शूलिनी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक को मिला वैश्विक ‘नानजिंग पुरस्कार’

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

 

सोलन। शूलिनी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक डॉ. शांतनु मुखर्जी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। उन्हें प्रतिष्ठित विश्व मृदा विज्ञान कांग्रेस 2026 (WCSS 2026) में अपना शोध प्रस्तुत करने के लिए चुना गया है और “नानजिंग पुरस्कार” से सम्मानित किया गया है।

 

विश्व मृदा विज्ञान कांग्रेस इस क्षेत्र का एक प्रमुख वैश्विक मंच है, जिसमें दुनिया भर से 4000 से अधिक वैज्ञानिक, नीति निर्माता और विशेषज्ञ भाग लेते हैं। इस सम्मेलन में 120 से अधिक वैज्ञानिक सत्र और 1000 से ज्यादा शोध प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं।

 

डॉ. शांतनु मुखर्जी का शोध मृदा और जल प्रणालियों में औषधीय प्रदूषण की बढ़ती समस्या पर केंद्रित है, खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में। उनके शोध में हिमालयी चीड़ की पत्तियों से बायोचार विकसित कर उसे “सुपरसॉर्बेंट” के रूप में उपयोग किया गया है, जो एंटीबायोटिक्स जैसे हानिकारक संदूषकों को पर्यावरण से हटाने में सक्षम है।

 

यह नवाचार “अपशिष्ट से धन” (Waste to Wealth) की अवधारणा को बढ़ावा देता है और चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप है। उनका शोध मृदा सुधार और पर्यावरणीय स्थिरता से जुड़े विशेष सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें मृदा क्षरण और प्रदूषण से निपटने के समाधान प्रदर्शित किए जाएंगे।

 

“नानजिंग विशिष्ट वैज्ञानिक पुरस्कार” चीन की मृदा विज्ञान सोसायटी और डब्ल्यूसीएस आयोजन समिति द्वारा प्रदान किया जाता है, जो विश्व स्तर पर उत्कृष्ट वैज्ञानिकों को उनके योगदान के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार में सम्मेलन में भागीदारी के लिए वित्तीय सहायता भी शामिल होती है।

 

डॉ. मुखर्जी की इस उपलब्धि से वैश्विक स्तर पर सहयोग, ज्ञान के आदान-प्रदान और विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय पहचान को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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