आदर्श हिमाचल ब्यूरों
शिमला। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर शिमला के ऐतिहासिक राम मंदिर में गुरुतत्त्व उत्सव एवं रुद्र पूजा का भव्य आयोजन सायं 4:30 बजे से श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। इस आध्यात्मिक आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, साधकों, नागरिकों एवं परिवारों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ संत कबीरदास जी के प्रसिद्ध दोहे— “गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागूं पाय। बलिहारी गुरु आपने, गोविंद दियो मिलाय॥” —की भावधारा को आत्मसात करते हुए गुरु पूजा से किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गुरु के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए “गुरु मेरी पूजा”, “गुरु गोविंद” सहित अनेक भक्तिमय गुरु भजनों का सामूहिक गायन किया।

आयोजन के दौरान वेद मंत्रों का पावन उच्चारण, भजन, सत्संग एवं सामूहिक ध्यान का आयोजन किया गया। ध्यान के माध्यम से उपस्थित श्रद्धालुओं ने आंतरिक शांति, सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया।
राज्य मीडिया प्रभारी तृप्ता शर्मा ने बताया कि रुद्र पूजा भगवान शिव के रुद्र स्वरूप की वैदिक उपासना है। राम मंदिर में आयोजित इस विशेष पूजा में श्री रुद्रम सहित वैदिक मंत्रों का उच्चारण किया गया, जिससे सम्पूर्ण वातावरण अत्यंत शांत, पवित्र एवं सात्त्विक बन गया। सावन मास की पावनता को ध्यान में रखते हुए रुद्राभिषेक भी संपन्न कराया गया।

उन्होंने बताया कि इस विशेष अनुष्ठान के लिए आर्ट ऑफ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय, बेंगलुरु से स्वामी कृपानन्द, वैदिक विद्वान पंडित अरुण एवं पंडित निशांत विशेष रूप से शिमला पहुंचे। उनके सान्निध्य में वैदिक मंत्रोच्चारण, रुद्र पाठ एवं रुद्राभिषेक संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के प्रशिक्षक कमलेश चौहान, सोनिया मिनोचा, कांता शर्मा, यामिनी शर्मा, अमित शर्मा, पूजा शर्मा, रत्ना शर्मा सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। वहीं आयोजित सत्संग में भूपेंद्र शर्मा, नमिता सूद, सावित्री एवं सत्संग टीम ने “गुरु मेरी पूजा, गुरु गोविंदा”, “मेहरा वालया सांइयाँ वे रखी नजराँ दे कोल”, “शंभु शम्भू महादेवाय” तथा “शंकरा शिव शंकरा” जैसे मनमोहक भजनों की प्रस्तुति दी, जिन पर श्रद्धालु भक्तिभाव में सराबोर होकर झूम उठे।
आश्रम से आमंत्रित वैदिक विद्वानों पंडित अरुण एवं पंडित निशांत ने वैदिक मंत्रोच्चारण कराया। संपूर्ण अनुष्ठान स्वामी गुरुकृपा जी की प्रेरणा एवं अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना, गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता, सद्भाव एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का प्रसार करना रहा। अंत में सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, मानव कल्याण एवं आध्यात्मिक उन्नति के लिए सामूहिक प्रार्थना की।











