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कोरोना को मात देकर स्वस्थ हुए नौ लोग, भेजा होम क्वारंटीन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

हमीरपुर। कोरोना को हराने वाले जिला हमीरपुर के नौ लोगों को सोमवार को उनके घर भेज दिया गया, जहां वे गृह संगरोध में रहेंगे। एनआईटी परिसर में स्थित जिला कोविड केयर केंद्र में उपचाराधीन इन लोगों की फॉलोअप रिपोर्ट रविवार को नेगेटिव आई थी। कोरोना की जंग जीतने पर इन्हें शुभकामनाएं देते हुए उपायुक्त हरिकेश मीणा ने कहा कि जिला में कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने तथा आम जनता को जागरुक करने में यह लोग सक्रिय योगदान दे सकते हैं। उपायुक्त ने कहा कि जिला में कोरोना संक्रमित लोगों के ठीक होने की दर लगातार बढ़ रही है और सोमवार दोपहर तक जिला में स्वस्थ होने वालों की संख्या 186 तक पहुंच चुकी है।

   उधर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना सोनी ने बताया कि जिला में कोरोना संक्रमण की चपेट में आए लोगों का पता लगाने के लिए नियमित रूप से सैंपल लिए जा रहे हैं। 5 जुलाई तक जिला से कुल 12,325 सैंपल जांच के लिए भेजे जा चुके हैं। रविवार को जिला से 66 सैंपल लिए गए, जिन्हें सोमवार को जांच के लिए आईएचबीटी पालमपुर भेज दिया गया। इनमें 18 सैंपल कोविड केयर केंद्र एनआईटी से, टौणी देवी से 6, बड़सर से 38, मेडिकल कालेज हमीरपुर तथा भोटा से 2-2 सैंपल भेजे गए हैं।

फसलों का बीमा करवाने के लिए आगे आएं किसान -ऋचा वर्मा

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

कुल्लू। उपायुक्त डा. ऋचा वर्मा ने कहा कि कुल्लू जिला में मौजूदा साल की खरीफ की फसल से लेकर वर्ष 2022-23 की रबी की फसलों का बीमा करवाने की सुविधा प्रदान की गई है। उन्होंने जिला के किसानों से अपनी फसलों का बीमा करवाने के लिए आगे आने का आग्रह किया है।
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इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए कृषि विभाग के उप-निदेशक डाॅ. राज पाल ने बताया कि मौजूदा खरीफ की फसल का बीमा करवाने की अंतिम तिथि 15 जुलाई, 2020 है। इसमें मक्की तथा धान का बीमा करवाने के लिए 48 रुपये प्रति बीघा की दर से प्रीमियम राशि निर्धारित की गई है जिसमें प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपये तक का बीमा कवर होगा। इसी प्रकार, रबी की फसलों में गेहूं तथा जौ की फसल के लिए प्रति बीघा प्रीमियम राशि क्रमशः 36 रुपये व 30 रुपये निश्चित की गई है जिसके तहत 30 हजार रुपये व 25 हजार रुपये का बीमा कवर किसानों को मिलेगा।
रबी की फसलों का बीमा करवाने की तिथि 15 दिसम्बर निर्धारित की गई है।  डाॅ. राज पाल ने कहा कि यह बीमा एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी आॅफ इण्डिया लिमिटेड द्वारा किया जाएगा। बीमा करवाने के लिए कंपनी के घनश्याम से उनके मोबाईल नम्बर 70188-06168 पर संपर्क किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऋणी किसान जो फसल का बीमा नहीं करवाना चाहते हैं, उन्हें बीमा करने की अंतिम तिथि से सात दिन पहले संबंधित बैंक शाखा में लिखित तौर पर सूचित करना होगा।
फसल बीमा के संबंध में अधिक जानकारी के लिए खण्ड के विषय विशेषज्ञ, कृषि विकास अधिकारी, कृषि प्रसार अधिकारी एवं बीमा कंपनी से संपर्क करने की सलाह किसानों को दी गई है।

कृषि उपकरणों पर अनुदान से किसानों में बढ़ा आधुनिक तकनीक के प्रति रुझान

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। कुछ अरसा पहले तक पारम्परिक कृषि का बोलबाला था। किसान बैलों के साथ कृषि करते थे और लगभग हर घर में बैल पालने का रिवाज़ था। बदलते समय के साथ पारम्परिक कृषि में आधुनिक तकनीक के रंग घुलने लगे। हल-बैल के स्थान पर ट्रैक्टर व अन्य यंत्रों का उपयोग होने लगा, खेतों से बैलों का रिस्ता टूटने लगा। कृषि कार्याें में मशीनीकरण का महत्व बढ़ गया है। कृषि यंत्रों का प्रयोग करने से किसान अपना कार्य कम मेहनत और कम समय में निपटा लेते हैं। जो कार्य एक जोड़ी हल व बैल से पूरे दिन में किया जाता है उसे एक ट्रैक्टर द्वारा लगभग एक घण्टे से भी कम समय में कर लिया जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार कृषि के मशीनीकरण का अर्थ भूमि पर सम्पन्न होने वाली खेतीबाडी की उन गतिविधियों से है जिनमें तमाम क्रियाओं में यांत्रिक शक्ति प्रयोग की जाती है। पहले इन सभी क्रियाओं में मानव और पशुश्रम सम्मिलित होता था।
सर्वविदित है कि कृषि यंत्रों तथा उपकरणों का मूल्य अधिक होता है इसलिए कई बार गरीब किसान इन उपकरणों को नहीं खरीद पाते। हिमाचल  प्रदेश सरकार द्वारा इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग के माध्यम से विभिन्न कृषि-यन्त्रों तथा उपकरणों पर अनुदान दिया जाता है ताकि गरीब किसानों को किसी तरह की कठिनाई न हो और वह अपनी खेतीबाड़ी में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से वंचित न रहें।
बीस से चालीस हॉर्स पावर के ट्रेक्टर की खरीद पर सीमान्त किसानों, अनुसूचित जाति, जनजाति व महिला कृषकों को 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम तीन लाख रुपये की जबकि आठ से बीस हॉर्स पावर के ट्रेक्टर पर 50 प्रतिशत या दो 25 हजार रुपये की राशि तक उपदान देने का प्रावधान है।
जिला काँगड़ा में सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकनेजीयेशन योजना के अन्तर्गत वर्ष 2019-20 में 206 किसानों को 595 लाख 50 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। आठ हॉर्स पावर से अधिक क्षमता के पावर टिल्लर पर 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 85 हजार रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इसके अंतर्गत जिला में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना में गत वित्त वर्ष में चार किसानों को 3 लाख 40 हजार रूपये का उपदान दिया गया।
राज्य कृषि यन्त्रीकरण तथा सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चर मेकनेजीयेशन योजना के अंतर्गत पावर वीडर पर दी जाने वाली 50 प्रतिशत अथवा 25 हजार रुपये की सब्सिडी के तहत गतवर्ष  2019-20 में लगभग एक करोड़ की सब्सिडी देकर जिला के 405 किसानों को लाभान्वित किया गया है।
कांगड़ा के समीप गांव ढुगियारी के किसान कुशल ंिसंह का कहना है कि मैंने भी दो वर्ष पूर्व अपनी खेतीबाड़ी के लिए एक पावर वीडर लिया था, जिस पर मुझे सरकार द्वारा 25 हजार रूपये का उपदान मिला। उनका कहना है कि पावर वीडर के इस्तेमाल से कम समय में खेत को बीजाई के लिए तैयार करना आसान हो गया है।
पावर वीडर के साथ कार्य करना इतना सरल है कि वर्तमान में उनके घर में आई उनकी भांजी सुनयना भी धान के खेतों में पावर वीडर के साथ काम करके खेतों को तैयार करने में अपने मामा की सहायता कर रही है जोकि काँगड़ा के नज़दीक सोहड़ा की रहने वाली है और बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा है।
सुनयना अपने अनुभव सांझा करते हुए बताती है कि उनके घर में पहले से ही पावर वीडर है, जिसे वह भी इस्तेमाल करती है, जबकि बैलों को जोतने का कार्य शायद वह नहीं कर पाती।
विकास खण्ड रैत की ग्राम पंचायत डोहब के राजेन्द्र कुमार का कहना है कि उन्होने दो वर्ष तक किसी और का ट्रैक्टर किराए पर लेकर अपने खेतों में खेतीबाडी की। लेकिन उनके लिए यह एक घाटे का सौदा रहा, फिर वह अपना पॉवर टिल्लर खरीदने हेतु गए। लेकिन इसका भाव अधिक होने के कारण वे इसे खरीदे बिना मायूस घर वापस लौट आए। उसके उपरांत उनके किसी मित्र ने उद्यान विभाग द्वारा कृषि उपकरणों बारे दिए जा रहे उपदान की जानकारी दी।
राजेन्द्र का कहना है कि उसके बाद उन्होने स्वंय विभागीय कार्यालय जाकर इस योजना के बारे में विस्तार से जाना और उसके लिए आवश्यक दस्तावेज की औपचारिक्ताओं को पूर्णकर आवेदन किया। विभाग द्वारा उन्हें कुछ समय पश्चात् 50 प्रतिशत उपदान स्वीकृत किया गया। राजेन्द्र कुमार सरकार का धन्यवाद करते हुए कहते है कि वह अब आराम से अपनी खेती तो कर ही रहें है अपितु गांव के अन्य किसानों के खेत जोत कर 10 से 15 हजार रूपए कमाकर अपनी आर्थिकी भी सुदृढ़ कर रहे है।
गांव डोहब के ही एक अन्य लाभार्थी किसान श्याम प्रदेश सरकार का धन्यवाद किया और बताया कि उन्होने भी माह फरवरी 2020 में एक ट्रैक्टर लिया है, और इस पर उन्हे कृषि विभाग के माध्यम से तीन लाख रूपए का उपदान मिला।  
धर्मशाला में कृषि विभाग के उत्तरी क्षेत्र के सयुंक्त निदेशक नरेन्द्र कुमार धीमान बताते हैं कि जिला काँगड़ा में वर्ष 2019-20 में लगभग 12 करोड़ की उपदान राशि देकर 36 हज़ार किसानों को लाभान्वित किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को विभिन्न कृषि उपकरणों के क्रय पर उपदान दिया जाता है। उनका कहना है कि जिला काँगड़ा में राज्य कृषि यंत्रीकरण तथा उत्तम चारा उत्पादन योजना के अंतर्गत वर्ष 2019-20 में 4600 किसानों को टोका मशीनों पर दो करोड़ 75 लाख रुपये का उपदान दिया गया है।
संयुक्त निदेशक कृषि के अनुसार बीजोपचार हेतु पानी के टब पर 50 प्रतिशत उपदान दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत वर्ष 2019-20 में 20 हजार किसानों को 66 लाख की उपदान राशि उपलब्ध करवाई गई। उन्होंने जिला के किसानों से आह्वान करते हुए कहा कि वे कृषि विभाग द्वारा चलाई गई विभिन्न कल्याणकारी  योजनाओं, उत्तम किस्म के बीजों का प्रयोग तथा समय-समय पर अधिकारियों द्वारा दी गई फसल सम्बन्धी विभिन्न तरह की जानकारी व कृषि विशेषज्ञों के परामर्श का लाभ उठाकर उन्नत तकनीक के साथ अपनी कृषि पैदावार बढ़ाकर आर्थिकी सुदृढ़ कर सकते हैं।

जिला मंडी में कोरोना का एक और नया मामला, एक घंटे में ही रिपोर्ट आई पाॅजिटिव

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

मंडी। हिमाचल प्रदेश के जिला मंडी के सुंदरनगर में कोरोना का एक और नया मामला सामने आया है। यह युवक 29 जून को आबू धाबी से आया था और सुंदरनगर के एक होटल में क्वारंटीन किया गया था। सोमवार को आई रिपोर्ट में वह पॉजिटिव पाया गया है। रविवार शाम को आई रिपोर्ट में वह निगेटिव निकला था। सोमवार को रिपोर्ट में पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। पहले निगेटिव  पाए जाने के बाद उसे घर भेज दिया था।
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एक घंटे में ही दोबारा पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद अफरातफरी मच गई है। जांच को लेकर मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही आई सामने आई है। एसएमओ सिविल अस्पताल सुंदरनगर डॉ चमन ने पुष्टि की है।

प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना से हमीरपुर में बिछा सडक़ों का जाल

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लगभग 145 करोड़ रुपये की लागत से पूरे हो चुके हैं 135 सडक़ों के कार्य

 

आदर्श हिमाचल ब्यूरो

हमीरपुर। ग्रामीण क्षेत्रों को सडक़ों से जोडक़र इनकी तकदीर और तस्वीर बदलने वाली प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना ने जिला हमीरपुर में भी बड़ा कमाल कर दिखाया है। इस योजना के माध्यम से जिला के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सडक़ों का जाल बिछाया गया है। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के कारण ही जिला का लगभग हर गांव सडक़ सुविधा से जुड़ चुका है और सडक़ों के घनत्व के मामले में हमीरपुर देश के अग्रणी जिलों में शुमार हो गया है।
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लोक निर्माण विभाग के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही पीएमजीएसवाई के तहत हमीरपुर जिला की 166 सडक़ों के लिए कुल 292 करोड़ 65 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ था। इनमें से 135 सडक़ों के कार्य पूरे हो चुके हैं, जिन पर लगभग 145 करोड़ की धनराशि खर्च की जा चुकी है।
 विभाग के अधीक्षण अभियंता एनपीएस चौहान ने बताया कि इस योजना के माध्यम से जिला के 103 गांवों को पक्की सडक़ों से जोड़ा जा चुका है। इनमें से छह गांवों की आबादी 1000 से अधिक और 30 गांवों की आबादी 500 से 1000 तक है। इनके अलावा ढाई सौ से अधिक आबादी वाले 67 गांवों में भी पीएमजीएसवाई के माध्यम से सडक़ें पहुंचाई गई हैं।
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि इसी योजना के तहत जिला में अभी 23 सडक़ों के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण कार्य तेजी से चले हुए हैं, जबकि 8 अन्य सडक़ों की टेंडर आवंटन प्रक्रिया जारी है। टेंडर आवंटन प्रक्रिया पूरी होते ही इन सडक़ों के कार्य भी आरंभ कर दिए जाएंगे।
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि पीएमजीएसवाई के प्रथम चरण में जिला में कुल 760 किलोमीटर सडक़ों का निर्माण किया जाना था, जिसमें से करीब 628 किलोमीटर सडक़ें बनाई जा चुकी हैं। योजना के दूसरे चरण में 80 किलोमीटर से अधिक सडक़ों के सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग 73 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत निर्मित सडक़ों की गुणवत्ता पर विशेष जोर दिया जाता है और इसके लिए उच्च मानक तय किए गए हैं। नई सडक़ के निर्माण से लेकर इसे पक्का करने तथा उसके बाद पांच वर्षों तक उसके रखरखाव एवं मरम्मत को लेकर ठेकेदार की जवाबदेही तय की जाती है। इन उच्च मानकों के कारण आज दूरदराज के गांवों में भी अच्छी और पक्की सडक़ों का निर्माण सुनिश्चित हो रहा है।
इस प्रकार प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना ने हमीरपुर जिला के गांवों की तकदीर और तस्वीर ही बदल दी है। कभी दुर्गम माने जाने वाले जिला के कई गांवों में भी आज पक्की और चौड़ी सडक़ों पर वाहन सरपट दौड़ रहे हैं। नि:संदेह इन गांवों के लिए पीएमजीएसवाई एक वरदान साबित हुई है।

अधिसूचना जारी होने के बाद परवाणू बैरियर पर पहुंची सैलानियों की इतनी गाड़ियां

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। हिमाचल में बिना कर्फ्यू पास पंजीकरण करवाकर प्रवेश करने की अधिसूचना के 48 घंटे बाद बंद पर्यटन कारोबार शुरू होने की उम्मीद जग गई है। रविवार को छुट्टी के दिन सोलन के परवाणू बैरियर पर 1700 से ज्यादा गाड़ियां पहुंच गईं। इनमें 500 गाड़ियां पर्यटकों की थीं। इनके पास न तो कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट थी और न ही पंजीकरण करवाया हुआ था। उधरए बिलासपुर जिले में अंतरराज्यीय बैरियर स्वारघाट से रविवार को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के 37 सैलानियों ने प्रवेश किया।
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बैरियर पर मौजूद पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सैलानियों की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। स्वारघाट बॉर्डर से 973 लोगों को पंजीकृत कर राज्य में प्रवेश की अनुमति दी गई। इनमें 263 लोग बिलासपुर के थे। ऊना के मैहतपुर नाके से 1256 लोगों ने प्रवेश कियाए जबकि 954 ने पंजीकरण करवाया। अब तक 2824 लोग पंजीकृत हो चुके हैं। कांगड़ा के कंडवाल बैरियर पर सन्नाटा छाया रहा।
हिमाचल में सोमवार से बिना ई-पास लोग प्रवेश कर सकेंगे। सैलानियों के लिए भी प्रदेश की सीमाएं सोमवार से खुल जाएंगी। शनिवार को पंजीकरण करवाने वाले सैलानियों के 48 घंटे सोमवार को पूरे हो जाएंगे। ऐसे में संभावित है कि सोमवार से प्रदेश में सैलानियों की आवाजाही शुरू हो सकती है। हिमाचल आने वाले सैलानियों की जांच के लिए सभी बॉर्डर एरिया पर संबंधित जिला प्रशासन के अधिकारियों की जिम्मेवारी सुनिश्चित की गई है।

कोरोना संकट मेें 14वें बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा घर पर ही मनाएगें अपना 85वां जन्मदिन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। कोरोना संकट के बीच 14वें बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का 85वां जन्मदिन पहली बार मैक्लोडगंज में बिना किसी भव्य समारोह के मनाया जाएगा। दलाईलामा सोमवार को 85 वर्ष के हो जाएंगे। जनवरी में कोरोना वायरस फैलने के बाद से दलाईलामा किसी बाहरी व्यक्ति से नहीं मिले। न ही विदेश दौरा किया। तीन माह तक उन्होंने कोई भी ऑनलाइन और ऑफलाइन टीचिंग नहीं दी। अब वे अपने निवास स्थान से ही दुनिया भर में वीडियो कांफ्रेंसिंग से संदेश दे रहे हैं। भारत और दुनिया भर में रहने वाले धर्मगुरु के अनुयायी अपने घरों पर ही पूजा-पाठ करके धर्मगुरु दलाईलामा का जन्मदिन मनाएंगे।
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धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार के मुख्यालय में भी जन्मदिन साधारण तरीके से मनेगा। इससे पहले दलाईलामा के जन्मदिन पर मैक्लोडगंज स्थित मुख्य बौद्ध मंदिर और दुनिया भर में 6 जुलाई को भव्य कार्यक्रम होते थे। अपने रविवार को धर्मगुरु ने ताईवान के लोगों को ऑनलाइन टीचिंग देते हुए मन को स्वस्थ रखने के टिप्स दिए। दलाईलामा के निजी सचिव सेटन सामदुप ने बताया कि सोमवार को धर्मगुरु के जन्मदिन पर कोई भी कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा। इन दिनों अपनी टीचिंग में दलाईलामा यह भी कह चुके हैं कि वह कम से कम 112 वर्ष तक जीवित रहेंगे। 
इसमें सबसे इस बात का ध्यान रखा जाता हैए ऐसे बच्चे धर्मगुरु की मौत के 9 महीने बाद जन्मे हों। 1933 में 13वें दलाईलामा की मौत हुई थी। इसके बाद तेंजिन ग्यात्सो के रूप में तिब्बत के आम्दो प्रांत में दो साल की उम्र में 14वें दलाईलामा की खोज हुई। दलाईलामा किसान के बेटे हैं।

भारत के मौसम वैज्ञानिकों ने बनाई दामिनी मोबाइल ऐप, बिजली गिरने से 15 मिनट पहले करेगी अलर्ट

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। भारत के मौसम वैज्ञानिकों ने एक दामिनी मोबाइल ऐप बनाई हैं जोकि बिजली गिरने से 15 मिनट पहले ही सूचित कर देगी। इस ऐप के जरिए किसान और अन्य लोग यह जान सकेगें कि बिजली गिरने की संभावनाएं कहां कहां हो सकती है। कृषि मौसम विशेषज्ञ गजेंद्र सिंह ने बताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी ने देश के 48 जगहों पर ऐसे सेंसर लगा दिए हैं।
यह भी पढ़ेंः- डेंटल काॅलेज के विभागाध्यक्ष पर लगा एमएस सहित अन्य विभागाध्यक्ष के साथ उलझने का आरोप
आपकों बता दें कि भारत में दो से ढाई हजार तक लोगों की बिजली से ही मौत हो जाती है। इसे देखते हुए ही वैज्ञानिकों ने लोगों की जान बचाने और बिजली से सावधान रहने के लिए इस ऐप को बनाया है। किसान व सामान्य व्यक्ति गूगल प्ले स्टोर से बड़ी आसानी से डाउनलोड करके इंस्टॉल कर उसमें रजिस्ट्रेशन कर सकता है। एप्लीकेशन 40 किलोमीटर की परिधि में वज्रपात की पूर्वानुमान लगाने में सक्षम है। गजेंद्र सिंह ने बताया कि यह मोबाइल एप्लीकेशन किसानों व आम जनता के लिए उनकी जान के सुरक्षा के नजरिए से बहुत ही जरूरी है। इसको गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं।

डेंटल काॅलेज के विभागाध्यक्ष पर लगा एमएस सहित अन्य विभागाध्यक्ष के साथ उलझने का आरोप

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो

शिमला। राजधानी शिमला के डेंटल कॉलेज में एक विभागाध्यक्ष पर एमएस और अन्य विभागाध्यक्ष के साथ उलझने का आरोप लगा है। इसके अलावा विभागाध्यक्ष पर गालीगलौच का भी आरोप लगाया गया है। इसके बारे में काॅलेज के प्रधानाचार्य को भी शिकायत दी गई।
यह भी पढ़ेंः- पर्यटकों के लिए हिमाचल खोलने का टूरिज्म इंडस्ट्री हिमाचल ने किया स्वागत, मुख्यमंत्री का जताया आभार
यह घटना बीते शनिवार की हैं जब काॅलेज में पीपीई किट को लेकर एक बैठक रखी गई थी तो ऐसे में वहां सही जगह पर कुर्सी ने रखने को लेकर विभागाध्यक्ष गुस्सा हो गए तो इसी दौरान एक अन्य विभागाध्यक्ष ने संयम बरतने को कहा तो वह उनसे उलझ गएए इसके बाद जब एमएस बीच में आए तो विभागाध्यक्ष उनके साथ भी गालीगलौज करने लगे। इसके बाद एमएस ने प्रिंसिपल को लिखित में शिकायत दीए जिसमें उक्त एचओडी पर कार्रवाई की मांग की गई। वहीं डेंटल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉण् आशु गुप्ता का कहना हैं कि इस मामले से संबंधित उनके पास शिकायत आई हैं तथा इसे देखकर ही इसके बारे में बताया जाएगा और आगामी कार्रवाई की जाएगी।

पर्यटकों के लिए हिमाचल खोलने का टूरिज्म इंडस्ट्री हिमाचल ने किया स्वागत, मुख्यमंत्री का जताया आभार

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। पर्यटन उद्योग को लॉक डाउन का सबसे अधिक नुकसान सहन करना पड़ा है। प्रदेश सरकार ने अब पर्यटन उद्योग को खोलने का निर्णय ले लिया है। अब होटल तथा अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसाइयों को उम्मीद की किरण जगी है कि उन्हें आने वाले सीजन में कुछ न कुछ ऑक्यूपेंसी अवश्य मिलेगी। इस समय जब भारत मे सभी पर्यटक स्थल पर्यटकों के लिए खोल दिये गए हैं, ऐसे में  हिमाचल के दरवाजे भी पर्यटकों के लिए खोलना एक सराहनीय कदम है जिसके लिए टूरिज्म इंडस्ट्री ने मुुुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का आभार जताया है।
टूरिज्म इंडस्ट्री हिमाचल के अध्यक्ष मोहिंदर सेठ ने कहा कि आज कॉम्पिटिशन का दौर है। यदि अन्य राज्यों के टूरिस्ट डेस्टिनेशन जैसे उत्तराखंड, गोआ, राजस्थान, केरल इत्यादि पर्यटकों के लिए खुल गए है और हिमाचल को न खोला जाता तो इसका विपरीत असर प्रदेश के टूरिज्म व्यसाय पर आने वाले सीजन पर पड़ सकता था। हर पर्यटन राज्य को अपनी उपस्थिति बनाए रखना बहुत आवश्यक होती है। होटल इंडस्ट्री ने सबसे पहले मार्च में अपने होटलों को बंद करने का फैसला स्वेछा से लिया था।
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मोहिंदर सेठ ने कहा कि पर्यटन व्यवसायी अपना मुख्य सीजन खो चुके है लेकिन अभी दो महीने ऑफ सीजन के है। इस दौरान होटल व्यवसाई अपने होटलों को SOP में दी गए मानकों को पूरा कर चरणबद्ध तरीके से होटलों को खोलेंगे। सरकार द्वारा होटलों को समय रहते पर्यटकों के लिए खोलने से होटल व्यवसायी अपने होटलों की पब्लिविटी कर सकतें है क्यूंकि होटल एक ऐसा व्यवसाय है जो कि खुलते ही बिजनेस जरनेट करना शुरू नही करता इसके लिए मार्केटिंग की आवश्यकता रहती है।
कहा कि टूरिज्म इंडस्ट्री स्टेक होल्डर एसोसिएशन ने पहले ही होटल मालिकों के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन कर SOP के बारे में जागरूक करने का एक सफल प्रयास किया है। हमारी एसोसिएशन ने जल्द ही होटेलों में कार्यरत जनरल मैनेजरों के लिए ट्रेनिंग का आयोजन करने का फैसला लिया है। इन मैनेजरों की मदत से होटलों में कार्यरत स्टाफ को ट्रेनिंग दी जाएगी तथा इसमें पर्यटन विभाग से आग्रह कर उन्हें भी इस ट्रेनिंग्स के लिए मदत ली जाएगी। अभी हमें पर्यटन विभाग द्वारा अन्य गाइडलाइन्स का इंतजार है ज्यों ही SOP गाइडलाइन्स विभाग द्वारा जारी की जाएंगी उसको भी ट्रेनिंग का हिसा बनाया जाएगा।
मोहिंद्र सेठ ने कहा कि हमारी एसोसिएशन ने भी पर्यटन विभाग को SOP को लेकर अपने सुझाव दिए हैं । होटल व्यवसायियों ने पहले चरण में अपने होटलों के कुछ ही कमरों को खोलने का मन बनाया है ताकि होटल इकाई को कम से कम स्टाफ से चलाया जा सके तथा सोशल डिस्टेंसिनग का पालन आसानी से किया जा सके।

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