बेसहारा गौ वंश की समस्या पर चुनावी चुप्पी से लोगों में रोष: अनिल शर्मा

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आदर्श हिमाचल बयूऱो

 

शिमला । बेसहारा गोवंश की समस्या का समाधान करने संबंधी मुद्दे को पंचायती राज संस्थाओं का चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों विशेष कर ग्राम पंचायत प्रधान पद के ज्यादातर दावेदारों द्वारा अब तक अपने चुनावी घोषणा पत्रों व चुनाव प्रचार में शामिल नहीं किए जाने पर लोगों में भारी निराशा व रोष व्याप्त होने लगा है।

 

 

गौरतलब है कि हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर जगह-जगह बेसहारा गोवंश अक्सर लोगों की फसलों का नुकसान, भय, जाम व वाहन दुर्घटनाओं का कारण बनते रहते हैं। प्रदेश की सड़कों पर कई जगह भूख-प्यास से तड़पते व लंगड़ाते बेसहारा गोवंश काफी संख्या में देखे जा सकते हैं। हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम 1994 के सेक्शन (11-क) के कानूनी प्रावधानों के मुताबिक बेसहारा गोवंश की समस्या का समाधान करने की जिम्मेवारी सीधे रूप से ग्राम पंचायतों व पशुपालन विभाग के ऊपर है। यह चुनाव भले ही पार्टी सिंबल पर नहीं हो रहे हैं पर ग्राम पंचायत के प्रधान, उप-प्रधान, पंचायत समिति सदस्य व जिला परिषद के ज्यादातर उम्मीदवारों की कोई ना कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि तो अवश्य होती है। प्रदेश के मुख्य राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी व कांग्रेस ने जिला परिषद के लिए तो बाकायदा अपने समर्थित उम्मीदवार उतार रखे हैं।

 

 

सभी उम्मीदवार सड़क पानी बिजली स्वास्थ्य शिक्षा इत्यादि समस्याओं को लेकर तो लोगों से संवाद कर रहे हैं पर बेसहारा गोवंश जैसे ज्वलंत मुद्दे पर अब तक लगभग सभी ने चुप्पी साध रखी है। भारतीय गोवंश रक्षण संवर्धन परिषद हिमाचल ,विश्व हिंदू परिषद गौ रक्षा के प्रांत गौरक्षा सह प्रमुख अनिल हिन्दू का कहना है कि सभी उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के दौरान बेसहारा गोवंश की समस्या के समाधान हेतु भी जन-जागरण अभियान चलाना चाहिए। बेसहारा गोवंश की समस्या इस समय प्रदेश में अत्यंत विकराल रूप धारण कर चुकी है अतः स्थानीय लोगों ने प्रदेश के प्रमुख राजनीतिक दलों व उनके द्वारा समर्थित उम्मीदवारों से चुनाव प्रचार के दौरान इस समस्या के उन्मूलन अपनी-अपनी नीतियों व सोच को स्पष्ट करने की मांग की है।