आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश के कालेजों में पढ़ने वाले 60 हजार से ज्यादा फर्स्ट व सेकेंड ईयर के छात्रों की फाइनल परीक्षाएं अभी नहीं होंगी। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि 13 जुलाई के बाद सबसे पहले फाइनल सेमेस्टर की परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी, उसके बाद अगर स्थिति सामान्य हुई, तो कालेज में रूसा के तहत पढ़ रहे फर्स्ट व सेकेंड ईयर के छात्रों की परीक्षाएं आयोजित करवाई जाएंगी।
यह भी पढ़ेंः- रामपुर के खनेरी महात्मा गाँधी मेडिकल सर्विस काॅमप्लेक्स में अगले हफ्ते से शुरू होंगे कोरोना टेस्ट
जानकारी के अनुसार अगर स्थिति काबू नहीं हो पाती है, तो ऐसे में फर्स्ट व सेकेंड के छात्रों को प्रोमोट कर दूसरी कक्षा में भी बिठाया जा सकता है। इसके अलावा सरकार ने यह भी फैसला लिया है कि लॉकडाउन की वजह से जो छात्र अपने-अपने घर दूसरे जिलो में चले गए हैं, उन छात्रों को परीक्षाओं के लिए एक जिला से दूसरे जिला में आने की भी आवश्यकता नहीं होगी। छात्रों को उन्हीं के जिला में बनाए गए परीक्षा केंद्रो में परीक्षाओं में बैठने की सुविधा दी जाएगी।
साथ ही सरकार कालेज फाइनल सेमेस्टर के छात्रों की परीक्षा से पहले एचपीयू को तैयारियां करने के लिए केवल पंद्रह दिन का ही समय देगा। जानकारी के अनुसार कालेज परीक्षाओं को लेकर सरकार रोज चर्चाएं व प्लानिंग कर रही है। दरअसल कई छात्र ऐसे भी हैं, जिनका घर कंटेनमेंट जोन में आता है। ऐसे में यह भी प्लान किया जा रहा है कि इन छात्रों को कैसे परीक्षाएं देने के लिए बुलाया जाए। फिलहाल इस पर सरकार प्लानिंग कर रही है। ऐसे में देखना होगा कि कालेज परीक्षाएं सभी छात्रों की सही रूप से हो सकें, इसके लिए सरकार की अगली प्लानिंग क्या होती है। बताया जा रहा है कि एचपीयू ने प्रश्न पत्र तैयार कर दिए हैं, प्रिटिंग के लिए दिए गए हैं। जब कालेज फाइनल परीक्षा की तारीख फाइनल हो जाएगी, तो एचपीयू प्रश्न पत्र की सप्लाई मंगवा देगा।
फिलहाल एचपीयू ने सरकार को शैक्षणिक गतिविधियों को कैसे सुचारू किया जा सकें, इन सभी संभावनाओं से सरकार को अवगत करवाया है। अहम यह है कि कालेजों में सेमेस्टर प्रणाली के तहत केवल एक ही बैच बचा है। यही वजह है कि सरकार सबसे पहले सेमेस्टर परीक्षा को निपटाना चाहता है। बताया जा रहा है कि मॉर्निंग व इंवनिंग दो सेशन में छात्रों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी।




इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत 1506 व्यक्तियों को 5,89,34,850 रुपये जबकि प्रदेश सरकार की वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत जिला में 27,997 लोगों को 10,76,19,900 रुपये की राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के तहत 3004 पात्र व्यक्तियों को 1,24,07,700 रुपये, विधवा पेंशन योजना के तहत 9222 पात्र महिलाओं को 2,92,45,200 रुपये, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय अपंग पेंशन योजना के तहत 37 व्यक्तियों को 1,66,500 रुपये तथा अपंग राहत भत्ता के तहत 5958 लोगों को 2,08,02,300 रुपये व कुष्ठ रोगी पुर्नवास भत्ते के तहत जिला में 180 रोगियों को 6,36,450 रुपये की राशि वितरित की गई।





पिछले वर्ष 26 फरवरी, 2019 को किसान सभा तथा क्षेत्र के नौजवानों की सक्रियता से वन विभाग एवं लोक निर्माण विभाग से कागजी कार्यवाही पूरी करवा कर कुल निर्माण लागत 7 करोड़ 42 लाख रुपये का टेंडर हो चुका था, जिसमें सड़क कटिंग की लागत 4.50 करोड़ रुपये है। और 12 जून को मशीनरी के साथ कार्य शुरू भी हो गया था। हालांकि इस सड़क का विधानसभा चुनावों के चलते 13 सितम्बर 2017 को ही स्थानीय विधायक ने तत्काल्लीन मुख्यमंत्री के माध्यम से ई.उद्घाटन तो करवा दिया था। लेकिन आज सरकार और निर्वाचित विधायक की भूमिका इस पूरे प्रकरण में कहीं भी नजर नहीं आ रही है।







