CAS बहाली सहित उच्च शिक्षा की समस्याओं को लेकर JAC प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से मुलाकात ।

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

शिमला । हिमाचल प्रदेश के समस्त विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक संगठनों के संयुक्त मंच जॉइंट एक्शन कमेटी (JAC) के प्रतिनिधिमंडल ने अध्यक्ष प्रो. जनार्दन सिंह एवं महासचिव डॉ. नितिन व्यास के नेतृत्व में राज्यपाल हिमाचल प्रदेश  कविंदर गुप्ता जी से लोकभवन में शिष्टाचार भेंट की।

 

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याप्त विभिन्न गंभीर समस्याओं से राज्यपाल को अवगत कराया तथा विशेष रूप से Career Advancement Scheme (CAS) को तत्काल प्रभाव से पुनः लागू करने की प्रमुख माँग रखी।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2022 से प्रदेश सरकार द्वारा CAS प्रक्रिया पर रोक लगाए जाने के कारण लगभग 1500 से 2000 शिक्षक प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि UGC दिशानिर्देशों के अंतर्गत यह एक नियमित एवं अनिवार्य पदोन्नति प्रक्रिया है, जिसे रोकना शिक्षकों के अधिकारों के साथ-साथ उच्च शिक्षा प्रणाली के विकास के लिए भी बाधक है।

 

 

JAC ने कहा कि CAS केवल वेतन वृद्धि की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों की शैक्षणिक प्रगति, शोध कार्य एवं गुणवत्ता सुधार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हुई है। इसके अवरुद्ध होने से शिक्षकों का मनोबल प्रभावित हो रहा है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

 

प्रतिनिधिमंडल ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षकों के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जा रहा है, जबकि अन्य सेवाओं में पदोन्नति प्रक्रियाएँ सामान्य रूप से जारी हैं। इसे उन्होंने असंतुलित एवं अनुचित बताया।
JAC ने यह भी कहा कि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सरकार को CAS के वित्तीय प्रभाव को लेकर गलत एवं भ्रामक जानकारी दी जा रही है, जबकि वास्तविक आंकड़ों के अनुसार इससे राज्य पर कोई असहनीय वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

 

 

प्रतिनिधिमंडल ने यह चिंता भी व्यक्त की कि CAS के लंबे समय तक स्थगित रहने से राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) की ग्रेडिंग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों की राष्ट्रीय स्तर पर छवि प्रभावित हो सकती है।
JAC ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय नौणी, सरदार पटेल विश्वविद्यालय मंडी एवं हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय सहित प्रमुख संस्थानों की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की।

 

 

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो इसका दीर्घकालिक प्रभाव प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था, शोध कार्य एवं प्रतिभा पलायन पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा में कटौती को वित्तीय बचत के रूप में देखना गलत नीति है और शिक्षा पर निवेश को भविष्य की पूंजी माना जाना चाहिए।
राज्यपाल महोदय ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना तथा आश्वासन दिया कि वे इस विषय पर संबंधित अधिकारियों एवं सरकार से विस्तृत चर्चा करेंगे।

 

JAC ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए CAS को शीघ्र बहाल करने के निर्देश प्रदान करें, ताकि शिक्षकों के अधिकारों की पुनः स्थापना हो सके।इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल में डॉ. प्रदीप, डॉ. सुनील, डॉ. अंजलि, डॉ. अजय अत्री एवं डॉ. बालक राम ठाकुर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

 

अंत में JAC ने चेतावनी दी कि यदि CAS को शीघ्र बहाल नहीं किया गया तो पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।