जिजीविषा से मिलेगा कांगड़ा की बेटियों को सम्मान, लिंगानुपात में सुधार के लिए जिला प्रशासन की पहल

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

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कांगड़ा।  बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना को और प्रबल और गतिशील बनाने के लिए कांगड़ा जिला प्रशासन द्वारा जिजीविषा अभियान आरंभ करने की पहल की है। कांगड़ा की बेटियों को भविष्य में और अधिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए यह कदम उठाया है ताकि कांगड़ा की बेटियां अपना भविष्य संवार सकें और दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में और अधिक सक्षम बन सकें।

जिजीविषा का अर्थ है जीने की प्रबल चाह। इसी सोच के साथ कांगड़ा में जिजीविषा के अंतर्गत बेटियों के लिए नए कार्यक्रम आरंभ किया गया है ताकि समाज में बेटियों के प्रति नकारात्मक सोच को बदला जा सके।

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2011 की जनगणना के अनुसार शिशु लिंग अनुपात  कांगड़ा जिला में एक हजार बेटों के मुकाबले 876 बेटियां है अगर इसी तरह से लिंग अनुपात घटता गया तो बेटियां असुरक्षित हो जाएंगी। जिला कांगड़ा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत शिशु लिंग अनुपात को सुधारने के लिए अनेक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जिजीविषा जिला प्रशासन का एक नवीन प्रयास है।

जिजीविषा के तहत हमारे गांव की बेटी हमारी शान, उपायुक्त का परिवार, शुभ विवाह नया आंगन, जनभागीदारी, खंड स्तरीय ब्रांड एंबेसडर, बेटियों की स्वास्थ्य जांच तथा आत्म रक्षा पर प्रशिक्षण पर विशेष फोक्स रहेगा।

हमारे गांव की बेटी के तहत जिला कांगड़ा की हर पंचायत में एक बेटी का चयन किया जा रहा है जिसने किसी भी क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया हो, स्थानीय एंबेसडर की पहचान भी की गई है उसी को क्षेत्र का उदाहरण बनाकर अन्य बेटियों के प्रोत्साहन के लिए प्रेरित किया जाएगा। पंचायत कार्यालयों में इन्हीं बेटियों के पोस्टर बैनर इत्यादि लगाए जाएंगे।

इसके साथ ही उपायुक्त का परिवार के तहत जिला पंचायत अधिकारी एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी उन परिवारों अथवा अभिभावकों की पहचान करेंगे जिनके यहां केवल बेटियां हों,ऐसे चिह्न्ति परिवारों के नाम सम्मान पटल पर दर्शाये जाएंगे। इन परिवारों को एक विशेष नाम डीसी का परिवार के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही शुभ विवाह नया आंगन के तहत एक मार्च 2020 के बाद नए शादीशुदा जोड़ों की पहचान की जा रही है और इनके नाम पंजीकृत कर आंगनबाड़ी स्तर पर रिकार्ड रखा जाएगा।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तथा आशा वर्कर्स प्रतिमाह ऐसे जोड़ों के घर जाएंगे और उपायुक्त की ओर से बधाई पत्र एवं शुभ संदेश दिया जाएगा। इस प्रकार नवविवाहित जोड़ों से संवाद स्थापित कर पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके अलावा भविष्य में गर्भवती होने पर इन जोड़ों को प्रसव संबंधी जानकारी दी जाएगी इससे गर्भधारण पंजीकरण में भी वृद्वि होगी।

इसके अलावा जनभागीदारी के तहत स्थानीय बाजार की दुकानों के नामों में बदलाव कर बेटियों के नाम पर रखने की योजना भी बनाई गई है।

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इस योजना के तहत प्रारंभिक चरण में पंचरूखी तथा नगरोटा सूरियां को चुना गया है । इन खंडों में ऐसे दुकानदारों की सूची ली जाएगी जो स्वेच्छानुसार अपनी दुकानों के नाम बेटियों या घर की महिला सदस्य के नाम पर रखना चाहते हैं। खंड स्तरीय ब्रांड एंबेसडर के तहत बाल विकास परियोजना अधिकारी अपने अधीनस्थ क्षेत्र में बेटी की पहचान करेंगे जिसने किसी भी क्षेत्र में अति उत्कृष्ट कार्य किया हो। एक खंड से एक बेटी को चिह्न्ति किया जाएगा।

चयनित बेटी जिजीविषा अभियान में एक ब्रांड एंबेसडर के रूप में कार्य करेगी। इन बेटियों के द्वारा स्कूल, कालेज एवं पंचायत स्तर पर अन्य बेटियों को प्रेरित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बेटियों के स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे जिसमें महिला चिकित्सक द्वारा एनीमिया की जांच, पौषाहार तथा स्वास्थ्य शिक्षा के बारे मेें जानकारी दी जाएगी।

इसके साथ ही आत्म रक्षा के लिए भी विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। उपायुक्त राकेश प्रजापति ने कहा कि कांगड़ा जिला में जिजीविषा अभियान आरंभ कर दिया गया है तथा इसमें आम जनमानस की सहभागिता भी सुनिश्चित की जाएगी ताकि बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ा जा सके।