कंपनी के साथ मिलीभगत रखने वाले अधिकारी तत्काल इस्तीफा दें-संदीप कुमार

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

दाडलाघाट/ शिमला । अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी की अनियंत्रित, अवैज्ञानिक एवं जानलेवा ब्लास्टिंग के विरोध में सीमेंट उद्योग व माइनिंग प्रभावित मंच  के नेतृत्व में चल रहा धरना 40वें दिन में प्रवेश कर गया। क्रमिक भूख हड़ताल एवं धरना स्थल पर प्रभावित परिवारों की उपस्थिति निरंतर बनी हुई है। मंच की मांगें पूर्ववत हैं।इस सीरीज में अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी द्वारा रात के समय की जा रही ब्लास्टिंग, अवैध माइनिंग, तथा प्रशासनिक अधिकारियों, कंपनी को बचाने वाले दलालों एवं राजनीतिक संरक्षण की विस्तृत सच्चाई वीडियो साक्ष्यों के साथ जनता के सामने लाई जाएगी।

 

Officials in collusion with the company should resign immediately, says Sandeep Kumar.
Officials in collusion with the company should resign immediately, says Sandeep Kumar.

संदीप ठाकुर ने कहा कि मंच की टीम द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन के दौरान कंपनी के कई ऐसे काले कारनामे कैमरे में रिकॉर्ड किए गए हैं, जिन्हें अब चरणबद्ध तरीके से सार्वजनिक किया जाएगा।
इन वीडियो के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सरकार, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों एवं प्रशासनिक अधिकारियों और अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी के बीच की मिलीभगत को देश-दुनिया के सामने उजागर किया जाएगा।

 

उन्होंने बताया कि एसडीएम अर्की द्वारा FIR के गंभीर मामले को बैठकों में बदलने और लगातार टालने की नीति से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

मंच द्वारा पहले ही बैठकों के बहिष्कार और FIR दर्ज करने की मांग को लेकर जो रुख अपनाया गया था, अब जनता उसका खुलकर समर्थन कर रही है। लोगों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया कंपनी को बचाने की एक सुनियोजित रणनीति है, जिसे अब आम जनता समझ चुकी है।

 

मंच ने आरोप लगाया कि अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी एक बार फिर धड़ाधड़ ब्लास्टिंग कर रही है, जिससे घमारों गांव एवं धार–संघोई क्षेत्र के ग्रामवासियों की जान पर गंभीर खतरा बना हुआ है। इसके बावजूद न तो एसडीएम कार्यालय द्वारा कोई बैठक आयोजित की जा रही है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की जा रही है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक व्यवस्था कंपनी को संरक्षण देने में प्रत्यक्ष रूप से शामिल है।

प्रभावित परिवारों एवं मंच की स्पष्ट मांग है कि—
कंपनी के साथ मिलीभगत रखने वाले अधिकारी तत्काल इस्तीफा दें,
अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी के सभी बोर्ड ऑफ मेंबर्स के खिलाफ FIR दर्ज कर उन्हें बर्खास्त किया जाए,
घमारों गांव प्रकरण में तुरंत FIR दर्ज की जाए।

मंच ने स्पष्ट किया कि जब तक उपरोक्त मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक क्रमिक भूख हड़ताल एवं धरना अनिश्चितकाल तक जारी रहेगा। साथ ही, मंच यह भी स्पष्ट करता है कि स्टिंग ऑपरेशन के तहत रोज़ शाम एक वीडियो जारी कर अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत को लगातार एक्सपोज़ किया जाएगा।

एचआरटीसी बेड़े में शामिल 297 इलेक्ट्रिक बसें, सोलन-शिमला मार्ग पर होगा ट्रायल’

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

ऊना,। प्रदेश सरकार हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को ई-मोबिलिटी की दिशा में सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में एचआरटीसी बेड़े में 297 नई इलेक्ट्रिक बसों को शामिल करके सरकार द्वारा निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इस श्रृंखला में पहली प्रोटोटाइप इलेक्ट्रिक बस हैदराबाद से सोलन पहुँच चुकी है। आगामी दो दिनों में सोलन-शिमला मार्ग पर इस ई-बस का ट्रायल किया जाएगा। इसके उपरांत प्रदेश के अन्य मार्गों तथा एचआरटीसी के विभिन्न डिपुओं में भी चरणबद्ध तरीके से इलेक्ट्रिक बसों के ट्रायल शुरू होंगे।

 

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि राज्य सरकार हरित एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से न केवल वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी, बल्कि डीज़ल पर निर्भरता घटेगी और एचआरटीसी की परिचालन लागत में भी कमी आएगी, जिससे निगम की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी। साथ ही यह पहल यात्रियों को सुरक्षित, आरामदायक, आधुनिक और विश्वसनीय परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

 

उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश भर में चार्जिंग इंफ़्रास्ट्रक्चर भी विकसित किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने बताया कि ये ई-बसें हिमाचल प्रदेश को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ परिवहन के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
297 electric buses added to HRTC fleet, trial to be conducted on Solan-Shimla route

धार्मिक तीर्थ से साहसिक गंतव्य बनता तत्तापानी

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   शिमला । सतलुज नदी के किनारे बसा हिमाचल प्रदेश का तत्त्तापानी लंबे समय से एक आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में जाना जाता है। अपने प्राकृतिक गर्म सल्फर स्प्रिंग्स के लिए प्रसिद्ध और महर्षि जमदग्नि की पूजा भूमि के रूप में पूजनीय, तत्तापानी ने पीड़ि‌यों से धार्मिक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित किया है। हालांकि, पिछले एक दशक में, तत्तापानी में एक ग्रलेखनीय परिवर्तन आया है। यह आध्यात्मिक गंतव्य अपनी गहरी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए साहसिक जल और एयरी स्पोर्ट्स, स्या और कल्याण के लिए एक वैश्चिक गंतव्य के रूप में उभर रहा है। अपने प्राकृतिक गर्म सल्फर के झरनों के रूप में प्रसिद्ध तत्तापानी सदियों से धार्मिक पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता रहा है। हालांकि, पिछले एक दशक में इस छोटे से गांव ने अद्भुत परिवर्तन देखा है। इस परिवर्तन के पीछे हैं की प्रेिम रैना, जो एक उत्साही आतिथ्य उद्यमी और दूरदर्शी नेतृत्व में हुआ है। उनके नेतृत्व में तत्तापानी अब वैश्विक स्तर पर एक उच्च गुणवत्ता वाले साहसिक जल और एपरो स्पोट्र्स, स्था और वेलनेस हब के रूप में उभर रहा है, जबकि अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को भी बनाए रख रहा है। तत्तापानी का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत गहरा है। इसके प्राकृतिक झरने जो कि पृथ्वी के गर्भ से निकलते हैं, चिकित्सीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है।

 

 

ये झरने, जो विभिन्न शारीरिक बीमारियों जैसे जोड़ों के दर्द और त्वचा रोगों को ठीक करने में सहायक माने जाते हैं, लंबे समय से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं। वहां आने वाले श्रद्धालु इन जल स्रोतों में छान करके अपने शरीर और आल्या की शुद्धि का अनुभव करते हैं। महर्षि जमदग्नि के पूजा स्थल के रूप में प्रसिद्ध, तत्तापानी का धार्मिक महत्व प्रदेश के प्राचीन धार्मिक इतिहास में निहित है। महां के विभिन मंदिर और धार्मिक स्थत तीर्थयात्रियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। विशेष रूप से मकर संक्रांति के दौरान, तत्तापानी में धार्मिक गतिविधियों का महत्व बढ़ जाता है, जब हजारों बद्धालु यहां के पवित्र जल में खान करने आते हैं। तत्तापानी के विकास की इस अद्भुत यात्रा में प्रेम रैना का योगदान उल्लेखनीय है। एक आतिथ्य क्षेत्र में गहरी समझ और समर्पण के साथ, रैना ने तत्तापानी के विकास को नई ऊंचाइयों तक

डा. अमरीक सिंह ठाकुर स्वतंत्र लेखक

पहुंचाया है। उन्होंने यह पहचान लिया था कि तत्तापानी की प्राकृतिक संपदा, नदी का विस्तार और शांत वातावरण धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ साहसिक जल और वेलनेस पर्यटन के लिए भी एक आदर्श गंतव्य बन सकता है। उनके नेतृत्व में, तत्तापानी एक बहुआयामी पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें धार्मिक, साहसिक और स्वास्थ्य-संवर्धन के अनुभव शामिल हैं। रैना के प्रयासों ने तत्तापानी के पारंपरिक धार्मिक तीर्थ स्थल के स्वरूप को परिवर्तित कर एक वैश्विक एडवेंचर और वेलनेस हब के रूप में स्थान दिलाया है। उनके नेतृत्व में न केवल तत्तापानी में नए पर्यटकों की बाड़ आई है, बरिया स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी एक नया प्रोत्साहन मिला है, जिससे रोजगार के नए अवसर उत्पन हुए हैं। ततापानी का भीगोलिक स्थान और नदी की उपस्थिति इसे जल-आधारित एडवेंचर खेलों के लिए एक आदर्श स्थल बनाती है। रैना और स्थानीय पर्यटन विकासकर्ताओं ने इस प्राकृतिक संपदा का भरपुर उपयोग करते हुए विभिन्न जल क्रीड़ाओं को गतिविधियों का आयोजन किया है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। तत्तापानी में प्रमुख एडवेंचर गतिविधियों में नदी की तेज धाराएं रोमांचक राफ्टिंग का अनुभव प्रदान करती हैं, और यह गतिविधि साहसी पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गई है। जी पर्यटक थोड़ा अधिक शांत अनुभव चाहते हैं, उनके लिए कयाकिंग और बोटिंग एक आदर्श विकल्प हैं। ये गतिविधियां पर्यटकों की नदी के शांत पानी में रोमांच का अनुभव कराती हैं। आसपास की हरी-भरी

पहाड़ियां और ऊंची चोटियां पैराग्लाइडिंग

एडवेंचर खेलों और वेलनेस पर्यटन के विकास ने यहां के स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर भी प्रदान किए हैं, आतिथ्य, गाइडिंग, एडवेंचर खेल प्रशिक्षण में….

और पैरासेलिंग के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। हवा में उड़ते हुए घाटी का विहंगम दृश्य रोमांच प्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव है। नदी बेसिन के सलापड़ से लेकर तत्तापानी तक का खिंचाव स्पीड बोटिंग, पार्निंग, बॉडी सर्किंग, और केबल स्कीइंग जैसी जल क्रीड़ाओं के लिए आदर्श है। यहां मोटरबाइक वाटर रेस और वेकबोर्डिंग जैसी नई गतिविधियों की संभावना भी तलाशी जा रही है। इसके अलावा यावा, सुत्री और तनापानी के बीच का हिस्सा राफ्टिंग के लिए अनुकूल है, जो पर्यटकों को चुनौतीपूर्ण धाराओं और नदी के सुंदर दृश्यों के साथ एक रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। एडवेंचर खेलों ने जहां तत्तापानी में रोमांच को बढ़ावा दिया है, वहीं यहां का केलनेस पर्यटन भी अपनी जड़ों को नहीं भूला है। तत्तापानी के प्राकृतिक गर्म जल के झरने, जी कभी तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते थे, अब अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के बीच स्वास्थ्य और शांति की तलाश में लोकप्रिय हो रहे हैं। इन झरनों के चिकित्सीय गुण, जो शरीर को आराम और रोगों से मुक्ति दिलाते हैं, ततापानी को एक अद्वितीय वेलनेस गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहे हैं। इसके अलावा, तनापानी में अब विभिन स्था उपचार, योग शिविर और आयुर्वेदिक चिकित्सा उपलब्ध हैं, जो पारंपरिक भारतीय विकित्सा पद्धतियों को आधुनिक वेलनेस तकनीकों के साथ जोड़ते हैं।

तत्तापानी का यह संपूर्ण स्वास्थ्य मांडल इसे उन पर्यटकों के लिए आदर्श मंतव्य बनाता है जो न केवल शरीरिक स्वास्थ्य वरिक मानसिक और आत्मिक शांति की भी तलाश कर रहे हैं। तत्तापानी का यह परिवर्तन स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। जैसे-जैसे यहां एडवेंचर और वेलनेस पर्यटन का विस्तार हो रहा है, स्थानीय व्यवसाय भी फल-फूल रहे है। होटल, रिजॉर्ट रेस्तरां और छोटे स्तर के सेवा प्रदाता सभी इस पर्यटन की बढ़ती मांग से लाभान्वित हो रहे हैं। एडवेंचर खेलों और वेलनेस पर्यटन के विकास ने यहां के स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार के अवसर भी प्रदान किए हैं, विशेष रूप से आतिथ्य, गाइडिंग और एडवेंचर खेल प्रशिक्षण के क्षेत्रों में। तत्तापानी की तेजी से बढ़ती लोकप्रियता के बावजूद, यहां कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान आवश्यक है। इस क्षेत्र का बुनियादी ढांचा, भले ही धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, फिर भी मजबूत करना चाहिए।

एसजेवीएन ने सुख आश्रय कोष को10 लाख की वित्तीय सहायता दी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । भूपेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक,एसजेवीएन ने अवगत कराया कि कारपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के अंतर्गत एसजेवीएन ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष को ₹10 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

यह चेक हिमाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष  कुलदीप सिंह पठानिया और प्रधान मुख्य वन संरक्षक  संजय सूद की उपस्थिति में,  विकास मारवाह, परियोजना प्रमुख, रामपुर जल विद्युत स्टेशन तथा  विवेक शर्मा, परियोजना प्रमुख, लूहरी जल विद्युत परियोजना (चरण-I) द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए श्री अजय कुमार शर्मा, निदेशक (कार्मिक), एसजेवीएन एवं अध्यक्ष, एसजेवीएन फाउंडेशन ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना राज्य भर में अनाथ, बेसहारा एवं समर्पित बच्चों की समग्र देखभाल, संरक्षण तथा दीर्घकालिक सहायता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

एसजेवीएन फाउंडेशन द्वारा प्रदान की गई यह सहायता योजना से लाभार्थी बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण, आवास, कौशल विकास एवं समग्र पुनर्वास से संबंधित भावी आवश्यकताओं को पूरा करने में योगदान देगी।

एसजेवीएन फाउंडेशन, एसजेवीएन का पंजीकृत ट्रस्ट है, जो कंपनी की सीएसआर एवं सततशील पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन एवं पारदर्शी निगरानी को सुनिश्चित करता है। अपनी सीएसआर रूपरेखा के अंतर्गत, एसजेवीएन स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, शिक्षा एवं कौशल विकास, संरचना विकास, आपदा सहायता, सतत विकास तथा संस्कृति एवं खेलों के संवर्धन एवं संरक्षण से संबंधित विभिन्न विकासात्मक गतिविधियों के लिए प्रतिबद्ध है।

दैट्स यू’ अतुलनीय अनुभव देने हेतु महत्त्वाकांक्षी पहल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने  हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग की पहल ‘दैट्स यू’ अभियान का शुभारम्भ किया। यह अभियान राज्य की पर्यटन नीति में महत्त्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है, जिसके तहत पारम्परिक दर्शनीय स्थलों तक सीमित पर्यटन से आगे बढ़ते हुए स्लो टूरिज्म की अवधारणा को प्रोत्साहित किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान विशेष रूप से राज्य के प्रवेश द्वारों, हवाई अड्डों तथा हेरिटेज़ रेेलवे स्टेशनों पर आने वाले पर्यटकों का स्वागत करने के लिए तैयार किया गया है ताकि यात्रियों और हिमालय प्रकृति के बीच एक गहरा और व्यक्तिगत जुड़ाव स्थापित किया जा सके।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्लो टूरिज्म की ओर यह पहल राज्य की पर्यावरणीय सेहत के प्रति प्रतिबद्धता भी दर्शाती है। कम लोकप्रिय गांवों में लम्बे प्रवास और स्थानीय संस्कृति में सहभागिता को बढ़ावा देकर यह अभियान स्थानीय अर्थ व्यवस्था को सशक्त और पर्यावरण को बढ़ावा देने सहित लोकप्रिय पर्यटन केन्द्रों पर दवाब कम कर ग्रामीण क्षेत्रों की सुन्दरता को सामने लाने पर केन्द्रित है।

 

निदेशक पर्यटन विवेक भाटिया ने अवगत करवाया कि यह अभियान चण्ड़ीगढ़-शिमला प्रवेश मार्ग, गग्गल एवं भुंतर हवाई अड्डों तथा ऐतिहासिक कालका-शिमला टॉय टेन मार्ग सहित प्रमुख आगमन स्थलों पर चलाया जाएगा।

आगामी सेब सीजन के सफल क्रियान्वयन के लिए स्थानीय स्तर पर करें समन्वय स्थापित – उपायुक्त

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आदर्श हिमाचल बयूरों 
शिमला  आगामी सेब सीजन के सफल क्रियान्वयन के लिए सभी उपमंडल दण्डाधिकारी स्थानीय स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित कर कार्य करें।
उपायुक्त आज यहां वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के माध्यम से जिला के सभी उपमंडल दण्डाधिकारियों, खण्ड विकास अधिकारियों, एनएचएआई, लोक निर्माण विभाग, बागवानी विभाग, एचपीएमसी आदि विभागों के अधिकारियों के साथ सेब सीजन को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इस बैठक का मकसद गत सेब सीजन में आई समस्याओं को ध्यान में रख कर आगामी सेब सीजन की तैयारी करना है ताकि उस समय किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।
बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025 के दौरान कुल 1,36,60,824 पेटियां सेब की पैदावार हुई। इसके अतिरिक्त, 92,539 मीट्रिक टन सेब एमआईएस के तहत एमएसपी पर ख़रीदा गया। यह भी बताया गया कि सेब का आकार छोटा रहने और बरसात के मौसम में हुए नुकसान की वजह से ज्यादा सेब खरीद नहीं हो पाई।
उपायुक्त ने कहा कि गत वर्ष काफी मात्रा में सेब एमएसपी पर ख़रीदा गया है और काफी मात्रा में सेब न उठने के कारण करोड़ों रुपए का सेब ख़राब भी हुआ था जोकि बागवानी के लिए अच्छी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि आगामी सेब सीजन में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए एचपीएमसी और हिमफैड से समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित किया जाएगा की बागवानों को नुकसान न हो। गत सेब सीजन के दौरान एचपीएमसी ने प्रदेश सरकार को लगभग 76 करोड़ रुपए की राशि का दावा प्रस्तुत किया था जबकि इस सेब सीजन की लगभग 122 करोड़ रुपए की राशि सरकार से प्राप्त होनी है।
ग्रेडिंग की समस्या से यूनिवर्सल कार्टन में भरा जा रहा ज्यादा सेब
बैठक में बताया गया कि प्रदेश में सेब के लिए यूनिवर्सल कार्टन प्रणाली लागू हो चुकी है परन्तु ग्रेडिंग सेंटर की जांच न होने से यूनिवर्सल कार्टन में भी 20 किलोग्राम से ज्यादा सेब भरा जा रहा है। कई जगह यूनिवर्सल कार्टन में 22 से 27 किलोग्राम तक सेब भरा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बागवानों द्वारा सेब के बगीचों में अवशेष जलाए जा रहे हैं जिससे जंगलों में आग लगने की घटनाओं के साथ-साथ वायु प्रदूषण भी फैल रहा है। इस दिशा में बागवानों को जागरूक किया जाना आवश्यक है। यह भी बताया गया कि एचपीएमसी द्वारा सेब का वजन करने के लिए जिन लोगों को कांटे जारी किये थे, उन्होंने कांटे आगे किसी और को सबलेट कर दिए हैं, जिन्हें इस काम की पूरी जानकारी भी नहीं है।
सड़क और पुल को प्राथमिकता में रखें सभी एसडीएम 
उन्होंने सभी उपमंडल दण्डाधिकारियों को सड़कों की स्थिति पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए ताकि सेब यातायात किसी भी सूरत में प्रभावित न हो। उन्होंने सभी उपमंडल दण्डाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में सड़कों और पुलों को प्राथमिकता में रखने के निर्देश दिए खासकर उन मार्गों को जहाँ से अधिकतम सेब यातायात होता है। उन्होंने सभी उपमंडल दण्डाधिकारियों को आगामी सेब सीजन से पूर्व स्थानीय स्तर पर बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए ताकि सेब सीजन में आने वाली परेशानियों से निपटने के लिए सभी तैयार रहे और सबकी जान की भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
अनुग्रह राशि का जल्द हो भुगतान
उपायुक्त ने उपमंडल दण्डाधिकारी कोटखाई को पिछले सेब सीजन के दौरान पिकअप दुर्घटना में मारे गए मजदूरों के परिजनों को तुरंत अनुग्रह राशि जारी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में सेब कारोबार बाहर से आये हुए मजदूरों के सहयोग से ही चलता है इसलिए उनकी सुरक्षा भी जिला प्रशासन की जिम्मेवारी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी दुर्घटना घटित होती है तो उस स्थिति में अनुग्रह राशि जल्द से जल्द पीड़ित परिवार को मुहैया करवाई जाए।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त दिव्यांशु सिंगल, अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी कानून एवं व्यवस्था पंकज शर्मा, उपमंडल दण्डाधिकारी शिमला ग्रामीण मंजीत शर्मा, उपमंडल दण्डाधिकारी कुपवी अमन कुमार राणा, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी विश्व मोहन सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीनियर रेजिडेंटशिप पॉलिसी बनाई जाएगी: मुख्यमंत्री

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने  स्वास्थ्य शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीनियर रेजिडेंटशिप पॉलिसी बनाई जाएगी। इस पॉलिसी के तहत सीनियर रेजिडेंट के पदों का युक्तिकरण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीनियर रेजिडेंटशिप में जीडीओ का कोटा 66 प्रतिशत किया जाएगा। अभी इसका अनुपात जीडीओ व सीधी भर्ती द्वारा पचास-पचास प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय चम्बा, नाहन, हमीरपुर व नेरचौक में नए विषयों में एमडी व एमएस करवाई जाएगी। इससे
स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत संरचना और सुदृढ़ होगी।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जो डीएम और एमसीएच सुपरस्पेशलिस्ट फील्ड में हैं उन्हें चिकित्सा महाविद्यालय में नियुक्ति प्रदान की जाएगी। सभी चिकित्सा महाविद्यालयों में उच्च तकनीकयुक्त स्टेट-ऑफ-द-आर्ट आईसीयू स्थापित किये जाएंगे।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में 1000 रोगी मित्र नियुक्त किये जाएंगे, जिसमें से 500 चिकित्सा महाविद्यालयों और 500 अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किये जाएंगे। इसके लिए प्रथम चरण में पायलट प्रोजेक्ट हमीरपुर जिला से शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि रोगी मित्र की कार्यप्रणाली के लिए विभाग द्वारा मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की गई है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत प्रथम चरण में रोगी मित्र प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात किये जाएंगे। उन्होंने कहा कि चमियाणा अस्पताल, चिकित्सा महाविद्यालय टांडा व आईजीएमसी शिमला में भी पायलट आधार पर 70 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों की मदद के लिए रोगी मित्र तैनात किये जाएंगे। इन संस्थानों में रोगी मित्र कांऊटर भी स्थापित किये जाएंगे।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि चिकित्सा महाविद्यालय की विभिन्न ओपीडी में मरीजों से सम्बन्धित विभिन्न डेटा दर्ज करने के लिए डाटा एंट्री ऑपरेटर भी तैनात किये जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा को सशक्त करने के लिए नवोन्मेषी उपायों के साथ-साथ दीर्घकालिक योजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं ताकि इस क्षेत्र में प्रदेश, देश का अग्रणी राज्य बने।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकर (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, सचिव स्वास्थ्य प्रियंका बासु इंगटी, विशेष सचिव स्वास्थ्य अश्वनी शर्मा एवं जितेन्द्र सांजटा, निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा डॉ. राकेश शर्मा, निदेशक स्वास्थ्य गोपाल बेरी और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

वीबी–जी राम जी योजना ग्रामीण भारत के लिए नया युग, रोजगार को विकास से जोड़ने का ऐतिहासिक कदम: डॉ. राजीव बिंदल

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने आज आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशव्यापी स्तर पर एक अत्यंत दूरदर्शी और समयानुकूल योजना का शुभारंभ किया है। हाल ही में संसद के शीतकालीन सत्र में पारित विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) – वीबी–जी राम जी विधेयक, 2025 ग्रामीण भारत के लिए एक नया आयाम स्थापित करने जा रहा है। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजगार को ग्रामीण विकास से जोड़ने की एक ठोस और परिणामोन्मुखी व्यवस्था है।

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि भारत की आज़ादी के बाद समय–समय पर विभिन्न सरकारों ने ग्रामीण रोजगार की दिशा में योजनाएं चलाईं। वर्ष 1960–61 में रूरल मैनपावर प्रोग्राम से लेकर 2005 में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) तक अनेक योजनाएं लागू की गईं। मनरेगा वर्ष 2005 से 2025 तक चली, लेकिन बदलती सामाजिक–आर्थिक परिस्थितियों, अनुभवों और जमीनी कमियों को देखते हुए एक नई, अधिक प्रभावी और विकास–आधारित योजना की आवश्यकता महसूस हुई, जिसके परिणामस्वरूप वीबी–जी राम जी अधिनियम अस्तित्व में आया।

 

प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मनरेगा में 100 दिन की रोजगार गारंटी थी, लेकिन वास्तविकता यह रही कि औसतन केवल 50.4 दिन का ही रोजगार सृजन हो पाया। इसके विपरीत वीबी–जी राम जी योजना में 125 दिन की कानूनी गारंटी दी गई है, जो विकास परियोजनाओं से जुड़ी होगी। इस योजना के अंतर्गत ग्राम सभा स्तर पर गांव का विकास प्लान तैयार होगा, जो ब्लॉक और जिला स्तर से होते हुए पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जुड़ेगा। उसी विकास प्लान के क्रियान्वयन के लिए रोजगार सृजित किया जाएगा, जिससे गांव का समग्र विकास सुनिश्चित होगा।

 

डॉ. बिंदल ने बताया कि इस योजना का एक बड़ा लाभ यह है कि यह पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मल्टी–लेवल मॉनिटरिंग, छह माह में समीक्षा और टाइम–बाउंड पेमेंट का स्पष्ट प्रावधान इसमें शामिल है। यदि समय पर रोजगार या भुगतान नहीं होता है, तो संबंधित व्यक्ति को मुआवजे का भी प्रावधान किया गया है, जिससे जवाबदेही तय होगी।

 

उन्होंने कहा कि फंडिंग पैटर्न को लेकर भी कांग्रेस भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है, जबकि सच्चाई यह है कि हिमालयी राज्यों जैसे हिमाचल प्रदेश के लिए केंद्र और राज्य का अनुपात 90:10 रखा गया है, जो प्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी है। अन्य राज्यों में यह अनुपात 60:40 है। केंद्र सरकार ने राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की है।

 

डॉ. बिंदल ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने वर्ष 2006 से 2014 तक मनरेगा पर ₹2.13 लाख करोड़ खर्च किए, जबकि एनडीए सरकार ने 2014 से 2025 तक ₹8.53 लाख करोड़ से अधिक खर्च कर दिए। रोजगार सृजन के मामले में भी यूपीए सरकार के दौरान 1660 मिलियन मंडेज, जबकि मोदी सरकार के दौरान 3210 मिलियन मंडेज सृजित हुए। पूर्ण कार्यों की संख्या यूपीए काल में 153 लाख, जबकि एनडीए काल में 862 लाख रही, जो भाजपा सरकार की गंभीरता को दर्शाता है।

 

हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए डॉ. बिंदल ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान प्रदेश में 16.52 लाख मंडेज, जबकि मोदी सरकार के समय 32.6 लाख मंडेज सृजित हुए, यानी दोगुना रोजगार। वीबी–जी राम जी योजना के तहत लगभग ₹1.5 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो पहले की तुलना में कहीं अधिक है।
उन्होंने कहा कि यह योजना चार प्रमुख क्षेत्रों—ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण आजीविका—पर केंद्रित है। प्रशासनिक व्यय को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत किया गया है, ताकि योजना का बेहतर क्रियान्वयन, ऑडिट और निगरानी हो सके।

 

डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि कांग्रेस केवल नाम बदलने का मुद्दा उठाकर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि इतिहास गवाह है कि कांग्रेस सरकारों ने स्वयं समय–समय पर योजनाओं के नाम बदले हैं। भाजपा ने कभी इसका विरोध नहीं किया। असली मुद्दा नाम नहीं, बल्कि परिणाम और विकास है।

 

अंत में उन्होंने कहा कि वीबी–जी राम जी योजना राजनीति से प्रेरित नहीं, बल्कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई एक दूरदर्शी योजना है। यदि प्रदेश सरकार अपना 10 प्रतिशत अंशदान समय पर नहीं देती, तो यह उसकी ग्रामीण और गरीब विरोधी मानसिकता को उजागर करेगा। भाजपा इस योजना को घर–घर तक पहुंचाने का कार्य करेगी और ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ खड़ी रहेगी।

जयराम ठाकुर के 61वें जन्मदिन पर प्रदेशभर से उमड़ा जन सैलाब बधाईयों का लगा तांता।

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । प्रदेश के एवं पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के 61वें जन्मदिन के अवसर पर पूरे प्रदेश में उत्साह, स्नेह और शुभकामनाओं का अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला। जन्मदिन पर प्रदेशभर से लोगों द्वारा बधाई देने का तांता लगा रहा। लोगों ने उन्हें जी भरकर दुआ दी और भरपूर प्रेम और  भावनाएं प्रकट की।  इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पूर्व विधायकों, पूर्व मंत्रियों, वर्तमान जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं, केंद्रीय मंत्रियों एवं अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने भी  जयराम ठाकुर को उनके जन्मदिन पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

हजारों की संख्या में लोग उनके आधिकारिक आवास पर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देते नजर आए। इस अवसर पर प्रदेश के विभिन्न मंदिरों एवं शक्तिपीठों में उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन के लिए उनके समर्थकों एवं प्रशंसकों द्वारा विशेष पूजा-अर्चना करवाई गई।

 

जयराम ठाकुर ने अपने जन्मदिन की शुरुआत भी  पूजा-अर्चना के उपरांत बजरंगबली के प्रसिद्ध जाखू मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। जन्मदिन के उपलक्ष्य में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ, जहां विभिन्न कलाकारों द्वारा  प्रस्तुतियां दी गईं। पारंपरिक नाटियों और लोकगीतों पर आगंतुकों ने उत्साह के साथ सहभागिता की और पूरा वातावरण उल्लास से भर उठा।

इस अवसर पर  जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेशवासियों से मिल रहे अपार प्रेम और शुभकामनाओं से वे अत्यंत अभिभूत हैं। उन्होंने सभी का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनता का यह विश्वास और स्नेह ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि वे अपनी अंतिम सांस तक प्रदेश और देश की सेवा, तथा आमजन के हितों के लिए समर्पित रहेंगे।

इस मौके पर  हिमाचल सरकार के मंत्री जगत नेगी, विधायक सुखराम चौधरी, बलबीर वर्मा, विनोद कुमार,  दीपराज, लोकेंद्र कुमार, रीना कश्यप, पूर्ण चंद्र ठाकुर, इंद्र सिंह गांधी, जनकराज, दलीप ठाकुर, आशीष शर्मा और पूर्व विधायक सुरेश भारद्वाज, रवि ठाकुर, नालागढ़ के पूर्व विधायक केएल ठाकुर, लखविंदर राणा,परमजीत पम्मी, अर्जुन ठाकुर, बलदेव तोमर, हीरालाल  समेत भारतीय जनता पार्टी के विभिन्न पदाधिकारी और कार्यकर्ता आमजन भारी संख्या में उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री ने सहारा एवं हिमकेयर योजना की समीक्षा की स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जाएगा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने यहां मुख्यमंत्री सहारा योजना और हिमकेयर योजना की विस्तृत समीक्षा की।
इस अवसर पर उन्होंने सहारा योजना का लोकल ऑडिट करने के निर्देश दिए ताकि पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सहारा योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के सत्यापन के लिए जिला स्तर पर तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया जाएगा।

 

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इस क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित किया जा रहा है। उन्होंने सहारा योजना के लाभार्थियों को हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने के निर्देश भी दिये। उन्होंने हिम केयर योजना के तहत विभिन्न मापदंडों और बजट के बारे आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि हिम केयर योजना के अन्तर्गत पंजीकरण के समय लाभार्थियों का सत्यापन फेस रिकॉगनेशन आधार पर किया जाएगा, जिसके लिए स्वास्थ्य और डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

 

मुख्यमंत्री ने कहा हिम केयर योजना के डेटा का विश्लेषण कर प्रदेश में विभिन्न बीमारियों की स्थिति जानने और स्वास्थ्य क्षेत्र में नीति निर्माण के लिए किया जाएगा। उन्होंने हिमकेयर योजना के तहत निजी अस्पतालों की देय राशि का भुगतान करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि हिम केयर योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्राइवेट वार्ड में इलाज की अनुमति प्रदान की जाएगी।

 

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्वस्थ हिमाचल की परिकल्पना को महत्त्व देते हुए नागरिकों को उनके घर के समीप गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए रोबोटिक सर्जरी, स्टेट कैंसर इंस्टीच्यूट सहित पैट स्कैन, स्पैक्ट-स्कैन जैसी आधुनिक मशीनों की स्थापना की गई है। उन्होंने कहा कि राज्य में 70 आदर्श स्वास्थ्य संस्थान, रोगी मित्र योजना, वैलनेस सेंटर और आई.जी.एम.सी शिमला में ट्रामा सेंटर जैसी योजनाएं स्वास्थ्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकर (नवीनीकरण, डिजिटल प्रौद्योगिकी एवं गवर्नेंस) गोकुल बुटेल, अतिरिक्त मुख्य सचिव के.के. पंत, सचिव स्वास्थ्य प्रियंका बासु इंग्टी और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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