैं और अतिरिक्त उपज को बाजार में बेचते हैं। राणा कहते हैं कि उनका बेटा आशीष राणा जोकि एक सिविल इंजिनियर है वह भी अब उनके इस कार्य को संभाल रहा है।
राणा बताते हैं कि ड्रैगन फ्रूट अत्यंत मीठा और उच्च गुणवत्ता वाला फल है, जिसे बिना फ्रीज किए भी दो महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। वे खेती में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का प्रयोग नहीं करते।
अपनी अथक मेहनत, नवाचार और प्राकृतिक खेती के प्रति समर्पण से जीवन सिंह राणा और उनका परिवार आज सफलता की नई कहानी लिख चुका है। ड्रैगन फ्रूट की लालिमा अब केवल उनके खेतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। वे यह सिद्ध करते हैं कि सेवानिवृत्ति अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का सबसे सुंदर अवसर हो सकता है।
उद्यान विभाग द्वारा ड्रैगन फ्रूट की खेती को निरंतर किया जा रहा है प्रोत्साहित : अलक्ष पठानिया 
उपनिदेशक उद्यान अलक्ष पठानिया ने कहा कि जिला कांगड़ा में उद्यान विभाग द्वारा ड्रैगन फ्रूट की खेती को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। वर्तमान में जिले में लगभग 3 हेक्टेयर क्षेत्र को ड्रैगन फ्रूट की खेती के अंतर्गत लाया जा चुका है, जिसमें करीब 5 बागवान इस फसल की खेती कर रहे हैं। यह खेती मुख्य रूप से नगरोटा सूरियां, नूरपुर, देहरा, रैत सहित अन्य क्षेत्रों में की जा रही है।
प्राकृतिक खेती से ड्रैगन फ्रूट की उपज में कमाया नाम, बने सैकड़ों किसानों की प्रेरणा
प्राकृतिक खेती से ड्रैगन फ्रूट की उपज में कमाया नाम, बने सैकड़ों किसानों की प्रेरणा
उन्होंने बताया कि ड्रैगन फ्रूट एक कैक्टस प्रजाति की फसल है, जो विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है जहाँ तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से अधिक रहता है। इसी कारण उद्यान विभाग द्वारा इसे जिले के गर्म क्षेत्रों में अधिक बढ़ावा दिया जा रहा है।
अलक्ष पठानिया ने कहा कि उद्यान विभाग द्वारा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों एवं बागवानों को अनेक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। सिंचाई व्यवस्था के लिए किसानों को ड्रिप इरिगेशन, स्प्रिंकलर, रेनगन जैसी आधुनिक प्रणालियों पर अनुदान दिया जा रहा है, ताकि पानी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। इन सुविधाओं के माध्यम से किसानों को सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि एरिया एक्सपेंशन योजना के अंतर्गत ड्रैगन फ्रूट की खेती का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और अब तक 3 हेक्टेयर क्षेत्र को इसके अंतर्गत लाया गया है। ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर 3 लाख 37 हजार 500 रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है, जिसमें पौधों की लागत एवं सपोर्ट सिस्टम (खंभे आदि) पर होने वाला खर्च शामिल है। यह अनुदान किसानों को दो किस्तों में प्रदान किया जाता है, जिसमें पहली किस्त 60 प्रतिशत होती है।
उपनिदेशक ने बताया कि नगरोटा सूरियां क्षेत्र के किसान जीवन राणा द्वारा एक हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती की गई है, जिसमें लगभग 5000 पौधे लगाए गए हैं और इससे जीवन राणा को इस वर्ष लगभग 7 लाख रुपये की आमदनी प्राप्त हो चुकी है।
प्राकृतिक खेती से ड्रैगन फ्रूट की उपज में कमाया नाम, बने सैकड़ों किसानों की प्रेरणा
उन्होंने कहा कि ड्रैगन फ्रूट एक ऐसी फसल है जो जल्दी उत्पादन देना शुरू कर देती है और बाजार में इसकी अच्छी मांग है। वर्तमान में ड्रैगन फ्रूट 250 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव से आसानी से बिक जाता है, जिससे किसानों को अच्छा लाभ मिल रहा है।
अलक्ष पठानिया ने बताया कि वर्तमान में जिले में नगरोटा सूरियां, नूरपुर, रैत और देहरा क्षेत्र के किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं, बेरोजगार किसानों एवं बागवानों से आह्वान किया कि वे इस लाभकारी खेती को अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।

शहरी क्षेत्र के दुकानदारों को मिलेगा मुख्यमंत्री लघु कल्याण योजना का लाभ: मुख्यमंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला ।  प्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले दुकानदारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से राज्य में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना को विस्तारित किया है। इसके तहत प्रदेश के सभी शहरी स्थानीय निकायों में मुख्यमंत्री लघु दुकानदार कल्याण योजना शहरी को शुरू करने की अधिसूचना जारी कर दी गई है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के दुकानदारों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से यह योजना वर्ष 2023 में शुरू की गई थी। वर्ष 2025-26 की बजट घोषणा के अनुरूप अब इस योजना को शहरी क्षेत्रों में विस्तारित किया गया है।

 

उन्होंने कहा कि शहरी क्षेत्रों में अपने कारोबार को विस्तार प्रदान करने के लिए छोटे दुकानदारों को वित्तीय सहायता की कमी का सामना करना पड़ता है। बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ रहने के कारण कई दुकानदारों के खाते एनपीए में बदल जाते है। छोटे व्यापारियों के समक्ष आने वाली इन चुनौतियों के निवारण के उद्देश्य से राज्य सरकार ने इस योजना का लाभ शहरी क्षेत्र के छोटे व्यापारियों को प्रदान करने का निर्णय लिया है।

 

 

योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में छोटे दुकानदारों जिनका वार्षिक कारोबार 10 लाख रुपये से कम है और जिन्होंने बैंकांे से व्यवसायिक ऋण लिए है तथा जिनके खाते एनपीए घोषित किए जा चुके हैं उनको वन टाइम सेटलमेंट के तहत सहायता प्रदान की जाएगी। योजना के तहत सरकार द्वारा बैंक के माध्यम से एक लाख रुपये तक की एकमुश्त निपटान सहायता प्रदान की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लाभार्थियों पर मूलधन व ब्याज सहित कुल बकाया राशि एक लाख रुपये तक है, उनका पूरा निपटान योजना के अंतर्गत किया जाएगा। जिन मामलों में बकाया राशि एक लाख रुपये से अधिक है।

 

 

इस स्थिति में लाभार्थी द्वारा शेष राशि स्वयं जमा करवानी होगी और राज्य सरकार द्वारा एक लाख रुपये की वन टाइम सहायता प्रदान की जाएगी। योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक द्वारा लिया गया अधिकतम ऋण 10 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि इस योजना को पारदर्शिता और सरल तरीके से तैयार किया गया है। शहरी स्थानीय निकायों, बैंकों, एक नोडल बैंक तथा शहरी विकास विभाग को शामिल करते हुए एक पारदर्शी संस्थागत व्यवस्था तैयार की गई है, ताकि दावों का समयबद्ध निपटान सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि मध्यवर्ती अवधि में ब्याज के बोझ को हटाकर तथा किसी भी प्रकार का प्रोसेसिंग या प्रशासनिक शुल्क न लगाकर राज्य सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि योजना का अधिकतम लाभ छोटे दुकानदारों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इस योजना से शहरी क्षेत्रों में काम कर रहे छोटे फल एवं सब्जी विक्रेता, चाय स्टॉल और ढाबा संचालक, नाई, पान विक्रेता, मोची, चाट विक्रेता, गैरेज मालिक, दर्जी, किराना दुकानदार, मोबाइल मरम्मत करने वाले, रेहड़ी-पटरी वाले और अन्य छोटे खुदरा दुकानदार लाभान्वित होंगे।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना 1 अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2025 के बीच लिए गए बिना जमानत के (कोलेटरल-फ्री) व्यवसायिक ऋणों पर लागू होगी। जानबूझकर ऋण न चुकाने, धोखाधड़ी या कदाचार से जुड़े मामलों को योजना में शामिल नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों की पहचान बैंक करेंगे, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिल सके।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के स्थायी निवासी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इसके अतिरिक्त आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और परिवार का कोई भी सदस्य नियमित सरकारी सेवा में कार्यरत नहीं होना चाहिए। आवेदन संबंधित शहरी स्थानीय निकाय में जमा किए जाएंगे। सत्यापन के बाद आवेदनों को बैंकों को भेजा जाएगा। बैंक मासिक आधार पर नोडल बैंक के माध्यम से शहरी विकास विभाग को ओटीएस दावे भेजेंगे और आवेदकों से किसी प्रकार का प्रोसेसिंग अथवा प्रशासनिक शुल्क नहीं लिया जाएगा।

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह योजना छोटे दुकानदारों को अपने ऋण चुकाने, एनपीए खातों को बंद करने, व्यवसाय को विस्तार प्रदान करने और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद करेगी, जिससे राज्य की शहरी अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा।

अस्पतालों में वृद्धजनों के लिए आरम्भ होगी विशेष ओपीडी परामर्श स्लॉट सुविधा -मुख्यमंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर कमला नेहरू अस्पताल, शिमला में आयोजित राज्य स्तरीय ‘सघन पल्स पोलियो अभियान’ का शुभारम्भ किया। उन्होंने नन्हें-मुन्ने बच्चों को पोलियो से बचाव की खुराक भी पिलाई।

 

मुख्यमंत्री ने अभियान के सफल आयोजन के लिए चिकित्सकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा, एएनएम, पंचायती राज संस्थाओं, स्कूल शिक्षकों एवं प्रशासन की सराहना की।

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लेकर मेडिकल कॉलेज तक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ कर रही है। उन्होंने कहा कि अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशलिटी आयुर्विज्ञान चमियाणा में एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर खोला जाएगा। इस सेंटर में बच्चों के इलाज के लिए विश्व स्तरीय सुविधाएं और आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि अस्पतालों में 70 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजनों के लिए ओपीडी परामर्श के लिए विशेष स्लॉट निर्धारित किए जाएंगे, ताकि उन्हें इंतजार न करना पड़े और सुविधाजनक उपचार सुविधा प्राप्त हो।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र को विशेष अधिमान दे रही है। स्वास्थ्य क्षेत्र को और सशक्त बनाने के लिए विश्वस्तरीय तकनीक और आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है। चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए सभी रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरा जा रहा है।

 

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सघन पल्स पोलियो टीकाकरण अभियान का उद्देश्य राज्य के पोलियो-मुक्त दर्जे को बनाए रखना है। अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर में 5,793 पोलियो बूथ में जीरो से पांच वर्ष आयु वर्ग के लगभग छह लाख बच्चों को पोलियो से बचाव की खुराक पिलाई जाएगी। इसके सफल संचालन के लिए 11,706 टीकाकरण टीमें तैनात की गई हैं।
उन्होंने कहा कि 22 व 23 दिसम्बर को मॉप-अप दिवस के दौरान घर-घर जाकर छूटे हुए बच्चों, प्रवासी परिवारों तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को कवर किया जाएगा। अभियान के लिए आवश्यक टीकें, कोल्ड-चेन उपकरण एवं अन्य लॉजिस्टिक सामग्री पहले ही सभी जिलों को उपलब्ध करवाई जा चुकी है।

Special OPD consultation slot facility will be started for the elderly in hospitals - Chief Minister
Special OPD consultation slot facility will be started for the elderly in hospitals – Chief Minister

मुख्यमंत्री ने केएनएच में मरीजों और उनके परिजनों सके बातचीत की और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीक को प्रदेश सरकार द्वारा सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जा रही है। शिमला के चमियाणा अस्पताल और कांगड़ा ज़िले के टांडा मेडिकल कॉलेज में ऐतिहासिक पहल करते हुए रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत की गई है। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से लेकर सिविल हॉस्पिटल तक पुरानी मशीनों को बदला जा रहा है। स्वास्थ्य संस्थानों में एमआरआई, सिटी स्कैन और एक्स-रे मशीन लगाने के लिए तीन हज़ार करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एम्ज दिल्ली की तर्ज़ पर मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। मरीजों के लिए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रॉमा सेंटर स्थापित किए गए हैं।

 

इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, विधायक हरीश जनारथा, सचिव संदीप कदम, प्रबंध निदेशक एनएचएम प्रदीप ठाकुर, निदेशक स्वास्थ्य डॉ. गोपाल बेरी, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

हिमाचली संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने में अहम भूमिका निभा रही है हिमाचल प्रांतीय सभा : राजीव राणा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों
हमीरपुर । हिमाचल प्रांतीय सभा द्वारा रजि ग्यासपुरा, लुधियाना में आयोजित सांस्कृतिक एवं धार्मिक कार्यक्रम ने प्रवासी हिमाचली समाज को अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जसपुरा ब्लॉक के अध्यक्ष  श्याम लाल डोगरा ने की।
हिमाचल प्रदेश असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस (केकेसी) के प्रदेश चेयरमैन राजीव राणा ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि प्रवासी हिमाचलियों के बीच हिमाचली संस्कृति, लोक परंपराओं और धार्मिक आस्थाओं को जीवंत बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, संस्कार और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।
हिमाचली संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने में अहम भूमिका निभा रही है हिमाचल प्रांतीय सभा : राजीव राणा
हिमाचली संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखने में अहम भूमिका निभा रही है हिमाचल प्रांतीय सभा : राजीव राणा
राजीव राणा ने कहा कि हिमाचली संस्कृति भाईचारे, मेहनत, सादगी और समरसता की प्रतीक है, और हिमाचल प्रांतीय सभा जैसे संगठन इसे सहेजने और आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे हिमाचली प्रवासी समाज ने अपनी मेहनत और संस्कारों से एक अलग पहचान बनाई है, जिसे बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के उपरांत प्रांतीय सभा द्वारा माँ के जागरण का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धा, भक्ति और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। माँ के जागरण के साथ पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का संदेश प्रसारित हुआ।
कार्यक्रम में डिम्पल राणा (अध्यक्ष, अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा पंजाब), राजेश रत्न भारद्वाज (अध्यक्ष, हिमाचल परिवार संगठन), अशोक ठाकुर (जिला अध्यक्ष, हिमाचल प्रांतीय सभा), अनिल डोगरा (महासचिव) सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति, सामाजिक कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में प्रवासी हिमाचली समाज के लोग उपस्थित रहे।
अंत में आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित जनसमूह का आभार व्यक्त किया गया।

जी राम जी’ योजना का विरोध केवल राम नाम के कारण, सनातन विरोध कांग्रेस की पहचान बन चुकी -विंदल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों
नाहन ।  बूथ संपर्क अभियान के दौरान खजूरना, कोटड़ी, मंझोली और गाडा बूथ में जनता को संबोधित करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी को भगवान श्रीराम के नाम से ही नफरत है और वह निरंतर ऐसे अवसर तलाशती रहती है, जिससे श्रीराम के नाम और उनसे जुड़े कार्यों का विरोध किया जा सके।
डॉ. बिंदल ने कहा कि भारत के हृदय सम्राट, घट-घट में विराजमान, जन-जन के आराध्य देव भगवान श्रीराम के जन्मस्थान पर भव्य मंदिर निर्माण का कांग्रेस पार्टी ने वर्षों तक विरोध किया। विरोध की हद यह रही कि कांग्रेस ने करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर सर्वोच्च न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी कर राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि राम सेतु का विरोध हो या श्रीराम से जुड़े किसी भी कार्य का विरोध—यह कांग्रेस की स्थायी नीति बन चुकी है।
डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि आज ‘जी राम जी’ योजना का जो विरोध किया जा रहा है, वह किसी नीति या जनहित के कारण नहीं, बल्कि सिर्फ इसलिए किया जा रहा है क्योंकि उस योजना में श्रीराम का नाम जुड़ा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही श्रीराम का नाम आया, पूरी कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगी दल छाती पीट-पीटकर इस योजना के विरोध में जुट गए, जिससे उनकी सनातन विरोधी मानसिकता पूरी तरह उजागर हो गई है।
डॉ. बिंदल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के व्यवहार को निरंतर सनातन विरोधी करार देते हुए कहा कि वर्ष 2022 में सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री का पहला बयान ही सनातन के विरुद्ध था, जिसमें उन्होंने 97 प्रतिशत हिंदुओं को हराकर सत्ता में आने जैसी टिप्पणी की। इसके बाद बच्चों द्वारा लगाए गए ‘राधे-राधे’ के उद्घोष का खुला विरोध भी इसी मानसिकता का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि केवल तुष्टीकरण की राजनीति के लिए कांग्रेस द्वारा बार-बार सनातन और राम नाम का विरोध किया जा रहा है।
डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि भारत में श्रीराम का विरोध करने वाले इतिहास गवाह है कि वे निरंतर पतन की ओर गए हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सनातन और श्रीराम के नाम का विरोध कर कांग्रेस अपनी शेष बची राजनीतिक जमीन भी स्वयं समाप्त कर लेगी। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश की जनता अब कांग्रेस की इस मानसिकता को भली-भांति समझ चुकी है और समय आने पर इसका करारा जवाब देगी।

जश्न में आगे और आपदा राहत में पीछे रहती है ‘सुख की सरकार -जयराम ठाकुर

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि प्रदेश में आई आपदा से राहत के मामले में सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पूरी तरह विफल और संवेदनहीन साबित हुई है। छह महीनें बीत जाने के बाद भी सरकार अभी तक बह चुकी सड़कों में मिट्टी और पत्थर भरवा कर भी उन्हें बहाल नहीं करवा पाई।

 

जिसकी वजह से प्रदेश में मंडी और आसपास के जिलों की सैकड़ो पंचायत सड़क मार्ग से कटी हुई है।सैकड़ों गांव आज भी वाहनों की पहुंच से दूर हैं। आपात स्थिति में किसी बीमार को बुजुर्ग को या फिर गर्भवती महिला को अस्पताल भी ले जाना हो तो उन्हें किसी न किसी तरह से पालकी पर लाद कर कई–कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ रहा है। जो सड़कें इस आपदा में बह गई, उन्हें पक्की करना तो दूर उनके गड्ढे भी ग्रामीण क्षेत्रों में नहीं भरे जा सके हैं।

 

विभाग के अधिकारी बजट न होने का हवाला देकर सड़के बहाल करने में अपनी असमर्थता जाता रहे हैं। बजट क्यों नहीं है इसका जवाब सरकार न तो सार्वजनिक मंचों से देती है और नहीं सदन में। मंडी और आसपास के जिलों में सबसे अधिक तबाही हुई, लेकिन सरकार ने राहत कार्यों की बजाय जश्न मनाना ज्यादा जरूरी समझा। उसके लिए किसी भी तरह की बजट की कमी नहीं हुई क्योंकि केंद्र सरकार द्वारा आपदा राहत के लिए भेजे गए पैसे का इस्तेमाल जश्न मनाने में हुआ।

 

 

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि जितनी फुर्ती से मुख्यमंत्री ने संस्थानों को शिफ्ट किया और आपदा प्रभावितों पर फर्जी मुकदमें दर्ज करवाकर आए दिन उन्हें थाने में बुलाकर बैठाया जा रहा है, यदि उतनी फुर्ती से सड़कों की बहाली होती तो आज यह दिन नहीं देखने पड़ते। सरकार ने जश्नों और उत्सवों में समय और संसाधन लगाए, लेकिन जिन क्षेत्रों में घर, सड़कें और आजीविका तबाह हो चुकी है, वहां राहत और पुनर्वास के नाम पर कुछ भी नजर नहीं आता। प्रभावित लोगों को न तो समय पर मदद मिली और न ही सरकार का कोई ठोस कार्य योजना सामने आई। सड़कों की बहाली के लिए मुख्यमंत्री द्वारा बजट तक जारी नहीं किया जा रहा। सड़कें पक्की करना तो दूर, जो सड़कें बह गई हैं उनमें मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से जोड़ने तक का काम नहीं हो पाया है।

 

जयराम ठाकुर ने कहा कि अब सर्दियां शुरू हो चुकी हैं और कुछ ही दिनों में बर्फबारी का दौर आने वाला है, लेकिन आपदा प्रभावित लोगों के पास न रहने का ठिकाना है और न ही भविष्य को लेकर कोई भरोसा। सरकार ने न अस्थायी आवास की व्यवस्था की और न ही ठंड से बचाव के लिए कोई ठोस योजना बनाई। उन्होंने कहा कि सुख की सरकार की उदासीनता और अकर्मण्यता ने प्रदेश के आपदा पीड़ितों को उनके हाल पर छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्र में तुरंत राहत, सड़क बहाली, अस्थायी आवास के लिए तत्काल बजट जारी किया जाए।

मरीज के लिए दवाई नहीं, सड़क के लिए बजट नहीं और मित्रों के लिए क्रिकेट प्रतियोगिता

जयराम ठाकुर ने कहा कि एक ओर प्रदेश बेरोजगारी, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली से जूझ रहा है। आयुर्वेदिक अस्पतालों में मरीजों को दवाइयां तक उपलब्ध नहीं हैं। प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान से जुड़े कार्यक्रम के लिए वसूली की जा रही है। सड़कों के गड्ढे काटने के लिए बजट नहीं है। लेकिन आयुष विभाग द्वारा मित्रों के लिए क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किए जा रहे हैं। जनस्वास्थ्य से जुड़े विभाग को इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी की तरह चलाना जनता के साथ धोखा है। सरकार इससे बाज आए तो बेहतर होगा।

बायपास पुलिस चौकी में स्थानीय निवासियों व टूरिस्टों के बच्चों को दवा पिलाकर किया गया जागरूक

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला‌ । देशभर में  पल्स पोलियो अभियान चलाया गया। अभियान के तहत हिमाचल प्रदेश में 5 वर्ष से कम आयु के लगभग 6.24 लाख बच्चों को पोलियो की दो बूंदें पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए प्रदेशभर में कुल 5,793 पोलियो बूथ स्थापित किए गए हैं।

 

Children of local residents and tourists were made aware by administering medicine to them at the Bypass Police Station.
Children of local residents and tourists were made aware by administering medicine to them at the Bypass Police Station.

राजधानी शिमला में अभियान के अंतर्गत शिमला बायपास स्थित पुलिस चौकी परिसर में पल्स पोलियो बूथ लगाया गया। यहां स्थानीय निवासियों के बच्चों के साथ-साथ बाहर से आए पर्यटकों (टूरिस्टों) के बच्चों को भी पोलियो की दवा पिलाई गई, वहीं अभिभावकों को पोलियो से बचाव और नियमित टीकाकरण के महत्व के बारे में समझाया व जागरूक किया गया।

 

स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा मौके पर मौजूद रहकर अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं। अभियान का उद्देश्य प्रदेश को पोलियो मुक्त बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा पोलियो दवा से वंचित न रह जाए।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोलियो की दो बूंदें अवश्य पिलवाएं।

बेसहारा पशुओं को गौशाला तक पहुंचाएगी समिति –  अनुपम कश्यप

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
शिमला ।  सड़क किनारे घूम रहे बेसहारा पशुओं को गोशाला तक पहुंचाने के लिए हर उपमंडल स्तर पर समिति गठन को लेकर अधिसूचना आज उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप ने जारी कर दी है।
इस अधिसूचना के अनुसार समिति के अध्यक्ष एसडीएम होंगे। इसके साथ ही अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग, खंड विकास अधिकारी, थाना प्रभारी, नगर निकाय /पंचायत सदस्य, स्थानीय गौशाला का प्रतिनिधि/ पशु आश्रय के प्रतिनिधि इस समिति के सदस्य रहेंगे। इसके अलावा वरिष्ठ पशु चिकित्सक समिति के सदस्य सचिव के तौर पर नियुक्त होंगे।
इस समिति को बेसहारा पशुओं को 15 दिनों के भीतर उपमंडल के परिधि क्षेत्र से इकट्ठा करके गौशाला तक पहुंचाना होगा। फिर इसकी रिपोर्ट 15 दिन बाद उपायुक्त को पेश करनी होगी।  उपायुक्त ने 15 दिवसीय विशेष अभियान की अधिसूचना जारी कर दी है। यह अभियान हर उपमंडल में एसडीएम की अध्यक्षता में समिति के माध्यम से धरातल पर लागू किया जाएगा। उपायुक्त की अध्यक्षता में आयोजित विशेष बैठक में फैसला लिया गया कि जनवरी 2026 में जिला शिमला के सभी चिन्हित स्थानों पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को नजदीकी गौ सदनों में पहुंचाया जाएगा। नव वर्ष में पूरा जिला बेसहारा पशु मुक्त बनाया जाएगा।
जिला भर में 272 बेसहारा पशु चिन्हित
बेसहारा पशु मुक्त होगा जिला शिमला, जनवरी 2026 तक सभी बेहसहारा पशु पहुंचाए जाएंगे गौ सदन

बेसहारा पशु मुक्त होगा जिला शिमला, जनवरी 2026 तक सभी बेहसहारा पशु पहुंचाए जाएंगे गौ सदन
उपायुक्त ने बताया कि पशुधन हमारी धरोहर है, इन्हें बेसहारा नहीं छोड़ना चाहिए। जिन भी लोगों ने अपने पशु छोड़े है उनसे विनम्र आग्रह है कि अपने पशुओं को वापिस ले जायें। उन्होंने कहा कि सर्दियों में बेसहारा पशुओं की जान जाने का खतरा भी रहता है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाएं भी इनकी वजह से होती है। जिला प्रशासन के आदेशों पर पशुपालन विभाग ने एक सर्वेक्षण हाल ही में करवाया था जिसमें पाया गया कि पशु पूरे जिला भर में 272 बेसहारा हैं। अब इन सभी बेसहारा पशुओं को नजदीकी गौ सदनों में पहुंचाया जाएगा। जिला में विभिन्न गौ सदनों में करीब 3500 के करीब पशुओं को रखने की क्षमता है। लेकिन अभी तक 2500 के करीब पशु ही रखे गए हैं। ऐसे में 272 पशुओं को क्षमता के अनुसार नजदीकी गौ सदनों तक पहुंचाया जाएगा।
इन स्थानों पर है बेसहारा पशु
जिला में पशुपालन विभाग की ओर से किए सर्वेक्षण में अग्रलिखित स्थानों पर काफी तादाद में बेसहारा पशु पाए गए है। इन्हीं स्थानों को बेसहारा पशु मुक्त बनाया जाएगा। इनमें

एसवीएच (स्टेट वेटनरी हॉस्पिटल) शिमला के तहत टूटू चौक, तारा देवी हाइवे, खलीनी में हनुमान मंदिर के समीप, सब डिवीजल वेटनरी हॉस्पिटल ज्यूरी के तहत नैनी (बढ़ाल), राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के समीप, खनेरी अस्पताल के नजदीक, झाकड़ी बस स्टॉप, बस स्टॉप रामपुर, तलाई मंदिर, भद्राश बाजार, नीरथ बाजार, बिथल, दत्तनगर, ओड्डी बाज़ार, किंगल बाज़ार, कुमारसैन बस स्टॉप भैराखड, बिथल बस स्टॉप और कोटगढ़ में बेहसरा पशु चिन्हित किए गए है। सब डिवीजल वेटनरी हॉस्पिटल ठियोग के तहत मतियाना, शिलारू, नारकंडा, संधू, छैला, कोटखाई और गुम्मा एसडीवीएच चौपाल के तहत नगर पंचायत नेरवा, फ़ेडिजपुल और गुम्मा व मिनस क्षेत्र, सब डिवीजल वेटनरी हॉस्पिटल रोहड़ू के तहत एमसी रोहड़ू, एनएसी चिडगांव और एनएसी जुब्बल को चिन्हित किया गया है।

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