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कोरोना अपडेट: प्रदेश के छह जिलों से आए संक्रमण के 21 नए मामले, संक्रमितों का कुल आंकड़ा पहुंचा 1067

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के रविवार को 21 नए मामले सामने आए हैं। इनमें जिला ऊना में सबसे ज्यादा सात मामले सामने आए हैं। इसके अलावा कांगड़ा जिला में पांच और चंबा में चार नए मामले मिले हैं। इसके साथ सोलन और कुल्लू में दो-दो, जबकि मंडी में एक नया मामला मिला है। इसके अलावा आज प्रदेश में 28 लोग ठीक भी हुए हैं।
प्रदेश में नए मामले आने के बाद कोरोना पीडि़तों की संख्या बढ़कर 1067 तक पहुंच गई है। अब तक हिमाचल में 724 कोरोना संक्रमित स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इसके बाद एक्टिव मरीजों की संख्या अब 319 ही रह गई है।
ऊना में ट्रैफिक पुलिस कर्मी समेत 7 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए। कांगड़ा जिले में बैजनाथ के रजोत में मुंबई से लौटे 61 वर्षीय बुजुर्ग की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
इसके अलावा जवाली के केहरियां में पिता-पुत्री, सपेल में अधेड़ महिला, देहरा के बिलासपुर की युवती संक्रमित पाई गई है। कांगड़ा में 7 मरीज ठीक भी हुए हैं। कुल्लू में संक्रमित मरीजों में आईटीबीपी बटालियन बंदरोल में तैनात 34 वर्षीय जवान और दियार गांव से एक महिला पॉजिटिव निकली। उधर सोलन जिले में नालागढ़ के कालूझिंडा में क्वारंटीन महिला और परवाणू में मिठाई बनाने वाले उद्योग में कार्यरत व्यक्ति पॉजिटिव पाया गया है।
सोलन में 8 लोगों ने कोरोना को मात भी दी। मंडी के सरकाघाट क्षेत्र में सेना के जवान का सैंपल पॉजिटिव निकला है। उधर ऊना के सैनिक की कोलकाता में कोरोना संक्रमण से मौत हो गई। चंबा में दो महिलाओं समेत 4 लोग संक्रमित निकले, जिनमें तीन दिल्ली से लौटे किहार ब्लाक से और एक बाथरी का गुडगांव से लौटा मरीज शामिल है।
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हमीरपुर जिले में रविवार को छह और लोगों ने कोरोना से जंग जीत ली है। अब जिले में कुल एक्टिव केस 78 रह गए हैं। जबकि, कुल संक्रमित मामलों की संख्या 265 है। फॉलोअप रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद प्रशासन ने स्वस्थ हुए इन छह लोगों को होम क्वारंटीन में भेज दिया है। ये सभी लोग एनआईटी परिसर में स्थापित समर्पित कोविड केयर सेंटर में उपचाराधीन थे। उपायुक्त हरिकेश मीणा ने बताया कि जिले में रविवार शाम तक ठीक होने वाले लोगों की कुल संख्या 184 तक पहुंच गई है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अर्चना सोनी ने बताया कि रविवार को ठीक हुए लोगों में गांव टकरूं डाकघर ग्वालपत्थर उपमंडल नादौन के 47 वर्षीय व्यक्ति, टौणी देवी तहसील की ग्राम पंचायत ऊहल के गांव ननोट की 26 वर्षीय युवती, गांव सम्मू डाकघर तरक्वाड़ी का दस वर्षीय बच्चा, गांव खैरी का 22 वर्षीय युवक, गांव ढोग डाकघर जाहू के 53 वर्षीय व्यक्ति और गांव छनेड़ डाकघर थाना की 9 वर्षीय बच्ची शामिल है। फॉलोअप रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद इन्हें घर भेजा गया है।
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की जांच के लिए रविवार को 1440 सैंपल भेजे गए थे। इनमें सबसे ज्यादा सोलन जिला के 317, बिलासपुर के 70, चंबा के 79, हमीरपुर के 136, कुल्लू से 71, मंडी के 140, शिमला जिला के 66, सिरमौर के 114 और ऊना जिला के 168 सैंपल जांच शामिल थे। किन्नौर और लाहुल से रविवार को कोई भी सैंपल नहीं लिया गया था। इसके अलावा रविवार के बाकी पॉजिटिव शनिवार के शेष सैंपलों की जांच में मिले हैं।
हिमाचल में कुल सैंपल की बात करें तो अब तक 88 हजार 459 सैंपल कोरोना जांच को भेजे हैं। इनमें से 87,369 सैंपलों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है। कोरोना संक्रमण के 724 मरीज स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। इसके बाद कोरोना के एक्टिव मरीजों की संख्या 319 है। हिमाचल में अब तक नौ लोगों की मौत कोरोना संक्रमण की वजह से हो चुकी है। बात यदि जिला स्तर पर की जाए, तो बिलासपुर जिला में 47 पीडि़तों में से 15 उपचाराधीन है। चंबा जिला में 58 कोरोना संक्रमितों में से 11 पीडि़तों का अस्पताल में उपचार चल रहा है। हमीरपुर जिला में कोरोना के 265 मामले हैं। इनमें से 76 मरीज कोविड सेंटरों में हैं।
कांगड़ा जिला में कोरोना पॉजिटिव के सबसे ज्यादा 288 मामले हो चुके हैं। इनमें से 84 मरीजों का अब भी इलाज चल रहा है। इसके अलावा किन्नौर में भी 34 मामले पॉजिटिव हो गए हैं, इनमें से 31 पीडि़त उपचाराधीन हैं। कुल्लू जिला में सात कोरोना पीडि़तों में से दो उपाचाराधीन हैं। लाहुल के चार मामले हैं और सभी उपचाराधीन हैं। मंडी जिला में 35 मामले कोरोना संक्रमितों के हैं, इनमें से नौ पीडि़त अभी कोविड सेंटर में भर्ती हैं।
शिमला जिला में कुल 47 कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 12 कोरोना पीडि़तों का उपचार चल रहा है। सिरमौर जिला में 40 मामले कोरोना पॉजिटिव के हो चुके हैं। इनमें से सात का इलाज चल रहा है। सोलन जिला में पीडि़तों का आंकड़ा 116 तक पहुंच गया हैं। इनमें से 38 का इलाज चल रहा है। ऊना जिला में 126 कोविड मरीज सामने आ चुके हैं और इनमें 30 कोविड सेंटरों में उपचाराधीन हैं और बाकी ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
 

सिविल अस्पताल रोहड़ू में पिछले लगभग एक महीने से एक्स-रे मशीन खराब, अलग अलग समस्याओं से लोग हुए त्रस्त: मोहन लाल ब्राक्टा

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विधायक मोहनलाल ब्राक्टा ROHRU
रोहड़ू के विधायक मोहनलाल ब्राक्टा

आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। विधानसभा क्षेत्र रोहड़ू से विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि जब से प्रदेश में जय राम सरकार बनी है, तब से रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के साथ राजनीतिक द्वेष की भावनाओं से भेदभाव किया जा रहा है। इस कारण रोहड़ू की जनता को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है ।
कहा कि, रोहड़ू सिविल अस्पताल की दशा दिन बा दिन खराब हो रही है जहां एक और विशषज्ञों की कमी से रोहड़ू वासी परेशान हो रहे है लगभग दो सालों से रोहड़ू हॉस्पिटल के स्त्री रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत पद खाली चल रहे हैं। सरकार से बार-बार आग्रह करने पर भी प्रदेश भाजपा सरकार के कान में जू तक नही रेंग रही है।
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हालत यह है कि लोगो को मजबूरी में निजी अस्पतालो में जाकर मंहगे दामों पर इलाज करना पड़ता है या तो इलाज करने शिमला जाना पड़ता है। अब एक और एक्स मशीन खराब होने के कारण लोग आये दिन परेशानी का सामना कर रहे है। लोगों को मजबूरन बाजार में मंहगे दामों पर एक्सरे करवाने पड़ रहे हैं।
लोगो को दोगुने दामो पर एक्स करने पड रहे हैं,  जो एक्सरे अस्पताल में 125 रुपये में होता है, वही बाजार में 250 रुपये में हो रहा है। बार-बार एक्सरे मशीन का ख़राब होना आए दिन लोगो के लिए किसी मुसीबत से कम नही है। बता दें कि रोहड़ू सिविल अस्पताल में सिर्फ रोहड़ू ही नही बल्कि जुब्बल और उत्तराखंड के मरीज भी यहां इलाज करवाने पहुंचते हैं।

हादसा: नेरवा के पास शवाला में 19 साल के युवक की ढांक से गिरकर मौत

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। नेरवा के समीप ग्राम शवाला में एक युवक की ढांक से गिर कर मौत होने का मामला प्रकाश में आया है। पुलिस ने परिजनों की सूचना पर मामला दर्ज कर आगे की कार्यवाही शुरू कर दी है।मृतक की पहचान सुमित उर्फ शिवानी पुत्र गणेश गांव शवाला के रूप में की गई है। जिस की उम्र करीब 19 वर्ष है।
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मामला ग्राम पंचायत रुसलाह का है घटना के तुरंत बाद ग्रामीण मौका पर एकत्र हो गए प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त युवक शवाला गांव के साथ चिवाड़ नामक जगह पर ढांक से फिसल गया मौका पर पुलिस कर्मी मनसाराम अपनी टीम के साथ पहुच कर कर लोगो की मदद से उक्त युवक को रेस्क्यू कर ढांक से मुश्किल से बाहर निकाला।
इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। जवान युवक की मौत से परिजन सदमे में है। सुमित के पिता और माता का रो रो कर बुरा हाल है चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा पूर्व विधायक  डॉ. सुभाष मंगलेट प्रदेश कांग्रेस महा सचिव रजनीश किमटा ने इस घटना पर शोक प्रकट किया है।

कोरोना अपडेट:हिमाचल में आज दो नए कोरोना पाॅजिटिव मामलों की पुष्टि,  संक्रमितों का कुल आंकड़ा हुआ 1048

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला/मंडी/कांगड़ा। प्रदेश में रविवार को मंडी व कांगड़ा जिला से कोरोना वायरस के दो नए मामले सामने आए हैं। इन दो नए मामलों के साथ प्रदेश में अब  संक्रमितों की संख्या बढ़ कर 1048 पहुंच गई है। वहीं 715 मरीज ठीक हो चुके है और 309 एक्टिव है। रविवार को चार जिलों से 19 मरीज ठीक भी हुए हैं। इनमें सबसे ज्यादा आठ मरीज सोलन से, हमीरपुर से छह,  कांगड़ा से चार और ऊना से एक मरीज आज ठीक हुआ है। अतिरिक्त मुख्य सचिव आर डी धीमान (स्वास्थ्य) और कोविड-19 के नोडल अधिकारी आर डी धीमान ने इसकी पुष्टि की है।
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उन्होंने बताया कि मंडी के सरकाघाट क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का एक मामला आया है। सेना का जवान 23 जून को पश्चिम बंगाल से अपने घर लौटा है। इसे होम क्वारंटीन किया था। तीन जुलाई को सैंपल लिए जिसमें रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
वहीं 27 जून को मुंबई से लौटा कांगड़ा जिले के रक्कड़ का 61 वर्षीय व्यक्ति कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। यह परौर में संस्थागत क्वारंटीन था। संक्रमित को कोविड अस्पताल धर्मशाला में शिफ्ट किया जा रहा है।
आज शाम पांच बजे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन के मुताबिक राज्य में 59959 लोगों को निगरानी हो चुकी है, जिसमें से 41062 लोग 28 दिन की अवधि पूरी कर चुके है और वर्तमान में 18897 लोगों को निगरानी में है। वहीं राज्य में 88455 लोगों के टेस्ट हो चुके है, जिसमें 86727 लोगों की जांच रिपोर्ट नेगेटिव पायी जा चुकी है। राज्य में 680 के सैंपल रिपोर्ट आना बाकी है।  इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा 1048 पहुंच गया है। सक्रिय मामले 309 हैं। रविवार को 19 और कोरोना मरीज ठीक हो गए हैं। अब तक 715 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं। नौ की मौत हुई है और 13 राज्य के बाहर चले गए हैं।

राहत: वृद्धजनों को आत्मनिर्भरता जैसा एहसास देती है वृद्धावस्था पेंशन

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
आनी।  वृद्धजनों के लिए सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन आत्मनिर्भरता जैसा एहसास देती है। बुजुर्गों के छोटे मोटे खर्च पेंशन से पूरे हो जाते हैं। आनी उपंडल के कराणा निवासी नौल राम और उनकी पत्नी डोलमा देवी ये बात कहते हुए बताते हैं कि सरकार ने उनकी पेंशन में हाल ही में इजाफा कर भी बुजुर्गों को बड़ी राहत दी है। नौल राम का कहना है कि जयराम सरकार ने बिना शर्त पेंशन लेने की उम्र 80 साल से 70 साल कर बुजुर्गों को सबसे बड़ी राहत दी है। ऐसा कर सरकार ने हजारों बुजुर्गों को पेंशन के तौर पर एक आसरा दिया है।
उनकी पत्नी डोलमा देवी का कहना है कि लॉकडाउन में सरकार ने समय पर एक साथ तीन महीने की पेंशन देकर हम बुजुर्गों का मान रखा है। उनका कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान पेंशन बड़ा सहारा बनी। दोनों बुजुर्ग दंपती का कहना है कि बृद्धाव्स्था में दवा जैसी जरूरतों को पूरा करने के लिए खर्च होता रहता है और सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन की वजह से इन खर्चों को पूरा करने के लिए किसी का मुंह नहीं ताकना पड़ता।
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नौल राम का कहना है कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने जीवन भर कठिन श्रम करके जीवन यापन किया है। बुढ़ापे में कोई सामाजिक सुरक्षा न होने के कारण चिंता होना स्वभाविक था लेकिन सरकार की वृद्धावस्था पेंशन ने सहारा दिया। दोनों बुजुर्गों ने पेंशन के लिए सरकार का धन्यवाद किया है।
आनी उपमंडल में 13300 लोगों को पेंशन  दी जा रही है। सरकार ने लॉकडाउन के साथ एक साथ तीन माह की पेंशन जारी की है जिस पर 4.77 करोड़ रुपए व्यय हुआ है। सरकार का प्रयास है कि नए आवेदनों पर भी जल्द विचार कर लोगों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन जारी की जाए।
प्रदेश में वृद्धजनों, विधवाओं, अपंगों और कुष्ठ रोगियों को राहत भत्ता के तौर पर सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है। 60 साल के बाद 35 हजार रुपए से कम आय वाले बुजुर्गों को 1 हजार रुपए पेंशन दी जाती है। बिना किसी आय सीमा के 70 साल बाद 1500 रुपए की पेंशन बुजुर्गों को दी जा रही है, जिसकी आयु सीमा पहले 80 साल थी। सरकार के इस कदम से हजारों बुजुर्गों को फायदा हुआ है।
इसी तरह विधवा, एकल नारी, परित्यक्ता, तलाकशुदा महिला 35 हजार रुपए से कम आय सीमा आदि शर्तें पूरी करने पर पेंशन की हकदार हैं। 40 फीसदी से ज्यादा अपंग लोगों और कुष्ठ रोगियों को भी सरकार औपचारिकताएं पूरी करने पर पेंशन जारी करती है। इस साल सरकार ने पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 1 हजार रुपए कर दिया है।

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए सरकार केके बनाए नियमों का सख्ती से करें पालन: आर डी धीमान

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) आर डी धीमान ने आज यहां बताया कि नागरिकों की सुविधा को देखते हुए समूचे देश में लाॅकडाउन के बाद अनलाॅक को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जहाँ जनसाधारण को दैनिक दिनचर्या के साथ अपने जीवन को सामान्य दिनों की तरह पटरी पर लाने का फिर से मौका मिला है। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर लोग कोरोना संक्रमण प्रतिबंधों को नजरअन्दाज करते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि लाॅकडाउन खत्म हुआ है कोरोना नहीं तथा यह जानकारी देते हुए हमें यह याद रखना होगा कि इस समय आवश्यकता और अधिक सजग व सावधान रहने की है।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा सभी एहतियाती कदम उठाए गए हैं और जरूरी दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें इनका अनुपालन गम्भीरता से करना चाहिए, तभी हम कोविड-19 संक्रमण की सम्भावनाओं को कम करने में सफल हो सकेंगे।
अतिरिक्त मुख्य सचिव ने जानकारी दी कि आर्थिक गतिविधियांे और पर्यटन व्यवसाय में तेजी आने पर भी कोविड-19 वैश्विक महामारी के इस दौर में हम स्वयं व समाज को जागरूक रहते हुए संक्रमण से बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि डरने या भ्रमित होने की बजाए आवश्यकता सजग व सतर्क रहने की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना वायरस, संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकले थूक के बेहद बारीक कणों से फैलता है। इन कणों में कोरोना वायरस के विषाणु होते हैं।
संक्रमित व्यक्ति के नजदीक जाने पर ये विषाणुयुक्त कण सांस के रास्ते हमारेे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इंसान के फेफड़े शरीर में वो जगह हैं, जहां से आॅक्सीजन शरीर में पहुंचना शुरू होता है, जबकि कार्बन डाई आॅक्साइड शरीर के बाहर निकलता है। लेकिन कोरोना से बने छोटे-छोटे एयरसैक में पानी जमने लगता है और इस कारण हमारे शरीर को सांस लेने में तकलीफ होती है और व्यक्ति लंबी सांस नहीं ले पाता। ऐसे में मरीज को वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है।
उन्होंने जनसाधारण से आह्वान किया कि लोग कोरोना वायरस से खुद को बचाने के लिए स्वच्छता का पूरा ख्याल रखें। सरकार द्वारा निर्दिष्ट नियमों का पालन करें, प्रत्येक व्यक्ति के मध्य एक मीटर के फासले को बरकरार रखते हुए परस्पर सामाजिक दूरी के सिद्धांत को बनाये रखें। एक स्थान पर अनावश्यक रूप से भीड़ इकट्ठी न होने दें। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए अपने हाथों को सैनिटाइजर या फिर साबुन और पानी से कम से कम 20 सेकंड तक धोएं, जब बाहर से घर वापस आए तो सबसे पहले अपने हाथ धोएं। अगर किसी कारणवश बाहर जाना पड़े तो सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। सामान्यतः मास्क या फेस कवर से मुंह ढकें। इसके साथ ही छींक आते समय टिशू से मुंह को ढक लें और शिष्टाचार का पालन करें, जिससे कोई दूसरा व्यक्ति इससे संक्रमित न हो।
उन्होंने कहा कि उपयोग की गई टिशू को तुंरत कूड़ेदान में डाल दें और अपने हाथ को धो लें। खांसी या जुकाम से ग्रसित व्यक्ति से बातें करते या मिलते समय उससे करीब एक मीटर यानी तीन फीट की दूरी बनाकर रखें। यदि किसी जगह को छूते है, तो हो सकता है कि उसमें वह वायरस हो, इसलिए नाक, आंख और मुंह को न छुएं। अस्पताल में भी ऐसे वार्ड्स की तरफ न जाएं, जहां कोरोना वायरस के मरीज हों, बुखार, खांसी, जुकाम हो या फिर सांस लेने में तकलीफ हो तो तुरंत हेल्पलाइन नम्बर-104 से सपंर्क करें अथवा ई-संजीवनी ओ.पी.डी. सेवा का लाभ उठायें।

नहीं रहे एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के सलाहकार और जाने-माने शिक्षाविद व कुशल प्रशासक एआर चौहान

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। हिमाचल प्रदेश के जाने-माने शिक्षाविद, चिन्तक व प्रशासक अनंतराम चौहान जिन्हें लोग प्यार से डॉ. एआर चौहान के नाम से पुकारते थे। शनिवार को एआर चौहान की तबीयत अचानक खराब होने पर परिजनों ने उन्हें इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया पर तबीयत में सुधार न होने पर एआर चौहान का रविवार सुबह साढ़े छह बजे के करीब इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में निधन हो गया।
एआर चौहान अपने पीछे पत्नी व दो पुत्र और एक पुत्री छोड़ गए हैं। इनका छोटा बेटा भारतीय सेना में ब्रिगेडियर के पद पर हैं बड़ा बेटा बागवान है और बेटी विदेश में जॉब में है। एआर चौहान वर्तमान समय में एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में बतौर विश्वविद्यालय सलाहकार के पद पर शिक्षा उन्नयन के लिए अपनी सामाजिक व निःस्वार्थ सेवा दे रहे थे।
एपीजी शिमला विश्वविद्यालय से पूर्व एआर चौहान हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के सत्रह-अठारह सालों तक रजिस्ट्रार रहे और उसके पश्चात देश के कई विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और प्रतिकुलपति भी रहे। वे एक कुशल प्रशासक के साथ-साथ एक शिक्षाविद, कुशल नेतृत्व, कुशल प्रवक्ता और एक चिंतक होने के साथ साथ एक अच्छे सलाहकार भी थे।
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छोटे से लेकर बड़ों तक उनकी बातों को लोग ध्यान से सुनते थे और उन पर अमल भी करते थे। वे कई सामाजिक संगठनों खासकर वे क्वालिटी एडुकेशन पर अधिक बल देते थे और हमेशा शिक्षा की बेहतरी के लिए ताउम्र संघर्ष करते रहे। ए आर चौहान आखिरी वक़्त तक एपीजी शिमला विश्वविद्यालय में शिक्षा उन्नयन और गुणवता के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन, व शिक्षकों और विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति अपने अनुभव व सलाह देते रहते थे कि एपीजी विश्वविद्यालय देश- प्रदेश में उच्च शिक्षा का एक बेहतर मॉडल बना रहे ताकि नव पीढ़ी को आगे बढ़ने के लिए सही शिक्षा व दिशा मिले।
वे एपीजी शिमला विश्वविद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश का एक उन्नत शिक्षा वाला उभरता विश्वविद्यालय मानते थे कि यही विश्वविद्यालय पहाड़ के लोगो को प्रोफेशनल एडुकेशन देकर उन्हें रोजगार व आत्मनिर्भर होने में सक्षम करवाएगा। एआर चौहान के अचानक निधन पर एपीजी शिमला विश्वविद्यालय के कुलपति, रजिस्ट्रार, स्टाफ मेम्बर, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने गहरा शोक जताया है।
कुलपति प्रो. रमेश कुमार चौधरी ने एआर चौहान के निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा कि एआर चौहान हर पीढ़ी के लोगों, छात्रों के लिए आदरणीय रहे और एपीजी शिमला विश्वविद्यालय उनके सुजाये गए मार्गदर्शन पर आगे बढ़कर उनके शिक्षा दर्शन पर काम करता रहेगा।

सेब व अन्य फलों के सीजन के लिए सरकार की आधी-अधूरी जानकारी चिंताजनक: संजय चौहान

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
शिमला। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) के राज्य सचिव मंडल के सदस्य संजय चौहान ने प्रदेश सरकार की सेब व अन्य फलों के सीजन को लेकर की गई आधी अधूरी तैयारियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की हैै और साथ ही और मांग की है कि सेब व अन्य फलों के सीजन को देखते हुए इसकी तैयारियों के लिए समय रहते उचित कदम उठाये ताकि आने वाले दिनों में बागवानों को मजदूरों, पैकेजिंग सामग्री, मालवाहक वाहनों आदि की कमी से न जूझना पड़े।
संजय चौहान ने कहा कि सेब व अन्य फलों का सीजन आरम्भ हो गया है और आगामी 10 से 15 दिनों में निचली व मध्यम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यह पूरा जोर पकड़ लेगा। परन्तु कोविड19 के चलते पैदा हुई विषम परिस्थितियों के कारण प्रदेश में मजदूरों, पैकेजिंग सामग्री व अन्य साधनो की बड़े पैमाने पर कमी देखी जा रही है। इसके साथ ही सरकार द्वारा हाल ही में पेट्रोल व डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि से महंगाई बढ़ रही है तथा ट्रकों व अन्य मालवाहकों के भाड़े में भी 20 प्रतिशत तक कि वृद्धि कर दी गई है।
बाज़ार में पैकेजिंग सामग्री भी 10 से 20 प्रतिशत तक महंगे दामो में उपलब्ध करवाई जा रही है। यदि सरकार द्वारा समय रहते इन समस्याओं के समाधान हेतू ठोस कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाली लगभग 4500 करोड़ की सेब की आर्थिकी बर्बाद हो जाएगी। इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ेगा जिससे लाखों किसानों व बागवानों का रोजी रोटी का संकट और अधिक गंभीर हो जाएगा।
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कोविड-19 व प्राकृतिक आपदा के कारण प्रदेश में सेब व अन्य फल उत्पादक पहले ही संकट के दौर से गुजर रहें है। प्राकृतिक आपदाओं जैसे असमायिक वर्षा व ओलावृष्टि से पहले ही सेब व अन्य फलों की लगभग 65 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई है। जिससे प्रदेश के किसान व बागवान करोड़ो रूपये का नुकसान पहले ही झेल चुके है।
प्रदेश में मौसम की बेरुखी से बगीचों में स्कैब, माईट, वूली एफिड, मरसोनिना आदि बीमारियों व अन्य कीटों का प्रकोप भी इस वर्ष बड़े पैमाने पर देखा जा रहा है। सरकार द्वारा समय रहते फफूंदीनाशक व कीटनाशक उपलब्ध न करवाने व बाजार में इनके महंगे दामों के कारण बागवान समय पर छिड़काव नहीं कर पाए हैं। जिसके परिणामस्वरूप इन बीमारियों की रोकथाम नहीं हो पाई और इनका प्रकोप अधिक बढ़ गया है और फसल खराब हुई है।
इस वर्ष प्रदेश का किसान व बागवान मजदूरों की कमी को लेकर अत्यंत चिंतित है और यदि समय रहते मजदूरों का प्रबंध नहीं किया गया तो बागवान अपना उत्पाद बगीचों से मण्डियों तक नहीं पहुंचा पाएंगे और इससे आर्थिक रूप से भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।
अधिकांश खेत व बगीचे सड़क से जुड़े न होने के कारण सेब व अन्य फल पीठ में ढोकर सड़क तक लाया जाता है जहां से गाड़ियों व ट्रकों के माध्यम से मण्डियों तक ले जाया जाता है। इस कार्य मे लगभग 60 प्रतिशत नेपाल से मज़दूर आकर इस कार्य को करता है। कोविड19 व नेपाल से संबंधों जैसे कुछ मुद्दों के कारण इस वर्ष यह मजदूर नहीं आ पाया है और इन मजदूरों के न आने से बागवानों के समक्ष एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
सरकार अभी तक इसका समाधान निकालने के लिए कोई संजीदा कदम नहीं उठा पाई है जिससे बागवानों की चिंता और अधिक बढ़ गई है। इस समस्या का यदि समय रहते कोई उचित समाधान नहीं होता तो सेब की आर्थिकी बर्बादी के कगार पर चली जाएगी।
सी.पी.एम. सरकार से मांग करती हैं कि प्रदेश में मजदूरों की कमी को दूर करने के लिए तुरंत केंद्र सरकार से बात कर नेपाल व अन्य राज्यों से मजदूरों को लाने के लिए तुरंत ठोस क़दम उठाये और शीघ्र मजदूरों को काम पर लाया जाए।
पैकेजिंग सामग्री व ट्रकों तथा अन्य साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा इनकी दरों में की गई वृद्धि तुरंत वापिस ली जाए। बागवानों को पहले की भांति बागवानी विभाग के पौध संरक्षण केंद्रों के माध्यम से फफूंदीनाशक व कीटनाशक उपदान पर मांग अनुसार उचित मात्रा में उपलब्ध करवाए जाए ताकि बागवान समय रहते छिड़काव कर बगीचों में आई बीमारियों पर क़ाबू पा सके। बागवानों का गत वर्षों का एच पी एम सी व हिमफेड के पास सेब का बकाया भुगतान तुरंत किया जाए ताकि इस संकट के समय बागवान इससे अपना ख़र्च चला सके।
सरकार इन मांगों पर तुरंत अमल कर किसानों व बागवानों को राहत प्रदान करें व इस संकट की घड़ी में अपने संवैधानिक उत्तरदायित्व का निर्वहन कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए गंभीरता से प्रयास करें।

कांग्रेस और उसके नेता लगातार सेना और सैनिकों के मनोबल को गिराने के लिए प्रयासरत: सुमीत

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सत्यदेव शर्मा सहोड़
ऊना। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश के मीडिया सह प्रभारी सुमीत शर्मा ने कहा कि जहां प्रधानमंत्री मोदी देश के सैनिकों का मनोबल फॉरवर्ड पोस्ट पर जाकर बढ़ा रहे हैं, वहीं पर कांग्रेस पार्टी और उसके नेता लगातार सेना और सैनिकों के मनोबल को गिराने के लिए प्रयासरत हैं।
गलवान की घटना के पश्चात पिछले 30 दिनों से लगातार कांग्रेस और उसके नेता अपने निजी एजेंडे के चलते मोदी सरकार के साथ तो खड़े नहीं दिखे लेकिन कांग्रेसी नेता यह अवश्य बताएं कि उनकी क्या मजबूरी है कि वह भारतीय सेना के पराक्रम पर भी लगातार प्रश्न चिन्ह लगा रहे हैं?
कांग्रेस को बताना होगा के डोकलाम के समय कांग्रेस के नेताओं ने चीन के साथ मिलकर गुपचुप मीटिंग कर क्या भारतीय सीमाओं को छिन भिन्न करने की पेशकश की थी। ऐसे ही दुर्लभ निर्णयों के कारण देश का लगभग 43,000 किमी क्षेत्र चीन के कब्जे में है। सुमीत ने कहा कि कांग्रेस को इन दुर्लभ निर्णयों का कारण देश की सवा सौ करोड़ जनता को बताना होगा। चीन लगातार विस्तारवादी सोच के चलते भारत की सीमा के लद्दाख, सिक्किम और यहां तक कि अरुणाचल प्रदेश के साथ लगते एलएसी पर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, लेकिन चीन के इस कुप्रयास को मोदी सरकार ने सफल विदेशीनीति के कारण आज विफल किया है।
उन्होंने कहा कि आज मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेनाओं ने चीन की सेना को मुंहतोड़ जवाब देते हुए उन्हें उनकी ही सीमा के अंदर आगे एलएसी की ओर बढ़ने की बजाय पीछे धकेलने का साहसिक कदम किया है। इस कदम के लिए देश के सवा सौ करोड़ वासी भारतीय सेना के इस मातृत्व सेवाभाव के लिए ऋणी है और सदैव भारतीय सेना के साथ खड़े हैं।
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सुमीत ने बताया कि बकौल केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर आज कांग्रेस, करप्शन और कावर्ड इन तीनों का आपसी समावेश हो चुका है। जिस कारण कांग्रेस मोदी के अग्रिम पोस्ट पर जाने को लेकर निरंतर जगहसाई जैसे गैर नैतिक बयानवाजी कर रही है। सुमीत ने कहा कि केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर वर्ष 1999 में हिमाचल संगठन के प्रभारी रहते हुए मोदी उस वक़्त के हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल व तत्कालीन विधानसभा स्पीकर गुलाब सिंह के साथ कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना और सैनिकों का मनोबल बनाए रखने के लिए अग्रिम पोस्ट पर गए थे।
सुमीत ने बताया कि मोदी उस समय किसी भी प्रशासनिक पद पर नहीं थे सिर्फ देश, सेना और सैनिकों के प्रति यह जज्बा ही था कि वो अग्रिम सीमा पर निर्भीक चले गए थे। लेकिन यह दुर्भाग्य ही है कि कांग्रेस के नेता मात्र एसी कमरों में बैठकर राजनीतिक टीकाटिप्पणी ही कर सकते हैं और राष्ट्रहित कार्यों में बिना थके खोट निकालने में लगे हुए हैं।
उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने हमेशा ही भारत की अस्मिता से खेलने का प्रयास किया है। चाहे मसला देश के अंदर आतंकी हमले या टुकड़े-टुकड़े गैंग का हो या बाहरी सीमाओं का कांग्रेस हमेशा शहीदों और राष्ट्रभक्तों की बजाय देशद्रोहियों के साथ खड़ी दिखती है। आज यही कारण है कि कांग्रेस अपनी सार्थकता खो रही है और भाजपा मोदी के नेतृत्व में नर-नारायण के सेवा कार्यों सहित सीमाओं की सुरक्षा को भी राष्ट्र सेवा के रूप में करने के लिए संकल्पित रूप से आगे बढ़ रही है।

अच्छी खबर: कोरोना में भी बागवानों को मिलेगा सेब का अच्छा दाम, नारकंडा में इस साल दोगुना सेब खरीदेगी ब्लूम कंपनी

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आदर्श हिमाचल ब्यूरो
सोलन। कोरोना संकटकाल के चलते बागबानों को सेब की मार्केटिंग, ट्रांसपोर्टेशन, पेटियां, ट्रे और लेबर की उपलब्धता सहित अन्य सभी बातों को लेकर प्रदेश सरकार सजग है और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर खुद सारी स्थिति पर नजर बनाए हुए है, जो कि बागबानों के लिए राहत की खबर है।
वहीं एपीएमसी पहले से प्रदेश में सेब का कारोबार कर रही कंपनियों, बाहरी राज्यों से आने वाले बड़े आढ़तियों सहित अन्य कंपनियों और सेब कारोबारियों को भी लाने की पहल कर रही है।
ब्लूम कंपनी के सीईओ नरेंद्र आनंद ने बताया कि सरकार और एपीएमसी के आह्वान पर इस सीजन में कोरोना संकट के चलते मार्केटिंग को लेकर बागबानों की चिंता को देखते हुए ब्लूम कंपनी ने नारकंडा में गत वर्ष से दोगुना कारोबार करने का फैसला लिया है।
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कंपनी आठ से दस लाख बाक्स लेने की रूपरेखा तैयार कर रही है। बताते चले कि ब्लूम कंपनी बिग बाजार (फ्यूचर गु्रप ) की ही एक कंपनी है जिसके भारत वर्ष में लगभग 2100 आउटलेट है। नारकंडा के एकांतबाड़ी में ब्लूम फु्रट प्राइवेट लिमिटेड एवं जेएमडी ब्लूम फ्रुट ट्रेडर द्वारा पिछले पांच वर्षों से सेब का कारोबार किया जा रहा है और बागबानों को सेब की गुणवता के आधार पर बेहतर रेट और समय रहते पेमेंट प्रदान करने का कार्य किया जा रहा है। गत वर्ष भी कंपनी द्वारा लगभग पांच लाख पेट्यिं का कारोबार किया गया था।
उनका कहना है कि कोरोना के चलते किसानों को कोई भी सेब फसल को लेकर नुकसान ना हो इसके लिए हमारी कम्पनी लगातार कार्य कर रही है और किसानो को अछे दाम मिले इसके लिए हम बागवानों के बीच कार्य कर रहे है।
कोरोना के चलते जहां सबका जीवन अस्त व्यस्त है वहीं किसान बागवान लगातार प्रयास कर रहे है। मंडियों में जिस तरह से लोगों को सेबों के दाम मिल रहे है वैसे ही हम उनके सेब को ग्रेड के हिसाब से अछे दाम दे रहे है। बाहरी राज्यो के आढ़ती भी हमसे सेब के लिए सम्पर्क कर रहे है और इस बार कोरोना के बावजूद भी बाहरी राज्यो में सेब की मांग बढ़ रही है

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