Home Blog Page 4

तीन वर्षों में सामजिक सुरक्षा पेंशन के 99,799 मामले स्वीकृत: मुख्यमंत्री

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

,शिमला । मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने  यहां सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तहत कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख सम्मान निधि योजना के तहत जनजातीय क्षेत्र पांगी, लाहौल-स्पीति, डोडरा क्वार तथा कुपवी में पात्र लाभार्थियों को बकाया निधि का शीघ्र भुगतान करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा राज्य में 8,41,917 लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्रदान की जा रही है। इसके तहत 1,04,740 लोगों को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, 5,04,253 लोगों को वृद्धावस्था पेंशन, 25,414 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन, 1,26,808 को विधवा, परित्यक्त व एकल नारी पेंशन, 1,340 को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन और 78,291 को दिव्यांगता राहत भत्ता राशि प्रदान की जा रहा है।

 

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा तीन वर्षों के दौरान सामाजिक सुरक्षा पेंशन के 99,799 नए मामले स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान 41,799, वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 41,012 और वित्त वर्ष 2025-26 में अभी तक 16,988 नए मामले स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 0 से 18 वर्ष आयु के 20,735 लाभार्थियों तथा 18 से 27 वर्ष आयु के 853 लाभार्थियों को सहायता राशि प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत विभिन्न लाभार्थियों को 1,000 रुपये, 2,500 रुपये तथा 4,000 रुपये मासिक की दर से सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

 

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के तहत पात्र लाभार्थियों को पेंशन व सहायता राशि प्रदान करने के लिए नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सॉफटवेयर का इस्तेमाल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि नए पेंशनरों के चयन व पेंशन वितरण का कार्य समयबद्ध सुनिश्चित हो सके।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह, अतिरिक्त मुख्य सचिव श्याम भगत नेगी, मुख्यमंत्री के सचिव राकेश कंवर, निदेशक महिला एवं बाल विकास डॉ. पंकज ललित और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

बीपीएल पर कैंची चलाकर लाखों गरीब परिवारों का गला घोंट रही सुखू सरकार: डॉ. राजीव बिंदल

0

 

आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । डॉ. राजीव बिंदल, प्रदेश अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखू, मंत्रिगण, कांग्रेस विधायकों एवं नेताओं पर अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में लाखों बीपीएल परिवारों का गला घोंटने का काम कांग्रेस सरकार द्वारा सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है। बीपीएल चयन के लिए नए नियम बनाकर, बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के, जिलाधीशों के माध्यम से आनन-फानन में बीपीएल सूचियों से नाम काटे जा रहे हैं।

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि कुछ जिलों में कल जो बीपीएल सूचियां प्रकाशित हुई हैं, उनमें लगभग 90 प्रतिशत तक पुराने बीपीएल परिवारों के नाम गायब कर दिए गए हैं, जो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि गरीबों को योजनाओं से बाहर करने की साजिश है।
प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस पूरी चयन प्रक्रिया में पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों—वार्ड पंच, प्रधान, उप-प्रधान, बीडीसी सदस्य, जिला परिषद सदस्य—किसी को भी विश्वास में नहीं लिया गया, न कोई बैठक बुलाई गई और न ही जमीनी स्तर की सच्चाई जानी गई। उन्होंने कहा कि यह काम सीधे-सीधे कांग्रेस के नेताओं, मंत्रियों, विधायकों और मुख्यमंत्री के दबाव में प्रशासन से करवाया गया है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था का खुला अपमान है।

 

डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि तथ्यों के साथ प्रभावित गरीब परिवारों के नाम भी सार्वजनिक किए हैं। नाहन विकास खंड सहित विभिन्न पंचायतों में जिन वास्तविक गरीब परिवारों के नाम बीपीएल सूची से काटे गए हैं, उनमें आशा देवी (पत्नी जिया राम), सद्दीक (पुत्र नूर मुहम्मद), पार्वती देवी (पत्नी स्व. महिपाल), रजनी (पत्नी स्व. राजवीर), अनीता देवी (पत्नी स्व. मान सिंह), निश्चा देवी (पत्नी स्व. सलिन्द्र सिंह), जतीन चौहान (पत्नी स्व. निर्मल सिंह), नीलम ठाकुर (पत्नी स्व. सुरजन सिंह), अलखदेव सिंह (पुत्र पनराम), राजेंद्र सिंह (पुत्र स्व. बलदेव सिंह), बनारसी दास (पुत्र आशुराम), जाहिदा (पत्नी स्व. नजीर), कमला देवी (पत्नी हंसराज), जद्वी देवी (पत्नी स्व. ओम पाल सिंह) सहित दर्जनों नाम शामिल हैं।
डॉ. बिंदल ने कहा कि यह केवल उदाहरण हैं, जबकि वास्तविक संख्या हजारों में है और पूरी सूची भाजपा द्वारा संलग्न की गई है।

 

उन्होंने कहा कि हिमाचल के इतिहास में पहली बार अत्यंत निर्धन परिवारों पर इस स्तर की तानाशाही की जा रही है। कांग्रेस सरकार गरीबों की विरोधी है और अब जब उसका असली चेहरा उजागर हो रहा है तो मंत्रीगण भूख हड़ताल जैसे नाटक कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।
डॉ. बिंदल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास पर पूरी तरह ताला लगा दिया गया है। पंचायतों में विकास के लिए जारी धनराशि प्रदेश सरकार ने वापस मंगवा ली है और शेष राशि से होने वाले कार्य भी रोक दिए गए हैं, जिससे गांवों में सड़क, पानी, भवन और अन्य बुनियादी विकास कार्य ठप पड़े हैं।

 

प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय में दिए गए बयान के अनुसार कांग्रेस सरकार अगले छह महीनों तक पंचायत चुनाव नहीं करवाना चाहती, जो पूरी तरह असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है। चुने हुए जनप्रतिनिधियों की शक्तियां छीनकर कुछ अधिकारियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है, ताकि कांग्रेस नेता गांवों में मनमानी, दादागिरी और भ्रष्टाचार कर सकें। यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों पर सीधा डाका है।
डॉ. बिंदल ने कहा कि मनरेगा के कार्य लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं और केंद्र सरकार द्वारा लाई गई वीबी–जी राम जी योजना को भी प्रदेश में शुरू नहीं किया गया है। विकसित भारत के लक्ष्य के तहत बनी इस योजना से गरीबों को मिलने वाली 125 दिन की रोजगार गारंटी से प्रदेश के ग्रामीणों को जानबूझकर वंचित किया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि एक तरफ बीपीएल सूची से नाम काटकर लाखों गरीब परिवारों का हक छीना जा रहा है, दूसरी तरफ रोजगार योजनाएं बंद कर गरीबों की आजीविका पर हमला किया जा रहा है और तीसरी तरफ पंचायतों के चुने हुए प्रतिनिधियों के अधिकारों को कुचला जा रहा है। यह कांग्रेस सरकार का असली चेहरा है।

 

डॉ. राजीव बिंदल ने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा इस अन्याय को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी। भाजपा नामों, दस्तावेज़ों और तथ्यों के साथ कांग्रेस सरकार की गरीब विरोधी नीतियों को जनता के सामने लाती रहेगी और गरीबों, पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीण हिमाचल के अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक पूरी मजबूती से लड़ी जाएगी।

एसएफआई ने HPU EC के मेंबरो को सौंपे

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला।  एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्रों की मांगों को लेकर ई सी के उम्मीदवारों को ज्ञापन सौंपा
छात्र मांगों पर विस्तार से बात रखते हुए एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर सचिव कामरेड मुकेश ने बताया कि 2013 के बाद से हिमाचल प्रदेश के अंदर छात्र संघ चुनाव बंद हैं जिस वजह से छात्र राजनीति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है छात्रों को उनका प्रतिनिधित्व न मिल पाने के कारण छात्र अपनी मांगे सही तरीके से प्रशासन के सम्मुख नहीं रख पाते हैं और जिस कारण वर्तमान समय में छात्र राजनीति का स्वरूप लगातार बदलता जा रहा है अतः स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया साफ तौर पर यह मांग करती है कि छात्रों के जनवादी अधिकार प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनाव को शीघ्र अति शीघ्र बहाल किया जाए ताकि छात्र राजनीति को वर्तमान समय में एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा सकता है।

 

एसएफआई ने आगे बात रखते हुए कहा कि 2005 में संविधान में 93 वा संशोधन किया गया जिसमें पिछड़े वर्गों से कमजोर छात्रों को उच्च शिक्षा में 27% आरक्षण दिया गया लेकिन हिमाचल प्रदेश अभी तक छात्रों को यह आरक्षण देने में पूरी तरह से नाकामयाब रहा है यह पूरी तरह से संविधान का उल्लंघन है एस एफ आई साफ तौर पर मांग कर रही है की उच्च शिक्षा में पिछड़े वर्गों के छात्रों को आरक्षण दिया जाए ।

 

 

एस एफ आई ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की अन्य समस्याओं जैसे कि छात्रावास की समस्या के बारे में बताया कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लगभग 4000 के करीब छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं लेकिन वर्तमान समय में हम देखते हैं कि प्रदेश विश्वविद्यालय के अंदर तकरीबन 1200 छात्र छात्राओं को ही हॉस्टल की सुविधा मिल पाती है। प्रदेश का एकमात्र प्रमुख सरकारी विश्वविद्यालय होने के बावजूद यहां पर छात्रों को रहने की उचित व्यवस्था नहीं की गई है अतः जल्द से जल्द विश्वविद्यालय के नए छात्रावासों का निर्माण किया जाना चाहिए।

 

एसएफआई ने ई सी के समक्ष मांगे रखते हुए कहा कि आर टी आई के माध्यम से जानकारी मिली है कि विश्वविद्यालय में 70 प्रतिशत शिक्षक फर्जी दस्तावेजों के सहारे भरे गए है जो लगातार विश्वविद्यालय में शैक्षणिक माहौल खराब करने का कार्य करते हुए संघ के एजेंडे को लागू कर रहे है। विश्वविद्यालय के यह फर्जी शिक्षक सरेआम राजनीतिक गतिविधियों में भी भाग ले रहे है जो विश्वविद्यालय ऑर्डिनेंस का भी उल्लंघन है। अतः एस एफ आई मांग करती है कि इस फर्जी भर्ती की न्यायिक जांच की जानी चाहिए तथा राजनीतिक गतिविधियों में संलिप्त शिक्षकों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।

 

एस एफ आई ने नई शिक्षा नीति को आम जन विरोधी बताते हुए कहा कि एन ई पी 2020 के माध्यम से शिक्षण संस्थानों का भगवाकरण किया जा रहा है। बाजार की वस्तु की तरह शिक्षा को बेचा जा रहा है जिसका उदाहरण हम वर्तमान में देखते हैं कि जो प्रगतिशील लेखक हैं उनकी किताबों को सिलेबस से हटाया जा रहा है उसके साथ-साथ एन ई पी के माध्यम से शिक्षा को लगातार निजी हाथों में सौंपने की कोशिश की जा रही है जिसका एस एफ आई खुले तौर पर विरोध करती है।

 

एस एफ आई ने आगे बात रखते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 2019 के अंदर गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती की सीटों का विज्ञापन निकाला गया था लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा भर्ती नहीं करवाई गई उसके बाद 2021 के अंदर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती का पुन: विज्ञापन निकाला जाता है लेकिन फिर भी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उस भर्ती को करवाने में नाकामयाब होता है जब एस एफ आई द्वारा गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती पर आरटीआई लगाई जाती है तो आरटीआई के माध्यम से यह जानकारी आती है की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय द्वारा लगभग 4.50 करोड रुपए छात्रों से लूटने का काम किया गया एसएफआई ने यह मांग की कि जल्द से जल्द गैर शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती को करवाया जाए।

 

इन तमाम मांगों को लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई सचिव कामरेड मुकेश ने ई सी से कहा कि इन तमाम मुद्दों पर जल्द से जल्द संज्ञान लिया जाए ताकि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में आने वाली छात्रों की समस्याओं को हल किया जा सके यदि इन मांगों को जल्द से जल्द पूरा नहीं किया गया तो आने वाले समय में एस एफ आई छात्रों को लामबंद करते हुए प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन तैयार करेगी जिसका जिम्मेदार स्वयं प्रशासन होगा ।

एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने 2026 का स्वागत किया, पवित्र हवन और उत्सव के साथ

0
  • आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
  • शिमला।  एपीजी शिमला विश्वविद्यालय ने नए वर्ष 2026 की शुरुआत उल्लास, ऊर्जा और आध्यात्मिक वातावरण के साथ की। दिन की शुरुआत विश्वविद्यालय के मंदिर में पवित्र हवन से हुई, जिसमें संकाय और स्टाफ सदस्यों ने भाग लिया। यह समारोह एक सफल और समृद्ध शैक्षणिक वर्ष के लिए आशीर्वाद प्राप्त करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।
  • हवन के बाद, उत्सव शेरा बैंड के लाइव संगीत प्रदर्शन के साथ जारी रहा, जिसने परिसर को उत्साही और आनंदमय माहौल से भर दिया। स्टाफ सदस्यों ने भी विशेष गेट-टुगेदर में भाग लिया, नव वर्ष की शुभकामनाएँ साझा कीं और नए साल की शुरुआत का आनंद उठाया।
    इस अवसर पर प्रो-चांसलर डॉ. रमेश चौहान, एडवाइजर इंजीनियर सुमन विक्रांत, रजिस्ट्रार डॉ. आर.एल. शर्मा, डीन एकेडमिक्स डॉ. आनंद मोहन, डीन फैकल्टी डॉ. अश्वनी शर्मा, डीन स्टूडेंट्स वेलफेयर डॉ. नीलम शर्मा और कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन अफज़ल खान की उपस्थिति रही।
    समारोह के दौरान, विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अपनी भावनाएँ साझा कीं और इस शैक्षणिक वर्ष को अर्थपूर्ण और व्यावहारिक बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने अधिक हैंड्स-ऑन लर्निंग प्रोग्राम, औद्योगिक यात्राएँ और वास्तविक दुनिया के अनुभव शुरू करने की योजना का उल्लेख किया, ताकि छात्रों को अकादमिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हो।
  • प्रबंधन ने यह भी जोर दिया कि वे एपीजी शिमला विश्वविद्यालय को और अधिक गतिशील, स्वागत योग्य और सुलभ बनाने के लिए प्रयासरत हैं!

डूअर्स ने शिमला के 20 सरकारी स्कूलों में 1,374 छात्रों व शिक्षकों को दिया आपदा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार और CPR का प्रशिक्षण

0
आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
शिमला। हिमालयी क्षेत्र में सक्रिय मानवीय संगठन Doers NGO ने शिमला जिले में बुधवार को आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 20 सरकारी स्कूलों में 1,374 प्रतिभागियों को आपदा तैयारी, प्राथमिक उपचार और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया है। इनमें 1,198 छात्र और 176 शिक्षक शामिल हैं।
यह प्रशिक्षण STEP4Schools नामक विशेष स्कूल-आधारित कार्यक्रम के तहत दिया गया, जिसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में की गई थी। यह परियोजना शिमला-4, रामपुर, सराहन और चौहारा शिक्षा ब्लॉकों में संचालित की जा रही है और इसमें वरिष्ठ माध्यमिक, उच्च तथा माध्यमिक विद्यालयों के छात्र भाग ले रहे हैं।
कार्यक्रम को M3M Foundation का सहयोग प्राप्त है, जबकि इसका समन्वय SPJIMR Mumbai के DoCC प्रोग्राम द्वारा किया जा रहा है। यह पहल शिमला जिले के चार शिक्षा ब्लॉकों में फैले कुल 125 सरकारी स्कूलों तक पहुंच बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षा, सतर्कता और आपदा प्रबंधन के सक्रिय प्रतिनिधि के रूप में तैयार करना है।
STEP4Schools कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिभागियों को आपदा की स्थिति में सुरक्षित प्रतिक्रिया, प्राथमिक उपचार देने के तरीके और CPR जैसी जीवनरक्षक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सत्रों में अनुभवात्मक शिक्षण पर विशेष जोर दिया गया, जहां छात्रों ने पट्टी बांधने, चोट या बेहोशी की स्थिति में प्राथमिक सहायता देने, तथा आपातकाल से पहले, दौरान और बाद में अपनाए जाने वाले आवश्यक कदमों का अभ्यास किया। यह प्रशिक्षण छात्रों को न केवल स्कूल बल्कि अपने घर और समुदाय स्तर पर भी आपदा से निपटने में सक्षम बनाता है।
कार्यक्रम को हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है, जहां भूकंप, भूस्खलन, आग और चरम मौसम जैसी घटनाएं आम हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण इनका जोखिम लगातार बढ़ रहा है।
डूअर्स की प्रशिक्षित पेशेवर टीम द्वारा स्कूल परिसरों में संरचित और व्यावहारिक कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी ने स्कूल स्तर पर आपदा तैयारी को संस्थागत रूप देने में अहम भूमिका निभाई। यह कार्यशालाएं शिमला-4 ब्लॉक के कई विद्यालयों—जैसे चौड़ा मैदान, जाखू, टुटू, चक्कर, बालूगंज, कृष्णा नगर, कश्मल का पानी, हरि नगर, बनूटी देवी, कालीहट्टी, बस्ती गुनाना, कोहबाग, टूटीकंडी, काइना, बाइचड़ी, शिल्ली, जाठिया देवी, श्यामलाघाट, चलौंठी और शांकली—में आयोजित की गईं, जिससे भौगोलिक और संस्थागत स्तर पर व्यापक कवरेज सुनिश्चित हुआ।
STEP4Schools के माध्यम से डूअर्स शिमला जिले में प्रारंभिक स्तर से ही आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सशक्त करने और तैयारी की एक स्थायी संस्कृति विकसित करने की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर आगे बढ़ा रहा है।

पंचायतों में हो रहा सर्वांगीण विकास -रोहित ठाकुर

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों 
शिमला। जुब्बल के समीप डकैड़ में निर्माणाधीन शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान (SIEMAT) के निर्माण कार्य का निरीक्षण करते हुए उन्होंने कहा कि यह संस्थान जुब्बल क्षेत्र में बनने वाला एक बड़ा और महत्वपूर्ण संस्थान है, जहाँ पर आने वाले समय में प्रदेश और देश भर से शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर सकेंगे, जिससे शिक्षा का आधारभूत ढांचा मज़बूत होगा और शिक्षा का स्तर बेहतर होगा।
इस संस्थान के निर्माण पर 17 करोड़ रुपए का व्यय किया जा रहा है, जो “हिमुडा” द्वारा किया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने निर्माण कार्य को निश्चित समयावधि में पूरा करने के निर्देश भी दिये।
इसके उपरांत शिक्षा मंत्री ने खड़ापत्थर में 1 करोड़ 87 लाख रुपए से निर्माणाधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया । उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 11 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। इसमें से एक स्वास्थ्य केंद्र बरथाटा (बटाड़गलू) का लोकार्पण किया जा चुका है।
ग्राम पंचायत पराली के प्रांगण में हुए एक समारोह में रोहित ठाकुर ने उपस्थित लोगों से कहा कि पराली पंचायत में भी अन्य पंचायतों की ही भांति सर्वांगीण विकास हुआ है। इसके अंतर्गत विभिन्न सड़कों और भवनों का निर्माण हुआ है।
इसके अतिरिक्त इस क्षेत्र की प्रमुख सड़क खड़ा पत्थर पटसारी का उन्नयन कार्य 17 करोड़ 16 लाख रुपए से किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत इस सड़क की मेटलिंग और टारिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि गिरी गंगा जुब्बल क्षेत्र का एक पवित्र और दर्शनीय स्थल है। खड़ापत्थर, गिरी गंगा सड़क को 6 करोड़ 46 लाख रूपये की लागत से पक्का किया गया है। इस सड़क के बनने से स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुविधा होगी और पर्यटन की दृष्टि से यह क्षेत्र विकसित होगा।  साथ ही प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत मडांन संपर्क मार्ग के लिए 2 करोड़ 96 लाख रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है, जिसकी औपचारिकताओं को शीघ्र ही पूरा कर के कार्य आरम्भ कर दिया जायेगा।
शिक्षा मंत्री ने नववर्ष 2026 के लिए सभी को शुभकामनायें दी और कहा कि वे ईश्वर से प्रार्थना करते है कि आने वाला वर्ष सभी प्रदेश वासियों के लिए सुखमय हो और हमारा प्रदेश विकास के नये आयाम स्थापित करे। उन्होंने कहा कि 2025 में वर्तमान सरकार के 3 वर्ष भी पूरे हुए है। इस दौरान जहाँ एक ओर हिमाचल ने एक मजबूत और अभूतपूर्व विकास यात्रा पूरी की। पिछली वर्षों के दौरान कुछ कड़वे अनुभव भी हमें देखने पड़े जहाँ 2023 और 2025 में प्राकृतिक अपादाओं के चलते हज़ारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उन्होंने आने वाले वर्ष के लिए आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाला समय प्रदेश के लिए सुखमय हो ।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर इस अवसर पर जुब्बल नवार कोटखाई कांग्रेस मण्डल अध्यक्ष  मोतीलाल डेरटा, प्रधान ग्राम पंचायत पराली  मीनाक्षी मजटा, पंचायत स्मिति सदस्य कोमल हांसटा जी, जुब्बल कांग्रेस जोन अध्यक्ष  लोकपाल शरखोली, ब्लॉक कांग्रेस अनुसूची जाति के अध्यक्ष  मुनि लाल नरसेठ , ग्राम पंचायत शिल्ली  प्रधान किरपा राम , पूर्व प्रधान शिल्ली लोकिंदर चौहान , युवा कांग्रेस अध्यक्ष जु0 ना0 कोटखाई0  दीपक कालटा एवं साथ लगती पंचायतों के जन प्रतिनिधि, उपमंडलाधिकारी जुब्बल  गुरमीत नेगी, बी डी ओ जुब्बल  करण सिंह एस एच ओ जुब्बल  चेतन चौहान एवं सभी विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत दौरा कर प्रदेश में इस अभियान को शुरू करेंगी -प्रतिभा सिंह

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला । पूर्व सांसद अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य,पूर्व प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह ने कहा है कि  मनरेगा से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाने व इसके मूल स्वरूप को कमजोर करने के खिलाफ प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस जनजागरण अभियान छेड़ेगी। उन्होंने कहा है कि कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में सभी राज्यों में कांग्रेस नेताओं को इसके खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ने का को कहा गया है।
प्रतिभा सिंह ने कहा है कि वह जल्द ही प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों का विस्तृत दौरा कर प्रदेश में इस अभियान को शुरू करेंगी।

 

प्रतिभा सिंह ने केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने इस  कानून को कमजोर कर ग्रामीण लोगों के काम के अधिकार को कमजोर तो किया ही है साथ मे इसका नाम बदल कर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का भी अपमान किया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के मार्गदर्शन में इस महत्वकांक्षी योजना को कानूनी स्वरूप देकर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बेरोजगार लोगों को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी थी।

 

इस योजना से  जहां ग्रामीण लोगों को उनकी पंचायतों के माध्यम से उनके घर द्वार में सुगम रोजगार उपलब्ध हो रहा था,साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास को गति भी मिलती थी। अब नए  कानून के तहत इसका पूरा अधिकार केंद्र ने अपने हाथों में लेकर ग्राम पंचायतों के अधिकार को भी निरस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि लोगों को उनके अधिकारों के प्रति सचेत करते हुए कांग्रेस देशभर में लोगों को जागरूक कर केंद्र सरकार को इसके मूल स्वरूप में लाने को विवश करेगी।

 पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर अपनी प्रतिक्रिया देते कहा है कि प्रदेश को जो उम्मीदें प्रधानमंत्री से थी,वह सब धरी की धरी रह गई।
प्रतिभा सिंह ने कहा है कि प्रदेश को 5000 करोड़ से अधिक का  नुकसान अभी तक  आंका गया है। इसकी  एवज पर 1500 करोड़ की साहयता बहुत ही कम हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जो हिमाचल प्रदेश को अपना दूसरा घर बताते हैं, उस घर की उन्हें पूरी मदद करनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि प्रदेश के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण व पुनर्वास कार्यो के लिये प्रदेश सरकार की मांग के अनुरूप प्रदेश की आर्थिक मदद करें।

परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह अभियान के तहत विभिन्न स्थानों पर किए जागरुकता कार्यक्रम  

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों 


बिलासपुर  ।
 परिवहन विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा 38वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2026 के अंतर्गत जिला बिलासपुर में 1 जनवरी से 31 जनवरी तक सड़क सुरक्षा-जीवन रक्षा अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में आज आरटीओ बिलासपुर राजेश कुमार कौशल द्वारा जिला के विभिन्न स्थानों जिनमें जिला युवा सेवाएं एवम् खेल विभाग, बिलासपुर द्वारा आयोजित किया जा रहे राज्य युवा उत्सव-2026’ कार्यक्रम में, प्रदेश भर से युवा कलाकारों, प्रवासी मजदूर समूह, चेतना चौक, आई टी आई चौक, बस स्टैंड, गुरुद्वारा चौक, कॉलेज चौक शामिल है। इन स्थानों पर जन जागरूकता अभियान के दौरान सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं पैदल यात्रियों (राहगीरों) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आम जनता से सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने बारे लोगों को जागरुक किया गया।

 

उन्होंने बताया कि पैदल चलने वालों को चाहिए कि जहां भी फुटपाथ उपलब्ध हो, उसका अनिवार्य रूप से उपयोग करें। यदि फुटपाथ न हो, तो सड़क के किनारे यातायात की विपरीत दिशा में चलें, जिससे आने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सके।

 

उन्होंने उपस्थित जनसमूह को जागरुक करते हुए बताया कि सड़क पार करते समय हमेशा दाएं-बाएं देखकर ही आगे बढ़ें तथा चौराहों, जेब्रा क्रॉसिंग, फुटओवर ब्रिज अथवा अंडरपास का ही उपयोग करें। ट्रैफिक लाइट और संकेतों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन, हेडफोन या अन्य गैजेट्स का प्रयोग न करें, ध्यान भटकने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। रात के समय या कम रोशनी में चमकीले अथवा रिफ्लेक्टिव कपड़े पहनें, ताकि वाहन चालक आपको आसानी से देख सकें। आवश्यकता होने पर टॉर्च का प्रयोग भी करें।

 

आरटीओ ने बताया कि बच्चों के साथ सड़क पार करते समय उनका हाथ पकड़कर चलें और उन्हें सुरक्षित पैदल चलने की आदतें सिखाएं। खड़ी गाड़ियों के बीच से या आगे-पीछे से सड़क पार न करें, क्योंकि इससे दृश्यता कम हो जाती है और दुर्घटना का खतरा रहता है। साथ ही, सड़क पर अचानक दौड़ने या रुकने से बचें, धैर्य रखें और सुरक्षित अवसर का इंतजार करें। शराब या किसी भी नशीले पदार्थ के प्रभाव में पैदल चलना भी खतरनाक है। सड़क विभाजकों या रैलिंग के ऊपर से अथवा बीच से पार करना नियमों के विरुद्ध है।

 

इन सरल लेकिन महत्वपूर्ण नियमों का पालन कर पैदल यात्री न केवल अपनी, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर सकते हैं।

रिज मैदान  पर सजेगा हिम एमएसएमई फेस्ट 2026, संस्कृति, स्टार्टअप और ‘मेड इन हिमाचल’ का भव्य मंच

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों

शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला शनिवार से एक ऐतिहासिक और यादगार आयोजन की साक्षी बनने जा रही है। हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 का शुभारंभ 3 जनवरी को ऐतिहासिक द रिज मैदान पर होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू  उद्घाटन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित होंगे, जबकि उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान बतौर विशेष अतिथि उपस्थित होंगे।

 

 

यह आयोजन हिमाचल प्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए एक नई दिशा तय करेगा। आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, हिमाचल प्रदेश के उद्योग विभाग के प्रयास से आयोजित यह फेस्ट हिमाचल प्रदेश को एक मजबूत MSME राज्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

दोपहर से शुरू होगा जश्न, बिखरेंगे लोक संस्कृति के रंग

फेस्ट के पहले दिन, दोपहर 2 बजे से रिज मैदान पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग शुरुआत होगी। प्रदेश के विभिन्न जिलों की लोकसंस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और कला के माध्यम से हिमाचल प्रदेश की आत्मा मंच पर जीवंत होगी। यह सांस्कृतिक प्रस्तुति पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक यादगार अनुभव बनेगी।
शाम 4 बजे से 7:40 बजे तक फेस्ट का सबसे खास आकर्षण रहेगा।  इस अवसर पर स्टार्टअप अवॉर्ड्स के ज़रिए प्रदेश के नवाचारी युवाओं और उभरते उद्यमियों को सम्मानित किया जाएगा।  कल्चरल फैशन शो में हिमाचली परिधानों और डिज़ाइनों के माध्यम से ‘मेड इन हिमाचल’ की झलक आधुनिक अंदाज़ में देखने को मिलेगी। यह समारोह इस बात का प्रतीक होगा कि हिमाचल में परंपरा और आधुनिक उद्यमिता साथ-साथ आगे बढ़ रही हैं।

स्टार नाइट में सजेगी संगीतमय शाम

 

शाम को कल्चरल ईवनिंग आयोजित होगी। इस अवसर पर आयोजित स्टार इवेंट आयोजित किया जाएगा, जहां संगीत, मनोरंजन और रोशनी का भव्य संगम रिज मैदान को उत्सव स्थल में बदल देगा।
यह स्टार नाइट फेस्ट में आए उद्यमियों, कारीगरों, पर्यटकों और शिमलावासियों के लिए खास आकर्षण होगी। पंजाबी गायक गैरी संधू स्टार नाइट के मुख्य आकर्षण होंगे।

 

हिम एमएसएमई फेस्ट केवल उत्सव नहीं, भविष्य की नींव है।  हिम एमएसएमई फेस्ट 2026 केवल मनोरंजन या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यह आयोजन स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को बाज़ार से जोड़ने, युवाओं को स्टार्टअप के लिए प्रेरित करने और ‘लोकल से ग्लोबल’ की सोच को ज़मीन पर उतारने का सशक्त मंच है।
रिज मैदान पर सजा यह मंच हिमाचल प्रदेश की आर्थिक, सांस्कृतिक और औद्योगिक क्षमता को एक साथ प्रदर्शित करेगा। यह फेस्ट निश्चय ही हिमाचल प्रदेश के विकास, उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिखेगा, जहां हर हुनर को पहचान, हर विचार को मंच और हर सपने को उड़ान मिलेगी।

हिमाचल में निराश्रितों के लिए ‘सरकार ही परिवार -मुख्यमंत्री

0

आदर्श हिमाचल ब्यूरों 

ऊना। हिमाचल सरकार की मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना पूरे देश में सामाजिक सुरक्षा का एक ऐसा उम्दा मॉडल बन चुकी है, जिसने हजारों ज़िंदगियों को सम्मान, सुरक्षा और नया जीवन आधार दिया है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के मानवीय दृष्टिकोण से उपजी इस योजना ने अभिभावक-विहीन बच्चों, निराश्रित महिलाओं और असहाय बुजुर्गों को केवल मदद नहीं, बल्कि जीवन को सशक्त बनाने वाला मजबूत आधार प्रदान किया है। पिछले दो वर्षों में लगभग 64 करोड़ रुपये के व्यय के साथ यह योजना सामाजिक सुरक्षा का एक ठोस ढांचा खड़ा कर चुकी है, जो सरकार की संवेदनशीलता का जीवंत प्रमाण है।

 

 

वहीं, ऊना जिला में बीते दो वर्षों में योजना के विभिन्न प्रावधानों के तहत लगभग पौने 4 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता जारी की गई है, जिसने निराश्रित बच्चों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार दिया है।

राज्य सरकार का अनूठा मानवीय मॉडल : ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप 28 फरवरी 2023 को आरंभ की गई मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जिसने अनाथ बच्चों को संस्थागत संरक्षण देते हुए उन्हें “चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट” का कानूनी दर्जा प्रदान किया है। प्रदेश में लगभग 6,000 निराश्रित बच्चों को यह दर्जा दिया गया है, और सरकार उनकी 27 वर्ष की आयु तक संपूर्ण देखभाल की जिम्मेदारी निभा रही है।

 

 

योजना उन सभी बच्चों को कवर करती है जिन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। इसमें अनाथ, अर्ध-अनाथ, विशेष रूप से सक्षम बच्चे और वे बच्चे जो विधिक संरक्षण के अधीन आए हैं, उन्हें कवर किया गया है।

समाज के कमजोर वर्गों तक बढ़ता दायरा

समावेशन की दृष्टि से योजना का लगातार विस्तार किया जा रहा है। असहाय बुजुर्गों, ट्रांसजेंडर समुदाय, परित्यक्त या सरेंडर किए गए बच्चों और एकल नारियों को भी इस योजना में शामिल किया है, जिससे उन्हें स्थायी आर्थिक सहारा दिया जा सके और वे सम्मानजनक जीवन जिएं।

इसी उद्देश्य को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने ‘मुख्यमंत्री सुख आश्रय कोष’ स्थापित किया है, जिसमें सरकारी अंशदान के साथ-साथ आम जनता, सामाजिक संस्थाओं और कंपनियों का सहयोग भी शामिल किया जा रहा है, जिससे इन बच्चों की उच्च शिक्षा और अन्य जरूरतों को पूरा किया जा सके।

शिक्षा और परवरिश की संपूर्ण ज़िम्मेदारी सरकार की

योजना का मूल भाव यह है कि जिन बच्चों का कोई नहीं है, उनकी संपूर्ण परवरिश, शिक्षा, भोजन, वस्त्र, स्वास्थ्य, आवास, सबकी जिम्मेदारी राज्य सरकार निभाएगी।

 

इसी उद्देश्य से प्रत्येक बच्चे को 4,000 रुपये मासिक पॉकेट मनी प्रदान की जा रही है। बाल संरक्षण संस्थानों में रह रहे 14 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 1,000 रुपये, जबकि 15 से 18 वर्ष तक के बच्चों के खातों में 2,500 रुपये प्रति माह जमा किए जाते हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों को, यदि छात्रावास सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो सरकार की ओर से 3,000 रुपये प्रतिमाह किराए का प्रावधान किया गया है, ताकि कोई भी बच्चा अपने सपनों से वंचित न रहे।

 

सुरक्षा, स्वावलंबन और सम्मान का मजबूत गठजोड़, आत्मनिर्भर युवा बनाने में सहयोग मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना केवल संरक्षण का कवच नहीं, बल्कि युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने का एक सशक्त संकल्प है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को स्वयं का स्टार्टअप शुरू करने के लिए 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। अभी तक 84 युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने हेतु यह सहयोग राशि प्रदान की जा चुकी है।

 

वहीं, जिला कार्यक्रम अधिकारी (आईसीडीएस) ऊना, नरेंद्र कुमार बताते हैं कि जिला में योजना ने बच्चों के लिए सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन, तीनों ही क्षेत्रों में ठोस परिणाम दिए हैं। सामाजिक सुरक्षा मदद में 294 बच्चों को 2 करोड़ 27 लाख 56 हजार 628 रुपये प्रदान किए गए, जिससे उन बच्चों के जीवन में बुनियादी स्थिरता आई है जो पहले किसी प्रकार के सहारे से वंचित थे। उच्च शिक्षा के लिए 60 छात्रों को 26 लाख 44 हजार 814 रुपये और व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए 35 युवाओं को 7 लाख 99 हजार 471 रुपये उपलब्ध कराए गए। कोचिंग सहायता के अंतर्गत 2 विद्यार्थियों को 1 लाख 48 हजार रुपये, स्किल डेवलपमेंट के लिए एक युवक को 98 हजार रुपये और माइक्रो एंटरप्राइज शुरू करने हेतु 9 युवाओं को 13 लाख 20 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई।

 

नरेंद्र कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच के अनुरूप विभाग का प्रयास केवल बच्चों को संरक्षित करना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है ताकि वे जीवन में किसी भी अवसर से वंचित न रहें।

 

राज्य सरकार इन बच्चों और युवाओं को देशभर में शैक्षणिक भ्रमण और एक्सपोज़र विजिट पर भी भेज रही है, जिसका पूरा व्यय सरकार वहन करती है।योजना के अंतर्गत विवाह के लिए 2 लाख रुपये की सहायता का भी प्रावधान है, जिसके तहत अब तक 264 लाभार्थियों को राशि प्रदान की गई है। वहीं, पात्र लाभार्थियों को आवास निर्माण के लिए 3 बिस्वा भूमि और 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे 423 लाभार्थियों को अब तक लाभ मिल चुका है इसके अतिरिक्त, 10,000 रुपये का वार्षिक वस्त्र अनुदान और 500 रुपये का उत्सव भत्ता, इस योजना को मानव गरिमा और जीवन-सम्मान को केंद्र में रखने वाली एक व्यापक सामाजिक पहल बनाते हैं।

आधुनिक सुविधाओं का नया घर होगा 132 करोड़ का ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर’

योजना के सुदृढ़ीकरण के तहत कांगड़ा जिले के लुथान में 132 करोड़ रुपये की लागत से ‘मुख्यमंत्री आदर्श ग्राम सुख-आश्रय परिसर’ का निर्माण किया जा रहा है।

यह देश का एक अनूठा परिसर होगा, जिसमें 400 आश्रितों के लिए आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित आवास, शिक्षा, कौशल विकास केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं, पुस्तकालय तथा मनोरंजन के सभी आवश्यक साधन उपलब्ध होंगे। यह परिसर भविष्य में राज्य की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का मॉडल संस्थान बनेगा।

सरकार ही परिवार’… मुख्यमंत्री सुक्खू का मानवीय दृष्टिकोण

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू का स्पष्ट कहना है कि जिन बच्चों का कोई सहारा नहीं है, उनके लिए सरकार ही परिवार है। इसी दृष्टि से सरकार माता-पिता की भूमिका भी निभा रही है। भोजन से लेकर वस्त्र, शिक्षा से लेकर कोचिंग, स्वास्थ्य से लेकर आवास तक, वह सब कुछ जो एक परिवार अपने बच्चों को देता है, राज्य सरकार उपलब्ध करा रही है।

मुख्यमंत्री के मानवीय दृष्टिकोण ने हिमाचल प्रदेश को ऐसे राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है जहां सरकार जन हित को सर्वोपरि रख कर संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से समाज के सबसे कमजोर वर्गों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रही है।

जिला में पात्र बच्चों तक योजना का लाभ पहुंचाना प्रशासन की प्रतिबद्ध

उपायुक्त ऊना जतिन लाल का कहना है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की सोच को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि प्रशासन पारदर्शिता, त्वरित सहायता और विभागीय समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह सुनिश्चित कर रहा है कि कोई भी पात्र बच्चा योजना से वंचित न रहे।

Shoolini University

Latest article

कंपनी के साथ मिलीभगत रखने वाले अधिकारी तत्काल इस्तीफा दें-संदीप कुमार

  आदर्श हिमाचल ब्यूरों  दाडलाघाट/ शिमला । अंबुजा–अदानी सीमेंट कंपनी की अनियंत्रित, अवैज्ञानिक एवं जानलेवा ब्लास्टिंग के विरोध में सीमेंट उद्योग व माइनिंग प्रभावित मंच ...

एचआरटीसी बेड़े में शामिल 297 इलेक्ट्रिक बसें, सोलन-शिमला मार्ग पर होगा ट्रायल’

आदर्श हिमाचल ब्यूरों  ऊना,। प्रदेश सरकार हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) को ई-मोबिलिटी की दिशा में सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी...

धार्मिक तीर्थ से साहसिक गंतव्य बनता तत्तापानी

   शिमला । सतलुज नदी के किनारे बसा हिमाचल प्रदेश का तत्त्तापानी लंबे समय से एक आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में जाना जाता है।...